10 तरीके भारत का सेमीकंडक्टर मिशन वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बदल रहा है
सेमीकंडक्टर चिप्स आज की दुनिया का दिल हैं। ये छोटी-छोटी चिप्स स्मार्टफोन, कारें, कंप्यूटर और यहां तक कि सैन्य उपकरणों को चलाती हैं। लेकिन वैश्विक सप्लाई चेन में चीन और ताइवान पर भारी निर्भरता ने कई समस्याएं पैदा की हैं। महामारी के दौरान चिप की कमी ने अर्थव्यवस्थाओं को ठप कर दिया था। भारत की सेमीकंडक्टर मिशन, जो 2021 में शुरू हुई, इसी कमी को दूर करने का प्रयास है। यह ₹76,000 करोड़ की योजना है जो चिप निर्माण, डिजाइन, पैकेजिंग और टेस्टिंग को बढ़ावा देती है। अब तक 10 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है, जिनमें कुल ₹1.60 लाख करोड़ का निवेश है। ये प्रोजेक्ट्स गुजरात, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में फैले हैं। 2025 के अंत तक व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो जाएगा, जो हजारों नौकरियां पैदा करेगा। इससे भारत न केवल आयात पर निर्भरता कम करेगा, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत और विविध भी बनाएगा। इस लेख में हम 10 प्रमुख तरीकों से समझेंगे कि कैसे यह मिशन वैश्विक स्तर पर बदलाव ला रहा है। सरल शब्दों और तथ्यों के साथ, हम देखेंगे कि भारत कैसे एक नया हब बन रहा है।
तरीका 1: निवेश आकर्षित करना
निवेश आकर्षित करना सेमीकंडक्टर मिशन का पहला बड़ा कदम है। वैश्विक कंपनियां अब भारत को एक सुरक्षित और लाभदायक जगह मान रही हैं। सरकार ने 50% तक सब्सिडी और प्रोत्साहन दिए हैं, जिससे बड़े निवेश आ रहे हैं। उदाहरण के लिए, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और ताइवान की पावरचिप सिमिकॉन्डक्टर का संयुक्त प्रोजेक्ट गुजरात के धोलेरा में ₹91,000 करोड़ का है। यह प्लांट 50,000 वेफर्स प्रति माह उत्पादित करेगा। इससे पहले, वैश्विक सप्लाई चेन मुख्य रूप से एशिया के कुछ देशों पर निर्भर थी, लेकिन अब भारत जैसे उभरते बाजारों में विविधीकरण हो रहा है। अमेरिका की व्यापार नीतियां, जैसे चीन पर टैरिफ, ने भारत को फायदा पहुंचाया है। Moody’s रिपोर्ट के अनुसार, भारत मलेशिया और सिंगापुर के साथ नए निवेशों में शीर्ष पर है। कुल मिलाकर, ₹1.60 लाख करोड़ का निवेश 2025 तक चिप उत्पादन को दोगुना करने में मदद करेगा। इससे वैश्विक कंपनियां जोखिम कम कर रही हैं और भारत को एक मजबूत पार्टनर बना रही हैं। सरल शब्दों में, यह निवेश सप्लाई चेन को लचीला बनाता है, जहां एक देश की समस्या पूरे चेन को न प्रभावित करे।
निवेश की झलक
| कंपनी/पार्टनरशिप | स्थान | निवेश (₹ करोड़) | स्थिति | क्षमता |
| माइक्रॉन टेक्नोलॉजी | सानंद, गुजरात | 22,516 | चल रहा | ATMP सुविधा, 5,000 नौकरियां |
| टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स & PSMC | धोलेरा, गुजरात | 91,000 | निर्माणाधीन | 50,000 वेफर्स/माह, ऑटोमोटिव चिप्स |
| CG पावर & रेनेसास | सानंद, गुजरात | 7,600 | शुरू | 0.5 मिलियन यूनिट्स/दिन, टेस्टिंग फोकस |
तरीका 2: उत्पादन क्षमता बढ़ाना
उत्पादन क्षमता बढ़ाना मिशन का दूसरा महत्वपूर्ण तरीका है। भारत पहले केवल चिप डिजाइन करता था, लेकिन अब पूर्ण फैब्रिकेशन प्लांट्स बन रहे हैं। ओडिशा में सिलिकॉन कार्बाइड का पहला व्यावसायिक प्लांट 2025 में शुरू होगा, जो इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चिप्स बनाएगा। वैश्विक सप्लाई चेन में 75% उत्पादन एशिया में होता है, लेकिन चीन पर निर्भरता जोखिम भरी है। भारत अब निर्यातक बनकर इस चेन को संतुलित कर रहा है। 2025 तक भारत का सेमीकंडक्टर बाजार $45-50 बिलियन का हो जाएगा, जो 2023 के $38 बिलियन से काफी वृद्धि है। इससे आयात $24 बिलियन से घटकर आधा रह जाएगा। सरल शब्दों में, भारत अब चिप्स खुद बनाएगा, जो उत्पादन लागत कम करेगा और वैश्विक कंपनियों को तेज डिलीवरी देगा। माइक्रॉन और टाटा जैसे प्रोजेक्ट्स पैकेजिंग और टेस्टिंग को मजबूत कर रहे हैं, जो सप्लाई चेन के अंतिम चरण को सुधारेंगे। यह बदलाव महामारी जैसी आपूर्ति बाधाओं से बचाव करेगा।
उत्पादन क्षमता तालिका
| प्रोजेक्ट | राज्य | क्षमता | अपेक्षित उत्पादन | प्रभाव |
| माइक्रॉन ATMP | गुजरात | चरणबद्ध, 80,000 वेफर्स/माह | 2025 में पूर्ण, मेमोरी चिप्स | पैकेजिंग में 20% वृद्धि |
| टाटा-PSMC फैब | गुजरात | 50,000 वेफर्स/माह | 2026 से, 28nm नोड्स | ऑटोमोटिव और IoT चिप्स |
| CG पावर OSAT | गुजरात | 14.5 मिलियन यूनिट्स/दिन | 2027 तक, टेस्टिंग | वैश्विक निर्यात में योगदान |
तरीका 3: नौकरियां और कौशल विकास
नौकरियां पैदा करना और कौशल विकसित करना मिशन का तीसरा तरीका है, जो मानव संसाधन को मजबूत करता है। नए प्रोजेक्ट्स से 2,000 सीधी नौकरियां और 15,000 अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा हो रही हैं। भारत में 10 लाख से ज्यादा इंजीनियर उपलब्ध हैं, जो AI और IoT में कुशल हैं। Nasscom के अनुसार, STEM ग्रेजुएट्स की बड़ी संख्या सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए वरदान है। ट्रेनिंग प्रोग्राम्स ने 60,000 से ज्यादा छात्रों को चिप डिजाइन और टेस्टिंग सिखाया है। वैश्विक सप्लाई चेन के लिए यह कुशल श्रमिक लागत कम रखेगा और नवाचार बढ़ाएगा। सरल शब्दों में, युवा इंजीनियर अब वैश्विक कंपनियों के लिए काम करेंगे, जो चेन को कुशल बनाएगा। अकादमिक सहयोग से 5,000 जॉब्स तैयार हो चुके हैं, जो 2026 तक उत्पादन को सपोर्ट करेंगे। यह तरीका सप्लाई चेन को मानवीय रूप से मजबूत कर रहा है।
कौशल विकास आंकड़े
| कार्यक्रम | लाभार्थी | फोकस क्षेत्र | परिणाम |
| ISM ट्रेनिंग | 60,000+ छात्र | चिप डिजाइन, AI इंटीग्रेशन | 2,000+ नौकरियां 2025 तक |
| अकादमिक सहयोग | 5,000+ जॉब्स | पैकेजिंग और टेस्टिंग | उद्योग तत्परता, R&D फोकस |
| वर्कफोर्स डेवलपमेंट | 2,000+ सीधी नौकरियां | टेस्टिंग और सर्विसेज | 15,000 अप्रत्यक्ष जॉब्स |
तरीका 4: सप्लाई चेन विविधीकरण
सप्लाई चेन का विविधीकरण चौथा तरीका है, जो जोखिम कम करता है। वैश्विक चेन अब चीन से हट रही है, और भारत इस बदलाव का केंद्र है। US टैरिफ नीतियों से भारत को $10 बिलियन का फायदा हुआ है। Moody’s रिपोर्ट कहती है कि भारत नए निवेशों में मलेशिया से आगे है। भारत का बड़ा बाजार ($1.4 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था) और राजनीतिक स्थिरता आकर्षक हैं। Semicon India Program ने कंपनियों को आमंत्रित किया है, जिससे 300 से ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स बने हैं। सरल शब्दों में, विविधीकरण से एक देश की समस्या पूरे चेन को न रोके। 2026 तक $63 बिलियन बाजार से निर्यात बढ़ेगा। यह तरीका वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाएगा।
विविधीकरण लाभ
| कारक | भारत का लाभ | वैश्विक प्रभाव |
| भू-राजनीतिक स्थिरता | कम जोखिम, FDI $26 बिलियन | सप्लाई सुरक्षा, 75% APAC क्षमता |
| बाजार आकार | $63 बिलियन 2026, 99% लोकल मोबाइल | निर्यात वृद्धि, $15.6 बिलियन मोबाइल एक्सपोर्ट |
| सब्सिडी | $26 बिलियन, PLI स्कीम | निवेश आकर्षण, इकोसिस्टम विस्तार |
तरीका 5: अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां
अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां पांचवां तरीका है, जो तकनीक का आदान-प्रदान और वैश्विक एकीकरण को बढ़ावा देता है। भारत की सेमीकंडक्टर मिशन ने अमेरिका, जापान, ताइवान और यूरोपीय संघ जैसे देशों के साथ मजबूत सहयोग स्थापित किया है, जो सप्लाई चेन को अधिक लचीला और टिकाऊ बनाता है। उदाहरण के लिए, SEMICON India 2025 आयोजन में 33 देशों की 350 से अधिक कंपनियां भाग ले रही हैं, जो निवेश और रणनीतिक साझेदारियों को प्रोत्साहित करता है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का ताइवान की पावरचिप सिमिकॉन्डक्टर (PSMC) के साथ ₹91,000 करोड़ का प्रोजेक्ट ताइवान की उन्नत 28nm तकनीक को भारत ला रहा है, जो ऑटोमोटिव और IoT चिप्स के लिए महत्वपूर्ण है। इसी तरह, अमेरिका के साथ नई साझेदारी सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन के अवसरों की खोज कर रही है, जिसमें माइक्रॉन टेक्नोलॉजी का ₹22,516 करोड़ का ATMP प्लांट शामिल है, जो मेमोरी चिप्स पर फोकस करता है। जापान की रेनेसास इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ CG पावर का ₹7,600 करोड़ का OSAT प्रोजेक्ट ऑटोमोटिव चिप्स के टेस्टिंग को मजबूत कर रहा है। ये साझेदारियां तकनीक हस्तांतरण को सुनिश्चित करती हैं, जहां विदेशी विशेषज्ञ भारतीय इकोसिस्टम को प्रशिक्षित कर रहे हैं। सरल शब्दों में, ये पार्टनरशिप वैश्विक चेन को मजबूत बनाती हैं, क्योंकि भारत अब R&D से लेकर उत्पादन तक की पूरी प्रक्रिया में भागीदार बन रहा है। EU और सिंगापुर के MoU से FDI बढ़ेगा, जो 2030 तक $110 बिलियन बाजार में भारत का योगदान दोगुना कर सकता है। कुल मिलाकर, ये सहयोग सप्लाई चेन को भू-राजनीतिक जोखिमों से बचाते हैं और नवाचार को तेज करते हैं।
प्रमुख साझेदारियां
| पार्टनर | क्षेत्र | निवेश | फोकस |
| PSMC (ताइवान) | फैब्रिकेशन | ₹91,000 करोड़ | वेफर उत्पादन, 28nm तकनीक, IoT चिप्स |
| रेनेसास (जापान) | OSAT | ₹7,600 करोड़ | ऑटो चिप्स, टेस्टिंग, EV एकीकरण |
| माइक्रॉन (US) | पैकेजिंग | ₹22,516 करोड़ | मेमोरी चिप्स, 5G इंटीग्रेशन, R&D हस्तांतरण |
| NXP (नीदरलैंड्स) | डिजाइन | $1 बिलियन | ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स, AI चिप्स |
तरीका 6: लागत लाभ प्रदान करना
लागत लाभ प्रदान करना छठा तरीका है, जो वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ाता है और सप्लाई चेन को अधिक आर्थिक रूप से कुशल बनाता है। भारत में कम श्रम लागत, मजबूत सब्सिडी योजना और उन्नत बुनियादी ढांचे के कारण उत्पादन खर्च वैश्विक औसत से 20% कम है, जो कंपनियों को आकर्षित कर रहा है। Semicon India Program के तहत $10 बिलियन की प्रोत्साहन योजना ने इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात को $15.6 बिलियन तक पहुंचा दिया है, जहां PLI स्कीम 99% स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहित करती है। सरल शब्दों में, ये लाभ कंपनियों को भारत चुनने के लिए मजबूर कर रहे हैं, क्योंकि यहां न केवल लागत कम है बल्कि राजनीतिक स्थिरता भी है। 2025 में $2.7 बिलियन की सब्सिडी से $18 बिलियन का कुल निवेश हो रहा है, जो पैकेजिंग और टेस्टिंग जैसे क्षेत्रों में लागत को और घटाएगा। उदाहरण के लिए, टाटा-PSMC प्रोजेक्ट में सरकारी सहायता से वेफर उत्पादन की लागत 15-20% कम हो जाएगी, जो वैश्विक चेन में भारत को सस्ता विकल्प बनाएगा। यह तरीका सप्लाई चेन को सुलभ बनाता है, जहां छोटे और मध्यम उद्योग भी भाग ले सकें। कुल मिलाकर, लागत लाभ से भारत $63-64 बिलियन के बाजार तक पहुंचेगा, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचाएगा।
लागत तुलना
| क्षेत्र | भारत लागत लाभ | वैश्विक औसत से तुलना |
| श्रम | 20% कम, 10 लाख इंजीनियर | चीन से बेहतर, IoT फोकस, $2/घंटा दर |
| सब्सिडी | $2.7 बिलियन 2025, PLI 50% सहायता | आकर्षक, 99% लोकल प्रोडक्शन, $10 बिलियन टोटल |
| कुल उत्पादन | $18 बिलियन निवेश, $64 बिलियन 2026 | प्रतिस्पर्धी, एक्सपोर्ट बूस्ट, 15% लागत बचत |
तरीका 7: R&D और डिजाइन को बढ़ावा
R&D और डिजाइन को बढ़ावा देना सातवां तरीका है, जो नवाचार को प्रेरित करता है और सप्लाई चेन को भविष्योन्मुखी बनाता है। मिशन ने चिप डिजाइन सेंटर्स स्थापित किए हैं, जहां ISRO का विक्रम प्रोसेसर पहला स्वदेशी 32-बिट चिप है, जो अंतरिक्ष मिशनों के लिए इस्तेमाल हो रहा है। ₹10 बिलियन का डिजाइन प्रोत्साहन स्टार्टअप्स को IP विकास और EDA टूल्स के लिए मदद देता है, जिससे 100 से अधिक स्टार्टअप्स उभरे हैं। सरल शब्दों में, यह बढ़ावा भारत को केवल उत्पादक न बनाकर डिजाइन हब भी बना रहा है, जो वैश्विक चेन में नई तकनीकें लाएगा। मोहाली लैब का ₹100 करोड़ का आधुनिकीकरण NXP के $1 बिलियन निवेश से हो रहा है, जो AI और 5G चिप डिजाइन पर फोकस करता है। ISM के तहत उद्योग-शैक्षणिक सहयोग से 60,000 छात्र ट्रेनिंग ले चुके हैं, जो R&D को व्यावहारिक बनाता है। यह तरीका सप्लाई चेन को उन्नत बनाएगा, जहां भारत 6G और EVs के लिए स्वदेशी समाधान देगा। कुल मिलाकर, R&D निवेश से भारत वैश्विक IP पोर्टफोलियो में 10% हिस्सा हासिल कर सकता है।
R&D निवेश
| क्षेत्र | बजट (₹ करोड़) | परिणाम |
| डिजाइन | 10,000 | स्टार्टअप्स, IP डेवलपमेंट, 100+ कंपनियां |
| लैब आधुनिकीकरण | 100,000 | मोहाली, AI फोकस, 5G टेस्टिंग |
| नवाचार | $1 बिलियन | NXP, ऑटोमोटिव R&D, विक्रम प्रोसेसर |
तरीका 8: निर्यात बढ़ाना
निर्यात बढ़ाना आठवां तरीका है, जो व्यापार संतुलन को सुधारता है और सप्लाई चेन को वैश्विक स्तर पर विस्तारित करता है। भारत पैकेजिंग और टेस्टिंग से शुरू कर पूर्ण चिप निर्यात की ओर बढ़ रहा है, जो आयात निर्भरता को $24 बिलियन से घटाकर $12 बिलियन कर देगा। 2030 तक $100-110 बिलियन का बाजार अनुमान है, जिसमें 2026 तक $63-64 बिलियन पहुंचेगा, मुख्य रूप से IoT और ऑटोमोटिव चिप्स से। सरल शब्दों में, निर्यात से भारत वैश्विक बाजार का 10% हिस्सा लेगा, जो चेन को संतुलित बनाएगा। मोबाइल निर्यात पहले ही $15.6 बिलियन हो चुका है, और नए प्रोजेक्ट्स जैसे ओडिशा का SiC फैब EVs के लिए निर्यात बढ़ाएगा। विकसित देश भारत को विश्वसनीय पार्टनर मान रहे हैं, जहां SEMICON India 2025 ने 350 कंपनियों को जोड़ा। यह तरीका सप्लाई चेन को मजबूत करेगा, क्योंकि भारत अब APAC क्षेत्र के 75% उत्पादन क्षमता में योगदान देगा। कुल मिलाकर, निर्यात वृद्धि से $1 ट्रिलियन वैश्विक बाजार में भारत की भूमिका बढ़ेगी।
निर्यात अनुमान
| वर्ष | बाजार मूल्य ($ बिलियन) | निर्यात वृद्धि |
| 2024 | 45-50 | 25%, पैकेजिंग फोकस, $15.6 बिलियन मोबाइल |
| 2026 | 63-64 | 30%, IoT चिप्स, SiC निर्यात |
| 2030 | 100-110 | 50%, पूर्ण चिप्स, $1 ट्रिलियन ग्लोबल हिस्सा |
तरीका 9: तकनीकी स्वावलंबन
तकनीकी स्वावलंबन नौवां तरीका है, जो आयात निर्भरता कम करता है और सप्लाई चेन को आत्मनिर्भर बनाता है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत ISM ने 6G नेटवर्क, EVs और AI के लिए स्वदेशी चिप्स विकसित किए हैं, जैसे सिलिकॉन कार्बाइड फैब जो इलेक्ट्रिक वाहनों को सपोर्ट करेगा। प्रोजेक्ट्स से 5,000 सीधी नौकरियां और $18 बिलियन की बचत हो रही है, जहां 99% लोकल उत्पादन लक्ष्य है। सरल शब्दों में, स्वावलंबन भारत को चेन का मजबूत लिंक बनाएगा, जो वैश्विक संकटों में स्थिर रहेगा। 10 प्रोजेक्ट्स में ओडिशा, पंजाब और आंध्र प्रदेश के नए प्लांट्स शामिल हैं, जो डिजाइन से पैकेजिंग तक कवर करते हैं। AI और 5G के लिए 1 मिलियन इंजीनियर डिजाइन हब बना रहे हैं, जो R&D पार्टनरशिप को मजबूत करता है। यह तरीका सप्लाई चेन को विविध बनाएगा, जहां भारत $24 बिलियन आयात को आधा कर देगा। कुल मिलाकर, स्वावलंबन से भारत वैश्विक हब बनेगा।
स्वावलंबन प्रभाव
| क्षेत्र | निर्भरता कमी | लाभ |
| आयात | $24 बिलियन से $12 बिलियन | $18 बिलियन बचत, लोकल 99%, 10 प्रोजेक्ट्स |
| EVs | स्वदेशी चिप्स, SiC फैब | ऑटो उद्योग बूस्ट, ओडिशा प्लांट |
| AI | डिजाइन हब, 1 मिलियन इंजीनियर | नवाचार, R&D पार्टनरशिप, 6G समर्थन |
तरीका 10: वैश्विक हब बनना
वैश्विक हब बनना दसवां तरीका है, जो पूर्ण एकीकरण और नेतृत्व प्रदान करता है, सप्लाई चेन को एक नई दिशा देता है। ISM ने भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण और डिजाइन का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए SEMICON India 2025 जैसे आयोजनों का उपयोग किया है, जहां 350 कंपनियां और 33 देश भाग ले रहे हैं। $1 ट्रिलियन वैश्विक बाजार में भारत का हिस्सा 10% तक पहुंच सकता है, जहां 6 राज्यों में 10 प्रोजेक्ट्स फैले हैं। सरल शब्दों में, हब बनने से सप्लाई चेन टिकाऊ और विविध बनेगी, जहां भारत नवाचार का केंद्र होगा। PLI स्कीम से 97% बजट उपयोग हो चुका है, जो 300 से अधिक यूनिट्स को जन्म दे रहा है। मेक इन इंडिया और ESDM पहलों ने इकोसिस्टम मजबूत किया, जो उच्च प्रौद्योगिकी डिजिटल इकोनॉमी को गति देता है। यह तरीका विदेशी निवेश को $26 बिलियन तक ले जाएगा, जो APAC की 75% क्षमता में योगदान देगा। कुल मिलाकर, वैश्विक हब से भारत रणनीतिक स्वतंत्रता हासिल करेगा।
हब विकास
| पहल | लक्ष्य | प्रगति |
| ISM | वैश्विक एकीकरण, $110 बिलियन 2030 | 10 प्रोजेक्ट्स, 3 नए प्लांट्स, 6 राज्य |
| PLI | $10 बिलियन, इलेक्ट्रॉनिक्स बूस्ट | 97% बजट उपयोग, 300 यूनिट्स, SEMICON 2025 |
| निर्यात | $110 बिलियन 2030, APAC 75% क्षमता | विविधीकरण, FDI $26 बिलियन, 33 देश सहयोग |
निष्कर्ष
भारत की सेमीकंडक्टर मिशन ने वैश्विक सप्लाई चेन को गहराई से बदल दिया है। निवेश से लेकर स्वावलंबन तक, ये 10 तरीके न केवल भारत को मजबूत बना रहे हैं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को लचीला और सुरक्षित कर रहे हैं। चार सालों में $10 बिलियन के निवेश से इकोसिस्टम मजबूत हुआ है, जो R&D, उत्पादन और निर्यात को कवर करता है। भविष्य में, 2030 तक $110 बिलियन बाजार के साथ भारत प्रमुख खिलाड़ी बनेगा, जो AI, 5G और EVs को सपोर्ट करेगा। सरल प्रयासों, जैसे PLI और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों से यह मिशन सफल हो रहा है। चुनौतियां बाकी हैं, जैसे तकनीकी गैप, लेकिन प्रगति सकारात्मक है। कुल मिलाकर, यह मिशन वैश्विक चेन को विविध और टिकाऊ बनाकर एक नई क्रांति ला रहा है। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोतों का सहारा लें।
