दिल्ली रेड फोर्ट ब्लास्ट: CCTV में फरीदाबाद मॉड्यूल से जुड़े संदिग्ध सुसाइड बॉम्बर की तस्वीर कैद हुई
दिल्ली के लाल किला कार धमाके, जो सोमवार शाम लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुआ, की पुष्टि एक आत्मघाती हमले के रूप में की गई है, जिसके सीधे संबंध फरीदाबाद के डॉक्टर उमर यू नबी से हैं, जो मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के पुलवामा के रहने वाले थे। इस विस्फोट में कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई और 20 से अधिक लोग घायल हुए, जिससे राजधानी में दहशत फैल गई और एक बड़े आतंकवादी नेटवर्क की जांच शुरू हो गई।
धमाके का विवरण
विस्फोट शाम लगभग 6:52 बजे हुआ जब एक सफेद ह्युंडई i20, जिसमें डॉक्टर उमर यू नबी के सवार होने की आशंका है, लाल किले के पास एक ट्रैफिक सिग्नल पर विस्फोट हो गया। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि पास खड़ी वाहनों में आग लग गई और मलबा 20 मीटर तक फैल गया, जिससे दिल्ली के सबसे घनी आबादी वाले और कड़ी सुरक्षा वाले क्षेत्रों में अफरा-तफरी मच गई। फोरेंसिक विशेषज्ञों ने पुष्टि की है कि विस्फोट में अमोनियम नाइट्रेट फ्यूल ऑयल का इस्तेमाल किया गया था, और सामान्य धात्विक टुकड़ों या छर्रों की अनुपस्थिति से जांचकर्ताओं को संदेह है कि यह पारंपरिक विस्फोटक की बजाय किसी रासायनिक या ईंधन आधारित मिश्रण से हुआ विस्फोट था।
डॉ. उमर यू नबी: पृष्ठभूमि और जांच
डॉ. उमर यू नबी, जिनका जन्म 24 फरवरी 1989 को हुआ था, फरीदाबाद के अल-फलाह मेडिकल कॉलेज में सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने श्रीनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज से एमडी किया था और जीएमसी अनंतनाग में सीनियर रेजिडेंट के पद पर कार्य किया था। उनकी मां शमीमा बानो पुलवामा की रहने वाली हैं, जबकि उनके पिता, मोहम्मद गनी भट, एक सरकारी शिक्षक थे जिन्होंने करीब 10–15 वर्ष पहले मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के कारण अपनी नौकरी छोड़ दी थी। बताया जा रहा है कि उमर अपने सहकर्मी डॉक्टर अदील अहमद राथर के करीबी सहयोगी थे, जो वर्तमान में चल रही आतंकवादी जांच का हिस्सा हैं।
जांचकर्ताओं ने विस्फोटक कार की बिक्री का पता लगाते हुए उसे अंततः डॉक्टर उमर से जोड़ा। सीसीटीवी फुटेज और फोरेंसिक सबूतों में एक कटे हुए हाथ को चालक का बताया जा रहा है, जिससे उमर की संलिप्तता का संकेत मिला है। उनकी पहचान की पुष्टि के लिए कश्मीर में परिवार के डीएनए नमूने लिए जा रहे हैं। उनके दोनों भाई और मां को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।
फरीदाबाद मॉड्यूल और आतंकी नेटवर्क
जांच में एक “व्हाइट कॉलर” आतंकवादी मॉड्यूल का खुलासा हुआ है जिसमें कट्टरपंथी चिकित्सक शामिल हैं, जिनमें डॉ. उमर, डॉ. मुज़म्मिल शकील और डॉ. अदील अहमद राथर शामिल हैं। माना जा रहा है कि यह नेटवर्क एनक्रिप्टेड टेलीग्राम चैनलों के माध्यम से कट्टरपंथी बना और दिल्ली-एनसीआर व जम्मू-कश्मीर में सक्रिय था। फरीदाबाद में छापेमारी के दौरान लगभग 2,900 किलोग्राम विस्फोटक और ज्वलनशील सामग्री, जिसमें अमोनियम नाइट्रेट, असॉल्ट राइफलें, पिस्तौल और गोला-बारूद शामिल हैं, बरामद किए गए हैं।
यह नेटवर्क प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों जैसे जैश-ए-मोहम्मद और अंसर गजवतुल हिंद से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है, जबकि अधिकारियों ने संभावित सीमा-पार संलिप्तता और पाकिस्तान की “डीप स्टेट” भूमिका को लेकर भी चेतावनी दी है। जांच जारी है और पुलिस व खुफिया एजेंसियां संदिग्धों से पूछताछ कर इस नेटवर्क की पूरी रूपरेखा उजागर करने में जुटी हैं।
प्रभाव और प्रतिक्रिया
धमाके के बाद दिल्ली में उच्च सतर्कता घोषित कर दी गई है। दिल्ली पुलिस ने गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) और अन्य आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत मामला दर्ज किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने स्थिति की समीक्षा की है और जांच को पूरी तरह से निष्पक्ष और विस्तृत करने का आश्वासन दिया है। इस घटना ने यह चिंता और बढ़ा दी है कि इस तरह के नेटवर्क इतनी कड़ी सुरक्षा के बावजूद कैसे सक्रिय हो सकते हैं, और इसके चलते मजबूत आतंकवाद-रोधी उपायों की मांग उठी है।
