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एच-1बी वीजा रद्द: नई “ऑनलाइन प्रेज़ेंस” जांच से भारत में फंसे भारतीय, अमेरिका लौटने की अनिश्चितता बढ़ी

एच-1बी वीजा रद्द की वजह से दिसंबर 2025 में भारत आए कई भारतीय पेशेवर और उनके परिवार अमेरिका लौटने में देरी झेल रहे हैं; 15–26 दिसंबर की कई अपॉइंटमेंट्स रद्द/रीशेड्यूल हुईं और नई तारीखें महीनों बाद की मिलीं—कारण नई “ऑनलाइन प्रेज़ेंस/सोशल-मीडिया” समीक्षा और बढ़ी स्क्रीनिंग बताई जा रही है।

क्या हुआ: किसे असर पड़ा और कितनी बड़ी समस्या है

दिसंबर 2025 के दूसरे पखवाड़े में भारत स्थित अमेरिकी दूतावास/कांसुलेट सिस्टम में H-1B (वर्क वीज़ा) और H-4 (डिपेंडेंट) श्रेणी के कई वीज़ा इंटरव्यू अपॉइंटमेंट अचानक रद्द होने लगे या आगे की तारीखों में शिफ्ट कर दिए गए। यह बदलाव खास तौर पर उन लोगों के लिए गंभीर बन गया जो नौकरी, छुट्टी, पारिवारिक कारणों या आपात स्थितियों में भारत आए थे और अब अमेरिकी वीज़ा स्टैम्पिंग के बिना वापस नहीं जा पा रहे हैं।

यहां सबसे अहम बात यह है कि अमेरिका में “स्टेटस/वर्क ऑथराइजेशन” और पासपोर्ट पर “वीज़ा स्टैम्प” अलग चीजें हैं। कोई व्यक्ति अमेरिका में नौकरी पर हो सकता है, लेकिन यदि वह अमेरिका के बाहर है और वीज़ा स्टैम्पिंग की जरूरत है, तो इंटरव्यू/प्रोसेसिंग में देरी का मतलब सीधा यह होता है कि वह वैध तरीके से तुरंत लौट नहीं पाएगा। इसी वजह से “वीज़ा है फिर भी एंट्री नहीं” जैसी चिंता बढ़ी है—कई मामलों में यह एंट्री-बैन नहीं, बल्कि अपॉइंटमेंट/प्रोसेसिंग-बॉटलनेक का नतीजा है।

नीचे उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों और कांसुलर कम्युनिकेशन के आधार पर प्रभावित समय-सीमा और संभावित देरी का एक सारांश दिया गया है:

विषय क्या देखा गया संभावित असर
प्रभावित अपॉइंटमेंट विंडो 15–26 दिसंबर 2025 के बीच की बड़ी संख्या में अपॉइंटमेंट्स रद्द/रीशेड्यूल छुट्टियों के बाद वापसी रुकी, नौकरी/परिवार पर दबाव
नई तारीखें कई मामलों में मार्च 2026 या उससे आगे अतिरिक्त ठहराव खर्च, अनिश्चितता
मुख्य कारण H-1B/H-4 के लिए नई “ऑनलाइन प्रेज़ेंस” समीक्षा + बढ़ी स्क्रीनिंग कांसुलर क्षमता घट सकती है, प्रति केस समय बढ़ सकता है

देरी का कारण: “ऑनलाइन प्रेज़ेंस/सोशल-मीडिया” समीक्षा और कांसुलर क्षमता

दिसंबर 2025 में अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से यह नीति-लाइन स्पष्ट की गई कि 15 दिसंबर 2025 से H-1B और H-4 आवेदकों पर भी “ऑनलाइन प्रेज़ेंस रिव्यू” लागू होगा। इसका व्यावहारिक मतलब यह है कि कांसुलर अधिकारी आवेदन में दिए गए तथ्यों (काम का इतिहास, भूमिका, शिक्षा, यात्रा, और अन्य विवरण) को आवेदक की सार्वजनिक ऑनलाइन मौजूदगी से मिलाकर देख सकते हैं—जिसमें सोशल-मीडिया प्रोफाइल, सार्वजनिक पोस्ट/कमेंट, और इंटरनेट पर उपलब्ध अन्य सार्वजनिक सूचनाएं शामिल हो सकती हैं।

यह बदलाव दो तरह से सिस्टम पर दबाव बढ़ाता है:

  1. प्रति आवेदक जांच का समय बढ़ना
    जब अधिकारी को अधिक डेटा-पॉइंट्स देखने होते हैं, तो एक दिन में इंटरव्यू की कुल संख्या घट सकती है। यही कारण है कि कुछ कांसुलर पोस्ट पहले से दिए गए स्लॉट्स को हटाकर नए स्लॉट्स आगे शिफ्ट कर देते हैं ताकि वे नई प्रक्रिया के अनुरूप काम कर सकें।
  2. बैकलॉग और “एडमिनिस्ट्रेटिव प्रोसेसिंग” की संभावना
    कई वीज़ा मामलों में कांसुलर अधिकारी इंटरव्यू के बाद अतिरिक्त जांच के लिए केस को “एडमिनिस्ट्रेटिव प्रोसेसिंग” में डाल सकते हैं। नई ऑनलाइन समीक्षा से ऐसे मामलों की संख्या या अवधि बढ़ सकती है, क्योंकि किसी भी असंगति/अस्पष्टता पर अतिरिक्त सत्यापन कराया जा सकता है।

इस पूरी स्थिति में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में बायोमेट्रिक्स/ओएफसी प्रक्रिया अलग चलती रही, लेकिन इंटरव्यू/कांसुलर अपॉइंटमेंट को आगे खिसका दिया गया। इससे लोगों को यह लगा कि प्रक्रिया “आधी” हो गई, लेकिन अंतिम चरण (स्टैम्पिंग/इशूएंस) अटक गया।

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भारत में फंसे लोगों की वास्तविक चुनौतियां: नौकरी, परिवार, खर्च और अनिश्चितता

अपॉइंटमेंट रद्द होना सिर्फ एक तारीख बदलना नहीं है। H-1B/H-4 धारकों के लिए इसका असर अक्सर चार स्तरों पर पड़ता है:

पहला, नौकरी और प्रोजेक्ट जोखिम

बहुत-से H-1B पेशेवर ऑन-साइट भूमिकाओं में होते हैं। लंबे समय तक विदेश में अटके रहने पर कंपनी की नीतियों के अनुसार:

  • प्रोजेक्ट डिलीवरी प्रभावित हो सकती है,
  • क्लाइंट-फेसिंग काम में बाधा आ सकती है,
  • और कुछ मामलों में पेरोल/लीव/परफॉर्मेंस पर असर पड़ सकता है।
    यदि कंपनी रिमोट-वर्क की अनुमति देती भी है, तो टाइम-ज़ोन, सिक्योरिटी, और कॉम्प्लायंस जैसी वजहों से यह हर भूमिका में संभव नहीं।

दूसरा, परिवार और बच्चों की पढ़ाई

H-4 पर रहने वाले जीवनसाथी और बच्चे अक्सर अमेरिका में स्कूल/हाउसिंग/मेडिकल अपॉइंटमेंट्स से जुड़े होते हैं। अचानक देरी होने पर:

  • स्कूल शेड्यूल और रूटीन टूटता है,
  • लीज़/रेंट/यूटिलिटी जैसी जिम्मेदारियां फंसती हैं,
  • और परिवारों को दो देशों में लॉजिस्टिक्स संभालनी पड़ती है।

तीसरा, खर्च और आर्थिक दबाव

अतिरिक्त ठहराव का मतलब है:

  • रहने का खर्च,
  • टिकट री-बुकिंग और संभावित कैंसिलेशन चार्ज,
  • दस्तावेज़ अपडेट (पासपोर्ट रिन्यूअल, फोटो/फॉर्म्स),
  • और कभी-कभी कानूनी सलाह का खर्च।
    अक्सर सबसे बड़ा खर्च “अनिश्चितता” पैदा करती है—क्योंकि लोग यह तय नहीं कर पाते कि वे कब तक रुकेंगे।

चौथा, मानसिक दबाव और अनिश्चित सूचना-प्रवाह

वीज़ा प्रोसेस में देरी का एक बड़ा नुकसान यह होता है कि आधिकारिक सूचना सीमित होती है, जबकि सोशल मीडिया/ग्रुप चैट में अफवाहें तेज़ चलती हैं। इससे तनाव बढ़ता है और गलत कदम उठने का जोखिम भी रहता है।

नीचे एक छोटा “रिस्क मैप” दिया गया है, जो बताता है कि किन समूहों पर असर ज्यादा दिख रहा है:

समूह क्यों ज्यादा असर सामान्य समस्या
ऑन-साइट/क्लाइंट रोल वाले H-1B भौतिक उपस्थिति जरूरी नौकरी/प्रोजेक्ट दबाव
H-4 परिवार (बच्चों सहित) स्कूल/घर/रूटीन अमेरिका में पढ़ाई/लॉजिस्टिक्स
जिनकी वीज़ा स्टैम्पिंग एक्सपायर लौटने के लिए स्टैम्प जरूरी तुरंत वापसी असंभव
छुट्टियों में भारत आए कर्मचारी शॉर्ट ट्रिप प्लान था अनियोजित ठहराव/खर्च

नीति का व्यापक संदर्भ: राष्ट्रीय सुरक्षा तर्क, बढ़ती जांच और शुल्क विवाद

नई ऑनलाइन समीक्षा को आमतौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा और पात्रता सत्यापन के तर्क से जोड़ा गया है—यानी यह सुनिश्चित करना कि आवेदक वीज़ा श्रेणी के अनुरूप गतिविधि करेगा और कोई सुरक्षा जोखिम नहीं है। इसी नीति-ढांचे में पहले कुछ अन्य गैर-इमिग्रेंट श्रेणियों के लिए भी ऑनलाइन/सोशल-मीडिया समीक्षा को मजबूत किया गया था, और अब इसका दायरा H-1B/H-4 तक बढ़ाया गया।

साथ ही, H-1B प्रोग्राम को लेकर अमेरिका में लंबे समय से बहस चलती रही है—एक तरफ यह तर्क कि इससे उच्च-कौशल प्रतिभा आती है और कंपनियों की प्रतिस्पर्धा बढ़ती है; दूसरी तरफ यह चिंता कि इससे कुछ क्षेत्रों में स्थानीय नौकरी बाजार पर दबाव पड़ सकता है। इसी बहस के बीच 2025 में H-1B पर बहुत ऊंचे शुल्क (जैसे $100,000) को लेकर कानूनी चुनौतियां और विवाद भी सामने आए हैं। ऐसे विवाद सीधे अपॉइंटमेंट कैंसिलेशन का कारण नहीं होते, लेकिन वे यह संकेत देते हैं कि H-1B इकोसिस्टम नीति-स्तर पर अधिक सख्ती और बदलाव के दौर में है।

इस पूरे परिदृश्य में कंपनियों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण रही है। कुछ बड़े नियोक्ताओं ने कर्मचारियों को अंतरराष्ट्रीय यात्रा को लेकर ज्यादा सतर्क रहने की सलाह दी है, क्योंकि यदि कर्मचारी अमेरिका से बाहर फंस गया तो वह अपने काम और जीवन दोनों में बड़ी बाधा झेल सकता है। इससे “ट्रैवल प्लानिंग” अब कई कंपनियों के लिए एचआर और इमिग्रेशन टीमों की निगरानी वाली चीज बनती जा रही है।

अब आगे क्या—आवेदकों के लिए व्यावहारिक कदम और संभावित अगला चरण

निकट भविष्य में स्थिति का सबसे यथार्थवादी निष्कर्ष यह है कि जब तक नई “ऑनलाइन प्रेज़ेंस” समीक्षा कांसुलर स्तर पर स्थिर नहीं हो जाती, तब तक इंटरव्यू स्लॉट्स की उपलब्धता और प्रोसेसिंग समय अस्थिर रह सकते हैं। ऐसे में प्रभावित लोग आमतौर पर इन व्यावहारिक कदमों से जोखिम कम कर सकते हैं:

  • आधिकारिक ईमेल/पोर्टल अपडेट नियमित देखें: रीशेड्यूल की सूचना अक्सर ईमेल/पोर्टल के जरिए आती है।
  • दस्तावेज़ों में पूर्ण一致 (Consistency) रखें: नौकरी का टाइटल, ड्यूटी, टाइमलाइन, और पते जैसी जानकारी DS-160, रोजगार पत्र और अन्य रिकॉर्ड में मेल खानी चाहिए।
  • ऑनलाइन प्रोफाइल/पब्लिक जानकारी की समीक्षा: नीति के तहत यदि प्रोफाइल “पब्लिक” रखने का निर्देश है, तो गलत/पुरानी/असंगत जानकारी को समझदारी से संभालें—अचानक बदलाव करने से पहले प्रभाव सोचें।
  • नियोक्ता/एचआर से पहले से प्लानिंग: बैकअप वर्क अरेंजमेंट, क्लाइंट कम्युनिकेशन, और लीव/पेरोल नीतियों पर पहले से स्पष्टता लें।
  • यात्रा निर्णय में सावधानी: जिनका वीज़ा स्टैम्पिंग जरूरी है, उनके लिए बिना ठोस अपॉइंटमेंट/वेट-टाइम आकलन के यात्रा करना जोखिमपूर्ण हो सकता है।

कुल मिलाकर, H-1B visa appointments cancelled की यह लहर संकेत देती है कि वीज़ा-प्रक्रिया अब सिर्फ इंटरव्यू तक सीमित नहीं, बल्कि डिजिटल/ऑनलाइन सत्यापन के नए चरण में प्रवेश कर चुकी है। जैसे-जैसे यह प्रक्रिया नियमित होगी, उम्मीद है कि शेड्यूलिंग स्थिर होगी—लेकिन तब तक हजारों लोगों के लिए दिसंबर 2025 की यह देरी एक बड़ा सबक बन गई है: स्टैम्पिंग-डिपेंडेंट ट्रैवल हमेशा “लो-रिस्क” नहीं होता।