कृषितकनीकीस्टार्टअप

15 भारतीय एग्रीटेक स्टार्टअप खेती के भविष्य को बदल रहे हैं (भारत और वैश्विक प्रभाव)

भारतीय कृषि हमेशा से देश की रीढ़ रही है। करोड़ों किसानों की मेहनत से हमारा भोजन सुरक्षित होता है। लेकिन आज जलवायु परिवर्तन, पानी की कमी और बाजार की अनिश्चितताओं ने खेती को चुनौतियों से भर दिया है। एग्रीटेक स्टार्टअप्स इन समस्याओं का सामना करने के लिए तकनीक का सहारा ले रहे हैं। ये कंपनियां एआई, आईओटी और डेटा एनालिटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों से किसानों को स्मार्ट खेती सिखा रही हैं। इससे न केवल उपज बढ़ रही है, बल्कि लागत भी कम हो रही है। उदाहरण के लिए, भारतीय एग्रीटेक क्षेत्र ने २०१५ से २०२५ तक २०% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर हासिल की है।​

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ये स्टार्टअप्स छोटे किसानों को सशक्त बना रहे हैं, जो भारत की ८६% कृषि आबादी हैं। वे बाजार से जुड़ाव बढ़ा रहे हैं और सस्टेनेबल प्रैक्टिसेज को प्रोत्साहित कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर, ये कंपनियां भारत को एग्रीटेक हब बना रही हैं। २०२४ तक इस क्षेत्र में २.४ बिलियन डॉलर का निवेश आया, जो अफ्रीका और एशिया के देशों में मॉडल एक्सपोर्ट कर रहा है। इससे खाद्य सुरक्षा मजबूत हो रही है और जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद मिल रही है। यह लेख १५ ऐसे स्टार्टअप्स की विस्तृत कहानी बताएगा। हर सेक्शन में टेबल से जानकारी आसान होगी। सरल शब्दों में, ये स्टार्टअप्स खेती को आसान, लाभदायक और पर्यावरण-अनुकूल बना रहे हैं। आइए, इनकी यात्रा समझें।​

एग्रीटेक स्टार्टअप्स की त्वरित जानकारी टेबल

स्टार्टअप का नाम स्थापना वर्ष मुख्यालय फोकस क्षेत्र
क्रोपइन २०१० बेंगलुरु एआई आधारित फार्म मैनेजमेंट
निंजा कार्ट २०१५ बेंगलुरु सप्लाई चेन ऑटोमेशन
डे हाट २०१२ पटना एंड-टू-एंड एग्री सर्विसेज
एग्रोस्टार २०१३ पुणे एग्री इनपुट्स और एडवाइजरी
बिगहाट २०१५ बैंगलोर ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म
भारतएग्री २०१७ बैंगलोर प्रिसिजन एग्रोनॉमी
फसल २०१८ बैंगलोर आईओटी सेंसर बेस्ड फार्मिंग
क्रोफार्म २०१६ दिल्ली फार्म-टू-फार्म डिलीवरी
खेतीगाड़ी २०१६ पुणे ट्रैक्टर और इक्विपमेंट रेंटल
बिजाक २०१९ दिल्ली बी2बी मार्केटप्लेस
वे कूल २०१५ चेन्नई फूड सप्लाई चेन
इंटेलो लैब्स २०१५ गुरुग्राम एआई क्वालिटी असेसमेंट
एगनेक्स्ट २०१५ गुड़गांव क्वालिटी टेस्टिंग
स्टेलाप्स २०११ बैंगलोर डेयरी टेक
साइफार्म्सइंडिया २०१४ हैदराबाद स्मार्ट फार्मिंग सॉल्यूशंस

१. क्रोपइन: एआई से खेतों की निगरानी

क्रोपइन एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो एआई और डेटा का इस्तेमाल करके किसानों को सलाह देता है। यह २०१० में बेंगलुरु में कृष्णा कुमार और कुनाल प्रसाद द्वारा शुरू हुआ। किसान अपने खेतों को जीपीएस से चिह्नित कर सकते हैं। सिस्टम मौसम, मिट्टी और फसल की जानकारी देता है। इससे उपज २०% तक बढ़ जाती है। यह स्टार्टअप सटीक कृषि पर जोर देता है, जहां संसाधनों का सही उपयोग होता है। जलवायु परिवर्तन के समय, यह किसानों को पूर्वानुमान देता है ताकि वे सूखे या बाढ़ से बच सकें।

भारत के अलावा, यह अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया में १६ मिलियन एकड़ से ज्यादा खेतों को डिजिटाइज कर चुका है। २०२४ में गूगल जेमिनी के साथ पार्टनरशिप से रीयल-टाइम इनसाइट्स मिलने लगे। वैश्विक कंपनियों जैसे नेस्ले के साथ काम करके, यह सस्टेनेबल सप्लाई चेन बना रहा है। छोटे किसानों के लिए सस्ता सब्सक्रिप्शन मॉडल है। इससे न केवल आय बढ़ती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण भी होता है क्योंकि उर्वरक का कम उपयोग होता है।​

क्रोपइन के प्रमुख फीचर्स टेबल

फीचर विवरण लाभ
फार्म मॉनिटरिंग जीपीएस ट्रैकिंग और सैटेलाइट इमेजरी उपज में १५-२०% वृद्धि
एआई एडवाइजरी मौसम और कीट पूर्वानुमान लागत में १०% कमी
सप्लाई चेन ट्रेस फार्म से फोर्क तक ट्रैकिंग निर्यात के लिए प्रमाणन
ग्लोबल रीच १०+ देशों में सेवाएं भारतीय किसानों को इंटरनेशनल मार्केट

२. निंजा कार्ट: ताजा उपज की तेज सप्लाई

निंजा कार्ट २०१५ में बेंगलुरु में शुरू हुआ। यह फल और सब्जियों की सप्लाई चेन को ऑटोमेट करता है। किसानों से सीधे सामान खरीदकर १२ घंटे में रिटेलर्स तक पहुंचाता है। इससे मध्यस्थों की संख्या कम होती है। कंपनी ने २५० मिलियन डॉलर से ज्यादा फंडिंग जुटाई है। दक्षिण भारत में मजबूत है, लेकिन अब पूरे देश में फैल रही है। किसानों को २४ घंटे में पेमेंट मिलता है। उपभोक्ताओं को ताजा और सस्ता सामान मिलता है।

वैश्विक प्रभाव में, यह सप्लाई मॉडल को एक्सपोर्ट कर रहा है, जैसे मध्य पूर्व के बाजारों में। इससे भारत का कृषि निर्यात बढ़ रहा है, जो २०२४ में ५१ बिलियन डॉलर तक पहुंचा। निंजा कार्ट ऐप से ऑर्डर बुकिंग आसान है। रिटर्न पॉलिसी भी है, अगर क्वालिटी खराब हो। इससे किसानों की कमाई २०-३०% बढ़ी है। यह मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है और खाद्य अपव्यय को ३०% तक कम करता है।​

निंजा कार्ट के लाभ टेबल

लाभ प्रकार किसानों के लिए रिटेलर्स के लिए
तेज पेमेंट २४ घंटे में भुगतान ताजा स्टॉक उपलब्ध
कम कमीशन कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं प्रतिस्पर्धी कीमतें
सप्लाई एफिशिएंसी मध्यस्थों से मुक्ति १२ घंटे डिलीवरी
वैश्विक स्केल एक्सपोर्ट मॉडल इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स

३. डे हाट: पूर्ण कृषि सेवाएं

डे हाट २०१२ में पटना से शशांक कुमार और मनीष कुमार द्वारा शुरू हुआ। यह किसानों को इनपुट्स, सलाह, फाइनेंस और मार्केट लिंकेज देता है। ५ मिलियन से ज्यादा किसानों को सेवा दे चुका है। कंपनी ने २५० मिलियन डॉलर फंडिंग जुटाई। गुजरात, राजस्थान जैसे राज्यों में मजबूत। एआई से व्यक्तिगत सलाह देता है। वैश्विक रूप से, यह छोटे किसानों के मॉडल को दुनिया भर में फैला रहा है, खासकर दक्षिण एशिया में।

उपज बिक्री से किसानों को १५-२०% ज्यादा आय। डे हाट का ऐप सरल है। किसान बीज, खाद खरीद सकते हैं और लोन ले सकते हैं। यह एकीकृत प्लेटफॉर्म ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाता है। ३००% तक आय वृद्धि के उदाहरण हैं। पर्यावरण के लिए, यह जैविक खेती को बढ़ावा देता है।​

डे हाट सेवाओं की टेबल

सेवा विवरण प्रभाव
इनपुट डिस्ट्रीब्यूशन बीज और खाद की होम डिलीवरी लागत में १०% बचत
फार्म एडवाइजरी एआई आधारित सलाह उपज २५% बढ़ोतरी
फाइनेंशियल सर्विस लोन और इंश्योरेंस वित्तीय समावेशन
मार्केट लिंकेज डायरेक्ट बायर्स से कनेक्ट आय में १५% वृद्धि

४. एग्रोस्टार: किसान के लिए कंटेंट और कॉमर्स

एग्रोस्टार २०१३ में पुणे में शरदुल शेठ और सीतांशु शेठ द्वारा स्थापित। यह मल्टीलिंगुअल ऐप है जो सलाह और उत्पाद बेचता है। ५ मिलियन किसानों को सेवा। कंपनी डेटा से फसल पैटर्न समझती है। १११ मिलियन डॉलर फंडिंग। महाराष्ट्र, गुजरात में लोकप्रिय। वैश्विक प्रभाव में, इसका मॉडल अफ्रीकी देशों में अपनाया जा रहा है। किसानों को सही समय पर सलाह से उपज बढ़ी। ऐप में वीडियो और चैट सपोर्ट है।

सरल भाषा में जानकारी। यह पर्सनलाइज्ड एडवाइजरी देता है, जैसे मिट्टी के प्रकार के आधार पर। इससे कीटों से नुकसान २०% कम होता है। ग्रामीण समुदायों को मजबूत बनाता है।​

एग्रोस्टार फीचर्स टेबल

फीचर विवरण लाभ
कंटेंट लेड कॉमर्स सलाह के साथ उत्पाद खरीदारी सूचित निर्णय
क्रॉप सॉल्यूशंस समस्या समाधान वीडियो २०% कम नुकसान
डेटा एनालिटिक्स पैटर्न ट्रैकिंग बेहतर प्लानिंग
ग्लोबल एडॉप्शन मॉडल एक्सपोर्ट इंटरनेशनल ग्रोथ

५. बिगहाट: डिजिटल एग्री मार्केटप्लेस

बिगहाट २०१५ में बैंगलोर से शशांक अग्रवाल और उनके साथियों द्वारा स्थापित किया गया। यह एक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है जो किसानों को बीज, खाद, कीटनाशक और अन्य कृषि इनपुट्स सस्ते दामों पर उपलब्ध कराता है। अब तक ४ मिलियन से ज्यादा किसानों ने इसका उपयोग किया है। कंपनी ने १३.४ मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई है, जो इसे विस्तार के लिए मजबूत बनाती है। मुख्य रूप से गुजरात और राजस्थान में सक्रिय, लेकिन अब पूरे भारत में फैल रहा है। डेटा एनालिटिक्स से बिक्री पैटर्न समझकर पर्सनलाइज्ड ऑफर्स देता है। वैश्विक रूप से, इसका सप्लाई चेन मॉडल दक्षिण एशिया और अफ्रीका में अपनाया जा रहा है, जहां छोटे किसानों को सशक्त बनाने की जरूरत है।

किसानों को सस्ते उत्पाद मिलने से लागत १०-१५% कम होती है, और होम डिलीवरी से समय की बचत होती है। यह प्लेटफॉर्म एक स्टॉप शॉप की तरह काम करता है, जहां किसान १ लाख से ज्यादा उत्पादों में से चुन सकते हैं। सस्टेनेबल प्रैक्टिसेज को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान देता है। २०२५ तक, ऐसे प्लेटफॉर्म्स से किसानों की आय में २०% वृद्धि की उम्मीद है।​

बिगहाट लाभ टेबल

लाभ विवरण प्रभाव
वाइड प्रोडक्ट रेंज १ लाख+ उत्पाद एक स्टॉप शॉप
डेटा बेस्ड सेल्स व्यवहार ट्रैकिंग पर्सनलाइज्ड ऑफर्स
होम डिलीवरी तेज पहुंच समय बचत
वैश्विक मॉडल चेन एक्सपोर्ट स्केलेबल बिजनेस

६. भारतएग्री: प्रिसिजन एग्रोनॉमी

भारतएग्री २०१७ में साई गोयल, सिद्धार्थ डायलानी और यशवन्त पी.एम. द्वारा बैंगलोर में स्थापित। यह एआई आधारित सलाह देता है जो किसानों को मौसम, मिट्टी और फसल प्रबंधन पर व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्रदान करता है। १० मिलियन डॉलर की फंडिंग से कंपनी ने तेजी से विस्तार किया है। व्हाट्सएप चैट सपोर्ट के जरिए किसान आसानी से सलाह ले सकते हैं। वैश्विक प्रभाव में, प्रिसिजन फार्मिंग मॉडल को एशिया और अफ्रीका में निर्यात किया जा रहा है, जहां जल सीमित है।

उपज २०% तक बढ़ी है, और पानी तथा उर्वरक का उपयोग १५% कम हुआ है। ऑनलाइन-ऑफलाइन टूल्स के साथ डोरस्टेप डिलीवरी सेवा भी उपलब्ध है। मृदा परीक्षण रिपोर्ट्स से किसान सूचित निर्णय लेते हैं, जो सस्टेनेबल खेती को बढ़ावा देती है। कंपनी ने १०.९ मिलियन डॉलर की आय हासिल की है। २०२५ तक, प्रिसिजन एग्रीटेक से भारत की कुल कृषि उत्पादकता में १०-१५% योगदान की उम्मीद है।​

भारतएग्री टूल्स टेबल

टूल विवरण लाभ
एआई एडवाइजरी व्यक्तिगत सलाह अधिक उपज
मिट्टी टेस्ट रिपोर्ट्स बेहतर इनपुट्स
वेदर फोरकास्ट दैनिक अपडेट जोखिम कम
ग्लोबल स्टैंडर्ड निर्यात सलाह इंटरनेशनल मार्केट

७. फसल: आईओटी से स्मार्ट फार्मिंग

फसल २०१८ में बैंगलोर में स्थापित, आईओटी सेंसर का उपयोग करके पानी, पोषक तत्व और मिट्टी की निगरानी करता है। १५ मिलियन डॉलर की फंडिंग से कंपनी ने स्मार्ट डिवाइस विकसित किए हैं। उपज में ३०% की वृद्धि दर्ज की गई है। वैश्विक रूप से, आईओटी मॉडल को एशिया और अफ्रीका में अपनाया जा रहा है, जहां जल संकट गंभीर है। सरल डिवाइस से किसान रीयल-टाइम डेटा ऐप पर देख सकते हैं। पानी की बचत ४०% तक होती है, जो जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद करती है। बीमारी रोकथाम के लिए अलर्ट सिस्टम है। २०२५ तक, आईओटी आधारित फार्मिंग से भारत में ५० मिलियन एकड़ भूमि कवर होने की संभावना है। यह छोटे किसानों के लिए सस्ता और आसान है।​

फसल फीचर्स टेबल

फीचर विवरण प्रभाव
आईओटी सेंसर रीयल-टाइम डेटा पानी बचत ४०%
प्रिसिजन इरिगेशन ऑटो कंट्रोल लागत कम
डेटा इनसाइट्स ऐप अलर्ट्स बीमारी रोकथाम
वैश्विक रीच एशिया-एफ्रिका टेक्नोलॉजी ट्रांसफर

८. क्रोफार्म: फार्म-टू-फार्म

क्रोफार्म २०१६ में दिल्ली में शुरू, ताजा उपज की फार्म-टू-फार्म डिलीवरी पर फोकस करता है। किसानों को डायरेक्ट मार्केट एक्सेस देकर मध्यस्थों को कम करता है। वैश्विक सप्लाई चेन पर प्रभाव डालते हुए, यह मॉडल मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया में फैल रहा है। आय में १५% वृद्धि हुई है। ऐप आधारित सिस्टम से ऑर्डर और ट्रैकिंग आसान है। कम नुकसान के कारण किसानों को फायदा। नई बाजारों तक पहुंच से निर्यात बढ़ा है। २०२५ तक, ऐसे प्लेटफॉर्म्स से खाद्य अपव्यय २०% कम होने की उम्मीद। यह ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देता है।​

क्रोफार्म लाभ टेबल

लाभ विवरण किसानों के लिए
डायरेक्ट सेल बिना मिडलमैन ज्यादा कीमत
तेज डिलीवरी २४ घंटे कम नुकसान
मार्केट एक्सेस ब्रॉड नेटवर्क नई बाजारें
ग्लोबल इंपैक्ट एक्सपोर्ट लिंक्स इंटरनेशनल सेल्स

९. खेतीगाड़ी: इक्विपमेंट रेंटल

खेतीगाड़ी २०१६ में पुणे से शुरू, ट्रैक्टर और कृषि उपकरणों के रेंटल पर केंद्रित है। बी2बी और बी2सी मॉडल से किसानों को सस्ते उपकरण उपलब्ध कराता है। वैश्विक रूप से, रेंटल मॉडल एशिया के अन्य देशों में लोकप्रिय हो रहा है। ऑनलाइन बुकिंग से प्रक्रिया सरल है। पूंजी की बचत होती है, खासकर छोटे किसानों के लिए। मेंटेनेंस सर्विस विश्वसनीयता बढ़ाती है। २०२५ तक, रेंटल मार्केट से १० मिलियन किसानों को लाभ। एशियन मार्केट्स में स्केलिंग हो रही है।​

खेतीगाड़ी सेवाएं टेबल

सेवा विवरण लाभ
ट्रैक्टर रेंट प्रति घंटा पूंजी बचत
इक्विपमेंट सेल नई-पुरानी एक्सेसिबल टूल्स
मेंटेनेंस सर्विस विश्वसनीयता
वैश्विक एडॉप्शन एशियन मार्केट्स स्केलिंग

१०. बिजाक: बी2बी मार्केट

बिजाक २०१९ में दिल्ली एनसीआर में स्थापित, कमोडिटी ट्रेडिंग के लिए बी2बी मार्केटप्लेस है। ३५ मिलियन डॉलर की फंडिंग से मजबूत हुआ। किसानों को फेयर प्राइस सुनिश्चित करता है। वैश्विक ट्रेड प्रभाव से इंटरनेशनल बाजारों से जुड़ाव। डिजिटल प्लेटफॉर्म से पारदर्शी कीमतें मिलती हैं। ट्रेड फाइनेंस से कैश फ्लो सुधार। रिस्क मैनेजमेंट टूल्स स्थिर आय देते हैं। २०२५ तक, बी2बी प्लेटफॉर्म्स से निर्यात में १५% वृद्धि। छोटे व्यापारियों को सशक्त बनाता है।​

बिजाक फीचर्स टेबल

फीचर विवरण प्रभाव
ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म कमोडिटी बाय-सेल पारदर्शी कीमतें
फाइनेंसिंग ट्रेड फाइनेंस कैश फ्लो
रिस्क मैनेजमेंट हेजिंग टूल्स स्थिर आय
ग्लोबल इंटीग्रेशन इंटरनेशनल ट्रेड एक्सपोर्ट ग्रोथ

११. वे कूल: फूड चेन मैनेजमेंट

वे कूल २०१५ में चेन्नई से स्थापित, फूड सप्लाई चेन को एंड-टू-एंड मैनेज करता है। किसानों से रिटेल तक कूल चेन सुनिश्चित करता है। वैश्विक चेन मॉडल से इंटरनेशनल पार्टनर्स के साथ काम। उपभोक्ताओं को ताजा उत्पाद मिलते हैं। कम वेस्टेज से खाद्य अपव्यय घटता है। किसान आय में बढ़ोतरी। माइक्रो वेयरहाउसिंग ताजगी बनाए रखती है। २०२५ तक, सप्लाई चेन टेक से २५% दक्षता। ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत।​

वे कूल लाभ टेबल

लाभ विवरण प्रभाव
सप्लाई चेन एंड-टू-एंड कम वेस्टेज
वेयरहाउसिंग माइक्रो वेयरहाउस ताजगी
मार्केट लिंक्स डायरेक्ट किसान आय बढ़ोतरी
वैश्विक प्रभाव इंटरनेशनल पार्टनर्स एक्सपोर्ट

१२. इंटेलो लैब्स: एआई क्वालिटी चेक

इंटेलो लैब्स २०१५ में गुरुग्राम में स्थापित, कंप्यूटर विजन से फसल क्वालिटी असेसमेंट करता है। १३ मिलियन डॉलर की फंडिंग से एआई टूल्स विकसित। फसल ग्रेडिंग से फेयर प्राइस मिलता है। वैश्विक निर्यात स्टैंडर्ड्स पूरा करता है। तेज प्रोसेसिंग से समय बचत। यील्ड पूर्वानुमान बेहतर प्लानिंग। ट्रेसिबिलिटी क्वालिटी कंट्रोल। २०२५ तक, एआई क्वालिटी टूल्स से निर्यात २०% बढ़ेगा। किसानों को विश्वास बढ़ता है।​

इंटेलो लैब्स टूल्स टेबल

टूल विवरण लाभ
विजन एनालिटिक्स फोटो से ग्रेडिंग तेज प्रोसेसिंग
प्रेडिक्टिव एनालिसिस यील्ड पूर्वानुमान बेहतर प्लानिंग
सप्लाई चेन ट्रेसिबिलिटी क्वालिटी कंट्रोल
ग्लोबल स्टैंडर्ड सर्टिफिकेशन एक्सपोर्ट आसान

१३. एगनेक्स्ट: क्वालिटी टेस्टिंग

एगनेक्स्ट २०१५ में गुड़गांव में स्थापित, एआई से फसल क्वालिटी टेस्टिंग करता है। पोर्टेबल डिवाइस से ऑन-स्पॉट चेक। वैश्विक मार्केट एक्सेस आसान। तुरंत रिजल्ट मिलते हैं। सटीकता ९५% है। रिपोर्ट्स से ट्रस्ट बिल्डिंग। इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स से निर्यात बढ़ोतरी। २०२५ तक, क्वालिटी टेक से १५% अधिक निर्यात। छोटे किसानों के लिए उपयोगी।​

एगनेक्स्ट फीचर्स टेबल

फीचर विवरण प्रभाव
पोर्टेबल टेस्टर ऑन-स्पॉट चेक तुरंत रिजल्ट
एआई एनालिसिस डेटा प्रोसेसिंग सटीकता ९५%
सर्टिफिकेशन रिपोर्ट्स ट्रस्ट बिल्डिंग
वैश्विक इंपैक्ट इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स निर्यात बढ़ोतरी

१४. स्टेलाप्स: डेयरी टेक्नोलॉजी

स्टेलाप्स २०११ में बैंगलोर में स्थापित, डेयरी मैनेजमेंट के लिए एआई और सेंसर टेक का उपयोग करता है। मिल्क चेन को ट्रैक करता है। वैश्विक डेयरी प्रभाव से एशिया-यूरोप मार्केट एक्सपैंशन। किसानों को बेहतर प्राइस। क्वालिटी चेक से हेल्थ स्टैंडर्ड। कम लॉस। यील्ड इनसाइट्स से प्रोडक्टिविटी। २०२५ तक, डेयरी टेक से १०% अधिक उत्पादन। ग्रामीण डेयरी किसानों को लाभ।​

स्टेलाप्स सेवाएं टेबल

सेवा विवरण लाभ
मिल्क मॉनिटरिंग क्वालिटी चेक हेल्थ स्टैंडर्ड
सप्लाई चेन ट्रैकिंग कम लॉस
एनालिटिक्स यील्ड इनसाइट्स प्रोडक्टिविटी
ग्लोबल रीच एशियन-यूरोपियन मार्केट एक्सपैंशन

१५. साइफार्म्सइंडिया: स्मार्ट फार्म सॉल्यूशंस

साइफार्म्सइंडिया २०१४ में हैदराबाद में स्थापित, स्मार्ट फार्मिंग के लिए एआई और IoT का एकीकृत सिस्टम प्रदान करता है। सस्टेनेबल मॉडल से पानी बचत करता है। वैश्विक ग्रीन टेक एक्सपोर्ट से क्लाइमेट एडाप्टेशन। ऑटो इरिगेशन से ३०% पानी बचत। ऑर्गेनिक सलाह से पर्यावरण संरक्षण। रीयल-टाइम डेटा डैशबोर्ड से निर्णय लेना आसान। २०२५ तक, स्मार्ट सॉल्यूशंस से २०% सस्टेनेबल फार्मिंग। छोटे किसानों के लिए सुलभ।​

साइफार्म्स फीचर्स टेबल

फीचर विवरण प्रभाव
स्मार्ट इरिगेशन ऑटो सिस्टम ३०% पानी बचत
सस्टेनेबल प्रैक्टिस ऑर्गेनिक सलाह पर्यावरण संरक्षण
डेटा डैशबोर्ड रीयल-टाइम निर्णय लेना
वैश्विक प्रभाव ग्रीन टेक एक्सपोर्ट क्लाइमेट एडाप्टेशन

वैश्विक प्रभाव और चुनौतियां

ये स्टार्टअप्स भारत की कृषि को वैश्विक स्तर पर ले जा रहे हैं। २०१५ से २०२५ तक २०% CAGR ग्रोथ। निर्यात में ५१% योगदान। लेकिन चुनौतियां हैं जैसे डिजिटल डिवाइड और फंडिंग गिरावट (२०२३ में ४५% कम)। सरकार की स्कीम्स जैसे स्टार्टअप इंडिया मदद कर रही हैं। भविष्य में एआई और ड्रोन से और बदलाव। ये स्टार्टअप्स ग्रामीण युवाओं को रोजगार दे रहे हैं।​

निष्कर्ष

भारतीय एग्रीटेक स्टार्टअप्स खेती को आधुनिक और सस्टेनेबल बना रहे हैं। ये १५ कंपनियां किसानों को सशक्त कर रही हैं, उपज बढ़ा रही हैं और लागत कम कर रही हैं। भारत और दुनिया दोनों को फायदा हो रहा है, खासकर वैश्विक खाद्य सुरक्षा में। सस्टेनेबल फार्मिंग से भविष्य सुरक्षित हो रहा है। जलवायु लचीलापन बढ़ रहा है, और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत। २०२५ तक, एग्रीटेक मार्केट २४ बिलियन डॉलर पहुंचेगा, जो ३२% CAGR दिखाएगा।

किसान इन तकनीकों को अपनाएं। सरकार और निवेशकों का सहयोग जारी रहे। इससे छोटे किसानों तक पहुंच बढ़ेगी। खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी। ग्रामीण युवाओं को रोजगार मिलेगा। अंत में, एग्रीटेक भारत को वैश्विक कृषि नेता बना सकता है, जहां १९३४ स्टार्टअप्स नवाचार ला रहे हैं।