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विस्फोट के पैमाने ने सैन्य-श्रेणी के विस्फोटकों के संकेत दिए, कुछ दिनों में स्पष्टता की संभावना

नई दिल्ली: सोमवार शाम को लाल किले के पास एक ह्युंडई i20 कार में हुए विस्फोट ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया है। इस घटना में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक लोग घायल हुए हैं। फोरेंसिक टीमों और नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) की विस्फोटक इकाई ने अभी तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट नहीं सौंपी है, लेकिन प्रारंभिक आकलन से पता चलता है कि विस्फोट की तीव्रता सैन्य स्तर के विस्फोटकों की ओर इशारा कर रही है। विस्फोट 10 नवंबर 2025 को शाम 6:52 बजे के आसपास हुआ, जब कार लाल किले मेट्रो स्टेशन के पास एक ट्रैफिक सिग्नल पर खड़ी थी।

आसपास की दुकानें, वाहन और इमारतें बुरी तरह प्रभावित हुईं, जिसमें कई गाड़ियां जल गईं और खिड़कियों के शीशे टूट गए। जांचकर्ताओं ने मंगलवार को फोरेंसिक विशेषज्ञों से पीईटीएन, सेमटेक्स या आरडीएक्स जैसे शक्तिशाली विस्फोटकों के इस्तेमाल पर राय मांगी है। यह विस्फोट फरीदाबाद में आतंकी मॉड्यूल पर छापेमारी के कुछ घंटों बाद हुआ, जहां 2900 किलोग्राम विस्फोटक जब्त किए गए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा, और पूरी जांच में पारदर्शिता बरती जाएगी।​

विस्फोट की पृष्ठभूमि और घटना का विवरण

इस विस्फोट की जड़ें 9 नवंबर 2025 को जम्मू-कश्मीर पुलिस की फरीदाबाद छापेमारी से जुड़ी हैं। वहां हरियाणा पुलिस के सहयोग से एक घर से 350 किलोग्राम विस्फोटक, असॉल्ट राइफलें, पिस्टल, टाइमिंग डिवाइस और गोला-बारूद बरामद किया गया। अगले दिन, 10 नवंबर को, संदिग्ध डॉक्टर उमर मोहम्मद ने घबराहट में कार में बम लादकर लाल किले के पास पहुंचा। सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि i20 कार दोपहर 3:19 बजे सुनेहरी मस्जिद के पास पार्किंग में खड़ी हुई थी और शाम 6:48 बजे तक वहीं रही।

विस्फोट के समय कार धीरे-धीरे चल रही थी, और एक मास्क पहने व्यक्ति को ड्राइविंग करते देखा गया। धमाके की आवाज सैकड़ों मीटर दूर तक सुनाई दी, और दिल्ली फायर सर्विस को 6:50 से 7:05 बजे के बीच कई कॉल्स मिलीं। सात फायर टेंडर तुरंत मौके पर पहुंचे और आग को 7:29 बजे तक काबू में कर लिया गया। इस हादसे में छह कारें, दो ई-रिक्शा और एक ऑटो रिक्शा पूरी तरह जल गए। घायलों को लोक नायक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां कुछ की हालत गंभीर बताई गई। पुलिस ने इलाके को सील कर दिया, और एनआईए को जांच सौंप दी गई। अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट (यूएपीए) के तहत केस दर्ज किया गया है।​

संभावित विस्फोटक: अमोनियम नाइट्रेट और अन्य सामग्रियां

प्रारंभिक जांच से अमोनियम नाइट्रेट फ्यूल ऑयल (एएनएफओ) और डेटोनेटर के इस्तेमाल की पुष्टि हो रही है। अमोनियम नाइट्रेट एक सामान्य उर्वरक रसायन है, जो खदानों में तोड़फोड़ के लिए इस्तेमाल होता है, लेकिन ईंधन जैसे नाइट्रोमिथेन के साथ मिलाकर यह आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) में बदल जाता है। फरीदाबाद से बरामद 2900 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट इसी तरह का था, जो विस्फोट में इस्तेमाल हुआ लगता है। यह सस्ता और आसानी से उपलब्ध होने के कारण आतंकियों का पसंदीदा है।

फोरेंसिक टीमों ने साइट से लगभग 42 नमूने इकट्ठा किए हैं, जिनमें कार के टायर, चेसिस, सीएनजी सिलेंडर, बोनेट के टुकड़े, पाउडर अवशेष और अन्य ट्रेस शामिल हैं। इनमें से दो प्रकार के विस्फोटक मिले हैं – एक अमोनियम नाइट्रेट जैसा, दूसरा इससे कहीं ज्यादा शक्तिशाली। लैब टेस्ट से पता चलेगा कि क्या पीईटीएन या आरडीएक्स का मिश्रण था। इसके अलावा, दो लाइव कारतूस और हथियार अवशेष भी बरामद हुए हैं, जो हमले की योजना को और पुष्ट करते हैं। जांचकर्ताओं का मानना है कि विस्फोटक को कार में ठीक से पैक नहीं किया गया था, जिससे प्रभाव सीमित रहा – कोई बड़ा गड्ढा नहीं बना और शरापनेल ज्यादा नहीं फैला।​

पीईटीएन और सेमटेक्स: इन विस्फोटकों की खासियतें

पीईटीएन (पेंटाएरिथ्रिटॉल टेट्रानाइट्रेट) सेमटेक्स का मुख्य हिस्सा है और नाइट्रोग्लिसरीन के परिवार से संबंधित है। यह एक अत्यंत शक्तिशाली विस्फोटक है, जिसके रंगहीन क्रिस्टल डिटेक्टरों से बच जाते हैं, इसलिए आतंकी इसे पसंद करते हैं। इसमें बहुत कम मात्रा ही काफी होती है – मात्र 100 ग्राम से एक कार को उड़ा देना संभव है। यह गर्मी या शॉक वेव से सक्रिय होता है, और इसमें अतिरिक्त शरापनेल की जरूरत नहीं पड़ती डेटोनेशन खुद ही भारी तबाही मचा देता है।

2010 के ट्रांसअटलांटिक कार्गो बम प्लॉट में पीईटीएन को प्रिंटर कार्ट्रिज में छिपाया गया था, जो इसके छिपाने की आसानी को दर्शाता है। सेमटेक्स, जो चेक गणराज्य में विकसित हुआ, प्लास्टिक जैसा दिखता है और आसानी से आकार दिया जा सकता है। अगर इस विस्फोट में पीईटीएन का इस्तेमाल हुआ, तो यह आतंकी नेटवर्क की उन्नत क्षमता को इंगित करेगा।​

अमोनियम नाइट्रेट का प्रभाव और ऐतिहासिक उदाहरण

अमोनियम नाइट्रेट फ्यूल ऑयल सुपरसोनिक शॉक वेव पैदा करता है, जो ऊर्जा को अत्यधिक तेज गति से रिलीज करता है, न कि धीमी जलन की तरह। इससे विस्फोट की तीव्रता बढ़ जाती है, जैसा कि इस मामले में देखा गया। 2011 के दिल्ली हाईकोर्ट विस्फोट में फोरेंसिक और एनएसजी ने अमोनियम नाइट्रेट और पीईटीएन के मिश्रण का अनुमान लगाया था, लेकिन गृह मंत्रालय ने बाद में आरडीएक्स की पुष्टि की। इसी तरह, 1995 के ओक्लाहोमा सिटी बमिंग में अमोनियम नाइट्रेट ने 168 लोगों की जान ली थी। यहां, विस्फोटक को घड़ी और छोटी बटन बैटरी से बने सर्किट से फोड़ा गया लगता है, जो एक उन्नत डेटोनेशन सिस्टम दर्शाता है। फोरेंसिक स्रोतों के अनुसार, विस्फोट स्थल पर 150 मीटर तक मलबा बिखरा था, जिसकी जांच जारी है। डीएनए सैंपल से संदिग्ध की पहचान की जा रही है, और कार के पहले मालिक मोहम्मद सलमान को गुरुग्राम से हिरासत में लिया गया है।​​

जांच की प्रगति: संदिग्ध और आतंकी कनेक्शन

फोरेंसिक टीमें नमूनों को गहन लैब टेस्टिंग के लिए भेज चुकी हैं, और कुछ दिनों में विस्फोटक के सटीक प्रकार पर स्पष्टता आ जाएगी। प्रारंभिक रिपोर्ट्स से यह एक आत्मघाती हमला लग रहा है, जिसमें डॉ. उमर मोहम्मद मुख्य संदिग्ध है। उमर एक रेडिकल डॉक्टर्स ग्रुप का सदस्य था, जो टेलीग्राम पर कोऑर्डिनेट करता था और पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) से जुड़ा था। उसके सहयोगी डॉ. मुजम्मिल शकील और डॉ. आदिल रदर को फरीदाबाद से गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद उमर ने 7 नवंबर को फोन बंद कर दिया और घबराहट में आईईडी असेंबल किया।

कार को पुलवामा के तारिक मलिक ने बेचा था, जो जेईएम से जुड़ा है। एनआईए ने साइट पर जांच शुरू कर दी है, और फोरेंसिक विशेषज्ञ मलबे की छानबीन कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने जेईएम के महिलाओं के विंग जमात उल-मोमिनात से भी लिंक पाए हैं, जिसका नेतृत्व मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर करती हैं। पूरे देश में आतंकी नेटवर्क पर छापे चल रहे हैं, जिससे बड़ा हमला टल गया। गृह मंत्री अमित शाह ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ रिव्यू मीटिंग की और हर दोषी को सजा दिलाने के निर्देश दिए।​​

मुआवजा, सुरक्षा उपाय और आगे की कार्रवाई

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मृतकों के परिवारों को 10 लाख रुपये, गंभीर घायलों को 5 लाख और स्थायी रूप से विकलांगों को 5 लाख रुपये का मुआवजा घोषित किया है। लाल किला मेट्रो स्टेशन को 12 नवंबर को भी सुरक्षा कारणों से बंद रखा गया है। अमेरिका ने घटना पर शोक व्यक्त किया है और स्थिति पर नजर रखने की बात कही। एनएसजी और फोरेंसिक टीमें साइट पर काम कर रही हैं, जबकि डीएनए टेस्ट से शवों की पहचान हो रही है। यह विस्फोट दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है, खासकर ऐतिहासिक स्थलों के पास। जांच से न केवल विस्फोटक का प्रकार स्पष्ट होगा, बल्कि आतंकी नेटवर्क की पूरी साजिश भी उजागर होगी। पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहे हैं, और सरकार ने आश्वासन दिया है कि कोई भी दोषी बच नहीं पाएगा।

 

यह जानकारी द टाइम्स ऑफ इंडिया और एमएसएन से एकत्र की गई है।