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GST Rates: जीएसटी की नई दरें लागू होने वाली हैं, उत्पाद खरीदते समय आपको क्या ध्यान रखना चाहिए?

नई जीएसटी दरें 22 सितंबर 2019 से पूरे देश में लागू हो रही हैं, जो उपभोक्ताओं के लिए एक सकारात्मक बदलाव है क्योंकि इससे कई रोजमर्रा के उत्पादों पर टैक्स कम हो जाएगा और कीमतें घट सकती हैं। खरीदारी के दौरान उत्पाद की पैकेजिंग पर लिखी नई बिक्री कीमत को ध्यान से जांचें, ताकि दुकानदार की अनभिज्ञता या पुरानी कीमतों के कारण आपको अनावश्यक रूप से ज्यादा पैसे न चुकाने पड़ें, और आप जीएसटी कटौती का पूरा लाभ उठा सकें।

जीएसटी बदलावों का उपभोक्ताओं पर असर और पृष्ठभूमि

जीएसटी, यानी गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स, भारत में 1 जुलाई 2017 से लागू हुआ था, और अब इसमें नए बदलाव किए जा रहे हैं जो 22 सितंबर 2019 से प्रभावी होंगे। इन बदलावों के तहत कई उत्पादों की जीएसटी दरों को कम किया गया है, जैसे कि कुछ खाद्य पदार्थों, घरेलू सामानों और अन्य आवश्यक वस्तुओं पर। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) की आधिकारिक वेबसाइट cbec.gov.in पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह कदम उपभोक्ताओं को राहत देने और अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए उठाया गया है। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई पैकेज्ड फूड आइटम जैसे बिस्किट या केक की पुरानी कीमत 30 रुपये थी, जिसमें जीएसटी शामिल था, तो नई दरों के साथ यह कीमत 27 रुपये या उससे कम हो सकती है, क्योंकि टैक्स स्लैब को समायोजित किया गया है।

उपभोक्ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने एक संशोधित एडवाइजरी जारी की है, जिसमें निर्माताओं, आयातकों और पैकर्स को निर्देश दिए गए हैं कि वे पुराने स्टॉक पर नई अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) को लागू करें। यह एडवाइजरी लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट, 2009 के तहत है, जो उत्पादों की सही माप और कीमत सुनिश्चित करती है। अगर दुकानदार अभी भी पुरानी कीमत पर उत्पाद बेचता है, तो यह उपभोक्ता के साथ धोखा हो सकता है, और इससे आपको आर्थिक नुकसान हो सकता है। ग्रांट थॉर्नटन की एक रिपोर्ट में भारत के पार्टनर मनोज मिश्रा ने कहा है, “सरकार के इस स्पष्टीकरण से व्यवसायों पर अनुपालन का बोझ कम हुआ है, लेकिन उपभोक्ताओं के लिए पारदर्शिता और सुरक्षा बनी रहेगी।” यह रिपोर्ट ग्रांट थॉर्नटन की आधिकारिक वेबसाइट से ली गई है, जो वैश्विक स्तर पर कर और व्यापार सलाह प्रदान करने वाली एक प्रतिष्ठित फर्म है।

पहले के नियमों में कंपनियों को नई कीमतों का विज्ञापन कम से कम दो प्रमुख समाचार पत्रों में करना अनिवार्य था, ताकि उपभोक्ताओं को जानकारी मिल सके। लेकिन अब इस आदेश को रद्द कर दिया गया है, क्योंकि सरकार ने इसे सरल बनाने का फैसला किया। इसके बजाय, निर्माताओं को केवल थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं को नई मूल्य सूची उपलब्ध करानी होगी, और इस सूची की एक प्रति राज्य के कानूनी मेट्रोलॉजी प्राधिकरण को भेजनी होगी। प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) की एक प्रेस रिलीज के अनुसार, यह बदलाव छोटे व्यवसायों को राहत देगा और उपभोक्ताओं को सही कीमत सुनिश्चित करेगा। इसके अलावा, जीएसटी परिषद की 37वीं बैठक में इन दरों को अंतिम रूप दिया गया था, जिसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हिस्सा लिया, और इसका उद्देश्य महंगाई को नियंत्रित करना और उपभोक्ता खर्च को बढ़ावा देना है।

पुराने पैकेट्स का प्रबंधन और नए नियमों का पालन

पुराने पैकेट्स, जिन पर पहले की जीएसटी दरों के आधार पर एमआरपी लिखी हुई है, का उपयोग 31 मार्च 2026 तक या स्टॉक समाप्त होने तक जारी रखा जा सकता है। निर्माता इन पैकेट्स पर स्टिकर चिपकाकर, स्टैंप लगाकर या डिजिटल प्रिंटिंग के माध्यम से नई बिक्री कीमत को अपडेट कर सकते हैं। कभी-कभी उत्पाद पर दो कीमतें दिखाई दे सकती हैं—एक मूल पुरानी कीमत और दूसरी नई जीएसटी-समायोजित कीमत। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की वेबसाइट consumerhelpline.gov.in पर उपलब्ध दिशानिर्देशों के मुताबिक, यह प्रक्रिया विशेष रूप से बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए आसान है, क्योंकि उनके पास बड़े पैमाने पर उत्पादन और वितरण की सुविधा है। छोटे निर्माताओं के लिए भी यह लचीलापन प्रदान करता है, ताकि वे बिना नुकसान के बदलाव लागू कर सकें।

हालांकि, इस संक्रमण काल में उपभोक्ताओं को सावधान रहना चाहिए, क्योंकि कुछ दुकानदार पुराने स्टॉक को पुरानी कीमत पर ही बेच सकते हैं, खासकर ग्रामीण इलाकों या छोटी दुकानों में जहां जानकारी की कमी हो सकती है। सीबीआईसी की रिपोर्ट्स से पता चलता है कि ऐसे मामलों में उपभोक्ता शिकायतें बढ़ सकती हैं, इसलिए सरकार ने जागरूकता अभियान चलाए हैं। उदाहरण के लिए, अगर आप एक पैकेज्ड साबुन खरीदते हैं जिसकी पुरानी एमआरपी 50 रुपये थी, लेकिन नई दरों के साथ यह 45 रुपये हो गई है, तो स्टिकर पर नई कीमत की जांच करें। अगर स्टिकर नहीं है, तो दुकानदार से पूछताछ करें या बिल में सही कीमत की मांग करें।

उपभोक्ताओं के लिए व्यावहारिक सलाह: सावधानी कैसे बरतें और अधिकारों का उपयोग करें?

नई जीएसटी दरों से टैक्स में कमी आई है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब उपभोक्ता खुद सतर्क रहें। पैकेज्ड सामान खरीदते समय हमेशा एमआरपी, निर्माण तिथि और नई कीमत की जांच करें। बिल लेना न भूलें, क्योंकि बिल में जीएसटी ब्रेकअप दिखाया जाता है, जो आपको सही टैक्स की पुष्टि करने में मदद करता है। अगर कोई अनियमितता लगे, तो राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1800-11-4000 पर कॉल करें या उपभोक्ता हेल्पलाइन ऐप के जरिए शिकायत दर्ज कराएं। भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइटों जैसे pib.gov.in पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ऐसे मामलों में उपभोक्ता अदालतों में भी शिकायत की जा सकती है, और दोषी पाए जाने पर दुकानदार पर जुर्माना लगाया जा सकता है।

छोटी दुकानों में पुरानी कीमतें चार्ज करने की समस्या ज्यादा आम है, क्योंकि वहां नई सूचनाएं पहुंचने में समय लग सकता है। इसलिए, बड़े सुपरमार्केट या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से खरीदारी करना सुरक्षित हो सकता है, जहां अपडेट जल्दी लागू होते हैं। इसके अलावा, जीएसटी परिषद की हालिया बैठकों में दरों को और अधिक तर्कसंगत बनाने पर जोर दिया गया है, जैसे कि कुछ उत्पादों को 18% से 12% स्लैब में लाना। पीआईबी की रिपोर्ट्स बताती हैं कि ये बदलाव लंबे समय में अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएंगे, उपभोक्ता विश्वास बढ़ाएंगे और बाजार में प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करेंगे। याद रखें, सही जानकारी के लिए हमेशा सरकारी स्रोतों पर भरोसा करें, जैसे सीबीआईसी की वेबसाइट या उपभोक्ता मंत्रालय के पोर्टल, और फर्जी खबरों से बचें। अगर आप सावधान रहेंगे, तो जीएसटी कटौती का पूरा फायदा आपकी जेब में पहुंचेगा, और आप अनावश्यक खर्च से बच सकेंगे।