15 उच्च लाभ वाले खाद्य उत्पाद भारत पहले से कहीं अधिक निर्यात कर रहा है
भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण स्थान है। देश की मिट्टी और जलवायु विविध फसलों को उपजाने में मदद करती है। हाल के वर्षों में, भारत के खाद्य निर्यात में तेजी आई है। वित्त वर्ष 2024-25 में, कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात 13 प्रतिशत बढ़कर 22.67 अरब डॉलर हो गए। यह वृद्धि वैश्विक मांग, बेहतर उत्पादन तकनीक और सरकारी नीतियों के कारण हुई है। वर्ल्ड फूड इंडिया 2025 जैसे कार्यक्रमों ने भारत को वैश्विक खाद्य केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद की है। यहां, कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात 49.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें प्रसंस्कृत खाद्य का हिस्सा 20.4 प्रतिशत हो गया।
इस लेख में, हम 15 उच्च-लाभकारी खाद्य उत्पादों पर चर्चा करेंगे जो भारत से अधिक निर्यात हो रहे हैं। ये उत्पाद न केवल किसानों को लाभ देते हैं, बल्कि वैश्विक बाजार में भारत की मजबूत स्थिति बनाते हैं। जैसे-जैसे स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ रही है, ये उत्पाद अधिक मांग में हैं। हम प्रत्येक उत्पाद के बारे में सरल भाषा में जानेंगे, जिसमें निर्यात आंकड़े, प्रमुख बाजार और लाभ शामिल हैं। यह जानकारी पाठकों को आसानी से समझने के लिए दी गई है। भारत का खाद्य निर्यात अब कुल निर्यात का 11.7 प्रतिशत है, जो 46.44 अरब डॉलर तक पहुंच गया। सरकारी पहल जैसे APEDA और कोल्ड चेन विकास से यह वृद्धि संभव हुई।
१. बासमती चावल
बासमती चावल भारत की सबसे प्रसिद्ध फसल है। इसकी लंबी दाने और सुगंध इसे विशेष बनाती है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा बासमती चावल निर्यातक है। वित्त वर्ष 2023-24 में, बासमती चावल के निर्यात का मूल्य 3.97 अरब डॉलर था। यह चावल मध्य पूर्व, यूरोप और अमेरिका में लोकप्रिय है। बासमती की खेती पंजाब और हरियाणा के उपजाऊ मैदानों में होती है, जहां सिंचाई और आधुनिक तकनीक से उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित की जाती है। वैश्विक स्तर पर, बासमती की मांग स्वास्थ्यवर्धक आहार के कारण बढ़ रही है, क्योंकि यह कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला चावल है।
सरकार ने निर्यात प्रतिबंध हटाने के बाद, चावल निर्यात में 21 प्रतिशत की वृद्धि हुई। किसान पंजाब और हरियाणा के क्षेत्रों में इसे उगाते हैं। यह उच्च मूल्य के कारण लाभकारी है। वैश्विक मांग बढ़ने से, 2025 में निर्यात और अधिक होने की उम्मीद है। अप्रैल 2025 में चावल निर्यात 13 प्रतिशत से अधिक बढ़ा, जो वैश्विक स्टॉक कमी से हुआ। किसानों को प्रति हेक्टेयर 2-3 लाख रुपये की आय होती है।
| विशेषता | विवरण | निर्यात मूल्य (2024-25) |
| प्रमुख उत्पादक राज्य | पंजाब, हरियाणा | 3.97 अरब डॉलर |
| शीर्ष आयातक देश | ईरान, सऊदी अरब, यूएई | 70% वैश्विक बाजार |
| लाभ मार्जिन | उच्च (प्रति टन 1,200 डॉलर) | बढ़ती मांग |
२. गैर-बासमती चावल
गैर-बासमती चावल साधारण लेकिन पौष्टिक है। भारत इसका बड़ा निर्यातक है। वित्त वर्ष 2024-25 में, इसका निर्यात 3.35 अरब डॉलर का रहा। अफ्रीका और एशिया के देश इसे पसंद करते हैं। यह चावल विभिन्न जलवायु में आसानी से उगाया जाता है, जो इसे लागत-प्रभावी बनाता है। वैश्विक खाद्य संकट के समय, यह चावल गरीब देशों की भोजन आवश्यकताओं को पूरा करता है। बंगाल के गंगा डेल्टा क्षेत्र में इसकी खेती से किसानों को स्थिर आय मिलती है।
यह चावल कम लागत में उगाया जाता है। बंगाल और उत्तर प्रदेश प्रमुख राज्य हैं। वैश्विक खाद्य सुरक्षा की जरूरत से निर्यात बढ़ा। 2025 में, 17 मिलियन टन से अधिक निर्यात हो सकता है। यह किसानों के लिए स्थिर आय का स्रोत है। वित्त वर्ष 2025 में चावल निर्यात रिकॉर्ड 12.47 अरब डॉलर पहुंचा, जो 20 प्रतिशत अधिक है। म्यांमार जैसे देशों की कमी से भारतीय चावल की मांग बढ़ी।
| विशेषता | विवरण | निर्यात मूल्य (2024-25) |
| प्रमुख उत्पादक राज्य | पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश | 3.35 अरब डॉलर |
| शीर्ष आयातक देश | इराक, बांग्लादेश, नेपाल | 21% वृद्धि |
| लाभ मार्जिन | मध्यम (प्रति टन 800 डॉलर) | खाद्य सुरक्षा मांग |
३. मसाले (कुल)
मसाले भारत की पहचान हैं। हल्दी, जीरा और मिर्च प्रमुख हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में, मसालों का निर्यात 4.72 अरब डॉलर का हुआ, जो 6 प्रतिशत अधिक है। अमेरिका, यूरोप और चीन मुख्य बाजार हैं। भारत 40 प्रतिशत वैश्विक मसाला उत्पादन करता है, जो आयुर्वेदिक गुणों से जुड़ा है। केरल के मसाला बागानों में जैविक खेती बढ़ रही है। स्वास्थ्य लाभ जैसे एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से पश्चिमी देशों में मांग दोगुनी हुई।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा मसाला उत्पादक है। केरल और तमिलनाडु में इन्हें उगाया जाता है। स्वास्थ्य लाभ से मांग बढ़ी। 2025 में, निर्यात 10 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यह उच्च लाभ वाला क्षेत्र है। जैविक मसालों का निर्यात 35 प्रतिशत बढ़ा। सरकारी योजनाएं जैसे स्पाइस बोर्ड से किसानों को प्रमाणन मिलता है।
| विशेषता | विवरण | निर्यात मूल्य (2024-25) |
| प्रमुख प्रकार | हल्दी, जीरा, मिर्च | 4.72 अरब डॉलर |
| शीर्ष आयातक देश | अमेरिका, यूके, बांग्लादेश | 17% वृद्धि |
| लाभ मार्जिन | उच्च (प्रति टन 2,000 डॉलर) | स्वास्थ्य ट्रेंड |
४. मिर्च
मिर्च भारतीय व्यंजनों का आधार है। भारत सबसे बड़ा निर्यातक है। वित्त वर्ष 2024-25 में, मिर्च निर्यात 1.34 अरब डॉलर का रहा, हालांकि मूल्य में 11 प्रतिशत कमी आई। वियतनाम और श्रीलंका प्रमुख खरीदार हैं। आंध्र प्रदेश के गर्म इलाकों में लाल मिर्च की खेती से उच्च उत्पादकता मिलती है। यह मसाला एशियाई और लैटिन अमेरिकी व्यंजनों में उपयोग होता है। वैश्विक मिर्च बाजार में भारत की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत है।
आंध्र प्रदेश और कर्नाटक मुख्य उत्पादक हैं। वॉल्यूम में 19 प्रतिशत वृद्धि हुई। वैश्विक मसाला उद्योग में यह महत्वपूर्ण है। 2025 में, कीमतें स्थिर होने से लाभ बढ़ेगा। किसानों को प्रति एकड़ 1.5 लाख रुपये की कमाई होती है। निर्यात विविधीकरण से नई बाजार खुल रहे हैं।
| विशेषता | विवरण | निर्यात मूल्य (2024-25) |
| प्रमुख उत्पादक राज्य | आंध्र प्रदेश, कर्नाटक | 1.34 अरब डॉलर |
| शीर्ष आयातक देश | वियतनाम, श्रीलंका | 7.15 लाख टन |
| लाभ मार्जिन | मध्यम-उच्च | कीमत स्थिरीकरण |
५. दालें
दालें प्रोटीन का अच्छा स्रोत हैं। चना और मूंग प्रमुख हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में, दालों का निर्यात 454 मिलियन डॉलर का हुआ। पाकिस्तान, यूएई और तुर्की मुख्य बाजार हैं। मध्य प्रदेश के मैदानों में चना की खेती रोटेशनल फसल के रूप में लाभदायक है। वीगन और प्लांट-बेस्ड डाइट ट्रेंड से वैश्विक मांग बढ़ी। ये दालें मिट्टी की उर्वरता बनाए रखती हैं।
मध्य प्रदेश और राजस्थान में इन्हें उगाया जाता है। प्लांट-बेस्ड प्रोटीन की मांग से निर्यात बढ़ा। 2025 में, यह स्वास्थ्य ट्रेंड के कारण लाभकारी रहेगा। अन्य अनाजों में 21 प्रतिशत वृद्धि से दालें भी फायदा उठा रही हैं। किसानों को सब्सिडी से कम लागत मिलती है।
| विशेषता | विवरण | निर्यात मूल्य (2024-25) |
| प्रमुख प्रकार | चना, मूंग, उड़द | 454 मिलियन डॉलर |
| शीर्ष आयातक देश | पाकिस्तान, यूएई | वीगन मांग |
| लाभ मार्जिन | उच्च (प्रति टन 1,500 डॉलर) | 21% अन्य अनाज वृद्धि |
६. गेहूं
गेहूं बेसिक फसल है। भारत इसका बड़ा निर्यातक बना। वित्त वर्ष 2024-25 में, निर्यात 35 मिलियन डॉलर का रहा। बांग्लादेश और श्रीलंका प्रमुख आयातक हैं। पंजाब के गेहूं खेत उच्च उपज देते हैं, जो 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है। वैश्विक युद्धों से उत्पन्न खाद्य संकट में भारतीय गेहूं महत्वपूर्ण साबित हुआ। यह फसल किसानों की आय का मुख्य स्रोत है।
पंजाब और मध्य प्रदेश मुख्य राज्य हैं। सरकारी खरीद से स्थिरता मिली। वैश्विक खाद्य संकट से मांग बढ़ी। 2025 में, निर्यात दोगुना हो सकता है। न्यूनतम समर्थन मूल्य से किसान सुरक्षित हैं।
| विशेषता | विवरण | निर्यात मूल्य (2024-25) |
| प्रमुख प्रकार | लोकवान, शर्भती | 35 मिलियन डॉलर |
| शीर्ष आयातक देश | बांग्लादेश, अफगानिस्तान | स्थिर मूल्य |
| लाभ मार्जिन | मध्यम | खाद्य सुरक्षा |
७. बाजरा और अन्य अनाज
बाजरा और अन्य अनाज भारत की पारंपरिक फसलें हैं जो स्वास्थ्य लाभों से भरपूर हैं। बाजरा ग्लूटेन-फ्री होने के कारण डायबिटीज रोगियों के लिए आदर्श है, जबकि रागी और ज्वार जैसे अन्य अनाज पोषक तत्वों जैसे आयरन और फाइबर प्रदान करते हैं। 2023 को संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय बाजरा वर्ष घोषित किया, जिससे वैश्विक ध्यान बढ़ा। भारत के अनाज निर्यात में बाजरा की हिस्सेदारी बढ़ रही है, क्योंकि ये सुपरफूड के रूप में लोकप्रिय हो रहे हैं। राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों में बाजरा सूखा प्रतिरोधी फसल है, जो कम पानी में अच्छी उपज देती है। वैश्विक स्तर पर, ये अनाज वीगन और स्वास्थ्य-केंद्रित आहार में शामिल हो रहे हैं।
निर्यात यूएसए और जर्मनी को होता है। वित्त वर्ष 2024-25 में, अन्य अनाजों में 21.95 प्रतिशत वृद्धि हुई। राजस्थान और महाराष्ट्र उत्पादक हैं। ग्लूटेन-फ्री ट्रेंड से लाभ। 2025 में, निर्यात बढ़ेगा। सरकारी प्रचार से किसानों को नई तकनीक मिल रही है। अमेरिकी टैरिफ छूट से इन अनाजों का निर्यात 2.5-3 अरब डॉलर बढ़ सकता है। किसानों को प्रति हेक्टेयर 1.5-2 लाख रुपये की आय हो रही है।
| विशेषता | विवरण | निर्यात मूल्य (2024-25) |
| प्रमुख प्रकार | बाजरा, रागी | 21.95% वृद्धि |
| शीर्ष आयातक देश | यूएसए, जर्मनी | स्वास्थ्य लाभ |
| लाभ मार्जिन | उच्च | ट्रेंडिंग |
८. समुद्री उत्पाद
समुद्री उत्पाद भारत के तटीय क्षेत्रों की समृद्धि का प्रतीक हैं, जहां झींगा, मछली और स्क्विड जैसे उत्पाद उच्च प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होते हैं। भारत की 7,500 किलोमीटर लंबी तट रेखा विविध समुद्री जीवन को पोषित करती है, जो एक्वाकल्चर और वाइल्ड कैच दोनों से निर्यात को बढ़ावा देती है। वित्त वर्ष 2024-25 में, निर्यात 7.4 अरब डॉलर का हुआ, जो वैश्विक सीफूड बाजार में भारत को प्रमुख खिलाड़ी बनाता है। ये उत्पाद स्वास्थ्य-जागरूक उपभोक्ताओं के बीच लोकप्रिय हैं, क्योंकि वे हृदय स्वास्थ्य और मस्तिष्क विकास में सहायक हैं। तमिलनाडु के तटों पर एक्वाकल्चर फार्म झींगा उत्पादन बढ़ा रहे हैं। सरकारी पहल जैसे ब्लू रिवोल्यूशन से सतत मछली पालन को प्रोत्साहन मिला।
अमेरिका और यूरोप मुख्य बाजार हैं। तमिलनाडु और गुजरात तट प्रमुख हैं। एक्वाकल्चर से वृद्धि। 2025 में, विविधीकरण से लाभ बढ़ेगा। 11 प्रतिशत वृद्धि से रोजगार बढ़ा। विश्व मछली दिवस 2025 पर APEDA ने निर्यात लक्ष्य 8 अरब डॉलर रखा। किसानों और मछुआरों को प्रति टन 4,000-6,000 डॉलर का लाभ मिल रहा है।
| विशेषता | विवरण | निर्यात मूल्य (2024-25) |
| प्रमुख प्रकार | झींगा, मछली | 7.4 अरब डॉलर |
| शीर्ष आयातक देश | अमेरिका, जापान | 11.08% वृद्धि |
| लाभ मार्जिन | बहुत उच्च (प्रति टन 5,000 डॉलर) | ब्लू इकोनॉमी |
९. चाय
चाय भारत की सांस्कृतिक धरोहर है, जो असम की हरी-भरी पहाड़ियों से लेकर दार्जिलिंग की ऊंची चोटियों तक उगाई जाती है। ब्लैक टी और ग्रीन टी जैसे प्रकार एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं, जो कैंसर रोकथाम और वजन नियंत्रण में मदद करते हैं। वित्त वर्ष 2024 में, निर्यात 255 मिलियन किलोग्राम का रहा, जो वैश्विक चाय बाजार में भारत की 20 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्शाता है। असम के चाय बागानों में जैविक चाय की खेती बढ़ रही है। एंटीऑक्सीडेंट गुणों से स्वास्थ्य लाभ मिलता है। दार्जिलिंग चाय की सुगंध वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध है। सरकारी स्कीम जैसे टी बोर्ड से गुणवत्ता नियंत्रण मजबूत हुआ।
रूस और ईरान प्रमुख आयातक हैं। असम और दार्जिलिंग प्रसिद्ध हैं। 10 प्रतिशत वृद्धि हुई। स्वास्थ्य चाय से मांग बढ़ी। ग्रीन टी ट्रेंड से निर्यात दोगुना हो सकता है। 2025 में, ऑर्गेनिक चाय का निर्यात 15 प्रतिशत बढ़ेगा। किसानों को प्रति हेक्टेयर 3 लाख रुपये की आय।
| विशेषता | विवरण | निर्यात मूल्य (2024-25) |
| प्रमुख प्रकार | ब्लैक टी, ग्रीन टी | 255 मिलियन किग्रा |
| शीर्ष आयातक देश | रूस, ईरान | 10% वृद्धि |
| लाभ मार्जिन | मध्यम-उच्च | वैश्विक ट्रेंड |
१०. कॉफी
कॉफी भारत के दक्षिणी राज्यों की ऊंची भूमि की देन है, जहां अरेबिका और रोबुस्ता बीन्स मजबूत स्वाद और सुगंध के लिए जाने जाते हैं। ये बीन्स कैफीन और एंटीऑक्सीडेंट प्रदान करते हैं, जो ऊर्जा बढ़ाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने में सहायक हैं। वित्त वर्ष 2023-24 में, निर्यात 1.29 अरब डॉलर का हुआ। कर्नाटक के हिली इलाकों में शेड-ग्रोन कॉफी पर्यावरण अनुकूल है। रोबुस्ता प्रकार मजबूत स्वाद के लिए जाना जाता है। कैफीन और एंटीऑक्सीडेंट से स्वास्थ्य लाभ। कॉफी बोर्ड की योजनाओं से किसानों को प्रशिक्षण मिलता है।
इटली और जर्मनी मुख्य बाजार हैं। कर्नाटक प्रमुख राज्य है। रोबुस्ता प्रकार लोकप्रिय। 2025 में, 10 प्रतिशत कमी की आशंका लेकिन मूल्य उच्च। 29 प्रतिशत वृद्धि से किसान लाभान्वित। रिकॉर्ड कीमतों से प्रति किलोग्राम 5 डॉलर लाभ।
| विशेषता | विवरण | निर्यात मूल्य (2024-25) |
| प्रमुख प्रकार | अरेबिका, रोबुस्ता | 1.29 अरब डॉलर |
| शीर्ष आयातक देश | इटली, रूस | 29% वृद्धि |
| लाभ मार्जिन | उच्च | रिकॉर्ड मूल्य |
११. फल (अंगूर, अनार)
फल भारत की उपजाऊ भूमि के रंगीन उपहार हैं, जहां अंगूर की मिठास और अनार के बीजों का स्वास्थ्य लाभ वैश्विक बाजार को आकर्षित करता है। ये फल विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर से भरपूर होते हैं, जो हृदय स्वास्थ्य और पाचन में सुधार करते हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में, फलों का निर्यात 161.4 मिलियन डॉलर का रहा। महाराष्ट्र के नासिक क्षेत्र में अंगूर की खेती निर्यात-उन्मुख है। अनार के एंटीऑक्सीडेंट गुण कैंसर रोकथाम में सहायक। केला और मैंगो भी प्रमुख हैं। APEDA की पैकेजिंग योजनाओं से शेल्फ लाइफ बढ़ी।
यूरोप और मध्य पूर्व बाजार हैं। महाराष्ट्र अनार और अंगूर उगाता है। एंटीऑक्सीडेंट गुण से मांग। 44 प्रतिशत मैंगो निर्यात वृद्धि। कोल्ड चेन से शेल्फ लाइफ बढ़ी। अमेरिकी छूट से फलों का निर्यात 1 अरब डॉलर बढ़ेगा।
| विशेषता | विवरण | निर्यात मूल्य (2024-25) |
| प्रमुख प्रकार | अंगूर, अनार, केला | 161.4 मिलियन डॉलर |
| शीर्ष आयातक देश | यूएई, सऊदी अरब | 44% मैंगो |
| लाभ मार्जिन | मध्यम | लंबी शेल्फ लाइफ |
१२. सब्जियां
सब्जियां भारत की विविध मिट्टी से प्राप्त पौष्टिक भोजन हैं, जहां प्याज, टमाटर और आलू विटामिन सी और पोटैशियम से समृद्ध होते हैं। ये सब्जियां इम्यूनिटी बढ़ाने और वजन नियंत्रण में मदद करती हैं। ताजी सब्जियों का निर्यात 894 मिलियन डॉलर का रहा। उत्तर प्रदेश के गंगा मैदान में प्याज और टमाटर की खेती वर्ष भर होती है। विटामिन समृद्ध ये सब्जियां स्वास्थ्य आहार का हिस्सा हैं। प्रसंस्कृत सब्जियां जैसे फ्रोजन वैल्यू एडेड हैं। हॉर्टिकल्चर मिशन से उत्पादकता बढ़ी।
मध्य पूर्व और एशिया आयातक हैं। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र उत्पादक हैं। प्रसंस्कृत सब्जियां 777 मिलियन डॉलर। मौसमी उपलब्धता से निर्यात स्थिर। जैविक सब्जियों की मांग बढ़ रही। टैरिफ छूट से सब्जी निर्यात दोगुना।
| विशेषता | विवरण | निर्यात मूल्य (2024-25) |
| प्रमुख प्रकार | प्याज, आलू, टमाटर | 894 मिलियन डॉलर |
| शीर्ष आयातक देश | बांग्लादेश, नेपाल | प्रसंस्कृत 777 मिलियन |
| लाभ मार्जिन | मध्यम | मौसमी उपलब्धता |
१३. चीनी
चीनी भारत के गन्ना बेल्ट की मीठी फसल है, जो ऊर्जा स्रोत के रूप में वैश्विक खाद्य उद्योग का आधार बनाती है। कच्ची और शुद्ध चीनी पोषण पूरक के रूप में उपयोग होती है। वित्त वर्ष 2024-25 में, 4-5 अरब डॉलर का अनुमान। उत्तर प्रदेश के गन्ना बेल्ट में उच्च उपज मिलती है। कच्ची चीनी ऊर्जा स्रोत के रूप में वैश्विक मांग में है। सरकारी एथेनॉल नीतियां सहायक। गन्ना किसानों को MSP से स्थिरता।
इंडोनेशिया और बांग्लादेश मुख्य हैं। उत्तर प्रदेश बड़ा उत्पादक है। सरकारी नीतियां सहायक। अधिशेष आधारित निर्यात बढ़ा। किसानों को MSP से सुरक्षा। 2025 में, जैव ईंधन से चीनी निर्यात 6 अरब डॉलर।
| विशेषता | विवरण | निर्यात मूल्य (2024-25) |
| प्रमुख प्रकार | कच्ची, शुद्ध | 4-5 अरब डॉलर |
| शीर्ष आयातक देश | इंडोनेशिया, यूएई | अधिशेष आधारित |
| लाभ मार्जिन | उच्च | नीति समर्थन |
१४. मक्खन मांस (बफेलो मीट)
मक्खन मांस या बफेलो मीट भारत का लीन प्रोटीन स्रोत है, जो कम वसा और उच्च आयरन से भरपूर होता है। हलाल प्रमाणन इसे मुस्लिम देशों में लोकप्रिय बनाता है। वित्त वर्ष 2024-25 में, मांस निर्यात में 20.29 प्रतिशत वृद्धि। उत्तर प्रदेश के बफेलो फार्म हाइजीनिक उत्पादन सुनिश्चित करते हैं। लीन प्रोटीन स्रोत होने से मांग। हलाल प्रमाणन मुस्लिम देशों में पहुंच बढ़ाता है। एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल से गुणवत्ता मानक।
वियतनाम और मलेशिया आयातक हैं। उत्तर प्रदेश और पंजाब से आता है। लागत-प्रभावी। 20 प्रतिशत वृद्धि से लाभ। निर्यात विविधीकरण जारी। प्रति टन 3,000 डॉलर मार्जिन।
| विशेषता | विवरण | निर्यात मूल्य (2024-25) |
| प्रमुख प्रकार | फ्रोजन बफेलो मीट | 20.29% वृद्धि |
| शीर्ष आयातक देश | वियतनाम, मिस्र | हलाल प्रमाण |
| लाभ मार्जिन | उच्च | लीन टेक्स्चर |
१५. प्रसंस्कृत खाद्य
प्रसंस्कृत खाद्य भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की ताकत हैं, जहां मिलेट बार्स, मखाना स्नैक्स और रेडी-टू-ईट उत्पाद क्लीन लेबल और ऑर्गेनिक ट्रेंड को पूरा करते हैं। ये उत्पाद पोषण और सुविधा प्रदान करते हैं, जो व्यस्त जीवनशैली के अनुकूल हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में, 12.9 अरब डॉलर का निर्यात। क्लीन-लेबल और ऑर्गेनिक ट्रेंड से मांग। मिलेट प्रोडक्ट्स पोषण समृद्ध हैं। भारत का प्रसंस्करण क्षेत्र 20.4 प्रतिशत योगदान दे रहा। वर्ल्ड फूड इंडिया 2025 में MoU से निवेश।
अमेरिका और यूरोप बाजार हैं। क्लीन-लेबल ट्रेंड से लाभ। भारत का प्रसंस्करण क्षेत्र मजबूत। 7.1 प्रतिशत वृद्धि। 1 लाख करोड़ MoU से निवेश। 2025 में, 15 अरब डॉलर लक्ष्य।
| विशेषता | विवरण | निर्यात मूल्य (2024-25) |
| प्रमुख प्रकार | मिलेट, मखाना | 12.9 अरब डॉलर |
| शीर्ष आयातक देश | अमेरिका, जर्मनी | 7.1% वृद्धि |
| लाभ मार्जिन | बहुत उच्च | वैल्यू एडेड |
निष्कर्ष
भारत के ये 15 उच्च-लाभकारी खाद्य उत्पाद वैश्विक व्यापार को मजबूत कर रहे हैं। निर्यात वृद्धि से किसानों और अर्थव्यवस्था को लाभ मिला। 2025 में, स्वास्थ्य और स्थिरता फोकस से और प्रगति होगी। सरकार की APEDA जैसी योजनाएं सहायक हैं। वर्ल्ड फूड इंडिया 2025 में 1 लाख करोड़ रुपये के MoU से निवेश बढ़ा। कृषि निर्यात 49.4 अरब डॉलर पहुंचा, जो 76 प्रतिशत दशकीय वृद्धि दर्शाता है।
भविष्य में, भारत 2 ट्रिलियन डॉलर निर्यात लक्ष्य की ओर बढ़ेगा। ये उत्पाद न केवल लाभ देते हैं, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी बढ़ाते हैं। जैविक निर्यात में 35 प्रतिशत वृद्धि से पर्यावरण संरक्षण मजबूत हुआ। किसानों को प्रशिक्षण और कोल्ड चेन से चुनौतियां कम होंगी। कुल मिलाकर, भारत विश्व की खाद्य टोकरी बनने की राह पर है। यह वृद्धि ग्रामीण रोजगार और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करेगी। वैश्विक साझेदारियां जैसे GCC और ASEAN से संबंध मजबूत होंगे। 2025-26 में 7 प्रतिशत और वृद्धि की उम्मीद।
