भोजनस्टार्टअप

10 भारतीय खाद्य स्टार्टअप पारंपरिक व्यंजनों को वैश्विक उत्पादों में बदल रहे हैं

भारतीय खाना दुनिया भर में अपनी अनोखी स्वाद और सुगंध के लिए मशहूर है। दाल-चावल से लेकर मसालेदार चाट तक, ये पारंपरिक व्यंजन न सिर्फ घरों में प्यार पाते हैं, बल्कि अब ग्लोबल मार्केट में भी अपनी जगह बना रहे हैं। आज के दौर में कई स्टार्टअप्स पारंपरिक भारतीय रेसिपीज को मॉडर्न पैकेजिंग और इनोवेशन के साथ दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचा रहे हैं। भारत का फूड सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। २०२५ में फूड एक्सपोर्ट का वैल्यू ५० बिलियन डॉलर से ज्यादा होने का अनुमान है। इसमें रेडी-टू-ईट (RTE) और रेडी-टू-कुक (RTC) प्रोडक्ट्स का बड़ा रोल है। ये स्टार्टअप्स न सिर्फ लोकल फूड इंडस्ट्री को बूस्ट दे रहे हैं, बल्कि एक्सपोर्ट मार्केट में भी भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। ये कंपनियां पारंपरिक रेसिपीज को हेल्दी और कन्वीनियेंट तरीके से पेश करती हैं, जो व्यस्त लाइफस्टाइल वाले लोगों को पसंद आते हैं। उदाहरण के लिए, बिरयानी या दाल जैसे व्यंजनों को पैक करके यूएस और यूके जैसे देशों में बेचा जा रहा है। इससे इंडियन कल्चरल हेरिटेज ग्लोबल लेवल पर फैल रहा है।​

इन स्टार्टअप्स की सफलता से पता चलता है कि कैसे ट्रेडिशनल इंडियन रेसिपीज जैसे दाल, बिरयानी, पापड़ और अचार को मॉडर्न टेक्नोलॉजी के साथ मिलाकर हेल्दी और कन्वीनियेंट प्रोडक्ट्स बनाए जा सकते हैं। भारत का फूड एक्सपोर्ट मार्केट २०२५ में ५० बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है, जिसमें RTE प्रोडक्ट्स का बड़ा योगदान है। ये स्टार्टअप्स लोकल किसानों से कच्चा माल लेते हैं, जो सस्टेनेबिलिटी को प्रमोट करता है। ग्लोबल कंज्यूमर्स अब ऑर्गेनिक और नेचुरल फूड्स की तलाश में हैं, और इंडियन स्पाइसेस व रेसिपीज इनकी डिमांड पूरी करते हैं। आइए, इन इनोवेटिव स्टार्टअप्स को करीब से जानें।​

१. आईडी फ्रेश फूड: साउथ इंडियन ब्रेकफास्ट को आसान बनाना

आईडी फ्रेश फूड एक बैंगलोर बेस्ड स्टार्टअप है जो पारंपरिक साउथ इंडियन ब्रेकफास्ट आइटम्स को फ्रेश और प्रिजर्वेटिव-फ्री तरीके से पैक करता है। फाउंडर्स PC मुस्तफा और कुणाल भसीन ने २००५ में इसे शुरू किया था। वे साउथ इंडिया के घरेलू किचन से इंस्पायर्ड थे। डोसा बैटर, इडली मिक्स और परोटा जैसे प्रोडक्ट्स को ये स्टार्टअप घरेलू किचन तक पहुंचाता है। आज ये भारत के अलावा यूएस, यूके और मिडिल ईस्ट में एक्सपोर्ट हो रहा है। कंपनी ने ग्लोबल मार्केट में साउथ इंडियन फ्लेवर्स को पॉपुलर बनाया है।

व्यस्त प्रोफेशनल्स अब घर पर आसानी से डोसा बना सकते हैं। ये स्टार्टअप फ्रेशनेस पर फोकस करता है, जो पारंपरिक तरीके से बनाए गए बैटर को इको-फ्रेंडली पैकेजिंग में रखता है। बिना केमिकल्स के ये प्रोडक्ट्स लंबे समय तक ताजा रहते हैं। ये प्रोडक्ट्स व्यस्त लाइफस्टाइल वाले लोगों के लिए परफेक्ट हैं। कंपनी ने २०२४ तक ५०० करोड़ रुपये का टर्नओवर किया है। इस ग्रोथ से पता चलता है कि कैसे लोकल रेसिपीज ग्लोबल ब्रांड बन सकती हैं।​

इसकी खासियत फ्रेशनेस है। पारंपरिक तरीके से बनाए गए बैटर को इको-फ्रेंडली पैकेजिंग में रखा जाता है, जो बिना केमिकल्स के लंबे समय तक ताजा रहता है। ये प्रोडक्ट्स व्यस्त लाइफस्टाइल वाले लोगों के लिए परफेक्ट हैं। कंपनी ने २०२४ तक ५०० करोड़ रुपये का टर्नओवर किया है, और ग्लोबल मार्केट में साउथ इंडियन फूड की डिमांड बढ़ाने में मदद की है।​

प्रोडक्ट मुख्य सामग्री ग्लोबल मार्केट बेनिफिट्स
डोसा बैटर चावल, उड़द दाल यूएस, यूके प्रिजर्वेटिव-फ्री, ७ दिनों तक ताजा
इडली मिक्स उड़द दाल, चावल मिडिल ईस्ट हेल्दी ब्रेकफास्ट, आसान तैयारी
परोटा गेहूं का आटा, तेल ऑस्ट्रेलिया ताजगी बरकरार, कन्वीनियेंट

ये टेबल आईडी फ्रेश के पॉपुलर प्रोडक्ट्स को दर्शाती है, जो पारंपरिक रेसिपीज को RTC फॉर्मेट में बदल देते हैं।​

२. ग्रामीया: कोल्ड-प्रेस्ड ऑयल्स की वापसी

चेन्नई की ग्रामीया स्टार्टअप पारंपरिक कोल्ड-प्रेस्ड ऑयल्स को मॉडर्न तरीके से प्रेजेंट करता है। फाउंडर सीबी सीबी ने २०१८ में इसे शुरू किया। वे अपने ग्रैंडपेरेंट्स की रेसिपीज से इंस्पायर्ड थे। ये स्टार्टअप ग्रैंडमदर की रेसिपीज पर आधारित ऑयल्स जैसे नारियल, तिल और सरसों का तेल बनाता है, जो एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं। भारत में रिफाइंड ऑयल्स के दौर में ये पारंपरिक तरीके को जिंदा रखता है। स्टोन मिल्स का इस्तेमाल करके बनाए गए ये ऑयल्स केमिकल-फ्री होते हैं। कंपनी ३०,००० लीटर प्रति माह प्रोड्यूस करती है। ५०% रेवेन्यू एक्सपोर्ट से आता है। यूरोप और यूएस में इंडियन कुकिंग ऑयल्स की डिमांड बढ़ रही है।

ग्रामीया ने लोकल ऑयल मेकर्स को भी जॉब्स दी हैं। ये लोग पहले प्रोफेशन छोड़ चुके थे। २०२३ में इसका टर्नओवर ८ करोड़ रुपये था। ये स्टार्टअप दिखाता है कि कैसे ट्रेडिशनल प्रिजर्वेशन टेक्नीक्स ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी ट्रेंड्स से मैच करती हैं।​ भारत में रिफाइंड ऑयल्स के दौर में ये पारंपरिक तरीके को जिंदा रखता है। स्टोन मिल्स का इस्तेमाल करके बनाए गए ये ऑयल्स केमिकल-फ्री होते हैं। कंपनी ३०,००० लीटर प्रति माह प्रोड्यूस करती है, और ५०% रेवेन्यू एक्सपोर्ट से आता है। यूरोप और यूएस में इंडियन कुकिंग ऑयल्स की डिमांड बढ़ रही है।​

ग्रामीया ने लोकल ऑयल मेकर्स को भी जॉब्स दी हैं, जो पहले प्रोफेशन छोड़ चुके थे। २०२३ में इसका टर्नओवर ८ करोड़ रुपये था। ये स्टार्टअप दिखाता है कि कैसे ट्रेडिशनल प्रिजर्वेशन टेक्नीक्स ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी ट्रेंड्स से मैच करती हैं।​

ऑयल टाइप पारंपरिक यूज एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन हेल्थ बेनिफिट्स
नारियल तेल साउथ इंडियन कुकिंग यूएस, यूके एंटी-इंफ्लेमेटरी
तिल का तेल उत्तर भारतीय व्यंजन जर्मनी हार्ट हेल्थ
सरसों का तेल बंगाली रेसिपीज कनाडा डाइजेशन एड

ये टेबल ग्रामीया के मुख्य प्रोडक्ट्स की झलक देती है।​

३. लड्डू बॉक्स: मिलेट-बेस्ड स्वीट्स का नया रूप

तेलंगाना की लड्डू बॉक्स २०२० में संदीप जोगिपार्टी और कविता गोपु ने शुरू की। वे फैमिली ट्रेडिशन्स से इंस्पायर्ड थे। ये स्टार्टअप फैमिली रेसिपीज पर आधारित मिलेट और दाल-बेस्ड लड्डू बनाता है, जो शुगर-फ्री और प्रिजर्वेटिव-फ्री होते हैं। पारंपरिक लड्डू को हेल्दी ट्विस्ट देकर ये ग्लोबल मार्केट टारगेट करता है। वेजन ऑप्शन्स के साथ ये प्रोडक्ट्स ड्राई फ्रूट्स और पल्सेस से बने होते हैं। कंपनी अब पूरे भारत में सप्लाई करती है। यूएस-बेस्ड इंडियन कम्युनिटी में पॉपुलर हो रही है। २०२३ में टर्नओवर २ करोड़ रुपये था। ये फैमिली रेसिपीज की ताकत दिखाता है।

ये स्टार्टअप इंडियन स्वीट्स को हेल्थ-कॉन्शस वर्ल्ड में फिट करता है। जहां शुगर-फ्री ऑप्शन्स की डिमांड है। ग्लोबल कंज्यूमर्स अब ट्रेडिशनल स्वीट्स को हेल्दी वर्जन में ढूंढते हैं।​ वेजन ऑप्शन्स के साथ ये प्रोडक्ट्स ड्राई फ्रूट्स और पल्सेस से बने होते हैं। कंपनी अब पूरे भारत में सप्लाई करती है, और यूएस-बेस्ड इंडियन कम्युनिटी में पॉपुलर हो रही है। २०२३ में टर्नओवर २ करोड़ रुपये था, जो फैमिली रेसिपीज की ताकत दिखाता है।​ ये स्टार्टअप इंडियन स्वीट्स को हेल्थ-कॉन्शस वर्ल्ड में फिट करता है, जहां शुगर-फ्री ऑप्शन्स की डिमांड है।​

लड्डू वैरायटी मुख्य सामग्री ग्लोबल अपील कैलोरी काउंट
रागी लड्डू रागी, गुड़ यूएस १५० किलो कैलोरी प्रति पीस
फॉक्सटेल मिलेट लड्डू मिलेट, ड्राई फ्रूट्स यूके शुगर-फ्री
मूंग दाल लड्डू मूंग दाल, नट्स ऑस्ट्रेलिया प्रोटीन रिच

टेबल में लड्डू बॉक्स के हेल्दी वैरिएंट्स लिस्टेड हैं।​

४. ड्राईएम फूड्स: फ्रीज-ड्रायड RTE मील्स

२०१७ में आयुषी जैन और मृणालिनी जैन ने ड्राईएम फूड्स शुरू किया। वे ट्रैवलर्स की प्रॉब्लम्स से इंस्पायर्ड थे। ये स्टार्टअप पारंपरिक खिचड़ी, दाल-चावल जैसे मील्स को फ्रीज-ड्राय टेक्नोलॉजी से RTE बनाता है। बिना प्रिजर्वेटिव्स के। स्टूडेंट्स और ट्रैवलर्स के लिए परफेक्ट। ग्लोबल मार्केट में इंडियन RTE की डिमांड बढ़ी है। खासकर यूके और यूएस में। कंपनी ने कोविड के बाद ग्रोथ की। जहां होम फूड की जरूरत पड़ी। ये प्रोडक्ट्स १२ महीने शेल्फ लाइफ रखते हैं। ड्राईएम ने मॉम्स और टॉडलर्स के लिए स्पेशल मेन्यू लॉन्च किया। जो ग्लोबल एक्सपैट्स को टारगेट करता है। ये टेक्नोलॉजी ट्रेडिशनल फ्लेवर्स को लॉक रखती है।​

ग्लोबल मार्केट में इंडियन RTE की डिमांड बढ़ी है, खासकर यूके और यूएस में। कंपनी ने कोविड के बाद ग्रोथ की, जहां होम फूड की जरूरत पड़ी। ये प्रोडक्ट्स १२ महीने शेल्फ लाइफ रखते हैं।​ ड्राईएम ने मॉम्स और टॉडलर्स के लिए स्पेशल मेन्यू लॉन्च किया, जो ग्लोबल एक्सपैट्स को टारगेट करता है।​

मील टाइप रेसिपी बेस एक्सपोर्ट कंट्री तैयारी टाइम
खिचड़ी दाल, चावल यूके ५ मिनट
दाल-चावल मसूर दाल यूएस जस्ट ऐड वॉटर
राजमा किडनी बीन्स कनाडा ३ मिनट

ये टेबल ड्राईएम के RTE प्रोडक्ट्स को हाइलाइट करता है।​

५. रिबेल फूड्स: क्लाउड किचन से ग्लोबल वर्चुअल ब्रांड्स

रिबेल फूड्स २०११ में जय भावनानी ने शुरू किया। वे फूड डिलीवरी गैप्स से इंस्पायर्ड थे। ये पारंपरिक इंडियन क्यूजीन को क्लाउड किचन मॉडल से ग्लोबल बनाता है। वर्चुअल ब्रांड्स जैसे फासोस और बेहल प्रोसेस से RTE प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट होते हैं। कंपनी डेटा एनालिटिक्स से लोकल टेस्ट को मैच करती है। अब यूएस और मिडिल ईस्ट में एक्सपैंड हो रही है। २०२४ में वैल्यूएशन १० बिलियन डॉलर की है। ये स्टार्टअप दिखाता है कि कैसे ट्रेडिशनल रेसिपीज को डिलीवरी के जरिए ग्लोबल पहुंचाया जा सकता है। क्लाउड किचन मॉडल कॉस्ट कम करता है।​

कंपनी डेटा एनालिटिक्स से लोकल टेस्ट को मैच करती है। अब यूएस और मिडिल ईस्ट में एक्सपैंड हो रही है। २०२४ में वैल्यूएशन १० बिलियन डॉलर की है।​ ये स्टार्टअप दिखाता है कि कैसे ट्रेडिशनल रेसिपीज को डिलीवरी के जरिए ग्लोबल पहुंचाया जा सकता है।​

ब्रांड स्पेशलाइटी ग्लोबल रीच इनोवेशन
फासोस रैप्स, बिरयानी यूएस AI ऑप्टिमाइज्ड डिलीवरी
बेहल प्रोसेस स्ट्रीट फूड मिडिल ईस्ट RTE पैकेजिंग
मंडे हेल्दी मील्स यूके कस्टमाइज्ड रेसिपीज

रिबेल फूड्स के वर्चुअल ब्रांड्स की डिटेल्स।​

६. शिमला रेड: RTE और RTC एक्सपोर्ट स्पेशलिस्ट

शिमला रेड एक लीडिंग RTE फूड एक्सपोर्टर है। जो पारंपरिक इंडियन मील्स को ग्लोबल स्टैंडर्ड्स पर बनाता है। फाउंडर्स ने २०१० के आसपास इसे शुरू किया। कंडीमेंट्स, डिप्स और RTC मील्स जैसे बिरयानी मिक्स इसकी रेंज में हैं। BRC, USFDA और HALAL सर्टिफाइड। कंपनी होम और HORECA सेक्टर को टारगेट करती है। ग्लोबल मार्केट में इंडियन फ्लेवर्स की डिमांड पूरी करती है। लॉन्ग शेल्फ लाइफ प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट के लिए आइडियल। ये स्टार्टअप कस्टमाइज्ड पैकेजिंग से प्राइवेट लेबलिंग ऑफर करता है। एक्सपोर्ट मार्केट में ४०% ग्रोथ देखी गई है।​

कंपनी होम और HORECA सेक्टर को टारगेट करती है। ग्लोबल मार्केट में इंडियन फ्लेवर्स की डिमांड पूरी करती है। लॉन्ग शेल्फ लाइफ प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट के लिए आइडियल।​ ये स्टार्टअप कस्टमाइज्ड पैकेजिंग से प्राइवेट लेबलिंग ऑफर करता है।​

प्रोडक्ट कैटेगरी उदाहरण सर्टिफिकेशन मार्केट
RTC मील्स कुरमा मिक्स USFDA यूएस
डिप्स एंड सॉसेस मिंट चटनी HALAL यूरोप
RTE स्नैक्स समोसा BRC मिडिल ईस्ट

शिमला रेड की रेंज।​

७. स्वाधिका फूड्स: फ्रोजन RTE एंड RTC

चेन्नई की स्वाधिका फूड्स २०१५ में स्वर्णमुगि आर कार्तिक ने शुरू की। वे फ्रोजन फूड गैप्स से इंस्पायर्ड थे। फ्रोजन कट फ्रूट्स, वेजिटेबल्स और RTE मील्स बनाती है। पारंपरिक इंडियन रेसिपीज को इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स पर एक्सपोर्ट करती है। प्रोडक्ट्स १००% नेचुरल और प्रिजर्वेटिव-फ्री। कस्टमाइज्ड पैकिंग से ग्लोबल शिपमेंट्स। कंपनी R&D पर फोकस करती है। जो ट्रेडिशनल फ्लेवर्स को मेनटेन रखती है। एक्सपोर्ट में ३०% सालाना ग्रोथ। ये स्टार्टअप सस्टेनेबल सोर्सिंग पर जोर देता है।​

प्रोडक्ट्स १००% नेचुरल और प्रिजर्वेटिव-फ्री। कस्टमाइज्ड पैकिंग से ग्लोबल शिपमेंट्स।​ कंपनी R&D पर फोकस करती है, जो ट्रेडिशनल फ्लेवर्स को मेनटेन रखती है।​

प्रोडक्ट फॉर्म एक्सपोर्ट फोकस फीचर्स
फ्रोजन RTE बिरयानी यूएस नो सिंथेटिक कलर्स
RTC वेज कट वेजिटेबल्स यूरोप फ्रेशनेस लॉक
फ्रूट पल्प IQF फ्रूट्स एशिया नेचुरल टेस्ट

स्वाधिका की मुख्य लाइन।​

८. चक्रधर फूड्स: डाइवर्स RTE रेंज

चक्रधर फूड्स RTE इंडियन और ग्लोबल फूड्स स्पेशलाइस्ट है। पारंपरिक स्नैक्स, साइड्स और कैनेड प्रोडक्ट्स बनाता है। फाउंडर्स ने २०१२ में इसे लॉन्च किया। स्नैक्स जैसे नमकीन को RTE फॉर्मेट में। कंपनी प्राइवेट लेबल सॉल्यूशन्स ऑफर करती है। ग्लोबल मार्केट में इंडियन स्नैक्स की डिमांड बढ़ा रही है। ट्रेडिशनल रेसिपीज को मॉडर्न प्रोसेसिंग से मैच। ये स्टार्टअप लोकल इंग्रीडिएंट्स को प्रमोट करता है। एक्सपोर्ट में २५% मार्केट शेयर।​

कंपनी प्राइवेट लेबल सॉल्यूशन्स ऑफर करती है। ग्लोबल मार्केट में इंडियन स्नैक्स की डिमांड बढ़ा रही है।​ ट्रेडिशनल रेसिपीज को मॉडर्न प्रोसेसिंग से मैच।​

कैटेगरी प्रोडक्ट ग्लोबल यूज बेनिफिट
स्नैक्स नमकीन यूएस क्रिस्पी टेक्स्चर
RTE मील्स दाल यूके क्विक प्रिप
कैनेड अचार कनाडा लॉन्ग लाइफ

चक्रधर की ऑफरिंग्स।​

९. फ्रेशमेनू: शेफ-क्यूरेटेड ट्रेडिशनल मील्स

फ्रेशमेनू एक QSR स्टार्टअप है। जो पारंपरिक मील्स को चीफ-क्यूरेटेड तरीके से RTE बनाता है। २०१० में शुरू हुआ। बिरयानी और कबाब जैसे आइटम्स। ग्लोबल एक्सपैंशन में यूएस और यूके टारगेट। डेटा-ड्रिवन अप्रोच से कस्टमर प्रेफरेंस मैच। ये स्टार्टअप अर्बन कंज्यूमर्स के लिए कन्वीनियेंट फूड लाता है। शेफ्स पारंपरिक रेसिपीज को इनोवेट करते हैं। २०२४ में २००% ग्रोथ।​

ग्लोबल एक्सपैंशन में यूएस और यूके टारगेट। डेटा-ड्रिवन अप्रोच से कस्टमर प्रेफरेंस मैच।​ ये स्टार्टअप अर्बन कंज्यूमर्स के लिए कन्वीनियेंट फूड लाता है।​

मील स्पेशल मार्केट फीचर्स
बिरयानी हाइडराबादी यूएस फ्रेश स्पाइसेस
कबाब चिकन यूके लो-ऑयल
वेज मील पनीर टिक्का मिडिल ईस्ट हेल्दी ट्विस्ट

फ्रेशमेनू की हाइलाइट्स।​

१०. लाइव यम फूड्स: प्लांट-बेस्ड डेयरी अल्टरनेटिव्स

बैंगलोर की लाइव यम फूड्स तान्या रवि ने शुरू की। २०१९ में। वे वीगन ट्रेंड्स से इंस्पायर्ड थीं। पारंपरिक चीज और घी को प्लांट-बेस्ड बनाता है। इंडियन कुकिंग ट्रेडिशन्स को वीगन ट्विस्ट। अमेजन और बिग बास्केट पर उपलब्ध। एक्सपोर्ट यूएस और यूरोप। कंपनी प्लांट-बेस्ड डाइट को एक्सेसिबल बनाती है। ग्लोबल मार्केट में वीगन इंडियन फूड्स की डिमांड ३०% बढ़ी।​

अमेजन और बिग बास्केट पर उपलब्ध, एक्सपोर्ट यूएस और यूरोप।​ कंपनी प्लांट-बेस्ड डाइट को एक्सेसिबल बनाती है।​

प्रोडक्ट बेस ग्लोबल रीच बेनिफिट्स
वीगन चीज प्लांट मिल्क यूएस कोलेस्ट्रॉल-फ्री
प्लांट घी नट्स यूके ट्रेडिशनल फ्लेवर
डेयरी अल्टर सोया यूरोप एनवायरनमेंट फ्रेंडली

लाइव यम की रेंज।​

निष्कर्ष

ये १० स्टार्टअप्स पारंपरिक भारतीय रेसिपीज को ग्लोबल प्रोडक्ट्स में बदलकर न सिर्फ कल्चरल हेरिटेज को प्रमोट कर रहे हैं, बल्कि इकोनॉमी को भी बूस्ट दे रहे हैं। RTE और RTC प्रोडक्ट्स से इंडियन फूड की पहुंच बढ़ रही है। जो हेल्थ-कॉन्शस कंज्यूमर्स को अट्रैक्ट करता है। इनकी सफलता से सीख मिलती है कि इनोवेशन और ट्रेडिशन का मिश्रण कैसे मार्केट को चेंज करता है। भारत का फूड सेक्टर उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ रहा है। ग्लोबल मार्केट में इंडियन फ्लेवर्स का बोलबाला होगा। अगर आप इनमें से कोई ट्राई करें, तो असली स्वाद का मजा लें। ये स्टार्टअप्स न सिर्फ बिजनेस हैं, बल्कि कल्चरल ब्रिज भी।