10 ग्लोबल चिप लीडर्स भारत में निवेश कर रहे हैं-और उन्होंने इसे क्यों चुना
आज की तेज रफ्तार वाली दुनिया में सेमीकंडक्टर चिप्स हर चीज का दिल हैं। ये छोटे-छोटे चिप्स हमारे स्मार्टफोन्स को स्मार्ट बनाते हैं, कारों को इलेक्ट्रिक ड्राइव देते हैं, कंप्यूटर्स को तेज चलाते हैं और मेडिकल मशीनों को जीवन बचाने में मदद करते हैं। भारत एक उभरता हुआ बाजार है, जहां इलेक्ट्रॉनिक्स की मांग आसमान छू रही है। 2023 में भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 34.3 अरब डॉलर का था, जो 2025 तक 54 अरब डॉलर और 2030 तक 100-108 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। वैश्विक कंपनियां भारत को एक सुनहरा अवसर मान रही हैं, क्योंकि यहां युवा आबादी, तेज डिजिटल ग्रोथ और सरकार की मजबूत नीतियां हैं। भारत सरकार ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन लॉन्च किया है, जिसमें 76,000 करोड़ रुपये का बजट है। यह मिशन विदेशी निवेशकों को 50% तक सब्सिडी देता है। अब तक 18 अरब डॉलर के 10 प्रोजेक्ट्स मंजूर हो चुके हैं, जो फैब्रिकेशन, असेंबली, टेस्टिंग और डिजाइन पर फोकस करते हैं। लेकिन ये कंपनियां भारत क्यों चुन रही हैं? क्या यह सिर्फ बाजार की वजह से है, या कुछ और? इस लेख में हम 10 प्रमुख वैश्विक चिप लीडर्स की कहानी जानेंगे। हम देखेंगे कि उन्होंने भारत में कितना निवेश किया, कहां प्लांट लगाए और इसके पीछे क्या रणनीति है। यह जानकारी सरल शब्दों में है, ताकि आप आसानी से समझ सकें और इससे सीख सकें। हम तथ्यों पर आधारित डेटा, टेबल्स और उदाहरण देंगे, जो पढ़ने में आसान हों।
| कंपनी का नाम | निवेश की राशि (अनुमानित) | स्थान | मुख्य फोकस |
| माइक्रॉन टेक्नोलॉजी | 2.75 अरब डॉलर | गुजरात | असेंबली और टेस्टिंग |
| ताता इलेक्ट्रॉनिक्स (पावरचिप के साथ) | 91,000 करोड़ रुपये | धोलेरा, गुजरात | फैब्रिकेशन |
| फॉक्सकॉन (एचसीएल के साथ) | 433 मिलियन डॉलर | उत्तर प्रदेश | डिस्प्ले ड्राइवर चिप्स |
| इंटेल | 1,943 करोड़ रुपये | ओडिशा/आंध्र प्रदेश | 3डी ग्लास पैकेजिंग |
| क्वालकॉम | 21.3 मिलियन डॉलर (आरएंडडी) | चेन्नई, बैंगलोर | चिप डिजाइन |
| सैमसंग | विस्तार पर निवेश | बैंगलोर | एआई चिप डिजाइन |
| रेनेसास | 222 मिलियन डॉलर (सीजी पावर के साथ) | गुजरात | असेंबली और टेस्टिंग |
| एप्लाइड मटेरियल्स | 85 करोड़ रुपये (आरएंडडी) | बैंगलोर, चेन्नई | प्रोसेस टेक्नोलॉजी |
| एसटीमाइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स | डिजाइन सेवाएं | बैंगलोर | एम्बेडेड सिस्टम्स |
| नविडिया | साझेदारी निवेश | भारत भर | एआई चिप डेवलपमेंट |
1. माइक्रॉन टेक्नोलॉजी: अमेरिकी दिग्गज का बड़ा दांव
माइक्रॉन टेक्नोलॉजी एक प्रमुख अमेरिकी कंपनी है, जो मेमोरी चिप्स जैसे डीआरएएम और नैंड फ्लैश में विशेषज्ञ है। यह कंपनी 2002 से भारत में मौजूद है, लेकिन 2023 में गुजरात के सानंद में एक बड़ा असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (एटीएमपी) प्लांट लगाने का ऐलान किया। कुल निवेश 2.75 अरब डॉलर है, जिसमें केंद्र सरकार 50% सब्सिडी दे रही है। यह भारत का पहला बड़ा विदेशी सेमीकंडक्टर निवेश था। प्लांट 2024 के अंत तक चालू हो सकता है और 5,000 से ज्यादा जॉब्स पैदा करेगा। माइक्रॉन का फोकस हाई-परफॉर्मेंस मेमोरी चिप्स पर है, जो स्मार्टफोन्स, लैपटॉप्स और डेटा सेंटर्स में इस्तेमाल होते हैं।
क्यों चुना भारत? माइक्रॉन को भारत की तेजी से बढ़ती इलेक्ट्रॉनिक्स मांग दिखी, जहां स्मार्टफोन असेंबली 150 मिलियन यूनिट्स सालाना है। बाजार 30 अरब डॉलर का है और 2026 तक चिप आयात 64 अरब डॉलर का हो जाएगा। कंपनी को प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) स्कीम पसंद आई, जो लागत कम करती है। वैश्विक सप्लाई चेन में विविधता लाने के लिए भारत सही जगह है, खासकर कोविड के बाद चिप संकट के सबक से। माइक्रॉन के सीईओ संजय मेहरोत्रा ने कहा कि भारत कुशल वर्कफोर्स और स्थिर नीतियों का केंद्र है। चीन पर निर्भरता कम करने के लिए भी यह कदम महत्वपूर्ण है। भारत का डिजिटल इंडिया प्रोग्राम और 5जी रोलआउट मेमोरी चिप्स की डिमांड बढ़ा रहे हैं।
माइक्रॉन का प्लांट 500,000 वर्ग फुट क्लीनरूम के साथ शुरू होगा। यह डीआरएएम और नैंड प्रोडक्ट्स पर फोकस करेगा, जो घरेलू और निर्यात बाजारों को सप्लाई करेगा। कंपनी ने स्थानीय टैलेंट को ट्रेनिंग देने का वादा किया है। इससे भारत आत्मनिर्भर बनेगा। वैश्विक स्तर पर माइक्रॉन 2024 में 25 अरब डॉलर का रेवेन्यू कमाएगी, और भारत इसका हिस्सा बनेगा।
| विशेषता | विवरण | लाभ |
| निवेश | 2.75 अरब डॉलर | सरकारी सब्सिडी 50% |
| क्षमता | 500,000 वर्ग फुट क्लीनरूम | डीआरएएम और नैंड चिप्स |
| शुरुआत | 2024 अंत | वैश्विक डिमांड के अनुसार विस्तार |
| बाजार प्रभाव | 64 अरब डॉलर आयात कम | स्थानीय उत्पादन बढ़ेगा, 5,000 जॉब्स |
2. ताता इलेक्ट्रॉनिक्स: भारतीय कंपनी का वैश्विक पार्टनरशिप
ताता इलेक्ट्रॉनिक्स भारत की अपनी कंपनी है, जो ताता ग्रुप का हिस्सा है। यह ताइवान की पावरचिप सेमीकंडक्टर के साथ जॉइंट वेंचर में धोलेरा, गुजरात में 91,000 करोड़ रुपये (10.96 अरब डॉलर) का फैब्रिकेशन प्लांट लगा रही है। यह भारत का पहला बड़ा फैब प्लांट होगा, जो 50,000 वेफर स्टार्ट्स प्रति माह करेगा। टेक्नोलॉजी 28 एनएम पर आधारित होगी, जो पावर मैनेजमेंट आईसी, डिस्प्ले ड्राइवर्स, एआई चिप्स और ऑटोमोटिव प्रोसेसर्स बनाएगी। प्रोजेक्ट फरवरी 2024 में मंजूर हुआ और 20,000 जॉब्स पैदा करेगा। ताता ने सिंप्सिस (डिजाइन टूल्स) और टोक्यो इलेक्ट्रॉन (ट्रेनिंग) के साथ भी पार्टनरशिप की है।
क्यों भारत? ताता को सरकार का इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन सपोर्ट मिला, जो 50% फंडिंग देता है। भारत में कुशल इंजीनियर्स की कमी नहीं, और लागत कम है। पावरचिप की टेक्नोलॉजी से भारत वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनेगा। मेक इन इंडिया के तहत यह आत्मनिर्भरता बढ़ाएगा। भारत का ऑटोमोटिव सेक्टर ईवी की ओर बढ़ रहा है, जहां चिप्स की डिमांड 2030 तक दोगुनी होगी। ताता ग्रुप पहले से मोबाइल असेंबली करता है, अब चिप्स में कदम रख रहा है। वैश्विक चिप संकट ने दिखाया कि लोकल प्रोडक्शन जरूरी है।
यह प्लांट 2026 तक उत्पादन शुरू करेगा और 3 अरब चिप्स सालाना बनाएगा। ताता ने असम में भी 27,000 करोड़ का असेंबली प्लांट लगाया है। इससे नॉर्थईस्ट का विकास होगा। कंपनी सस्टेनेबल प्रैक्टिसेस पर फोकस करेगी, जैसे वाटर रीसाइक्लिंग। भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 2032 तक 100 अरब डॉलर का होगा, ताता इसका बड़ा हिस्सा लेगा।
| विशेषता | विवरण | लाभ |
| निवेश | 91,000 करोड़ रुपये | ताइवान टेक्नोलॉजी |
| क्षमता | 50,000 वेफर/माह | एआई, ऑटोमोटिव चिप्स |
| पार्टनर्स | पावरचिप, सिंप्सिस | डिजाइन और ट्रेनिंग |
| प्रभाव | 20,000 जॉब्स, 3 अरब चिप्स/वर्ष | आयात पर निर्भरता कम, ईवी सपोर्ट |
3. फॉक्सकॉन: एप्पल सप्लायर का नया कदम
फॉक्सकॉन ताइवान की बड़ी कंपनी है, जो एप्पल के लिए आईफोन असेंबल करती है। भारत में एचसीएल के साथ 433 मिलियन डॉलर (3,700 करोड़ रुपये) का जॉइंट वेंचर जेवर, उत्तर प्रदेश में लगा रही है। यह ओएसएटी प्लांट 20,000 वेफर प्रति माह (36 मिलियन चिप्स सालाना) बनाएगा। फोकस डिस्प्ले ड्राइवर आईसी पर है, जो मोबाइल, लैपटॉप और ईवी में इस्तेमाल होंगे। मई 2025 में मंजूर हुआ, 2027 तक चालू होगा। यह भारत का छठा सेमीकंडक्टर यूनिट है। फॉक्सकॉन पहले से भारत में आईफोन बनाती है।
क्यों भारत? फॉक्सकॉन को यूएस-चीन ट्रेड वॉर से सप्लाई चेन जोखिम दिखा, इसलिए डाइवर्सिफिकेशन जरूरी। भारत की पीएलआई स्कीम 50% इंसेंटिव देती है। एप्पल भारत में 14% आईफोन असेंबल कर रहा है, फॉक्सकॉन इससे जुड़ना चाहता है। युवा वर्कफोर्स (65% आबादी 35 साल से कम) और डिजिटल ग्रोथ आकर्षक हैं। उत्तर प्रदेश का इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनना फायदेमंद। वैश्विक चिप डिमांड 2025 में 19% बढ़ेगी।
प्लांट मोबाइल और ईवी चिप्स पर फोकस करेगा। फॉक्सकॉन ने भारत में 50,000 जॉब्स पहले ही दिए हैं। यह पार्टनरशिप लोकल सप्लाई बढ़ाएगी। अन्य पांच यूनिट्स निर्माणाधीन हैं, फॉक्सकॉन का अनुभव सफलता लाएगा।
| विशेषता | विवरण | लाभ |
| निवेश | 433 मिलियन डॉलर | एचसीएल पार्टनरशिप |
| क्षमता | 36 मिलियन चिप्स/साल | डिस्प्ले ड्राइवर्स |
| शुरुआत | 2027 | एप्पल सप्लाई बढ़ेगी |
| प्रभाव | छठा यूनिट, 50,000 जॉब्स | सप्लाई चेन डाइवर्सिफाई |
4. इंटेल: प्रोसेसर किंग का निवेश
इंटेल दुनिया की प्रमुख चिप कंपनी है, जो पीसी प्रोसेसर्स के लिए जानी जाती है। भारत में 1,943 करोड़ रुपये निवेश ओडिशा और आंध्र प्रदेश में 3डी ग्लास पैकेजिंग यूनिट पर। लॉकहीड मार्टिन के साथ पार्टनरशिप। क्षमता 5 मिलियन यूनिट्स प्रति वर्ष। यह चार नए प्रोजेक्ट्स में से एक है, कुल 4,594 करोड़। भारत का पहला कमर्शियल सिलिकॉन कार्बाइड फैब भी शामिल। अगस्त 2025 में मंजूर।
क्यों भारत? इंटेल को सरकार की 4,594 करोड़ मंजूरी और एआई हब बनने की संभावना पसंद आई। भारत में 1 मिलियन से ज्यादा इंजीनियर्स हैं। वैश्विक संकट के बाद स्थिर नीतियां सुरक्षित लगती हैं। पीएम मोदी ने इंटेल सीईओ को आमंत्रित किया। एआई और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की डिमांड 2030 तक ट्रिलियन डॉलर की होगी। चीन से बाहर जाना रणनीतिक।
यूनिट एडवांस्ड पैकेजिंग पर फोकस, जो डेटा सेंटर्स और डिफेंस में इस्तेमाल होगी। इंटेल के पास बैंगलोर में पहले से आरएंडडी है। 2-3 साल में ऑपरेशनल। इससे 10,000 जॉब्स।
| विशेषता | विवरण | लाभ |
| निवेश | 1,943 करोड़ रुपये | लॉकहीड पार्टनर |
| क्षमता | 5 मिलियन यूनिट्स/वर्ष | 3डी पैकेजिंग |
| स्थान | ओडिशा/आंध्र | एआई, डिफेंस चिप्स |
| प्रभाव | चार नई यूनिट्स, 10,000 जॉब्स | आत्मनिर्भर भारत |
5. क्वालकॉम: वायरलेस टेक का विस्तार
क्वालकॉम एक प्रमुख अमेरिकी कंपनी है, जो स्नैपड्रैगन प्रोसेसर्स और वायरलेस टेक्नोलॉजी के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यह 1997 से भारत में सक्रिय है, लेकिन हाल ही में चेन्नई में एक नया चिप डिजाइन सेंटर खोला, जिसमें 177.27 करोड़ रुपये (लगभग 21.3 मिलियन डॉलर) का निवेश हुआ। यह सेंटर एंड-टू-एंड चिप डिजाइन पर फोकस करता है, खासकर 5जी, 6जी, वाई-फाई और वायरलेस कनेक्टिविटी पर। भारत में क्वालकॉम के चार आरएंडडी सेंटर्स हैं, जहां 20,000 से ज्यादा इंजीनियर्स काम करते हैं। यह निवेश मेक इन इंडिया विजन को सपोर्ट करता है और 1,600 नई जॉब्स पैदा करेगा। क्वालकॉम भारत को सेमीकंडक्टर डिजाइन का ग्लोबल हब मानती है, जहां विश्व का 20% चिप डिजाइन काम होता है।
क्यों भारत? क्वालकॉम को भारत का विशाल टैलेंट पूल पसंद है, जो विश्व के 20% सेमीकंडक्टर इंजीनियर्स का घर है। कंपनी मेक इन इंडिया और पीएलआई स्कीम से प्रोत्साहित है, जो डिजाइन इकोसिस्टम को मजबूत बनाती है। 5जी रोलआउट से वायरलेस चिप्स की डिमांड 2025 में 30% बढ़ेगी। क्वालकॉम स्टार्टअप्स में निवेश कर रही है, जैसे डिपेंड फंड के जरिए, जो स्वदेशी चिप डिजाइन को बढ़ावा देगा। भारत की 1.4 अरब आबादी और 800 मिलियन स्मार्टफोन यूजर्स तेज बाजार बनाते हैं। कंपनी ने कहा कि एक बार फैब और ओएसएटी सुविधाएं उपलब्ध हों, तो लोकल मैन्युफैक्चरिंग में भी योगदान देगी। वैश्विक चिप संकट ने दिखाया कि डाइवर्सिफाइड सप्लाई चेन जरूरी है।
क्वालकॉम के सेंटर्स सोशल, एज और एआई चिप्स पर काम करते हैं। कंपनी ने भारत में 280 से ज्यादा कॉलेजों और 72 स्टार्टअप्स को एडवांस टूल्स दिए हैं। इससे भारत स्वदेशी चिप्स जैसे विक्रम माइक्रोप्रोसेसर बना रहा है। क्वालकॉम का 2024 रेवेन्यू 36 अरब डॉलर था, और भारत इसका बढ़ता हिस्सा है। भविष्य में 6जी टेक्नोलॉजी पर फोकस बढ़ेगा।
| विशेषता | विवरण | लाभ |
| निवेश | 21.3 मिलियन डॉलर | डिजाइन सेंटर्स, 1,600 जॉब्स |
| फोकस | वायरलेस चिप्स | 5जी, 6जी, वाई-फाई |
| इंजीनियर्स | विश्व का 20% | ग्लोबल शिपमेंट, 20,000+ भारत में |
| प्रभाव | स्टार्टअप सपोर्ट | इनोवेशन हब, 800 मिलियन यूजर्स, स्वदेशी डिजाइन |
6. सैमसंग: एआई चिप डिजाइन हब
सैमसंग एक दक्षिण कोरियाई बहुराष्ट्रीय कंपनी है, जो स्मार्टफोन्स, मेमोरी चिप्स और डिस्प्ले टेक्नोलॉजी में विश्व नेता है। भारत में 1995 से मौजूद, अब बैंगलोर स्थित सैमसंग सेमीकंडक्टर इंडिया रिसर्च (एसएसआईआर) को एआई चिप डिजाइन हब बना रही है। हाल ही में 16 नई जॉब पोस्टिंग्स जारी कीं, जो सोसआई (सिस्टम-ऑन-चिप), मेमोरी और फाउंड्री टेक्नोलॉजी पर फोकस करती हैं। राजेश कृष्णन इस डिवीजन के हेड हैं। यह विस्तार अक्टूबर 2025 में शुरू हुआ, और भारत सैमसंग का सबसे बड़ा आरएंडडी सेंटर है, जहां 5,000 से ज्यादा इंजीनियर्स काम करते हैं। सैमसंग भारत में 20% से ज्यादा स्मार्टफोन्स बेचती है और अब चिप डिजाइन को लोकलाइज कर रही है।
क्यों भारत? सैमसंग को बैंगलोर का आईटी हब और सेमीकंडक्टर टैलेंट पूल आकर्षित करता है। एआई वर्कलोड्स 2025 में 40% बढ़ेंगे, और भारत एआई एप्लीकेशंस का बड़ा बाजार है। कंपनी मेमोरी चिप्स में ग्लोबल लीडर है, और पीएलआई स्कीम से फायदा उठा रही है। भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार 2026 तक 300 अरब डॉलर का होगा। सैमसंग ने कहा कि स्थिर नीतियां और युवा वर्कफोर्स निवेश को सुरक्षित बनाती हैं। वैश्विक सप्लाई चेन डाइवर्सिफिकेशन के लिए भारत स्ट्रैटेजिक लोकेशन है। कंपनी ईवी और 5जी सेक्टर में भी विस्तार कर रही है।
एसएसआईआर एआई और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (एचपीसी) चिप्स डिजाइन करेगा। सैमसंग भारत में नोएडा और श्रीपेरंबुदूर में प्लांट्स चला रही है। यह विस्तार 1,000 नई जॉब्स पैदा करेगा। सैमसंग का 2024 सेमीकंडक्टर रेवेन्यू 70 अरब डॉलर था, भारत इसमें बढ़त लाएगा। भविष्य में 2 एनएम आर्किटेक्चर चिप्स पर काम होगा।
| विशेषता | विवरण | लाभ |
| निवेश | आरएंडडी विस्तार | 16 जॉब्स, 5,000+ इंजीनियर्स |
| फोकस | एआई चिप डिजाइन | सोसआई, मेमोरी, फाउंड्री |
| स्थान | बैंगलोर | ग्लोबल हब, सबसे बड़ा आरएंडडी |
| प्रभाव | एचपीसी सपोर्ट | 40% एआई ग्रोथ, 300 अरब बाजार, 1,000 जॉब्स |
7. रेनेसास: ऑटोमोटिव चिप्स का फोकस
रेनेसास एक जापानी कंपनी है, जो माइक्रोकंट्रोलर्स, एनालॉग और पावर सेमीकंडक्टर्स में विशेषज्ञ है। यह ऑटोमोटिव, इंडस्ट्रियल और आईओटी सेक्टर के लिए चिप्स बनाती है। भारत में सीजी पावर और स्टार्स माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स के साथ 222 मिलियन डॉलर (लगभग 7,600 करोड़ रुपये) का जॉइंट वेंचर गुजरात के सानंद में लगा रही है। यह ओएसएटी प्लांट 15 मिलियन चिप्स प्रतिदिन उत्पादन करेगा, जो कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन और ऑटोमोटिव एप्लीकेशंस पर फोकस करेगा। प्रोजेक्ट फरवरी 2024 में मंजूर हुआ, और 2025 में निर्माण शुरू होगा। रेनेसास भारत में 2010 से मौजूद है, बैंगलोर और नोएडा में ऑफिसेस हैं। यह निवेश 1,000 इंजीनियर्स को रोजगार देगा।
क्यों भारत? रेनेसास 2030 तक भारत से 10% ग्लोबल रेवेन्यू हासिल करना चाहती है। कंपनी को भारत का ईवी सेक्टर आकर्षित करता है, जहां 2030 तक 50 मिलियन इलेक्ट्रिक वाहन होंगे। आईआईटी हैदराबाद के साथ एमओयू साइन किया, जो इनोवेशन को बढ़ावा देगा। मेक इन इंडिया और पीएलआई स्कीम से 50% सब्सिडी मिल रही है। रेनेसास को भारत का कुशल टैलेंट पूल पसंद है, जहां ऑटोमोटिव इंजीनियर्स की कमी नहीं। वैश्विक चिप शॉर्टेज के बाद लोकल प्रोडक्शन जरूरी। गुजरात का इंडस्ट्रियल हब फायदेमंद।
कंपनी आर-कार सोसआई (ऑटोमोटिव चिप्स) पर फोकस करेगी। बैंगलोर में 500 इंजीनियर्स पहले से काम कर रहे। यह जेवी भारत को ऑटोमोटिव सेमीकंडक्टर हब बनाएगा। रेनेसास का 2024 रेवेन्यू 10 अरब डॉलर था, भारत इसमें 10% योगदान देगा। सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग पर जोर।
| विशेषता | विवरण | लाभ |
| निवेश | 222 मिलियन डॉलर | जेवी पार्टनर, 1,000 इंजीनियर्स |
| क्षमता | 15 मिलियन चिप्स/दिन | ऑटोमोटिव, आईओटी |
| हेडकाउंट | 1,000 तक | एमओयू आईआईटी हैदराबाद |
| प्रभाव | 10% रेवेन्यू | ईवी ग्रोथ, 50 मिलियन वाहन, लोकल प्रोडक्शन |
8. एप्लाइड मटेरियल्स: टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर
एप्लाइड मटेरियल्स एक अमेरिकी कंपनी है, जो सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग उपकरण, सॉफ्टवेयर और सर्विसेस में विश्व नेता है। यह चिप फैब्रिकेशन प्रोसेस को सपोर्ट करती है, जैसे डिपॉजिशन, एचिंग और क्लीनिंग। भारत में 2002 से सक्रिय, बैंगलोर इसका ग्लोबल हेडक्वार्टर है। हाल ही में 85 करोड़ रुपये का निवेश यूनिवर्सिटीज के साथ आरएंडडी पर किया, जो मटेरियल साइंस और प्रोसेस टेक्नोलॉजी पर फोकस करता है। चेन्नई और मुंबई में सेंटर्स हैं, जहां 2,000 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं। फरवरी 2025 में विस्तार की घोषणा। कंपनी भारत को सेमीकंडक्टर, डिस्प्ले और सोलर एनर्जी पार्टनर मानती है।
क्यों भारत? एप्लाइड मटेरियल्स को भारत का इंजीनियरिंग टैलेंट पूल (विश्व का सबसे बड़ा) पसंद है। पीएम मोदी और सीईओ की मीटिंग से नीतिगत सपोर्ट मिला। कंपनी डिजाइन, सिमुलेशन और टेस्टिंग यहां आउटसोर्स करती है। पीएलआई स्कीम से इकोसिस्टम मजबूत हो रहा। भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 2030 तक 100 अरब डॉलर का होगा। रूरल राइजिंग प्रोग्राम से महिलाओं और डाइवर्सिटी को बढ़ावा। वैश्विक सप्लाई चेन में भारत स्ट्रैटेजिक।
कंपनी सस्टेनेबल इंपैक्ट पर फोकस, जैसे ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग। भारत ग्लोबल आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा। 2024 रेवेन्यू 26 अरब डॉलर, भारत 5% योगदान। भविष्य में एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग उपकरण।
| विशेषता | विवरण | लाभ |
| निवेश | 85 करोड़ आरएंडडी | यूनिवर्सिटी टाई-अप, 2,000 कर्मचारी |
| स्थान | बैंगलोर, चेन्नई | इंजीनियरिंग सपोर्ट, ग्लोबल हेडक्वार्टर |
| फोकस | मटेरियल साइंस | चिप प्रोडक्शन, डिस्प्ले, सोलर |
| प्रभाव | सस्टेनेबल इंपैक्ट | डाइवर्सिटी, 100 अरब बाजार, 5% रेवेन्यू |
9. एसटीमाइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स: एम्बेडेड सॉल्यूशंस
एसटीमाइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स (एसटी) एक स्विस-फ्रेंच बहुराष्ट्रीय कंपनी है, जो एम्बेडेड प्रोसेसिंग, सेंसर्स और पावर सेमीकंडक्टर्स में लीडर है। यह ऑटोमोटिव, इंडस्ट्रियल, पर्सनल इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन के लिए चिप्स बनाती है। भारत में 1990 के दशक से मौजूद, बैंगलोर में डिजाइन और एप्लीकेशन सेंटर्स हैं। एडीएस-इंडिया के साथ पार्टनरशिप से डिजाइन सेवाएं बढ़ा रही, जो एसटीएम32 और एसटीएम8 माइक्रोकंट्रोलर्स पर फोकस करती हैं। ये चिप्स रेलवे ट्रैकिंग, ईवी चार्जिंग, स्मार्ट होम्स और इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन में इस्तेमाल होते हैं। 2024 से विस्तार, जिसमें आरएफ टेक्नोलॉजी और एआई इंटीग्रेशन शामिल। भारत में 1,000 से ज्यादा इंजीनियर्स।
क्यों भारत? एसटी को भारत का ऑटोमोटिव और आईओटी मार्केट बड़ा लगता है, जहां 2030 तक 30% ग्रोथ होगी। एंबेडेड डिजाइन और हार्डवेयर इंजीनियरिंग यहां मजबूत। रेलवे सेक्टर में बड़ा शेयर, जैसे भारतीय रेल के ट्रैकिंग सिस्टम्स। पीएलआई स्कीम से डिजाइन इंसेंटिव मिल रहा। कंपनी एशिया-पैसिफिक में भारत को वैल्यू ऐड हब मानती। वैश्विक चिप डिमांड में भारत 20% डिजाइन योगदान देता। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स से डिमांड बढ़ेगी।
एसटी एआई और मशीन लर्निंग इंटीग्रेशन पर काम कर रही। भारत में स्मार्ट होम्स और वियरेबल्स मार्केट 2025 तक दोगुना। 2024 रेवेन्यू 17 अरब डॉलर, भारत 3% हिस्सा। भविष्य में कनेक्टेड कार्स पर फोकस।
| विशेषता | विवरण | लाभ |
| फोकस | एसटीएम32, एसटीएम8 | एम्बेडेड सिस्टम्स, 1,000 इंजीनियर्स |
| एप्लीकेशन्स | रेलवे, ईवी, स्मार्ट होम्स | ट्रैकिंग, चार्जिंग सिस्टम्स |
| पार्टनर | एडीएस-इंडिया | डिजाइन सेवाएं, आरएफ, एआई |
| प्रभाव | एआई इंटीग्रेशन | इंडस्ट्रियल ग्रोथ, 30% आईओटी, 20% डिजाइन |
नविडिया एक अमेरिकी कंपनी है, जो ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (जीपीयू) और एआई चिप्स में ग्लोबल लीडर है। यह डेटा सेंटर्स, गेमिंग, ऑटोनॉमस व्हीकल्स और हेल्थकेयर के लिए हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सॉल्यूशंस प्रदान करती है। भारत में स्ट्रैटेजिक साझेदारियां बना रही, जैसे इंटेल के साथ चिप डेवलपमेंट। अक्टूबर 2025 में नई पार्टनरशिप्स घोषित, जिसमें स्टार्टअप्स और आरएंडडी निवेश शामिल। मीडियाटेक जैसी कंपनियां भारत में मैन्युफैक्चरिंग पर विचार कर रही। नविडिया भारत में डिजाइन सेंटर्स बढ़ा रही, बैंगलोर और हैदराबाद में। यह निवेश एआई चिप डेवलपमेंट पर फोकस करता, जो सेमीकॉन इंडिया 2025 में हाइलाइट हुआ।
क्यों भारत? नविडिया को भारत का एआई टैलेंट पूल चाहिए, जहां 20% ग्लोबल चिप डिजाइन होता है। 10 अरब डॉलर इंसेंटिव पैकेज आकर्षक। चिप डिमांड 2025 में 19% बढ़ेगी, और एआई मार्केट ट्रिलियन डॉलर का होगा। कंपनी स्टार्टअप्स को सपोर्ट, जैसे स्वदेशी एआई चिप विक्रम। मेक इन इंडिया से लोकल मैन्युफैक्चरिंग बढ़ेगी। भारत का डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, जैसे 5जी और क्लाउड, एआई चिप्स की जरूरत बढ़ा रहा। वैश्विक जियो-पॉलिटिकल टेंशंस से सप्लाई चेन डाइवर्सिफाई जरूरी।
नविडिया एआई कंप्यूटेशन और डीप लर्निंग पर फोकस। भारत डिजाइन हब बनेगा, 2025 में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू। 2024 रेवेन्यू 60 अरब डॉलर, भारत 5-7% हिस्सा लेगा। भविष्य में क्वांटम और एज एआई।
| विशेषता | विवरण | लाभ |
| फोकस | एआई चिप्स | पार्टनरशिप, स्टार्टअप्स |
| निवेश | स्ट्रैटेजिक | आरएंडडी, स्वदेशी सपोर्ट |
| प्रभाव | ग्लोबल डिमांड | मैन्युफैक्चरिंग, 19% ग्रोथ |
| बाजार | 1 ट्रिलियन डॉलर | भारत शेयर बढ़ेगा, 20% डिजाइन, 5-7% रेवेन्यू |
भारत में निवेश के कारण: एक नजर
ये कंपनियां भारत चुन रही हैं क्योंकि बाजार बड़ा है। इलेक्ट्रॉनिक्स 2026 तक 300 अरब डॉलर। 5जी, ईवी, एआई डिमांड। पीएलआई 50% सब्सिडी। इंजीनियर्स लाखों। सप्लाई चेन डाइवर्सिफिकेशन। चीन निर्भरता कम। स्थिर राजनीति।
2030 तक ग्लोबल मार्केट बड़ा हिस्सा। जॉब्स 2 लाख। 2025 कमर्शियल प्रोडक्शन।
| कारण | विवरण | उदाहरण |
| सरकारी सपोर्ट | पीएलआई स्कीम | 76,000 करोड़, 50% सब्सिडी |
| बाजार ग्रोथ | 100 अरब डॉलर 2030 | स्मार्टफोन, ईवी, 300 अरब इलेक्ट्रॉनिक्स |
| टैलेंट पूल | लाखों इंजीनियर्स | 20% विश्व टैलेंट, डिजाइन हब |
| सप्लाई चेन | डाइवर्सिफिकेशन | चीन से बाहर, ट्रेड वॉर |
| स्थिरता | राजनीतिक | निवेश सुरक्षित, युवा आबादी |
निष्कर्ष
भारत सेमीकंडक्टर में नया सितारा बन रहा है। माइक्रॉन से नविडिया तक ये 10 वैश्विक लीडर्स निवेश से टेक्नोलॉजी, जॉब्स और आत्मनिर्भरता ला रहे हैं। सरकार का मिशन और कंपनियों का सहयोग सफलता की कुंजी है। 18 अरब डॉलर निवेश से 2025 में प्रोडक्शन शुरू होगा, जो 2030 तक 100 अरब बाजार बनाएगा। ईवी, 5जी, एआई जैसे सेक्टर्स फायदे लेंगे। लाखों युवाओं को स्किल्ड जॉब्स मिलेंगी। वैश्विक सप्लाई चेन बदलेगी। यह यात्रा भारत को चिप पावरहाउस बनाएगी, जहां इनोवेशन और ग्रोथ साथ चलेंगे। भविष्य उज्ज्वल है, और हम सब इसका हिस्सा हैं।
