क्लार्ना ने गूगल के खिलाफ दायर किया 8.3 अरब डॉलर का मुकदमा
सोमवार को स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में स्थित पेटेंट एंड मार्केट कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मुकदमे की सुनवाई शुरू की। यह मुकदमा स्वीडिश फिनटेक दिग्गज क्लार्ना के स्वामित्व वाली मूल्य तुलना वेबसाइट प्राइसरेनर द्वारा टेक जगत के सबसे बड़े नाम गूगल के खिलाफ दायर किया गया है। मुकदमे में मांगी गई राशि है 78 अरब स्वीडिश क्रोना, जो अमेरिकी डॉलर में लगभग 8.3 अरब डॉलर के बराबर है। यह केस गूगल पर उसके सर्च इंजन के रिजल्ट्स में अपनी खुद की शॉपिंग तुलना सेवाओं को अनुचित तरीके से बढ़ावा देने के आरोप पर आधारित है, जिससे स्वतंत्र प्रतिस्पर्धियों को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
क्लार्ना, जो यूरोप की प्रमुख फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी कंपनियों में से एक है, ने 2022 में प्राइसरेनर को अधिग्रहित किया था। प्राइसरेनर एक लोकप्रिय स्वीडिश प्लेटफॉर्म है जो उपभोक्ताओं को विभिन्न ऑनलाइन स्टोर्स से उत्पादों की कीमतों की तुलना करने में मदद करता है। इस अधिग्रहण के बाद क्लार्ना ने प्राइसरेनर के हितों को मजबूती से अपनाया और इस मुकदमे को आगे बढ़ाया। मुकदमे की फाइलिंग 2022 में हुई थी, लेकिन इसकी जड़ें 2017 के यूरोपीय संघ के फैसलों में हैं, जिन्होंने गूगल की बाजार प्रभुत्व वाली प्रथाओं पर सवाल उठाए थे। अदालत में दोनों पक्षों के वकील सोमवार को अपनी दलीलें पेश करने लगे, और यह सुनवाई कई हफ्तों तक चलेगी।
यूरोपीय संघ के फैसलों की पृष्ठभूमि और गूगल की गलतियां
यह मुकदमा यूरोपीय संघ की जनरल कोर्ट के एक फैसले पर टिका हुआ है, जिसमें गूगल को यूरोपीय संघ के एंटीट्रस्ट (प्रतिस्पर्धा विरोधी) कानूनों का उल्लंघन करने का दोषी ठहराया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि गूगल ने अपने सर्च इंजन के रिजल्ट्स को हेरफेर करके अपनी तुलना शॉपिंग सेवाओं, जैसे गूगल शॉपिंग, को फायदा पहुंचाया। इस प्रक्रिया में स्वतंत्र साइट्स जैसे प्राइसरेनर को नीचे धकेल दिया गया, जिससे उनकी दृश्यता और व्यापारिक आय में भारी गिरावट आई।
यह विवाद 2017 में शुरू हुआ जब यूरोपीय आयोग ने गूगल पर 2.42 अरब यूरो (लगभग 2.7 अरब डॉलर) का रिकॉर्ड जुर्माना लगाया। आयोग की जांच में पाया गया कि गूगल ने 2008 से 2016 के बीच यूरोप में अपनी खोज सेवाओं का दुरुपयोग किया। मूल रूप से, जब कोई यूरोपीय उपयोगकर्ता “स्मार्टफोन” या “जूते” जैसे शॉपिंग से जुड़े कीवर्ड सर्च करता था, तो गूगल स्वतंत्र मूल्य तुलना साइट्स को प्राकृतिक रूप से ऊपरी स्थानों पर दिखाता था। लेकिन गूगल शॉपिंग लॉन्च होने के बाद, गूगल ने अपने प्रोडक्ट लिस्टिंग को बाकी रिजल्ट्स से अलग करके, चमकीले बॉक्स में ऊपर प्रदर्शित किया, जबकि प्रतिस्पर्धियों को 10वें या उससे नीचे धकेल दिया। आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, इस बदलाव से प्राइसरेनर जैसी साइट्स की वेब ट्रैफिक में 80-90% की कमी आई, जो सीधे उनके राजस्व को प्रभावित करती थी।
2024 में यूरोपीय कोर्ट ऑफ जस्टिस ने आयोग के इस फैसले को पूरी तरह बरकरार रखा, गूगल की अपील को खारिज कर दिया। क्लार्ना ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि इस फैसले के आधार पर अब क्षतिपूर्ति की मांग न्यायोचित है। कंपनी के प्रवक्ता जॉन क्रास्के ने एएफपी न्यूज एजेंसी को ईमेल के माध्यम से बताया, “हम लगभग 78 अरब क्रोना की मांग कर रहे हैं, जो प्राइसरेनर को हुए आर्थिक नुकसान के विस्तृत विश्लेषण पर आधारित है।” क्रास्के ने यह भी जोड़ा कि चूंकि गूगल का कथित उल्लंघन आज भी जारी है, इसलिए क्षतिपूर्ति की राशि रोजाना बढ़ रही है। मूल रूप से प्राइसरेनर ने 2022 में मुकदमा दायर करते समय लगभग 2 अरब डॉलर की मांग की थी, लेकिन बाद के आंकड़ों और मुद्रास्फीति के कारण यह राशि कई गुना बढ़ गई।
गूगल के बाजार प्रभुत्व का प्रभाव और क्लार्ना का दावा
क्लार्ना ने शुक्रवार को जारी एक विस्तृत बयान में गूगल के बाजार प्रभुत्व की गहराई से चर्चा की। कंपनी ने कहा, “ऑनलाइन उपभोक्ताओं तक पहुंचने के लिए सर्च रिजल्ट्स में दृश्यता अनिवार्य है। और यहीं पर गूगल के पास लगभग पूर्ण शक्ति है।” आंकड़ों के अनुसार, यूरोप में 90% से अधिक इंटरनेट सर्च गूगल के प्लेटफॉर्म के माध्यम से होते हैं, जो इसे डिजिटल विज्ञापन और शॉपिंग बाजार में एकाधिकार जैसी स्थिति प्रदान करता है। प्राइसरेनर के मामले में, गूगल की प्रथाओं ने कंपनी की वार्षिक ट्रैफिक को आधे से भी कम कर दिया, जिससे लाखों यूरो का नुकसान हुआ। क्लार्ना, जो खुद एक ‘बाय नाउ, पे लेटर’ फाइनेंशियल सर्विस प्रदान करती है, ने प्राइसरेनर के माध्यम से अपनी शॉपिंग एकीकरण को मजबूत करने की कोशिश की, लेकिन गूगल की नीतियों ने इसे बाधित किया।
यह मुकदमा केवल प्राइसरेनर तक सीमित नहीं है; यह पूरे डिजिटल इकोसिस्टम के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है। यूरोपीय संघ ने हाल के वर्षों में गूगल पर कई एंटीट्रस्ट कार्रवाइयां की हैं। उदाहरण के लिए, 2018 में एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम पर 4.34 अरब यूरो का जुर्माना लगाया गया, क्योंकि गूगल ने अपने ऐप्स को जबरन प्री-इंस्टॉल करने को मजबूर किया। इसी तरह, 2019 में गूगल ऐडसेंस विज्ञापन सर्विस पर 1.49 अरब यूरो का जुर्माना लगा। इन सभी मामलों में सामान्य धागा गूगल का बाजार दुरुपयोग रहा है। क्लार्ना का दावा है कि गूगल शॉपिंग ने 2012 से अब तक प्राइसरेनर को हुए कुल नुकसान की गणना आर्थिक मॉडल्स से की गई है, जिसमें खोई हुई ट्रैफिक, कम हुए क्लिक्स और प्रभावित विज्ञापन राजस्व शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अदालत क्लार्ना के पक्ष में फैसला देती है, तो यह अन्य प्रभावित कंपनियों जैसे ट्रिवागो या कंपैरेटर साइट्स के लिए दरवाजे खोल सकता है।
मुकदमे की वर्तमान प्रक्रिया और गूगल का बचाव
अदालत के दस्तावेजों के अनुसार, गूगल का मुख्य तर्क यह है कि 2017 के यूरोपीय आयोग के फैसले के बाद कंपनी ने अपनी प्रमुख बाजार स्थिति का कोई दुरुपयोग नहीं किया। गूगल का कहना है कि प्राइसरेनर को कोई ठोस नुकसान नहीं हुआ और उनकी शॉपिंग सर्विस अब निष्पक्ष रूप से संचालित हो रही है। कंपनी ने दावा किया है कि सर्च एल्गोरिदम में सुधार किए गए हैं और अब स्वतंत्र साइट्स को भी उचित दृश्यता मिल रही है। हालांकि, एएफपी ने गूगल से टिप्पणी के लिए संपर्क किया, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला। गूगल के प्रवक्ता अक्सर ऐसे मामलों में कहते हैं कि वे यूरोपीय नियमों का पालन कर रहे हैं और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देते हैं, लेकिन इस केस में चुप्पी बरतना उनकी रणनीति का हिस्सा लगता है।
यह मुकदमा 19 दिसंबर, 2025 तक चलने का अनुमान है, जिसमें दोनों पक्ष गवाहों, विशेषज्ञ रिपोर्ट्स और डेटा विश्लेषण पेश करेंगे। सुनवाई के दौरान आर्थिक विशेषज्ञों की गवाही महत्वपूर्ण होगी, जो प्राइसरेनर के नुकसान को प्रमाणित करेंगे। क्लार्ना के सीईओ सेइबास्टर सिमॉनस्की ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा कि यह केस डिजिटल बाजार में न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है, जहां बड़े प्लेटफॉर्म छोटे व्यवसायों को कुचल सकते हैं। यदि क्लार्ना जीतती है, तो यह न केवल वित्तीय मुआवजा दिलाएगा, बल्कि गूगल को अपनी प्रथाओं में और बदलाव करने पर मजबूर कर सकता है।
यह विवाद वैश्विक स्तर पर एंटीट्रस्ट मुद्दों को रेखांकित करता है, जहां अमेरिकी टेक कंपनियां यूरोपीय नियामकों के निशाने पर हैं। भारत जैसे उभरते बाजारों में भी समान चिंताएं हैं, जहां गूगल का प्रभुत्व सर्च और ई-कॉमर्स को प्रभावित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुकदमा डिजिटल अर्थव्यवस्था के भविष्य को आकार देगा, स्वतंत्र नवाचार को प्रोत्साहित करते हुए।
जानकारी एमएसएन और बैरन से एकत्र की जाती है।
