कॉलिन्स एयरोस्पेस पर साइबर हमले से प्रमुख यूरोपीय हवाई अड्डों पर चेक-इन प्रणाली बाधित
यूरोप के कई प्रमुख हवाई अड्डों पर शनिवार, 20 सितंबर 2025 को एक बड़े साइबर हमले ने भारी व्यवधान पैदा किया, जिसका मुख्य निशाना चेक-इन और बोर्डिंग सिस्टम प्रदान करने वाली कंपनी कोलिंस एयरोस्पेस थी। इस हमले से लंदन का हीथ्रो हवाई अड्डा, जो महाद्वीप का सबसे व्यस्त हवाई अड्डा है, सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ, और इससे सैकड़ों उड़ानें देरी से चलीं जबकि कई को रद्द करना पड़ा। फ्लाइट ट्रैकर फ्लाइट अवेयर के आंकड़ों के मुताबिक, इस घटना ने यात्रियों को लंबी कतारों, अनिश्चितता और असुविधा का सामना कराया, जो रविवार तक जारी रहा। कोलिंस एयरोस्पेस की पैरेंट कंपनी आरटीएक्स ने इसे “साइबर से जुड़ी समस्या” बताया, और कहा कि यह उनके MUSE सॉफ्टवेयर पर कुछ चुनिंदा हवाई अड्डों पर हुआ, लेकिन प्रभावित जगहों के नाम नहीं बताए। इस हमले ने एविएशन सेक्टर की डिजिटल निर्भरता को उजागर किया, जहां एक छोटी सी समस्या पूरे नेटवर्क को प्रभावित कर सकती है।
इस घटना की शुरुआत शुक्रवार रात से हुई, जब हैकर्स ने कोलिंस एयरोस्पेस के सिस्टम को निशाना बनाया, जिससे शनिवार सुबह से ही हवाई अड्डों पर अफरा-तफरी मच गई। ब्रुसेल्स हवाई अड्डे ने अपने बयान में कहा कि यह हमला शुक्रवार रात 19 सितंबर को चेक-इन और बोर्डिंग सिस्टम के सर्विस प्रोवाइडर पर हुआ, जो कई यूरोपीय हवाई अड्डों को प्रभावित कर रहा है। बर्लिन ब्रैंडेनबर्ग हवाई अड्डे ने भी पुष्टि की कि सिस्टम में तकनीकी समस्या से चेक-इन पर लंबी वेटिंग टाइम हो रही है, और उन्होंने प्रभावित सिस्टम से कनेक्शन काट दिए हैं। डबलिन और आयरलैंड के दूसरे सबसे बड़े हवाई अड्डे कॉर्क ने भी मामूली व्यवधान की सूचना दी, जहां टर्मिनल 2 में कुछ एयरलाइंस मैनुअल तरीके से बैग टैग और बोर्डिंग पास जारी कर रही हैं। एविएशन डेटा प्रोवाइडर सिरियम के अनुसार, शनिवार को हीथ्रो, बर्लिन और ब्रुसेल्स में कुल 35 डिपार्चर और 25 अराइवल रद्द हुए, जबकि रविवार दोपहर तक 38 डिपार्चर और 33 अराइवल कैंसल हो चुके थे, जिसमें ब्रुसेल्स पर सबसे ज्यादा 15 कैंसलेशन थे।
यात्रियों की कहानियां इस घटना की गंभीरता को दर्शाती हैं। पत्रकार तेरेसा पुल्टारोवा ने बीबीसी न्यूज से बात करते हुए बताया कि वह हीथ्रो से सुबह 6:30 बजे एम्स्टर्डम के लिए उड़ान भरकर केप टाउन जा रही थीं, लेकिन उनकी एयरलाइन का सर्विस डेस्क न होने से वे पूरी तरह अनजान रहीं। उन्होंने कहा, “यहां बहुत chaos है, और ज्यादातर लोग काफी निराश और हताश हैं, क्योंकि कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही”। इसी तरह, बर्लिन से उड़ान भरने वाले सिगफ्रीड श्वार्ज ने अपनी देरी पर हैरानी जताते हुए कहा, “आज की उन्नत तकनीक के साथ, ऐसी घटनाओं से खुद को बचाने का कोई तरीका न होना समझ से परे है”। ब्रुसेल्स में एक यात्री ने बताया कि लंबी कतारों में घंटों इंतजार करना पड़ा, और कई लोगों को अपनी उड़ानें मिस करनी पड़ीं। ये अनुभव दिखाते हैं कि कैसे एक डिजिटल हमला सामान्य यात्रियों के दैनिक जीवन को प्रभावित कर सकता है।
इलेक्ट्रॉनिक चेक-इन प्रभावित
कोलिंस एयरोस्पेस के सिस्टम यात्रियों को स्वयं चेक-इन करने, बोर्डिंग पास और बैग टैग प्रिंट करने तथा कियोस्क से सामान भेजने में सहायता प्रदान करते हैं, और यह 170 से ज्यादा हवाई अड्डों पर मौजूद है। कंपनी ने अपने बयान में कहा कि यह “साइबर से जुड़ी समस्या” उनके MUSE (मल्टी-यूजर सिस्टम एनवायरनमेंट) सॉफ्टवेयर पर चुनिंदा हवाई अड्डों पर हुई, और इसका असर सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक कस्टमर चेक-इन तथा बैगेज ड्रॉप पर सीमित है। आरटीएक्स ने जोर देकर कहा कि मैनुअल चेक-इन से इस समस्या को संभाला जा सकता है, और वे इसे जल्द से जल्द ठीक करने में लगे हैं। ब्रुसेल्स हवाई अड्डे ने अपनी वेबसाइट पर पुष्टि की कि ऑटोमैटेड सिस्टम काम नहीं कर रहे, इसलिए सिर्फ मैनुअल प्रक्रियाएं चल रही हैं, जिससे उड़ान शेड्यूल पर “बड़ा असर” पड़ रहा है।
बर्लिन हवाई अड्डे ने कहा कि यूरोप भर में काम करने वाले सिस्टम प्रोवाइडर में समस्या से चेक-इन पर लंबा इंतजार हो रहा है, लेकिन उन्होंने कोई बड़ी देरी या रद्दीकरण की सूचना नहीं दी। हीथ्रो ने बताया कि समस्या से “न्यूनतम” व्यवधान हुआ है, और कोई उड़ान सीधे रद्द नहीं हुई, लेकिन देरी जरूर हुई। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ राफ पिलिंग, जो सोफोस फर्म के थ्रेट इंटेलिजेंस डायरेक्टर हैं, ने कहा कि यह घटना “एयर ट्रैवल को सपोर्ट करने वाली डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की नाजुक और जुड़ी हुई प्रकृति” को उजागर करती है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस साल यूके में रिटेल और ऑटोमोटिव सेक्टर पर भी ऐसे हमले हुए हैं, और खतरा बहुत वास्तविक है।
साइबर हमलों का बढ़ता खतरा
हाल के वर्षों में साइबर हमले और तकनीकी खराबियां दुनिया भर के हवाई अड्डों को प्रभावित कर रही हैं, जापान से जर्मनी तक के उदाहरण मौजूद हैं। फ्रेंच एयरोस्पेस कंपनी थेल्स की जून 2025 में जारी रिपोर्ट के अनुसार, एविएशन सेक्टर में 2024 से 2025 तक साइबर हमलों में 600 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। रिपोर्ट में कहा गया कि एयरलाइंस, हवाई अड्डों, नेविगेशन सिस्टम और सप्लायर्स हर कड़ी हमले की शिकार हो सकती है, क्योंकि यह सेक्टर रणनीतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है और हैकर्स का मुख्य लक्ष्य बन गया है। जुलाई 2025 में ऑस्ट्रेलियाई एयरलाइन क्वांटास पर हमला हुआ, जिसमें 6 मिलियन ग्राहकों का संवेदनशील डेटा चोरी हुआ। इसी तरह, 2023 में कोलिंस एयरोस्पेस पर रैनसम-मांगने वाले हैकर्स ने हमला किया था, जैसा कि कई ब्रेक-ट्रैकिंग वेबसाइटों ने रिपोर्ट किया।
ट्रैवल एनालिस्ट पॉल चार्ल्स ने स्काई न्यूज से कहा कि वे इस हमले से “हैरान और स्तब्ध” हैं, क्योंकि कोलिंस जैसी बड़ी कंपनी की सिस्टम इतनी कमजोर साबित हुई। उन्होंने इसे “बहुत चालाक साइबर हमला” बताया, क्योंकि यह एक साथ कई एयरलाइंस और हवाई अड्डों को प्रभावित कर रहा है, न कि सिर्फ एक को। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रैनसमवेयर हमला हो सकता है, जहां साइबर अपराधी नेटवर्क को लॉक करके पैसे मांगते हैं, या फिर जानबूझकर किया गया डिजिटल सबोटेज। यूरोपीय कमीशन के प्रवक्ता ने कहा कि यह कोई “बड़े पैमाने का गंभीर हमला” नहीं लगता, और जांच चल रही है।
रिकवरी की स्थिति
रविवार, 21 सितंबर 2025 तक स्थिति में सुधार हो रहा था, लेकिन पूरी तरह सामान्य नहीं हुई। हीथ्रो ने एक्स पर पोस्ट किया कि वे चेक-इन सिस्टम की समस्या से रिकवर करने में लगे हैं, और ज्यादातर उड़ानें चल रही हैं, लेकिन यात्रियों को अपनी फ्लाइट स्टेटस जांचने की सलाह दी। ब्रुसेल्स हवाई अड्डे ने कहा कि साइबर हमला “उड़ान शेड्यूल पर काफी असर” डाल रहा है, जिससे देरी और रद्दीकरण हो रहे हैं, और उन्होंने एयरलाइंस से रविवार के लिए आधे डिपार्चर कैंसल करने को कहा ताकि लंबी लाइनें और आखिरी मिनट के कैंसलेशन से बचा जा सके। बर्लिन ब्रैंडेनबर्ग ने बताया कि समस्या बनी हुई है, लेकिन वे कंपनी के साथ मिलकर इसे ठीक कर रहे हैं, और फिलहाल कोई बड़ी देरी या रद्दीकरण नहीं है।
सिरियम के आंकड़ों के अनुसार, रविवार दोपहर तक हीथ्रो पर देरी “न्यूनतम” थी, बर्लिन पर “मध्यम” और ब्रुसेल्स पर “भारी” लेकिन सुधार हो रहा था। ब्रिटिश ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर हीदी अलेक्जेंडर ने एक्स पर कहा कि वे हीथ्रो और अन्य यूरोपीय हवाई अड्डों पर चेक-इन और बोर्डिंग प्रभावित होने की निगरानी कर रही हैं, और नियमित अपडेट ले रही हैं। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोपीय हवाई अड्डों का तीसरे पक्ष की कंपनियों पर ज्यादा निर्भर होना और एक ही सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल उन्हें आसान निशाना बनाता है। वे चेतावनी देते हैं कि भविष्य में ऐसे हमले और बढ़ सकते हैं, जो यात्री सेवाओं, स्टाफिंग और पूरे नेटवर्क पर गंभीर खतरा पैदा करेंगे। इस घटना ने एविएशन सेक्टर में साझा प्लेटफॉर्म्स की जोखिम को उजागर किया, जहां एक वेंडर की समस्या बड़े हब्स पर कैस्केड इफेक्ट पैदा करती है।
यात्रियों के लिए सलाह और व्यापक प्रभाव
हवाई अड्डा अधिकारियों ने यात्रियों को सलाह दी है कि एयरपोर्ट जाने से पहले अपनी उड़ान की स्थिति ऑनलाइन जांचें, समय से पहले पहुंचें (लॉन्ग-हॉल फ्लाइट्स के लिए तीन घंटे पहले और शॉर्ट-हॉल के लिए दो घंटे पहले), और टिकट व बोर्डिंग पास की कॉपी या स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें। ब्रुसेल्स ने विशेष रूप से कहा कि यात्रियों को अपनी फ्लाइट स्टेटस चेक करने के बाद ही एयरपोर्ट आएं। इस घटना को यूरोप की हवाई सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चेतावनी माना जा रहा है, और जांच एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि इसके पीछे कौन सा हैकर ग्रुप है—चाहे वह अपराधी संगठन हों, राज्य प्रायोजित हमलावर या कोई अन्य। भारतीय हवाई अड्डों पर इस हमले का कोई असर नहीं पड़ा है, जैसा कि न्यूज ऑन एयर ने रिपोर्ट किया।
यह हमला स्वास्थ्य, रक्षा, रिटेल और ऑटोमोटिव जैसे अन्य सेक्टरों पर हो रहे साइबर हमलों की श्रृंखला का हिस्सा है, जैसे कि हाल ही में जगुआर लैंड रोवर पर हुआ हमला जिसने उनकी प्रोडक्शन लाइन्स रोक दीं। मार्क्स एंड स्पेंसर जैसी कंपनियों को भी लाखों पाउंड का नुकसान हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हमलों से बचने के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा उपायों, बैकअप सिस्टम और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत है। कुल मिलाकर, यह घटना दिखाती है कि कैसे डिजिटल इंटरकनेक्टेड सिस्टम आधुनिक यात्रा को सुविधाजनक बनाते हैं, लेकिन साथ ही उन्हें नए खतरों के प्रति संवेदनशील भी।
