मेड इन इंडिया भारत और दुनिया के लिए एआई
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) हमारे दैनिक जीवन और कामकाज को तेजी से बदल रही है, और यह समाज में सकारात्मक तथा रचनात्मक बदलाव लाने की जबरदस्त क्षमता रखती है। भारत जैसे बड़े और विविधतापूर्ण देश के लिए AI के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता विकसित करना बेहद आवश्यक है, क्योंकि इससे न केवल आर्थिक विकास होगा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक समावेश भी मजबूत होगा। इसके तीन मुख्य कारण हैं: सबसे पहले, आत्मनिर्भरता से घरेलू स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी और निजी क्षेत्र का निवेश बढ़ेगा, जैसा कि अन्य AI अग्रणी देशों में देखा जा रहा है। उदाहरण के तौर पर, चीन ने हाल ही में Nvidia चिप्स पर प्रतिबंध लगाकर अपनी स्वदेशी चिप-मेकिंग क्षमता को बढ़ावा दिया है, जिससे उनके स्थानीय उद्योगों को फायदा हुआ है। दूसरा, भारत की अनोखी संस्कृति, समृद्ध इतिहास, विविध भाषाओं और स्थानीय बारीकियों के अनुरूप AI विकसित करने से यह तकनीक हर भारतीय के लिए आसानी से उपलब्ध और व्यावहारिक बनेगी, खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में जहां भाषाई विविधता एक बड़ी चुनौती है। तीसरा, राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से जिम्मेदार AI क्षमता का विकास महत्वपूर्ण है, जहां उन्नत मॉडल डेटा की उत्पत्ति का स्पष्ट रिकॉर्ड (डेटा-लाइनेज) रखें, ताकि कोई छिपी हुई हानिकारक गतिविधि महत्वपूर्ण समय पर न उभरे, जैसे कि साइबर हमलों या गलत सूचना के मामलों में।
AI क्षमता बनाने के लिए तीन बुनियादी तत्व जरूरी हैं: उच्च गुणवत्ता वाला डेटा, शक्तिशाली कंप्यूटिंग पावर और कुशल मानव प्रतिभा। भारत में इन तत्वों को मजबूत करने के लिए सरकार ने कई पहल शुरू की हैं, जैसे कि इंडिया AI मिशन, जो 2024 में लॉन्च हुई और जिसमें 10,300 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है, ताकि AI इकोसिस्टम को मजबूत किया जा सके। यह मिशन AI कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटासेट प्लेटफॉर्म और इनोवेशन सेंटर जैसे क्षेत्रों पर फोकस करती है, जिससे भारतीय स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं को वैश्विक स्तर की सुविधाएं मिल रही हैं।
भारत में AI का वर्तमान परिदृश्य
आज भारत में OpenAI का ChatGPT दुनिया के किसी भी अन्य देश की तुलना में सबसे ज्यादा मासिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं वाला प्लेटफॉर्म है, जो दर्शाता है कि भारतीय उपयोगकर्ता AI को तेजी से अपना रहे हैं। OpenAI ने कुल 40 अरब डॉलर की फंडिंग जुटाई है और उपयोगकर्ताओं को आकर्षित करने के लिए हर महीने 1-2 अरब डॉलर खर्च कर रहा है, जिसमें सेवाएं मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही हैं, जो अमेरिकी नीतियों से प्रेरित है जो डेटा आयात और AI निर्यात पर जोर देती हैं। इससे न केवल उपयोगकर्ता बढ़ रहे हैं, बल्कि कंपनियां भारतीय डेटा का उपयोग करके और भी उन्नत क्लोज्ड-सोर्स AI मॉडल ट्रेन कर रही हैं, जो भारत की डेटा संप्रभुता के लिए खतरा पैदा करता है। अगर भारत AI में आत्मनिर्भर नहीं बना, तो भविष्य में हमारी सेवाएं हमारे ही डेटा से चलेंगी, लेकिन विदेशी कंपनियों के स्वामित्व में रहेंगी और हमें ही महंगे दामों पर बेची जाएंगी, जिससे आर्थिक निर्भरता बढ़ेगी। इसके बजाय, हमें वैश्विक मॉडलों की सर्वोत्तम विशेषताओं को अपनाते हुए उन्हें भारत में संचालित करने की अनुमति देनी चाहिए, लेकिन ऐसे सख्त नियम बनाने चाहिए जो भारतीय और विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करें, जैसे कि डेटा लोकलाइजेशन पॉलिसी जो डेटा को देश के भीतर रखने पर जोर देती है।
केंद्र सरकार ने इंडिया एआई मिशन के जरिए भारतीय स्टार्टअप्स को स्वतंत्र AI मॉडल बनाने में मजबूत समर्थन दिया है, जिसमें 10,000 से ज्यादा GPU की कंप्यूट क्षमता विकसित की जा रही है। हालांकि, इन मॉडलों का असली फायदा तभी होगा जब वे भारतीय डेटा पर आधारित हों और हर भारतीय की सेवा में लगें, जैसे कि स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि जैसे क्षेत्रों में। भारत को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि स्वतंत्र AI अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में, और AI के उपयोग से धन का केंद्रीकरण रोके, ताकि छोटे उद्यमी और किसान भी इसका लाभ उठा सकें। 2025 तक भारत का AI बाजार 8 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो 40% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है, और इसमें स्टार्टअप्स की भूमिका अहम है।
तकनीक के क्षेत्र में कभी-कभी दूसरे स्थान पर आने वाले देश तेजी से आगे बढ़ सकते हैं, क्योंकि वे पहले की गलतियों से सीखते हैं और स्मार्ट तरीके से विकास करते हैं। भारत के पास AI में बड़ी छलांग लगाने का सुनहरा अवसर है, खासकर क्योंकि यहां 875 मिलियन इंटरनेट उपयोगकर्ता हर महीने 17 एक्साबाइट डेटा उत्पन्न कर रहे हैं, जो AI ट्रेनिंग के लिए अमूल्य संसाधन है। निम्नलिखित मुद्दों को संबोधित करके भारत यह अवसर हासिल कर सकता है।
पहला: सरकारी कार्यों में स्वतंत्र या ओपन-सोर्स मॉडल का उपयोग
सरकार को अपने सभी आंतरिक कार्यों, जैसे कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं और डेटा प्रबंधन के लिए केवल स्वतंत्र या ओपन-सोर्स AI मॉडल का उपयोग करना चाहिए, जो पूरी तरह से सुरक्षित और स्वदेशी इंफ्रास्ट्रक्चर पर चलें। क्लोज्ड-सोर्स मॉडल, जिनका व्यवहार ऑडिट नहीं किया जा सकता, गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा करते हैं, जैसे कि डेटा लीक या विदेशी हस्तक्षेप। इसके अलावा, हाल की पहलों जैसे कि ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) की साझेदारी, जो छात्रों और शिक्षकों को विदेशी AI मॉडल प्रोवाइडर्स से मुफ्त लाइसेंस देती है, को रोकना चाहिए। ऐसे समझौते से मूल्यवान भारतीय डेटा देश से बाहर जाता है, जो नागरिकों को प्रोफाइल करने और विदेशी मॉडल को बेहतर बनाने में इस्तेमाल होता है, साथ ही इससे बाजार में अनुचित प्रतिस्पर्धा बढ़ती है। AI में डेटा एक मुख्य इनपुट है, जो मॉडल की गुणवत्ता और क्षमता को सीधे प्रभावित करता है, इसलिए इसे सुरक्षित रखना राष्ट्रीय प्राथमिकता होनी चाहिए। भारत की रिजर्व बैंक ने भी 2025 में एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें वित्तीय क्षेत्र में जिम्मेदार AI अपनाने पर जोर दिया गया है, ताकि जोखिम कम हों। ओपन-सोर्स मॉडल को बढ़ावा देने से भारतीय शोधकर्ता अपनी जरूरतों के अनुसार उन्हें अनुकूलित कर सकते हैं, जैसे कि स्थानीय भाषाओं में।
दूसरा: भारत में AI मॉडल और API का स्थानीय इंफ्रास्ट्रक्चर
सरकार को यह अनिवार्य बनाना चाहिए कि भारत में उपयोगकर्ताओं को सेवा देने वाले सभी AI मॉडल और एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API) पूरी तरह से भारतीय सीमाओं के भीतर होस्टेड इंफ्रास्ट्रक्चर पर चलें, ताकि डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित हो। बड़े भाषा मॉडल (LLM) से जुड़े एप्लिकेशन के लिए कोई भी उपयोगकर्ता डेटा भारत से बाहर न जाए, जिससे गोपनीयता की रक्षा होगी और विदेशी AI क्षमताओं को अनुचित फायदा नहीं मिलेगा। इससे GPU जैसे कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े पैमाने पर निजी निवेश आकर्षित होगा, और हार्डवेयर की स्थानीय उपलब्धता बढ़ेगी। भारत की वर्तमान कंप्यूटिंग क्षमता वैश्विक नेताओं से काफी पीछे है; उदाहरण के लिए, OpenAI और Nvidia जल्द ही 10 गीगावॉट GPU क्षमता तक पहुंचेंगे, जबकि भारत में अभी केवल लगभग 30,000 GPU हैं। इस अंतर को पाटने के लिए निजी क्षेत्र और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) की जरूरत है, और इंडिया AI मिशन के तहत 18,693 GPU की सुविधा विकसित की जा रही है, जो DeepSeek जैसे ओपन-सोर्स मॉडलों से नौ गुना ज्यादा है।
सरकार को मांग को एकत्रित करके स्वतंत्र मॉडल को सार्वजनिक भलाई के रूप में उपलब्ध कराना चाहिए, जहां इंफरेंस के लिए इस्तेमाल होने वाला इंफ्रास्ट्रक्चर नए मॉडल ट्रेनिंग के लिए भी उपयोग हो। यह Nvidia CEO Jensen Huang के “इंटेलिजेंस फैक्ट्री” विचार से मेल खाता है, जो AI को “मैन्युफैक्चरिंग” की तरह देखता है। भारत में AI की “मैन्युफैक्चरिंग” को 100% स्थानीय मूल्य वृद्धि के साथ बढ़ावा दिया जाना चाहिए, वैश्विक पूंजी और बौद्धिक संपदा का स्वागत करते हुए, ताकि 2025 तक 45 नए डेटा सेंटर जुड़ें और कुल क्षमता 1,015 MW तक पहुंचे।
तीसरा: नई डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) का निर्माण
सरकार को एक नई प्रकार की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) विकसित करनी चाहिए, जो सभी सरकारी सेवाओं, पर्यटन डेटा, NCERT की शैक्षिक सामग्री, आपातकालीन सेवाओं, विभिन्न योजनाओं, रेलवे बुकिंग, स्वयं प्लेटफॉर्म और इसी तरह की प्रणालियों को एकीकृत करे। फिर, स्वतंत्र AI मॉडल और एप्लिकेशन डेवलपर्स को इस DPI के अनुरूप प्लेटफॉर्म बनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, ताकि सभी भारतीय नागरिक आसानी से स्वतंत्र AI मॉडल, सरकारी सेवाओं और NCERT किताबों जैसे ज्ञान स्रोतों तक पहुंच सकें। इससे कोई भी नागरिक एक सरल, सहज प्लेटफॉर्म पर अपनी जरूरतें पूछ सकता है, जैसे कि स्वास्थ्य सलाह या शिक्षा सामग्री। पहुंच को बढ़ाने के लिए वॉइस कमांड, मोबाइल ऐप और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म जैसे कई माध्यमों का उपयोग किया जाना चाहिए, खासकर उन इलाकों में जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर है। यह DPI भारत के मौजूदा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे आधार, UPI और डिजिलॉकर पर आधारित होगी, जो पहले से ही वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त हैं, और G20 में कई देशों ने इन्हें अपनाने में रुचि दिखाई है। AI को DPI में एकीकृत करने से स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में तेज दवा खोज संभव होगी, जहां AI 30% नई दवाओं में योगदान दे सकता है।
चौथा: AI मांग बढ़ाकर निवेश आकर्षित करना
1.4 अरब की विशाल आबादी वाले भारत में AI की मांग को काफी बढ़ाकर—देश में इंफरेंस को अनिवार्य करके और नागरिकों को AI सेवाएं प्रदान करके—हम कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निजी निवेश आकर्षित कर सकते हैं। इससे FDI बढ़ेगा और वैश्विक स्तर की AI प्रतिभा भारत वापस आएगी, क्योंकि बेहतर संसाधन शोधकर्ताओं को आश्वस्त करेंगे कि भारत उन्नत AI अनुसंधान के लिए उपयुक्त जगह है। भारत को शीर्ष AI विशेषज्ञों को आकर्षित और बनाए रखने के लिए एक समर्पित राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू करना चाहिए, जैसे कि इंडिया AI मिशन के तहत फ्यूचरस्किल्स प्रोग्राम, जो AI शिक्षा को बढ़ावा दे रहा है। इससे डेटा क्यूरेशन के बेहतर तरीके विकसित होंगे और गैर-व्यक्तिगत जानकारी को सार्वजनिक भलाई के रूप में साझा किया जा सकेगा, जैसा कि AI कोश प्लेटफॉर्म कर रहा है। अंततः, यह डेटा, कंप्यूटिंग पावर और प्रतिभा का एक सकारात्मक चक्र बनाएगा, जो भारत की AI क्षमताओं को आगे बढ़ाएगा और क्षेत्र में छलांग लगाने में मदद करेगा। 2025 में, 96% भारतीय पेशेवर AI टूल्स का उपयोग कर रहे हैं, जो वैश्विक औसत से ज्यादा है, और इससे AI बाजार 28.8 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
