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जैसलमेर बस में आग लगने से 20 लोगों की मौत, PM मोदी ने 2 लाख की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की

राजस्थान के जैसलमेर जिले में एक भयानक बस हादसे ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। एक प्राइवेट बस में अचानक लगी आग से 20 यात्रियों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 16 अन्य यात्री गंभीर रूप से झुलस गए। यह हादसा जैसलमेर से जोधपुर जा रही बस में हुआ, जो थार मरुस्थल के रेगिस्तानी इलाके में सड़क परिवहन की चुनौतियों को उजागर करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया और तत्काल राहत पैकेज की घोषणा की, जो प्रभावित परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा साबित होगी।

जैसलमेर, जो अपनी सुनहरी रेत और ऐतिहासिक किलों के लिए जाना जाता है, अक्सर पर्यटकों और स्थानीय यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण ट्रांजिट पॉइंट होता है। इस हादसे ने न केवल स्थानीय समुदाय को हिला दिया है, बल्कि पूरे राजस्थान में सड़क सुरक्षा को लेकर बहस छेड़ दी है।

प्रधानमंत्री मोदी का संदेश और राहत उपाय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के आधिकारिक हैंडल से एक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने इस दुखद घटना पर अपनी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने लिखा, “जैसलमेर में हुई दुर्घटना से लोगों की जान जाने पर बेहद दुखी हूं। प्रभावित लोगों और उनके परिवारों के साथ इस कठिन समय में मैं हूं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।”

इसके अलावा, पीएम मोदी ने तत्काल राहत के लिए ठोस कदम उठाए। उन्होंने घोषणा की कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) से प्रत्येक मृतक के परिजन को 2 लाख रुपये की अनुदान राशि प्रदान की जाएगी। इसी तरह, घायल यात्रियों को 50,000 रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। यह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जाएगी, ताकि कोई देरी न हो। पीएमओ के अनुसार, यह सहायता योजना केंद्र सरकार की आपदा प्रबंधन नीति का हिस्सा है, जो ऐसी त्रासदियों में पीड़ितों को जल्दी मदद पहुंचाने पर जोर देती है।

प्रधानमंत्री का यह बयान न केवल संवेदनशीलता दिखाता है, बल्कि केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया की तेजी को भी रेखांकित करता है। विपक्षी दलों ने भी इस घोषणा का स्वागत किया है, हालांकि उन्होंने राज्य स्तर पर सुरक्षा मानकों को सख्त करने की मांग की है।

हादसे का पूरा विवरण: कैसे फैली आग?

पुलिस और स्थानीय प्रशासन की प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे का शिकार हुई बस एक प्राइवेट ऑपरेटर की थी, जो जैसलमेर से जोधपुर के बीच दैनिक सेवाएं संचालित करती है। बस में कुल 57 यात्री सवार थे, जिनमें परिवार, पर्यटक और स्थानीय निवासी शामिल थे। यह बस दोपहर करीब 3 बजे जैसलमेर के मुख्य बस स्टैंड से रवाना हुई थी। यात्रा के दौरान, जैसलमेर-जोधपुर हाईवे के एक सुनसान खंड पर, वाहन के पिछले हिस्से से अचानक धुआं निकलने लगा।

ड्राइवर ने सतर्कता दिखाते हुए बस को तुरंत सड़क किनारे रोक दिया और यात्रियों को बाहर निकालने की कोशिश की। लेकिन आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में पूरी बस जलने लगी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस के इंजन या ईंधन टैंक से स्पार्क होने की वजह से आग भड़क उठी, जो रेगिस्तानी हवा में और तेजी से फैल गई। कई यात्री खिड़कियों और दरवाजों से बाहर कूदने की कोशिश में घायल हो गए, जबकि कुछ आग की चपेट में आ गए।

हादसा हाईवे के 150वें किलोमीटर पत्थर के पास हुआ, जो एक दुर्गम इलाका है जहां तुरंत मदद पहुंचना मुश्किल होता है। स्थानीय ग्रामीणों ने सबसे पहले सूचना दी, जिसके बाद जैसलमेर जिला पुलिस, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीआरएफ) और अग्निशमन दल की टीमें मौके पर पहुंचीं। बचाव कार्य में करीब दो घंटे लगे, और शवों को निकालने के लिए विशेष उपकरणों का इस्तेमाल किया गया।

मृतकों में ज्यादातर 25 से 50 वर्ष की आयु के पुरुष और महिलाएं थीं, जिनमें कुछ बच्चे भी शामिल थे। घायलों को पहले नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, फिर जोधपुर के एमडीएम अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया, जहां उन्हें ऑक्सीजन और बर्न ट्रीटमेंट प्रदान किया जा रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि कुछ घायलों की हालत नाजुक है, लेकिन उचित चिकित्सा से वे ठीक हो सकते हैं।

राहत और जांच के कदम: सरकार की प्रतिक्रिया

राजस्थान सरकार ने हादसे के तुरंत बाद उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जिला कलेक्टर को निर्देश दिए कि प्रभावित परिवारों को राज्य स्तर पर अतिरिक्त सहायता प्रदान की जाए, जिसमें मृतकों के परिवारों को 5 लाख रुपये का अनुदान और घायलों के इलाज का पूरा खर्च शामिल है। राज्य आपदा राहत कोष से यह राशि जारी की जा रही है।

केंद्र और राज्य सरकार ने संयुक्त जांच टीम गठित की है, जो हादसे के सटीक कारणों की पड़ताल करेगी। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि बस में सीएनजी सिलेंडर फिटेड था, जो आग के तेजी से फैलने का प्रमुख कारण हो सकता है। परिवहन विभाग ने बस ऑपरेटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है और सभी प्राइवेट बसों की सुरक्षा जांच के आदेश दिए हैं। राजस्थान हाई कोर्ट ने भी स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है।

इसके अलावा, एनएचएआई (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) ने हाईवे पर अतिरिक्त एम्बुलेंस और फायर टेंडर तैनात करने का फैसला लिया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं में देरी न हो। स्थानीय एनजीओ और रेड क्रॉस जैसे संगठन भी राहत कार्य में जुटे हैं, जो भोजन, दवाइयां और मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान कर रहे हैं।

व्यापक प्रभाव: सड़क सुरक्षा पर सवाल

यह हादसा राजस्थान में सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या को दर्शाता है। राज्य परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में राजस्थान में 50,000 से अधिक सड़क हादसे दर्ज हुए, जिनमें आग लगने वाली घटनाएं 10% से अधिक हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पुरानी बसों, अपर्याप्त रखरखाव और ड्राइवरों की थकान मुख्य कारण हैं।

यात्रियों से अपील की जा रही है कि वे हमेशा सीट बेल्ट बांधें, आपातकालीन निकास मार्गों को जानें और संदिग्ध धुएं पर तुरंत अलर्ट रहें। परिवहन मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्तर पर बसों में फायर सप्रेसर और जीपीएस ट्रैकिंग अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा है। यह घटना न केवल एक त्रासदी है, बल्कि सड़क सुरक्षा को मजबूत करने का अवसर भी प्रदान करती है।