गाजा में हमास और फिलिस्तीनी कबीले के बीच भीषण लड़ाई
गाजा पट्टी के दक्षिणी शहर खान यूनिस में हमास की सुरक्षा बलों और स्थानीय अल-मुजाइदा कबीले के सशस्त्र सदस्यों के बीच युद्ध की शुरुआत के बाद से सबसे तीव्र आंतरिक संघर्ष भड़क उठा है। यह घटना न केवल क्षेत्र की नाजुक शांति को हिला रही है, बल्कि फिलिस्तीनियों के बीच पहले से व्याप्त डर, विस्थापन और तबाही के माहौल को और गहरा बना रही है, जहां हजारों परिवार अपनी जान बचाने के लिए लगातार विस्थापित हो रहे हैं।
घटना का विस्तृत विवरण
यह झड़प रविवार को खान यूनिस के अल-मुजाइदा इलाके में दोपहर के समय शुरू हुई, जो कई घंटों तक चली और पूरे इलाके को युद्धक्षेत्र में बदल दिया। हमास के आधिकारिक बयान के अनुसार, उनकी विशेष सुरक्षा इकाई ने इलाके में एक सुनियोजित छापेमारी अभियान चलाया था। इसका उद्देश्य उन व्यक्तियों को गिरफ्तार करना था, जिन पर इजरायल के साथ गुप्त सहयोग करने के गंभीर आरोप लगे हुए थे। हमास ने दावा किया कि ये संदिग्ध गाजा की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहे थे, खासकर जब क्षेत्र इजरायली हमलों का सामना कर रहा है। छापेमारी के दौरान हमास के सदस्यों ने घर-घर तलाशी ली, लेकिन यह कार्रवाई जल्द ही हिंसक टकराव में बदल गई।
दूसरी ओर, स्थानीय निवासियों और कबीले के सदस्यों के बयानों से एक अलग तस्वीर उभरती है। उनके अनुसार, लगभग 50 सशस्त्र व्यक्ति पांच पिकअप ट्रकों पर सवार होकर अचानक हमला करने पहुंचे। इनके पास आधुनिक असॉल्ट राइफलें, जैसे कि AK-47 और M16, के साथ-साथ एक शक्तिशाली रॉकेट-प्रोपेल्ड ग्रेनेड (आरपीजी) लॉन्चर भी था। ये हमलावर सीधे अल-मुजाइदा कबीले के आवासीय क्वार्टर में घुस आए, जहां उन्होंने परिवार के कम से कम पांच सदस्यों को गोली मारकर हत्या कर दी। मारे गए लोगों में ज्यादातर युवा पुरुष थे, जो कबीले की सुरक्षा में लगे हुए थे। यह कबीला दक्षिणी गाजा का एक प्रमुख और प्रभावशाली परिवार है, जिसकी जड़ें दशकों पुरानी हैं और जो स्थानीय अर्थव्यवस्था, व्यापार और सामाजिक संरचना में गहराई से जुड़ा हुआ है। अल-मुजाइदा कबीले के सदस्य अक्सर गाजा के बाजारों और कृषि क्षेत्रों में सक्रिय रहते हैं, और उनकी संख्या हजारों में है, जो उन्हें हमास के लिए एक महत्वपूर्ण लेकिन चुनौतीपूर्ण ताकत बनाता है।
कबीले के सशस्त्र रिश्तेदारों ने तत्काल जवाबी कार्रवाई की। उन्होंने अपने हथियारों से लैस होकर हमास के सदस्यों पर हमला बोला, जिससे इलाके में भारी गोलीबारी शुरू हो गई। यह लड़ाई इतनी तीव्र थी कि आसपास के घरों की खिड़कियां टूट गईं, और कई निर्दोष नागरिकों को अपनी जान बचाने के लिए छिपना पड़ा। गाजा जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्र में ऐसी झड़पें आम लोगों के लिए विशेष रूप से खतरनाक साबित होती हैं, जहां सड़कें संकरी हैं और बचाव के साधन सीमित हैं।
सोशल मीडिया पर फैली रिपोर्ट्स और वीडियो
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, जैसे टेलीग्राम और फेसबुक, पर इस घटना से जुड़ी कई अनियंत्रित रिपोर्ट्स तेजी से वायरल हो रही हैं। हालांकि, इनकी स्वतंत्र सत्यापन करना बेहद मुश्किल है, क्योंकि गाजा में इंटरनेट कनेक्टिविटी अक्सर बाधित रहती है और इजरायली ब्लॉकेड के कारण सूचना का प्रवाह सीमित होता है। इन रिपोर्ट्स के अनुसार, 11 से अधिक हमास सदस्य इस झड़प में मारे गए, और कुछ के शवों को कबीले के सदस्यों द्वारा सड़कों पर घसीटा गया—एक ऐसा कृत्य जो पारंपरिक रूप से अपमान और बदले की भावना को दर्शाता है।
ऑनलाइन शेयर किए गए कई वीडियो फुटेज—जिनकी बीबीसी या अन्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने अभी तक पूरी तरह पुष्टि नहीं की है—में सैन्य वर्दी पहने खून से लथपथ शवों के दृश्य दिखाई देते हैं। एक वीडियो में एक आवाज का ओवरले है, जो दावा करता है कि ये शव हमास की विशेष ‘सहम यूनिट’ के सदस्यों के हैं। यह यूनिट हमास की आंतरिक सुरक्षा के लिए जानी जाती है और अक्सर संदिग्धों पर निगरानी रखती है। एक अन्य वीडियो में आरपीजी के हमले से एक आवासीय इमारत पर धमाका होता दिखाया गया है, उसके बाद लगातार गोलीबारी के दृश्य हैं। इन वीडियो में धुंधला धुआं, चीखें और भागते हुए लोग नजर आते हैं, जो घटना की भयावहता को रेखांकित करते हैं। गाजा में युद्ध के दौरान हथियारों की आसान उपलब्धता—जो काला बाजार और पुराने संघर्षों से आती है—ऐसी घटनाओं को और जटिल बना रही है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि गाजा में लाखों हथियार फैले हुए हैं, जो आंतरिक टकरावों को भड़काने का बड़ा कारण हैं।
झड़प के कुछ घंटों बाद स्थानीय बुजुर्गों और कबीले के नेताओं ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराई, जिसके परिणामस्वरूप मारे गए लोगों के शवों का आदान-प्रदान हुआ। यह एक पारंपरिक मध्यस्थता प्रक्रिया थी, जो गाजा की सामाजिक संरचना का हिस्सा है, जहां कबीले के सम्मानित सदस्य अक्सर सशस्त्र झगड़ों को सुलझाते हैं। हालांकि, यह समाधान अस्थायी लगता है, क्योंकि गहरे मुद्दे अनसुलझे रह गए हैं।
यह घटना फिलिस्तीनियों के बीच चिंता की लहर पैदा कर रही है। कई लोग आशंकित हैं कि शक्तिशाली कबीले, हमास का केंद्रीकृत नियंत्रण और हथियारों की बाढ़ से गाजा में गृहयुद्ध जैसी स्थिति बन सकती है। गाजा पट्टी, जो इजरायल की नाकाबंदी और चल रहे युद्ध से जूझ रही है, पहले से ही भयानक संकट में है। संयुक्त राष्ट्र की हालिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि युद्ध के कारण 20 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं, बुनियादी सुविधाएं नष्ट हो गई हैं, और भुखमरी का खतरा मंडरा रहा है। आंतरिक संघर्ष इस संकट को और बिगाड़ सकते हैं, खासकर जब कानून-व्यवस्था की कमी बढ़ रही हो। इतिहास गवाह है कि 2007 में हमास के फतह पर कब्जे के बाद भी आंतरिक झड़पें हुईं, जो आज भी सुलग रही हैं।
हमास के लिए चुनौतियां और ट्रंप का युद्धविराम प्रस्ताव
यह झड़प हमास की आंतरिक कमजोरियों को उजागर करती है। पिछले 17 वर्षों से सत्ता में रहते हुए हमास ने कई विरोधी समूहों और व्यक्तियों को दबाया है, जिससे व्यापक असंतोष फैला है। लेकिन ट्रंप के युद्धविराम प्रस्ताव को अस्वीकार करने का एक प्रमुख कारण हिंसक प्रतिशोध का डर भी है। प्रस्ताव के अनुसार, हमास को अपनी पूरी सैन्य क्षमता का निरस्त्रीकरण करना होगा, जो उसके हजारों सदस्यों के लिए सड़क पर मौत का खतरा पैदा कर सकता है। कबीले जैसे स्थानीय समूह इस कमजोरी का फायदा उठा सकते हैं, जैसा कि इस घटना में दिखा।
गाजा में हमास की सैन्य शाखा, इज्जुद्दीन अल-कसम ब्रिगेड्स, के प्रमुख ने बीबीसी को दिए बयान में स्पष्ट किया कि वे इस योजना से सहमत नहीं हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को यह प्रस्ताव पेश किया था, जो मध्य पूर्व शांति प्रक्रिया का हिस्सा है। इसमें तत्काल युद्धविराम, मानवीय सहायता की आपूर्ति और लंबी अवधि की बातचीत शामिल है। ट्रंप ने हमास को रविवार शाम 6 बजे तक (ईडीटी, जो जीएमटी के अनुसार रात 10 बजे है) सहमति देने की समय सीमा दी है, अन्यथा ‘सारी नर्क’ यानी पूर्ण तबाही की धमकी दी है। यह धमकी इजरायली सेना को और मजबूत कार्रवाई की छूट दे सकती है, जो पहले से ही गाजा पर हवाई और जमीनी हमले कर रही है।
ट्रंप का यह प्रस्ताव अमेरिकी मध्य पूर्व नीति का हिस्सा है, जो इजरायल के मजबूत समर्थन पर आधारित है। लेकिन हमास के आंतरिक दबाव—जैसे कि कबीले के साथ टकराव और सदस्यों की सुरक्षा—इसे स्वीकार करना मुश्किल बना रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि युद्धविराम नहीं हुआ, तो गाजा में आंतरिक अराजकता बढ़ेगी, जो पूरे क्षेत्र के लिए खतरा पैदा कर सकती है। फिलिस्तीनियों के लिए यह दोहरी चुनौती है: बाहरी युद्ध और आंतरिक विभाजन।
जानकारी एमएसएन और बीबीसी से एकत्र की गई है
