भारत, चीन ने सीधी उड़ानें फिर से शुरू कीं
दुनिया की दो सबसे अधिक आबादी वाले देश, भारत और चीन, के बीच पांच साल के लंबे अंतराल के बाद सीधी उड़ानें फिर से शुरू होने जा रही हैं। यह विकास अक्टूबर के अंत तक होगा और इससे दोनों देशों के बीच यात्रा, व्यापार तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम द्विपक्षीय संबंधों में गर्मजोशी का संकेत है, जो वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में दोनों देशों की मजबूत स्थिति को और सुदृढ़ करेगा। यात्रियों के लिए यह सुविधा न केवल समय और लागत बचाएगी, बल्कि पर्यटन और व्यवसायिक अवसरों को भी बढ़ावा देगी।
इंडिगो एयरलाइंस की महत्वपूर्ण घोषणा और नई सेवाएं
भारत की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइंस इंडिगो ने शुक्रवार को एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि वह 26 अक्टूबर से कोलकाता और चीन के प्रमुख शहर ग्वांगझोउ के बीच दैनिक गैर-रोक वाली उड़ानें शुरू करेगी। कोलकाता, जो पूर्वी भारत का एक व्यस्त व्यापारिक केंद्र है, से ग्वांगझोउ, जो चीन का एक प्रमुख विनिर्माण और निर्यात हब है, की यह सीधी कनेक्टिविटी यात्रियों को लगभग चार घंटे की उड़ान में दोनों देशों के बीच पहुंच प्रदान करेगी। इससे पहले, यात्रियों को मध्यस्थ शहरों जैसे बैंकॉक या सिंगापुर के रास्ते जाना पड़ता था, जो समय और खर्च दोनों बढ़ा देता था।
इसके अतिरिक्त, इंडिगो दिल्ली से किसी एक चीनी शहर तक दूसरी रूट की योजना बना रही है, हालांकि अभी उसका अंतिम नाम और तिथि की पुष्टि नहीं हुई है। संभावना है कि यह रूट शंघाई या बीजिंग जैसा प्रमुख शहर हो सकता है, जो भारत की राजधानी से सीधा जुड़ाव स्थापित करेगा। इंडिगो ने बुकिंग खोलते हुए जोर दिया कि यह पहल सीमा-पार व्यापार को पुनर्जीवित करेगी, जहां चीनी उत्पादों का भारत में आयात और भारतीय वस्तुओं का निर्यात आसान होगा। साथ ही, रणनीतिक व्यवसाय साझेदारियां मजबूत होंगी, जैसे प्रौद्योगिकी, विनिर्माण और ई-कॉमर्स क्षेत्रों में सहयोग। पर्यटन के लिहाज से, यह कदम चीनी पर्यटकों को भारत के सांस्कृतिक स्थलों जैसे ताजमहल और राजस्थान की यात्रा करने का बेहतर अवसर देगा, जबकि भारतीय यात्री चीन के ऐतिहासिक स्थलों जैसे महान दीवार की सैर कर सकेंगे। इंडिगो के अधिकारियों ने कहा कि यह सेवा सुरक्षित, विश्वसनीय और किफायती होगी, जो मध्यम वर्ग के यात्रियों के अनुकूल है।
भारतीय सरकार का आधिकारिक बयान और नागरिक उड्डयन समझौता
भारतीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने गुरुवार को एक विस्तृत बयान जारी किया, जिसमें कहा गया, “भारत और चीन के नागरिक उड्डयन प्राधिकरणों के बीच अब सहमति हो गई है कि निर्दिष्ट बिंदुओं को जोड़ने वाली सीधी हवाई सेवाएं अक्टूबर के अंत तक बहाल की जा सकती हैं।” यह समझौता दोनों देशों की उड्डयन नीतियों के अनुरूप है और इसमें सुरक्षा मानकों, आवृत्ति तथा मार्गों की विस्तृत चर्चा शामिल है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि यह कदम लोगों-से-लोगों के संपर्क को बढ़ावा देगा, जो द्विपक्षीय संबंधों के सामान्यीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वर्तमान में, दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध मजबूत हैं, जहां 2024 में द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर से अधिक पहुंच गया है, लेकिन यात्रा प्रतिबंधों ने व्यक्तिगत और व्यावसायिक संपर्कों को सीमित रखा था। अब, यह समझौता न केवल यात्री उड़ानों को सुगम बनाएगा, बल्कि कार्गो सेवाओं को भी मजबूत कर सकता है, जिससे निर्यात-आयात प्रक्रिया तेज होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और चीन के दक्षिणी प्रांतों के बीच आर्थिक एकीकरण बढ़ेगा।
प्रधानमंत्री मोदी की शंघाई यात्रा: संबंधों में नई गति
यह सकारात्मक विकास अगस्त के अंत में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शंघाई यात्रा से जुड़ा है, जो उनकी सात वर्षों बाद चीन की पहली आधिकारिक यात्रा थी। यात्रा के दौरान मोदी ने चीनी प्रधानमंत्री शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें उन्होंने जोर दिया कि भारत और चीन विकास के साझेदार हैं, न कि प्रतिद्वंद्वी। इस मुलाकात में व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
मोदी ने कहा कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे के पूरक हैं, और सहयोग से एशिया की विकास दर को बढ़ावा मिलेगा। यह यात्रा 2020 के तनाव के बाद पहली उच्च स्तरीय संपर्क थी, जिसने विश्वास बहाली का माहौल बनाया। यात्रा के परिणामस्वरूप, कई समझौते हुए, जिनमें उड्डयन क्षेत्र का पुनरारंभ भी शामिल है। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह कदम भारत-चीन संबंधों में स्थिरता लाएगा, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए लाभदायक होगा।
पृष्ठभूमि: 2020 का सीमा विवाद और कोविड-19 का प्रभाव
दोनों देशों के संबंधों में 2020 में बड़ा मोड़ आया, जब हिमालय की विवादित सीमा, विशेष रूप से लद्दाख क्षेत्र में, भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हुई। इस घटना में 20 भारतीय सैनिक और चार चीनी सैनिक शहीद हुए, जो 1975 के बाद सबसे घातक संघर्ष था। इस झड़प ने आर्थिक बहिष्कार, ऐप प्रतिबंध और व्यापार तनाव को जन्म दिया, जिससे सीधी उड़ानें पूरी तरह बंद हो गईं।
हालांकि, कोविड-19 महामारी ने पहले ही वैश्विक उड़ानों को ठप कर दिया था, और सीमा तनाव के कारण बहाली में देरी हुई। महामारी के दौरान दोनों देशों ने स्वास्थ्य प्रोटोकॉल के तहत यात्रा प्रतिबंध लगाए, लेकिन अब वैक्सीनेशन और सुरक्षा उपायों के साथ सामान्यीकरण हो रहा है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दोनों देशों पर लगाए गए टैरिफ और व्यापार युद्ध ने उन्हें करीब लाया है, क्योंकि दोनों अब वैकल्पिक साझेदारियां तलाश रहे हैं। ट्रंप प्रशासन के नीतियों ने चीन के निर्यात को प्रभावित किया, जबकि भारत पर भी दबाव पड़ा, जिससे दोनों देशों ने एक-दूसरे के बाजारों पर जोर दिया।
धार्मिक पर्यटन में नया कदम: माउंट कैलाश यात्रा की अनुमति
संबंधों में सुधार का एक और संकेत जून में आया, जब बीजिंग ने 2020 की झड़प के बाद पहली बार भारतीय तीर्थयात्रियों को तिब्बत के पवित्र माउंट कैलाश जाने की अनुमति दी। यह स्थल हिंदू, बौद्ध, जैन और अन्य धर्मों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहां हर साल हजारों यात्री परिक्रमा करते हैं। अनुमति के तहत सीमित संख्या में तीर्थयात्री जा सकेंगे, लेकिन यह धार्मिक सद्भाव का प्रतीक है।
इस कदम से सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बल मिला है, और विशेषज्ञों का अनुमान है कि उड़ानों के फिर शुरू होने से ऐसी यात्राएं और आसान हो जाएंगी। कुल मिलाकर, ये विकास भारत और चीन के बीच शांति और सहयोग की दिशा में सकारात्मक हैं। यात्रियों को सलाह है कि वे इंडिगो की आधिकारिक वेबसाइट या सरकारी पोर्टल से बुकिंग और वीजा अपडेट की जांच करें, ताकि कोई असुविधा न हो। यह नया दौर दोनों देशों के नागरिकों के लिए अवसरों से भरा है।
जानकारी एमएसएन और बीबीसी से एकत्र की जाती है।
