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व्याख्याः चक्रवात ‘मोंथा’ का नाम कैसे रखा गया, इसका क्या अर्थ है

अरब सागर के ऊपर एक नया चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ का जन्म हो गया है, जो मौसम विशेषज्ञों के अनुसार तेजी से अपनी ताकत बढ़ा रहा है। भारत मौसम विभाग (आईएमडी) ने चेतावनी जारी की है कि यह तूफान 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों पर सीधा टकरा सकता है, जिससे भारी तबाही का खतरा मंडरा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, ओडिशा के कुछ हिस्से भी इस तूफान से प्रभावित हो सकते हैं, जहां भारी बारिश और तेज हवाओं की संभावना है। वर्तमान में, बंगाल की खाड़ी में एक निम्न दाब का क्षेत्र विकसित हो चुका है, जो अगले 24 से 48 घंटों में और मजबूत होकर गंभीर चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है। आईएमडी के सैटेलाइट डेटा के आधार पर, यह तूफान उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ रहा है और इसकी गति लगभग 10-15 किलोमीटर प्रति घंटा है। राज्य सरकारें पहले से ही तैयारी में जुटी हुई हैं, जिसमें राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीमें तैनात की गई हैं और स्थानीय प्रशासन ने स्कूल-कॉलेज बंद करने के आदेश जारी किए हैं। ये अपडेट आईएमडी की आधिकारिक वेबसाइट और एनडीटीवी तथा हिंदुस्तान टाइम्स जैसे विश्वसनीय समाचार स्रोतों से लिए गए हैं, जो तूफान की रीयल-टाइम ट्रैकिंग कर रहे हैं। ऐसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए समय पर सूचना और तैयारी ही सबसे बड़ा हथियार है, जैसा कि पिछले चक्रवातों में देखा गया है।

मौसम विभाग ने आंध्र प्रदेश के कुल 26 जिलों में से 23 के लिए लाल और नारंगी अलर्ट जारी किए हैं, जो तूफान के संभावित प्रभाव को दर्शाते हैं। लाल अलर्ट वाले जिलों में तत्काल निकासी और आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था की जा रही है, जबकि नारंगी अलर्ट वाले क्षेत्रों में सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और पुदुच्चेरी जैसे पड़ोसी राज्यों के लिए भी भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है, जहां तूफान के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है और बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती है। ओडिशा में 28 और 29 अक्टूबर को भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है, जिससे ग्रामीण इलाकों में जलभराव और फसल नुकसान का खतरा है। विशेष रूप से, गंजम, गजपति, रायगढ़ा, कोरापुट और मल्कानगिरी जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है, जहां स्थानीय प्रशासन ने राहत शिविर स्थापित करने शुरू कर दिए हैं। आईएमडी के विशेषज्ञों का कहना है कि तूफान की तीव्रता इसकी पथ और समुद्री तापमान पर निर्भर करेगी, जो वर्तमान में अनुकूल परिस्थितियां प्रदान कर रही है। ये सभी जानकारियां आईएमडी के 27 अक्टूबर के दैनिक बुलेटिन से सत्यापित हैं, जो वैज्ञानिक मॉडल्स और रडार डेटा पर आधारित हैं।

साइक्लोन मोंथा का नाम कैसे पड़ा?

उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र में चक्रवातों को नाम देने की प्रक्रिया एक अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर आधारित है, जो प्राकृतिक आपदाओं को बेहतर ढंग से ट्रैक और संवाद करने में मदद करती है। ‘मोंथा’ नाम थाईलैंड ने सुझाया है, जो इस क्षेत्र के 13 सदस्य देशों में से एक है। यह नाम 2020 में अपडेट की गई सूची का हिस्सा है, जब विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ) और संयुक्त राष्ट्र की एशिया-प्रशांत आर्थिक और सामाजिक आयोग (ईएससीएपी) ने नई नामावली को मंजूरी दी थी। रीजनल स्पेशलाइज्ड मेट्रोलॉजिकल सेंटर (आरएसएमसी), नई दिल्ली, जो आईएमडी के अधीन कार्य करता है, इस प्रक्रिया को संचालित करता है। थाईलैंड ने यह नाम प्रकृति से प्रेरित रखा है, जो चक्रवातों के नामकरण में सकारात्मक और सांस्कृतिक रूप से उपयुक्त होने का उद्देश्य पूरा करता है।

‘मोंथा’ शब्द थाई भाषा में ‘सुगंधित फूल’ या ‘सुंदर फूल’ का अर्थ रखता है, जो थाई संस्कृति में सुंदरता और नाजुकता का प्रतीक है। हालांकि, यह नाम एक विनाशकारी तूफान से जुड़ गया है, लेकिन नामकरण का मुख्य मकसद चक्रवातों को व्यक्तिगत पहचान देना है ताकि वैज्ञानिक, मीडिया और जनता आसानी से चर्चा कर सकें। डब्ल्यूएमओ के अनुसार, नामकरण से आपदा प्रबंधन में सुधार होता है, क्योंकि लोग नाम से तूफान को याद रखते हैं और चेतावनियों पर अधिक ध्यान देते हैं। उदाहरण के लिए, 2021 के चक्रवात ‘तौकते’ का नाम भी थाईलैंड ने ही सुझाया था, जो समान रूप से प्रकृति से जुड़ा था। आईएमडी की रिपोर्ट्स से पता चलता है कि यह नाम सूची के क्रम के अनुसार चुना गया है, और एक बार इस्तेमाल होने के बाद इसे रिटायर नहीं किया जाता जब तक कि कोई विशेष कारण न हो। यह प्रणाली 2000 से प्रभावी है और अब तक सैकड़ों चक्रवातों को नाम दिए जा चुके हैं, जो क्षेत्रीय सहयोग का एक मजबूत उदाहरण है।

चक्रवातों का नामकरण कैसे होता है?

उत्तर हिंद महासागर में चक्रवात नामकरण की प्रक्रिया डब्ल्यूएमओ और ईएससीएपी की संयुक्त निगरानी में चलती है, जहां भारत का आईएमडी मुख्य भूमिका निभाता है। इस क्षेत्र में चक्रवातों को नाम तभी दिया जाता है जब वे कम से कम 48 किलोमीटर प्रति घंटा की हवा की गति प्राप्त कर लें। नामकरण का इतिहास 2000 से शुरू होता है, जब 13 देशों ने पहली बार एक संयुक्त सूची बनाई थी। ये देश हैं: बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका, थाईलैंड, यमन, ईरान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई)। प्रत्येक देश 13 नाम सुझाता है, जो मिलकर कुल 169 नामों का पूल बनाते हैं। ये नाम लिंग-तटस्थ होते हैं, आसानी से उच्चारण योग्य होते हैं और किसी भी संस्कृति को ठेस न पहुंचाने वाले होते हैं।

जब कोई नया चक्रवात बनता है, तो आरएसएमसी नई दिल्ली सूची से अगला उपलब्ध नाम चुन लेता है। सूची को वर्णमाला क्रम में रखा जाता है, और हर पांच साल में इसे अपडेट किया जाता है ताकि नए नाम जोड़े जा सकें। उदाहरणस्वरूप, भारत ने ‘अम्फान’ (जो बंगाली में बादल का मतलब है), ‘निसर्ग’ (संस्कृत में प्रकृति) और ‘गुलाब’ जैसे नाम सुझाए हैं, जो क्षेत्रीय भाषाओं से लिए गए हैं। यह सिस्टम न केवल वैज्ञानिक ट्रैकिंग को आसान बनाता है बल्कि जन जागरूकता भी बढ़ाता है। डब्ल्यूएमओ की गाइडलाइंस के अनुसार, नामों को छोटा, याद रखने लायक और मौसम से जुड़ा रखा जाता है। आईएमडी की वेबसाइट पर पूरी सूची सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है, जहां लोग खुद चेक कर सकते हैं कि अगला नाम कौन सा होगा। इस प्रक्रिया से आपदा प्रबंधन में पारदर्शिता आती है, और देशों के बीच सहयोग मजबूत होता है। पिछले दशक में, इस सिस्टम ने चक्रवात ‘फानी’ और ‘अम्फान’ जैसे तूफानों के दौरान प्रभावी ढंग से काम किया, जहां नामकरण से त्वरित प्रतिक्रिया संभव हुई।

साइक्लोन मोंथा कब और कहां तट से टकराएगा?

आईएमडी के विस्तृत पूर्वानुमान के अनुसार, साइक्लोन मोंथा 28 अक्टूबर को दोपहर या शाम के समय आंध्र प्रदेश के तट पर लैंडफॉल कर सकता है। वर्तमान में, यह तूफान गंभीर चक्रवाती तूफान (सीएसएस) की श्रेणी में है, जिसमें हवाओं की गति 50-60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। लैंडफॉल के समय यह और तेज हो सकता है, संभवतः 80-90 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार तक। तूफान का मुख्य पथ मछलीपट्टनम से कलिंगापट्टनम के बीच है, जो काकिनाडा के आसपास के तटीय क्षेत्रों को सबसे ज्यादा प्रभावित करेगा। सैटेलाइट इमेजरी और कंप्यूटर मॉडल्स से पता चलता है कि तूफान बंगाल की खाड़ी से अरब सागर की ओर शिफ्ट हो रहा है, लेकिन इसका केंद्र आंध्र तट पर ही रहेगा।

लैंडफॉल के बाद, तूफान तेजी से कमजोर पड़ सकता है, लेकिन उसके अवशेष भारी बारिश के रूप में कई दिनों तक बने रहेंगे। आंध्र प्रदेश के जिलों जैसे विजयवाड़ा, कृष्णा, गोदावरी, पूर्व गोदावरी और पश्चिम गोदावरी में बाढ़ और तटीय क्षरण का खतरा है। राज्य सरकार ने 10,000 से अधिक लोगों की निकासी की योजना बनाई है, और बिजली, पानी तथा संचार सेवाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। ओडिशा में, तूफान के अप्रत्यक्ष प्रभाव से भद्रक, बालासोर, केंद्रपाड़ा और भद्रक जिलों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है, जहां नदियों जैसे महानदी का जलस्तर निगरानी में है। आईएमडी के 27 अक्टूबर के बुलेटिन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ये पूर्वानुमान जीआईएस (ग्लोबल फोरकास्ट सिस्टम) और यूरोपीय मॉडल्स पर आधारित हैं, जो 80% सटीकता के साथ काम करते हैं। मछुआरों को अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से दूर रहने की सख्त हिदायत दी गई है, क्योंकि तूफान के कारण ऊंची लहरें उठ सकती हैं। ये सभी उपाय राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के मानकों के अनुरूप हैं, जो जनहानि को न्यूनतम रखने पर केंद्रित हैं।

हाई अलर्ट वाले जिले

साइक्लोन मोंथा के कारण प्रभावित होने वाले जिलों में बाढ़, भूस्खलन, पेड़ गिरने और बुनियादी ढांचे को नुकसान का उच्च जोखिम है। आईएमडी और राज्य आपदा प्रबंधन विभागों ने विस्तृत अलर्ट जारी किए हैं, जो निम्नलिखित प्रमुख जिलों पर केंद्रित हैं। इन क्षेत्रों में स्थानीय निवासियों को घरों से बाहर न निकलने और आपातकालीन नंबरों पर संपर्क करने की सलाह दी गई है।

आंध्र प्रदेश में हाई अलर्ट वाले प्रमुख जिले:

  • कृष्णा जिला: यह क्षेत्र तूफान के सीधे पथ पर है, जहां मछलीपट्टनम बंदरगाह प्रभावित हो सकता है। भारी बारिश से कृष्णा नदी में बाढ़ आ सकती है, और तटीय गांवों में जलमग्न होने का खतरा है। प्रशासन ने 5,000 से अधिक लोगों की निकासी शुरू कर दी है।
  • पूर्व गोदावरी जिला: काकिनाडा शहर लैंडफॉल का संभावित केंद्र है, जहां तेज हवाओं से बंदरगाह और तेल रिफाइनरी प्रभावित हो सकती हैं। जिले में 100 मिमी से अधिक बारिश रिकॉर्ड हो सकती है, जिससे सड़कें अवरुद्ध हो जाएंगी।
  • पश्चिम गोदावरी जिला: नारसापुर और एलुरु जैसे इलाकों में नदियों का जलस्तर बढ़ेगा, जिससे खेती योग्य भूमि डूब सकती है। यहां एनडीआरएफ की दो टीमें तैनात हैं।
  • विजयवाड़ा और आसपास के क्षेत्र: शहर में जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्या हो सकती है। बुदमेरु नदी के किनारे रहने वाले लोगों को विशेष सतर्क रहने को कहा गया है।

ओडिशा में हाई अलर्ट वाले जिले:

  • गंजम और गजपति: दक्षिणी तटीय जिलों में 28 अक्टूबर को 150 मिमी तक बारिश हो सकती है, जिससे रुषिकुल्या नदी में बाढ़ का खतरा है। स्थानीय मंदिर और बाजार क्षेत्रों को सुरक्षित करने की कोशिश की जा रही है।
  • रायगढ़ा, कोरापुट और मल्कानगिरी: ये पहाड़ी जिले भूस्खलन के प्रति संवेदनशील हैं, जहां भारी बारिश से सड़कें कट सकती हैं। आदिवासी समुदायों के लिए विशेष राहत सामग्री भेजी गई है।
  • भद्रक और बालासोर: उत्तरी जिलों में तूफान के अप्रत्यक्ष प्रभाव से हिराकुंड बांध से पानी छोड़े जाने की संभावना है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ आ सकती है। ओडिशा सरकार ने 20 राहत केंद्र खोले हैं।

तमिलनाडु के उत्तरी जिलों जैसे चेन्नई, तिरुवल्लुर और कांचीपुरम में भी हल्की से मध्यम बारिश की चेतावनी है, जो तूफान के बाहरी बैंड से प्रभावित होंगे। आईएमडी ने इन अलर्ट्स को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के दिशानिर्देशों के आधार पर जारी किया है, जो वैज्ञानिक डेटा और ऐतिहासिक पैटर्न पर निर्भर करते हैं। पिछले चक्रवातों के अनुभव से सीखते हुए, इन जिलों में स्वास्थ्य सेवाएं और खाद्य आपूर्ति की व्यवस्था पहले से की गई है।

क्या सावधानियां बरतें?

साइक्लोन मोंथा जैसे तूफानों से निपटने के लिए तैयारी ही सुरक्षा की कुंजी है। आईएमडी और एनडीएमए की सिफारिशों के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों को निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए। सबसे पहले, घरों को मजबूत करें खिड़कियां और दरवाजे टेप से सील करें, ढीली वस्तुओं को अंदर लाएं और छतों की जांच करवाएं। जरूरी सामान जैसे पानी, सूखा राशन, टॉर्च, दवाइयां और बैटरी संचालित रेडियो को स्टॉक करें, कम से कम 72 घंटों के लिए।

मछुआरों और तटीय समुदायों के लिए विशेष सलाह है कि समुद्र में न जाएं, क्योंकि ऊंची लहरें (3-5 मीटर तक) खतरनाक साबित हो सकती हैं। अगर आप पहाड़ी या नदी किनारे रहते हैं, तो भूस्खलन और बाढ़ के संकेतों पर नजर रखें। सरकारी ऐप्स जैसे ‘सैंडेस’ या ‘आईएमडी वेदर’ के जरिए रीयल-टाइम अपडेट लें, और निकासी के आदेश आने पर तुरंत पालन करें। बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को प्राथमिकता दें। बिजली गुल होने पर जनरेटर का सुरक्षित उपयोग करें और आग लगने से बचें।

ये सावधानियां पिछले चक्रवातों जैसे ‘यास’ (2021) और ‘गुदरव’ (2021) से प्राप्त अनुभवों पर आधारित हैं, जहां सही तैयारी से हजारों जानें बचाई गईं। एनडीएमए की रिपोर्ट्स बताती हैं कि जागरूकता अभियानों से आपदा प्रभाव 30-40% तक कम हो जाता है। अगर आप प्रभावित क्षेत्र में हैं, तो हेल्पलाइन नंबर 1077 या स्थानीय पुलिस से संपर्क करें। तूफान के बाद, साफ पानी पीने और संक्रमण से बचने के लिए सतर्क रहें। इस तरह की आपदाओं से सीखकर, हम अपनी सुरक्षा को मजबूत बना सकते हैं।

यह जानकारी इंडिया टीवी ने दी है।