कनाडा की वीजा कार्रवाई में 47,000 अंतरराष्ट्रीय छात्रों को दर्जा खोने का खतरा
कनाडा की इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज एंड सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) ने 47,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय छात्रों की विस्तृत समीक्षा शुरू कर दी है, जो वीजा नियमों के उल्लंघन के कारण अपना कानूनी स्टेटस खोने के कगार पर हैं। यह कार्रवाई देश के तेजी से विस्तारित शिक्षा प्रणाली पर नियंत्रण कसने का हिस्सा है, जहां छात्रों के लिए कक्षाओं में नियमित उपस्थिति वीजा की प्रमुख शर्त है। 2025 में लागू सख्त अध्ययन परमिट सीमाओं के बीच यह कदम अंतरराष्ट्रीय छात्रों, खासकर भारतीयों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
IRCC की माइग्रेशन इंटीग्रिटी विभाग की असिस्टेंट डिप्टी मिनिस्टर ऐशा जफर ने 23 सितंबर 2025 को हाउस ऑफ कॉमन्स की सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन स्टैंडिंग कमिटी के समक्ष अपनी गवाही में बताया कि समीक्षित छात्रों में से 8% “संभावित रूप से गैर-अनुपालन” वाले पाए गए। इसका अर्थ है कि ये छात्र अपनी अध्ययन शर्तों के तहत आवश्यक कक्षाओं में भाग नहीं ले रहे। जफर ने स्पष्ट किया, “जिन छात्रों से अनुपालन संबंधी जानकारी मांगी गई थी, उनकी कुल संख्या के आधार पर यह आंकड़ा लगभग 47,175 तक पहुंचता है। हमने अभी यह निर्धारित नहीं किया है कि ये छात्र पूरी तरह से गैर-अनुपालन वाले हैं; ये संस्थानों द्वारा प्रदान किए गए प्रारंभिक परिणाम हैं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि IRCC इस डेटा को कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी (CBSA) के साथ साझा करता है, जो उल्लंघनकर्ताओं की जांच करता है और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें देश से हटाने की प्रक्रिया शुरू करता है।
यह आंकड़ा कनाडा की पोस्ट-सेकेंडरी संस्थानों से प्राप्त रिपोर्टों पर आधारित है, जहां छात्रों की अनुपस्थिति को चिह्नित किया जाता है। हालांकि, जफर ने स्वीकार किया कि सटीक गैर-अनुपालन की संख्या तय करना चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि CBSA ही अंतिम जांच और प्रवर्तन का जिम्मेदार है। कनाडा में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की कुल संख्या 2023 में 10 लाख से अधिक हो चुकी थी, और यह संख्या शिक्षा क्षेत्र को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लेकिन दुरुपयोग की बढ़ती घटनाओं ने सरकार को सतर्क कर दिया है।
गैर-अनुपालन की पहचान और चुनौतियां
गैर-अनुपालन की पुष्टि करना एक जटिल प्रक्रिया है, जैसा कि जफर ने कमिटी में उल्लेख किया। डेजिग्नेटेड लर्निंग इंस्टीट्यूशंस (DLIs) अलग-अलग समय पर उपस्थिति डेटा रिपोर्ट करते हैं, और कुछ छात्र वैध कारणों से संस्थान बदल सकते हैं, स्नातक हो सकते हैं, या अधिकृत छुट्टी ले सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोई छात्र स्वास्थ्य कारणों से अनुपस्थित होता है या जॉब शैडोइंग प्रोग्राम में भाग लेता है, तो इसे उल्लंघन नहीं माना जाता। IRCC की आधिकारिक गाइडलाइंस के अनुसार, अध्ययन परमिट धारकों को पूर्णकालिक रूप से पढ़ाई जारी रखनी होती है, और किसी भी बदलाव की सूचना IRCC को देनी पड़ती है।
इसके अलावा, “नो-शो” छात्रों की समस्या पुरानी बनी हुई है। 2024 की वसंत सत्र में ही लगभग 50,000 छात्रों को “नो-शोज” के रूप में चिह्नित किया गया, जो अध्ययन परमिट लेकर कनाडा आए लेकिन कभी नामांकन ही नहीं किया। इनमें सबसे अधिक 19,582 भारतीय छात्र थे, उसके बाद 4,279 चीनी छात्र, फिर नाइजीरिया और घाना से। IRCC के जनवरी 2025 के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय छात्रों में अनुपालन दर 91.1% है, लेकिन गैर-अनुपालन 5.4% और रिपोर्ट न करने वाले 12,553 हैं। यह डेटा दिखाता है कि भारत कनाडा का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय छात्र स्रोत है, इसलिए उल्लंघनों की संख्या भी अधिक प्रतीत होती है।
फर्जी दस्तावेजों का मुद्दा भी गंभीर है। पिछले साल IRCC ने 5 लाख दस्तावेजों की जांच के दौरान 10,000 से अधिक फर्जी छात्र स्वीकृति पत्र पकड़े, जिनमें 80% गुजरात और पंजाब से जुड़े थे। इससे साफ होता है कि भर्ती प्रक्रिया में कमजोरियां हैं, जो अब सख्ती से दूर की जा रही हैं।
विशेषज्ञों की राय: संकट या सुधार?
एम.एम. एडवाइजरी सर्विसेज की संस्थापक मारिया मथाई, जो भारतीय शिक्षा उद्योग में 29 वर्षों का अनुभव रखती हैं, का मानना है कि 47,000 के आंकड़े को “संकट” के रूप में चित्रित करना गलत होगा। उन्होंने कहा, “प्रांत स्तर पर अटेस्टेशन लेटर (PAL) की शुरुआती स्क्रीनिंग अब उन हजारों छात्रों को रोक रही है जो पहले आसानी से प्रवेश पा लेते थे। चल रही निगरानी पुरानी समस्याओं को उजागर कर रही है। ये 47,000 मामले एक बैकलॉग हैं, जो साबित करते हैं कि धोखाधड़ी का पता लगाने की प्रणाली मजबूत हो रही है, न कि कमजोर।” मथाई ने जोड़ा कि कनाडा का सिस्टम अनुकूलन कर रहा है। ओंटारियो प्रांत, जहां सबसे अधिक विदेशी छात्र रहते हैं, पहले उन कॉलेजों को PAL आवंटित करता था जहां डिफॉल्ट रेट ऊंचा था। अब 2025-2027 के इमिग्रेशन लेवल प्लान के तहत अध्ययन परमिटों पर 437,000 की सीमा लगाने से प्रांतों को साक्ष्य-आधारित प्रवेश प्रक्रियाओं को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
मथाई के अनुसार, यह बदलाव मुख्य रूप से कॉलेज सेक्टर को प्रभावित करेगा, जो अंतरराष्ट्रीय छात्रों के 75% आवेदनों को संभालता है। स्टूडेंट डायरेक्ट स्ट्रीम (SDS) को 2024 में समाप्त करने से भारतीय छात्रों के लिए वीजा प्रक्रिया धीमी हो गई है, और अब स्टैंडर्ड स्ट्रीम के तहत आवेदन करना पड़ता है। जनवरी से जुलाई 2025 तक भारतीय छात्रों को केवल 52,765 अध्ययन परमिट जारी हुए, जो 2024 के समान अवधि के 188,255 से 72% कम है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि वर्षांत तक यह संख्या 90,000 से अधिक नहीं होगी, जो 2023 से 67% की गिरावट दर्शाता है।
कनाडा-आधारित इमिग्रेशन विश्लेषक दर्शन महाराजा ने कहा, “भर्ती प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार और गलत प्रथाओं को जड़ से उखाड़ने के लिए व्यापक सुधार जरूरी हैं।” यह टिप्पणी व्यवसाय स्टैंडर्ड को दी गई थी, जो सिस्टम की गहराई तक की समस्याओं पर जोर देती है।
अंतरराष्ट्रीय छात्र प्रणाली का इतिहास और नई व्यवस्था
कनाडा की अंतरराष्ट्रीय छात्र अनुपालन व्यवस्था की शुरुआत 2014 में हुई थी, जो DLIs पर निर्भर है। ये संस्थान हर छह महीने में उपस्थिति और अनुपालन रिपोर्ट IRCC को सौंपते हैं। नई नियमावली के तहत, रिपोर्ट न देने वाले स्कूलों को एक वर्ष तक निलंबित किया जा सकता है, जो वीजा दुरुपयोग को रोकने का प्रमुख उपकरण है। IRCC की वेबसाइट के अनुसार, 2024 से लागू बदलावों में भाषा प्रवीणता प्रमाण, फील्ड ऑफ स्टडी आवश्यकताएं, और पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) के लिए नए मानक शामिल हैं।
2025 में लागू 437,000 अध्ययन परमिट कैप का उद्देश्य अस्थायी निवासियों की संख्या को कुल आबादी के 5% से नीचे रखना है। पहले छमाही में कुल आगमन 57% कम हुए, जिसमें छात्र 70% और वर्क परमिट 50% घटे। यह कदम आवास संकट और सार्वजनिक सेवाओं पर दबाव को कम करने के लिए है। अंतरराष्ट्रीय छात्र कनाडा की अर्थव्यवस्था में सालाना 40 बिलियन कैनेडियन डॉलर का योगदान देते हैं, लेकिन अनियंत्रित वृद्धि ने स्थानीय चुनौतियां पैदा की हैं।
PAL सिस्टम 2024 में पेश किया गया, जो प्रांतीय स्तर पर आवेदनों को सत्यापित करता है। इससे पहले, कई छात्र फर्जी PAL के साथ प्रवेश पा लेते थे। अब यह प्रक्रिया हजारों संभावित उल्लंघनों को रोक रही है।
भर्ती प्रक्रिया में बढ़ती सख्ती और कॉलेजों की भूमिका
फैनशॉ कॉलेज के इंटरनेशनल रिक्रूटमेंट के एसोसिएट डायरेक्टर प्रणव राठी ने बताया कि सख्त स्क्रीनिंग पहले से लागू है। “हर आवेदन की बारीकी से जांच की जाती है, जिसमें समग्र स्कोर, बैकलॉग, और मार्कशीट की प्रामाणिकता शामिल है। IRCC-अनुमोदित अंग्रेजी भाषा परीक्षण जैसे IELTS प्रदान करना अनिवार्य है, और हम रिपोर्ट से प्रवीणता की पुष्टि करते हैं।” राठी ने चेतावनी दी कि अध्ययन परमिट मिलने के बाद संस्थान बदलने की छूट ने समस्या को बढ़ावा दिया है। “संस्थानों को अपने प्रतिनिधियों को पारदर्शी, प्रशिक्षित रखना चाहिए और नैतिक भर्ती प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित करना चाहिए जो संस्थागत तथा नियामक मानकों से मेल खाएं।” 2024 से भर्ती एजेंटों पर अधिक नियंत्रण लगाया गया है ताकि फर्जी दस्तावेज रोके जा सकें।
कॉलेजों में दक्षता के मुद्दे भी उठे हैं। कुछ संस्थानों में कम प्रवेश मानक के कारण “डिप्लोमा मिल्स” का आरोप लगा है, जहां छात्र केवल वीजा के लिए आते हैं, न कि पढ़ाई के लिए। IRCC अब DLIs को रेटिंग सिस्टम से जोड़ेगा ताकि उच्च गुणवत्ता वाले संस्थान प्राथमिकता पाएं।
राजनीतिक बहस और भविष्य की दिशा
ओटावा में यह मुद्दा राजनीतिक गरमी का केंद्र है। कंजर्वेटिव सांसद मिशेल रेम्पेल गार्नर ने IRCC अधिकारियों से उल्लंघनकर्ताओं को ट्रैक और हटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कोनेस्टोगा कॉलेज के प्रेसिडेंट जॉन टिबिट्स को कमिटी के समक्ष बुलाने का प्रस्ताव भी पास करवाया। टिबिट्स को संसद में उच्च विदेशी छात्र संख्या से आवास और सार्वजनिक सेवाओं पर पड़ने वाले दबाव के आरोपों का सामना करना पड़ा। उन्होंने CTV न्यूज को दिए बयान में कहा, “भविष्य की ओर देखते हुए, यह सिस्टम को स्थिर करने का समय है ताकि अंतरराष्ट्रीय छात्र कार्यक्रम टिकाऊ, निष्पक्ष, वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बने और कनाडा की आर्थिक प्राथमिकताओं पर केंद्रित हो।”
टिबिट्स ने जोर दिया कि कॉलेज स्थानीय अर्थव्यवस्था को समर्थन देते हैं, लेकिन सतत विकास के लिए सुधार आवश्यक हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये बदलाव लंबे समय में शिक्षा प्रणाली को मजबूत बनाएंगे, हालांकि अल्पकालिक रूप से छात्रों और संस्थानों को चुनौतियां झेलनी पड़ेंगी। भारतीय छात्रों के लिए, जो कनाडा को स्थायी निवास का द्वार मानते थे, अब विकल्प जैसे ऑस्ट्रेलिया या यूके पर विचार करना पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, यह वीजा क्रैकडाउन कनाडा की इमिग्रेशन नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जो गुणवत्ता और अनुपालन पर जोर देता है। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे IRCC की आधिकारिक वेबसाइट से नियमों की जांच करें और प्रामाणिक सलाहकारों से संपर्क करें।
जानकारी एमएसएन और वीएनएक्सप्रेस इंटरनेशनल से एकत्र की गई है।
