गाजा शांति योजना पर मिस्र शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे स्टारमर, नंबर 10 ने कहा
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सर कीर स्टार्मर गाज़ा संकट को खत्म करने के लिए सोमवार को मिस्र के शर्म अल-शेख में आयोजित होने वाले ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय शांति शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। इस सम्मेलन को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी संयुक्त रूप से अध्यक्षता करेंगे। इन दोनों नेताओं के अलावा, यूएन महासचिव एंटोनिओ गुटेरेस, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, और 20 से अधिक प्रमुख देशों के नेता इसमें हिस्सा लेंगे। माना जा रहा है कि यह सम्मेलन गाज़ा पट्टी में दो साल से चल रही भीषण जंग को खत्म करने और पूरे मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता की नई शुरुआत कराने का ऐतिहासिक अवसर होगा.
सम्मेलन के अहम उद्देश्य और अंतरराष्ट्रीय भूमिका
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य गाज़ा में संघर्ष का अंत करना, क्षेत्र में शांति और स्थिरता स्थापित करना और भविष्य के लिए नए सुरक्षा मार्गदर्शन तैयार करना है। सम्मेलन से पहले मिस्र, कतर, तुर्की और अमेरिका की मध्यस्थता में लगातार कई दिनों तक कठोर वार्ताएं हुईं, जिनमें इन देशों की कूटनीति केंद्रीय भूमिका में रही। डाउनिंग स्ट्रीट ने कहा है कि प्रधानमंत्री स्टार्मर मिस्र, कतर, तुर्की और राष्ट्रपति ट्रंप को उनके योगदान के लिए धन्यवाद देंगे और दूसरे चरण को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग बनाए रखने का आह्वान करेंगे। इस सम्मेलन में फ्रांस अपनी सक्रिय भूमिका को दर्शाते हुए पूरी तरह समझौते के क्रियान्वयन का समर्थन करेगा.
गाज़ा युद्ध विराम समझौते के चरण
गाज़ा युद्ध विराम समझौता कई चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण में शुक्रवार से तुरंत युद्धविराम लागू हो गया है, जिसके दौरान हमास को सोमवार दोपहर 12:00 बजे (09:00 जीएमटी) तक सभी जीवित इसरायली बंधकों को रिहा करना है। इसमें लगभग 20 जीवित बंधक और करीब 28 मृतकों के शव शामिल हैं। इसके बदले में इसरायल को लगभग 250 फिलीस्तीनी कैदियों और 1,700 गाज़ा के हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करना होगा। इसके अलावा, गाज़ा में पांच नई क्रॉसिंग खोलने और प्रति दिन 400 से लेकर 600 ट्रकों तक मानवीय सहायता भेजने की व्यवस्था की गई है.
इस पहले चरण में इसरायली सेना गाज़ा सिटी, राफा, खान यूनुस और गाज़ा के उत्तर से पीछे हट जाएगी और क्षेत्र के लगभग 53% हिस्से पर अपनी सैन्य मौजूदगी सीमित करेगी। समझौते के मुताबिक अगले 72 घंटों में सभी बंधकों की रिहाई और युद्ध विरोधी कैदियों की अदला-बदली का लक्ष्य रखा गया है.
आगामी जटिल मुद्दे और आगे की प्रक्रिया
समझौते का दूसरा और तीसरा चरण अभी तक पूर्ण रूप से तय नहीं है, जिन पर सम्मेलन के बाद वार्ता जारी रहेगी। इनमें प्रमुख चुनौतीपूर्ण मुद्दे गाज़ा का दीर्घकालिक शासन, इसरायली सेना की पूरी वापसी, हमास का पूर्ण निरस्त्रीकरण, और क्षेत्र की सुरक्षा का ठोस ढांचा कायम करना शामिल है। इन पहलुओं पर सहमति बनाना मुश्किल हो सकता है क्योंकि दोनों पक्षों के हित टकराते रहे हैं.
युद्ध विराम समझौते की रक्षा और निगरानी के लिए एक संयुक्त अंतरराष्ट्रीय बल का गठन करने की योजना है, जिसमें अमेरिका, मिस्र, तुर्की, कतर और अन्य अरब-इस्लामी देशों के सैनिक रहेंगे। यूके ने स्पष्ट किया है कि वह खुद सैनिक नहीं भेजेगा, लेकिन मानवीय सहायता और निजी निवेश के जरिये गाज़ा के पुनर्निर्माण में योगदान देगा.
अंतरराष्ट्रीय नेताओं की प्रतिक्रियाएं और आगे की रणनीति
ब्रिटिश प्रधानमंत्री सम्मेलन में गाज़ा में स्थायी शांति और सुरक्षा के लिए यूके की दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराएंगे और वैश्विक साझेदारों से निरंतर सहयोग की अपील करेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि क्षेत्र के सभी देश लड़ाई से थक चुके हैं और अब स्थायी समाधान चाहते हैं।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने भी पूरी तरह सहयोग का भरोसा दिलाया है जबकि मिस्र के विदेश मंत्रालय के अनुसार, शिखर सम्मेलन दुनिया भर के नेताओं को एकजुट करेगा ताकि मध्य-पूर्व को नई स्थिरता और सुरक्षा मिल सके.
गाज़ा में मौजूदा जंग 7 अक्टूबर 2023 को हमास के दक्षिणी इसरायल पर हमलों से शुरू हुई थी, जिसमें लगभग 1,200 लोग मारे गए थे और 251 को यरूशलम के बंधक बना लिया गया था। प्रतिक्रिया में इसरायली सेना ने तीनों हिस्सों में भीषण सैन्य अभियान छेड़ दिया, जिसकी वजह से स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार गाज़ा में 67,000 से अधिक लोग मारे गए, जिनमें 18,000 से ज्यादा बच्चे थे.
जनवरी 2024 में भी एक अंतरराष्ट्रीय युद्ध विराम समझौता हुआ था, लेकिन वह सिर्फ दो महीने ही स्थिर रह पाया, क्योंकि कड़े मुद्दों पर सहमति नहीं बनी और इसरायल ने फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी थी.
शिखर सम्मेलन की व्यवस्थाएं और निगरानी
इस सम्मेलन की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने के लिए मिस्र के विदेश मंत्री और अमेरिकी विदेश मंत्री ने विस्तार से चर्चा की। अमेरिकी सैनिक, जो क्षेत्र में पहले से तैनात हैं, उन्हें फिलहाल इसरायल में स्थापित होने जा रहे नागरिक-सैन्य समन्वय केंद्र में तैनात किया जाएगा। यह केंद्र युद्ध विराम और मानवीय सहायता की निगरानी करेगा। समझौते के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र, मिस्र, कतर और अमेरिका भी भविष्य की व्यवस्था के गारंटर रहेंगे.
शर्म अल-शेख सम्मेलन से दुनियाभर को उम्मीद है कि गाज़ा पट्टी और क्षेत्र में नए युग की शुरुआत होगी, जहां विवाद और रक्तपात से स्थायी शांति और सुरक्षा का रास्ता निकलेगा। सम्मेलन में संयुक्त रूप से हस्ताक्षर होने के बाद ही समझौते के अन्य चरणों पर काम आगे बढ़ेगा और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगरानी में इनकी प्रगति तय की जाएगी।
जानकारी बीबीसी और द इंडिपेंडेंट से एकत्र की गई है।
