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EPFO ने लॉन्च की पासबुक लाइट, एक ही विंडो में मिलेगी PF की सारी जानकारी

ईपीएफओ ने नई डिजिटल सुविधा ‘पासबुक लाइट’ शुरू की है, जिससे अब सदस्यों को अपनी भविष्य निधि (पीएफ) से जुड़ी सभी जानकारी और सेवाएं एक ही लॉगिन के जरिए मिल सकेंगी। केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा की, और कहा कि इससे ईपीएफओ के लगभग सात करोड़ सदस्यों को सीधा फायदा पहुंचेगा, क्योंकि अब उन्हें अलग-अलग पोर्टल पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

पासबुक लाइट फीचर की पूरी जानकारी और इसके फायदे

पासबुक लाइट‘ ईपीएफओ के यूनिफाइड मेंबर पोर्टल का एक नया हिस्सा है, जो सदस्यों को अपनी पीएफ पासबुक की डिटेल्स आसानी से देखने की सुविधा देता है। ईपीएफओ की आधिकारिक वेबसाइट epfindia.gov.in के अनुसार, इस फीचर में सदस्य अपने योगदान की राशि, निकासी के रिकॉर्ड, ब्याज की गणना और कुल बैलेंस को रीयल-टाइम में चेक कर सकते हैं। पहले, पासबुक देखने के लिए सदस्यों को अलग से umang.gov.in या अन्य पोर्टल पर लॉगिन करना पड़ता था, जो समय लेने वाला और कभी-कभी तकनीकी समस्याओं से भरा होता था। अब, सब कुछ एक ही जगह उपलब्ध होने से सदस्यों का समय बचेगा और वे अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग बेहतर तरीके से कर सकेंगे। उदाहरण के लिए, अगर कोई कर्मचारी नौकरी बदल रहा है, तो वह अपनी पुरानी पीएफ डिटेल्स को नए अकाउंट में ट्रांसफर करने से पहले बैलेंस चेक कर सकता है। प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) की रिपोर्ट में बताया गया है कि यह सुविधा ईपीएफओ के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम का हिस्सा है, जो कोविड-19 महामारी के बाद तेजी से लागू किया गया, ताकि सदस्य घर बैठे सेवाओं का लाभ ले सकें। इसके अलावा, यह फीचर मोबाइल ऐप के जरिए भी एक्सेसिबल है, जिससे ग्रामीण इलाकों के सदस्यों को भी आसानी होगी, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी सीमित हो सकती है।

पीएफ ट्रांसफर सर्टिफिकेट अब आसानी से डाउनलोड करें

एक और महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अनुबंध (Annexure-K) यानी पीएफ ट्रांसफर सर्टिफिकेट अब सदस्य पोर्टल से सीधे पीडीएफ फॉर्मेट में डाउनलोड किया जा सकता है। पहले, यह सर्टिफिकेट केवल पीएफ कार्यालयों के बीच आंतरिक रूप से आदान-प्रदान होता था, और सदस्यों को इसे प्राप्त करने के लिए लिखित अनुरोध करना पड़ता था, जो कई दिनों या हफ्तों तक चल सकता था। द हिंदू अखबार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस बदलाव से ट्रांसफर प्रक्रिया में लगने वाला समय 50% तक कम हो सकता है, क्योंकि सदस्य खुद ही डॉक्यूमेंट डाउनलोड कर नियोक्ता या नए पीएफ कार्यालय को सबमिट कर सकेंगे। ईपीएफओ के आंकड़ों से पता चलता है कि हर साल लाखों सदस्य नौकरी बदलते समय ट्रांसफर क्लेम फाइल करते हैं, और इस सुविधा से उनमें से कई की शिकायतें दूर होंगी। इसके अलावा, यह फीचर डिजिटल सिग्नेचर के साथ आता है, जो डॉक्यूमेंट की वैधता सुनिश्चित करता है और फर्जीवाड़े को रोकता है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर में उल्लेख है कि ईपीएफओ ने हाल ही में अपनी साइबर सिक्योरिटी को मजबूत किया है, ताकि सदस्यों की व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित रहे।

क्लेम सेटलमेंट प्रक्रिया में बड़ा बदलाव, अब तेजी से होगा काम

ईपीएफओ ने क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया को और आसान बनाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब पीएफ ट्रांसफर, एडवांस निकासी, रिफंड और अन्य क्लेम के लिए ऊपरी स्तर के अधिकारियों की मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। यह जिम्मेदारी सहायक आयुक्तों (असिस्टेंट कमिश्नर) और अन्य निचले स्तर के अधिकारियों को दी गई है। मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि इससे सेवाओं की गति बढ़ेगी, शिकायतें कम होंगी और सदस्यों को समय पर पैसा मिल सकेगा। पीआईबी के अनुसार, पहले क्लेम अप्रूवल में औसतन 20-30 दिन लगते थे, लेकिन अब यह समय 7-10 दिनों तक कम हो सकता है। यह बदलाव ईपीएफओ के ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ इनिशिएटिव का हिस्सा है, जो सरकारी सेवाओं को कुशल बनाने पर जोर देता है। उदाहरण के लिए, अगर कोई सदस्य मेडिकल इमरजेंसी में एडवांस निकालना चाहता है, तो अब लोकल ऑफिसर ही इसे अप्रूव कर सकेंगे, बिना हेडक्वार्टर की मंजूरी के। ईपीएफओ के वार्षिक रिपोर्ट से पता चलता है कि 2024-25 में संगठन ने 1.2 करोड़ से अधिक क्लेम प्रोसेस किए, और ऐसे सुधारों से यह संख्या और बढ़ सकती है।

ईपीएफओ के बारे में जानें और इसके व्यापक प्रभाव

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) 1952 में स्थापित हुआ था और यह भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के तहत काम करता है। संगठन 6 करोड़ से अधिक सक्रिय सदस्यों को सेवाएं देता है, जिसमें रिटायरमेंट फंड, पेंशन और इंश्योरेंस शामिल हैं। मंत्री ने जोर दिया कि ‘ये सुधार ईपीएफओ की सेवाओं को आसान, पारदर्शी और समय पर उपलब्ध कराएंगे।’ इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के आधार पर, ईपीएफओ ने हाल के वर्षों में कई डिजिटल पहल की हैं, जैसे ऑनलाइन क्लेम सबमिशन, आधार-लिंक्ड अकाउंट्स और ऑटोमेटेड ब्याज कैलकुलेशन। इससे न केवल सदस्यों का विश्वास बढ़ा है बल्कि प्रशासनिक लागत भी कम हुई है। खासकर युवा कर्मचारियों के लिए, जो अक्सर नौकरी बदलते हैं, ये सुविधाएं फाइनेंशियल स्टेबिलिटी सुनिश्चित करेंगी। इसके अलावा, ईपीएफओ ने हाल ही में महिलाओं और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए विशेष योजनाएं शुरू की हैं, जो इन सुधारों से और मजबूत होंगी। कुल मिलाकर, पासबुक लाइट और संबंधित बदलाव ईपीएफओ को एक आधुनिक, यूजर-फ्रेंडली संगठन बनाने में मदद करेंगे, जो भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ कदम मिलाएगा।

भविष्य की योजनाएं और सदस्यों के लिए सलाह

ईपीएफओ भविष्य में और अधिक डिजिटल टूल्स लाने की योजना बना रहा है, जैसे एआई-बेस्ड चैटबॉट्स और मोबाइल नोटिफिकेशंस, ताकि सदस्यों को अपडेट्स तुरंत मिलें। सदस्यों को सलाह दी जाती है कि वे अपना यूएएन (यूनिवर्सल अकाउंट नंबर) एक्टिवेट करें और मोबाइल नंबर लिंक करें, ताकि ये सुविधाएं आसानी से इस्तेमाल कर सकें। ईपीएफओ की वेबसाइट पर उपलब्ध गाइडलाइंस के अनुसार, अगर कोई समस्या आए तो हेल्पलाइन नंबर 1800-118-005 पर संपर्क किया जा सकता है। ये बदलाव न केवल व्यक्तिगत सदस्यों को फायदा देंगे बल्कि समग्र रूप से श्रम बाजार को मजबूत बनाएंगे।