महाराष्ट्र सरकार ने लड़की के लाभार्थियों के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य किया, दो महीने की समय सीमा तय की
महाराष्ट्र सरकार ने मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना की सभी लाभार्थी महिलाओं के लिए ई-केवाईसी (इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर) प्रक्रिया को अनिवार्य घोषित कर दिया है। गुरुवार रात जारी सरकारी संकल्प (जीआर) के अनुसार, योग्य महिलाओं को अगले दो महीनों के भीतर इस सत्यापन को पूरा करना होगा, अन्यथा उनकी मासिक सहायता राशि रोकी जा सकती है।
योजना का पृष्ठभूमि और उद्देश्य
मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना महाराष्ट्र में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल है। यह योजना 2024 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले लॉन्च की गई थी, और इसका मुख्य उद्देश्य 21 से 65 वर्ष की आयु वाली महिलाओं को प्रति माह 1,500 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करना है। योजना का फोकस ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं पर है, जो घरेलू खर्चों में मदद के लिए इस राशि का उपयोग कर सकती हैं। महाराष्ट्र सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, योजना में कुल पंजीकृत लाभार्थी महिलाओं की संख्या 2.25 से 2.30 करोड़ के बीच है, जो राज्य की कुल महिला आबादी का एक बड़ा हिस्सा कवर करती है।
यह योजना महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के साथ-साथ राज्य की सामाजिक-आर्थिक नीतियों का हिस्सा है। हालांकि, चुनाव के बाद योजना की जांच शुरू होने पर कई अनियमितताएं सामने आईं, जिसने ई-केवाईसी को अनिवार्य बनाने की जरूरत पैदा की। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, योजना की शुरुआत में बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए थे, लेकिन जांच से पता चला कि कई आवेदन फर्जी या अयोग्य थे। इससे सरकार को योजना की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाने पड़े।
ई-केवाईसी अनिवार्य करने का कारण और जांच के नतीजे
सरकारी संकल्प में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ई-केवाईसी पूरा न करने पर लाभार्थियों की मासिक सहायता रोकी जाएगी, और उन्हें हर साल इस प्रक्रिया को दोहराना होगा। यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि जांच में 26.34 लाख अयोग्य लाभार्थी पाए गए, जिनमें पुरुष भी शामिल थे। इन अयोग्य लोगों ने योजना का लाभ उठाकर सरकारी खजाने पर बोझ डाला था। उदाहरण के लिए, फरवरी 2025 में सरकार ने पांच लाख से अधिक लाभार्थियों को सूची से हटाया, क्योंकि वे आयु सीमा, आय स्तर या अन्य योग्यता मानदंडों पर खरे नहीं उतरते थे।
इसके अलावा, 2,289 लाभार्थी सरकारी कर्मचारी होने के कारण हटाए गए, क्योंकि योजना केवल गैर-सरकारी महिलाओं के लिए है। जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि लगभग 14,000 पुरुषों ने महिला बनकर या फर्जी दस्तावेजों से योजना का लाभ लिया था। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ये अनियमितताएं मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में देखी गईं, जहां दस्तावेजों की जांच कम सख्त थी। सरकार ने अब ई-केवाईसी को आधार-आधारित बनाने का फैसला किया है, जो यूआईडीएआई (यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के मानकों पर आधारित है। इससे पहचान की पुष्टि होती है और धोखाधड़ी को रोका जा सकता है।
मंत्री अदिति तटकरे ने एक्स पर पोस्ट में कहा कि ई-केवाईसी से योजना में पारदर्शिता आएगी और केवल योग्य महिलाएं ही लाभ उठा पाएंगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह प्रक्रिया अन्य सरकारी योजनाओं, जैसे पीएम किसान या आयुष्मान भारत, से जुड़ने में भी मददगार साबित होगी, क्योंकि आधार लिंकिंग अब कई कल्याणकारी योजनाओं की बुनियाद है।
ई-केवाईसी प्रक्रिया कैसे पूरी करें: स्टेप-बाय-स्टेप गाइड
ई-केवाईसी प्रक्रिया को सरल और पहुंचयोग्य बनाने के लिए सरकार ने वेब पोर्टल ‘ladakibahin.maharashtra.gov.in’ पर सुविधा उपलब्ध कराई है। लाभार्थी महिलाएं घर बैठे या नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) पर जाकर इसे पूरा कर सकती हैं। यहां स्टेप-बाय-स्टेप तरीका समझाया गया है:
- सबसे पहले, पोर्टल पर लॉगिन करें और अपना आवेदन नंबर या मोबाइल नंबर दर्ज करें।
- आधार नंबर डालें और ओटीपी (वन-टाइम पासवर्ड) के माध्यम से सत्यापन करें।
- बैंक खाता विवरण, जैसे आईएफएससी कोड और खाता संख्या, की पुष्टि करें।
- यदि बायोमेट्रिक सत्यापन की जरूरत हो, तो नजदीकी आधार केंद्र पर जाएं।
- प्रक्रिया पूरी होने पर एक कन्फर्मेशन मैसेज मिलेगा, जो लाभ जारी रखने की गारंटी देगा।
यह प्रक्रिया पूरी तरह मुफ्त है और इसमें कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगता। अगर कोई तकनीकी समस्या आए, तो हेल्पलाइन नंबर 1800-233-XXXX (आधिकारिक नंबर चेक करें) पर संपर्क किया जा सकता है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र में पहले से ही लाखों लाभार्थियों ने ई-केवाईसी पूरी कर ली है, और यह प्रक्रिया योजना की लंबी अवधि के लिए लाभ सुनिश्चित करती है।
योजना के प्रभाव और भविष्य की संभावनाएं
इस योजना ने महाराष्ट्र की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है, जैसे कि शिक्षा, स्वास्थ्य और छोटे व्यवसायों में निवेश। हालांकि, अनियमितताओं के कारण सरकार को बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ा, और अब ई-केवाईसी से यह सुनिश्चित होगा कि फंड सही हाथों में पहुंचे। राज्य सरकार के आंकड़ों से पता चलता है कि योजना शुरू होने के बाद से कुल 10,000 करोड़ रुपये से अधिक वितरित किए गए हैं, लेकिन जांच से 500 करोड़ रुपये की बचत हुई है।
भविष्य में, सरकार योजना को और विस्तारित करने की योजना बना रही है, जैसे कि आय सीमा बढ़ाना या अतिरिक्त लाभ जोड़ना। बीबीसी हिंदी की एक रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने कहा है कि ई-केवाईसी जैसे डिजिटल टूल से सरकारी योजनाएं अधिक कुशल बनती हैं, और महाराष्ट्र का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए उदाहरण बन सकता है। इससे महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
निष्कर्ष और सलाह
ई-केवाईसी अनिवार्य करने से योजना अधिक विश्वसनीय बनेगी और धोखाधड़ी पर रोक लगेगी। सभी लाभार्थी महिलाओं को सलाह दी जाती है कि वे समय सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी करें, ताकि उनका मासिक भत्ता बिना रुकावट मिलता रहे। यदि कोई सवाल हो, तो आधिकारिक पोर्टल या स्थानीय अधिकारी से संपर्क करें। यह कदम न केवल योजना की रक्षा करेगा, बल्कि महिलाओं को सशक्त बनाने के सरकारी प्रयासों को मजबूती देगा।
