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लूवर डकैती के संदिग्धों पर आरोप, गहने बरामद नहीं हुएः पेरिस के अभियोजक

पेरिस के लूव्र संग्रहालय, जो दुनिया का सबसे प्रसिद्ध और सबसे बड़ा कला संग्रहालय है, 19 अक्टूबर को एक साहसिक चोरी का शिकार हुआ। इस घटना ने न केवल फ्रांस की सांस्कृतिक विरासत को खतरे में डाला, बल्कि वैश्विक स्तर पर संग्रहालयों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। बुधवार को पेरिस के सार्वजनिक अभियोजक कार्यालय ने घोषणा की कि हिरासत में लिए गए दो मुख्य संदिग्धों पर संगठित डकैती और अपराध करने की साजिश रचने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ये दोनों संदिग्ध पिछले सप्ताहांत से हिरासत में हैं और उन्हें मुकदमे तक जेल में रखा गया है। यह जानकारी पेरिस अभियोजक कार्यालय के आधिकारिक बयान पर आधारित है, जिसे एबीसी न्यूज, रॉयटर्स और एपी न्यूज जैसी विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने सत्यापित किया है। लूव्र संग्रहालय, जो प्रति वर्ष लगभग 10 मिलियन से अधिक पर्यटकों को आकर्षित करता है, इस चोरी से सदमे में है, और फ्रांसीसी सरकार ने इसकी जांच को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।

अभियोजक की प्रेस कॉन्फ्रेंस: जांच में महत्वपूर्ण प्रगति और नई जानकारियां

बुधवार को पेरिस की प्रमुख सार्वजनिक अभियोजक लॉर बेक्यू ने एक संवाददाता सम्मेलन में मामले की ताजा अपडेट साझा की। उन्होंने बताया कि जांचकर्ता इस केस में “महत्वपूर्ण प्रगति” हासिल कर चुके हैं, लेकिन चोरी हुए मूल्यवान आभूषण अभी तक कहीं नहीं मिले हैं। बेक्यू ने स्पष्ट किया कि यदि ये संदिग्ध दोषी साबित होते हैं, तो उन्हें फ्रांसीसी कानून के तहत अधिकतम 15 वर्ष की कठोर कैद की सजा और भारी आर्थिक जुर्माना हो सकता है। यह सजा संगठित अपराधों के लिए निर्धारित मानकों के अनुरूप है, जैसा कि फ्रांस के आपराधिक न्याय संहिता में वर्णित है।

लूव्र चोरी की यह घटना संग्रहालय की ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए और भी चिंताजनक है। लूव्र, जो 1793 में स्थापित हुआ था, मोना लीसा और वीनस डी मिलो जैसे विश्व प्रसिद्ध कलाकृतियों का घर है। हालांकि इस चोरी में मुख्य प्रदर्शनी क्षेत्र प्रभावित नहीं हुए, लेकिन चोरी वाले आभूषण संग्रहालय के विशेष संग्रह का हिस्सा थे, जिनकी अनुमानित कीमत लाखों यूरो बताई जा रही है। फ्रांसीसी संस्कृति मंत्रालय की रिपोर्ट्स के अनुसार, ये आभूषण 18वीं और 19वीं शताब्दी के यूरोपीय शिल्पकला के नमूने थे, जो संग्रहालय की विविधता को दर्शाते हैं। जांचकर्ताओं ने पुष्टि की है कि चोरी एक सुनियोजित ऑपरेशन था, जिसमें संदिग्धों ने संग्रहालय की कमजोरियों का फायदा उठाया। बेक्यू ने कहा कि टीम अब आभूषणों की तलाश में अंतरराष्ट्रीय सहयोग मांग रही है, क्योंकि ये वस्तुएं काला बाजार में बेची जा सकती हैं।

संदिग्धों की गिरफ्तारी और उनकी आंशिक स्वीकारोक्ति

दोनों संदिग्धों को शनिवार को गिरफ्तार किया गया था, और 96 घंटे की कानूनी समय सीमा बुधवार को समाप्त हो रही थी। इस समय सीमा के तहत पुलिस को या तो संदिग्धों पर औपचारिक आरोप लगाने थे या उन्हें रिहा करना था। दोनों ही पेरिस के उपनगरीय इलाके सीन-सेंट-डेनिस के निवासी हैं, जो एक ऐसा क्षेत्र है जहां अपराध दर अपेक्षाकृत अधिक मानी जाती है। बेक्यू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा किया कि गिरफ्तार संदिग्धों ने जांचकर्ताओं के सामने घटनाओं में अपनी “आंशिक संलिप्तता” स्वीकार की है। यह स्वीकारोक्ति जांच को नई दिशा दे सकती है, लेकिन पूरी सच्चाई अभी सामने नहीं आई है।

फ्रांसीसी पुलिस की रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह चोरी रात के समय हुई, जब संग्रहालय बंद था। संदिग्धों ने स्कूटर का इस्तेमाल करके संग्रहालय के परिसर में प्रवेश किया और चुपचाप आभूषणों को चुरा लिया। कोई हिंसा या अलार्म ट्रिगर नहीं हुआ, जो चोरी की सफाई को दर्शाता है। अधिकारियों ने अभी दो अन्य संदिग्धों की तलाश जारी रखी है, और बेक्यू ने कहा कि और लोगों की संलिप्तता की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। हालांकि, वर्तमान साक्ष्यों से कोई अतिरिक्त सहयोगी का पता नहीं चला है। इंटरपोल के साथ समन्वय में पुलिस अब सीमाओं के पार संदिग्धों की तलाश कर रही है, क्योंकि चोरी की वस्तुएं आसानी से विदेश ले जाई जा सकती हैं।

डीएनए साक्ष्य की भूमिका और संदिग्धों का आपराधिक इतिहास

जांच का एक प्रमुख आधार ट्रेस डीएनए है, जो चोरी में इस्तेमाल किए गए स्कूटर और लूव्र संग्रहालय की एक खिड़की से प्राप्त हुआ। इस डीएनए ने संदिग्धों की पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोनों संदिग्धों के नाम अभी गोपनीय रखे गए हैं, ताकि जांच प्रभावित न हो। पहला संदिग्ध शनिवार रात करीब 8 बजे पेरिस के चार्ल्स डी गॉल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पकड़ा गया। वह बिना वापसी टिकट के देश छोड़ने की तैयारी कर रहा था, जो उसके भागने के इरादे को दर्शाता है। बेक्यू के अनुसार, यह व्यक्ति 2010 से फ्रांस में रह रहा है और उसके खिलाफ पहले से एक डकैती का मामला दर्ज है। उसकी गिरफ्तारी हवाई अड्डे की सुरक्षा जांच के दौरान हुई, जब उसके सामान की तलाशी ली गई।

दूसरा संदिग्ध एक टैक्सी ड्राइवर है, जिसे उसी शाम 8:40 बजे उसके घर के पास गिरफ्तार किया गया। उसका डीएनए सीधे लूव्र की खिड़की पर मिला, जो चोरी के दौरान उसके संपर्क को साबित करता है। बेक्यू ने बताया कि इस संदिग्ध को 2008 और 2014 में “गंभीर डकैतियों” के लिए दोषी ठहराया जा चुका है। ये पुराने मामले पेरिस की अदालती रिकॉर्ड्स में दर्ज हैं, जो उसके दोहराव वाले अपराधी होने की पुष्टि करते हैं। पहले एबीसी न्यूज को दिए बयान में जांचकर्ताओं ने दावा किया था कि यह व्यक्ति माली (अफ्रीका का एक देश) जाने की तैयारी में था, लेकिन बुधवार को बेक्यू ने इसकी सफाई दी कि उसके पास देश छोड़ने का कोई ठोस इरादा नहीं था। यह विरोधाभास जांच की जटिलता को उजागर करता है, जहां शुरुआती रिपोर्ट्स हमेशा सटीक नहीं होतीं। फ्रांसीसी फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने डीएनए विश्लेषण को इस केस की सफलता का श्रेय दिया, जो आधुनिक तकनीक की ताकत को दिखाता है।

व्यापक मैनहंट और आभूषणों की बरामदी: सुरक्षा पर सवाल

बुधवार को भी बड़े पैमाने पर मैनहंट जारी था, जिसमें पुलिस टीमें पेरिस और उसके आसपास के इलाकों में छापेमारी कर रही हैं। कम से कम दो अन्य संदिग्धों को पकड़ने के लिए विशेष इकाइयां तैनात की गई हैं, और बेक्यू ने कहा कि चोरी के आभूषण अभी लापता हैं। इन आभूषणों को बरामद करने के लिए जांचकर्ता काले बाजार, नीलामी घरों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर नजर रख रहे हैं। लूव्र संग्रहालय ने घटना के बाद अपनी सुरक्षा प्रक्रियाओं की गहन समीक्षा शुरू कर दी है। इसमें सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाना, मोशन सेंसर लगाना और रात्रिकालीन गश्त को मजबूत करना शामिल है। फ्रांसीसी संस्कृति मंत्री ने संसद में कहा कि यह चोरी संग्रहालयों के लिए एक सबक है, और राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा मानकों को अपग्रेड किया जाएगा।

19 अक्टूबर की यह चोरी रात के अंधेरे में हुई, जब संदिग्धों ने संग्रहालय के एक कम सुरक्षित हिस्से से प्रवेश किया। फ्रांसीसी मीडिया जैसे ली फिगारो और ले मोंडे की रिपोर्ट्स के अनुसार, चोरी के दौरान कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन यह घटना संग्रहालय की आंतरिक कमजोरियों को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि संदिग्धों ने संभवतः अंदरूनी जानकारी का इस्तेमाल किया हो। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जांच तेजी से आगे बढ़ रही है, और जल्द ही सभी संदिग्धों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। यह मामला न केवल फ्रांस बल्कि पूरी दुनिया के सांस्कृतिक संरक्षण प्रयासों को प्रभावित कर सकता है।

यह जानकारी ए. बी. सी. न्यूज़ और बी. बी. सी. से एकत्र की गई है।