नासा फरवरी 2026 की शुरुआत में चंद्रमा के चारों ओर ऐतिहासिक आर्टेमिस II मिशन लॉन्च कर सकता है
नासा अपनी महत्वाकांक्षी आर्टेमिस II मिशन को फरवरी 2026 में लॉन्च करने की योजना बना रहा है, जिसमें चार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के चारों ओर उड़ान भरेंगे, जो अपोलो मिशनों के बाद 50 साल से ज्यादा समय में पहली ऐसी मानवयुक्त यात्रा होगी। पहले इस मिशन को अप्रैल 2026 तक टाला गया था, लेकिन ह्यूस्टन के जॉनसन स्पेस सेंटर में मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नासा के अधिकारियों ने घोषणा की कि वे 5 फरवरी से शुरू होने वाले लॉन्च विंडो को लक्ष्य बना सकते हैं, जिससे मिशन की समयसीमा पहले की तुलना में काफी आगे आ जाएगी (नासा के आधिकारिक अपडेट और प्रेस रिलीज के अनुसार)।
मिशन का महत्व, लक्ष्य और अंतरराष्ट्रीय सहयोग
आर्टेमिस II मिशन नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम का दूसरा चरण है, जो चंद्रमा पर स्थायी मानव उपस्थिति स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देना, आर्थिक अवसर पैदा करना और अंततः मंगल ग्रह पर मानव मिशन की तैयारी करना है। “हम सब मिलकर इतिहास के पहले पंक्ति के दर्शक हैं। हम 50 साल से ज्यादा समय बाद चंद्रमा पर लौट रहे हैं,” नासा की एक्सप्लोरेशन सिस्टम डेवलपमेंट सिस्टम्स डायरेक्टोरेट की कार्यकारी उप सहयोगी प्रशासक लकीशा हॉकिन्स ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा। यह मिशन विविधता को भी बढ़ावा देता है, क्योंकि इसमें शामिल अंतरिक्ष यात्री विभिन्न पृष्ठभूमियों से आते हैं, जो अंतरिक्ष अन्वेषण को अधिक समावेशी बनाता है (नासा की वेबसाइट और एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट्स से)।
आर्टेमिस II टीम में तीन अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री – कमांडर रीड वाइजमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन स्पेशलिस्ट क्रिस्टीना हैमॉक कोच – और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैंसेन शामिल हैं। यह पहला मौका होगा जब कोई कनाडाई चंद्रमा की कक्षा तक पहुंचेगा, जो कनाडाई स्पेस एजेंसी (CSA) के साथ नासा के अंतरराष्ट्रीय सहयोग को दर्शाता है। ग्लोवर चंद्रमा तक पहुंचने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति बनेंगे, जबकि कोच पहली महिला होंगी जो चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश करेंगी। यह मिशन चंद्रमा की सतह पर उतरने की बजाय उसके चारों ओर उड़ान भरेगा, जो लगभग 10 दिनों तक चलेगा और पृथ्वी से लगभग 2,30,000 मील दूर तक जाएगा (नासा के मिशन ओवरव्यू से)।
आर्टेमिस I से मिली सीख, चुनौतियां और सुधार
आर्टेमिस कार्यक्रम की शुरुआत आर्टेमिस I से हुई, जो नवंबर 2022 में लॉन्च हुआ और दिसंबर 2022 में सफलतापूर्वक पूरा हुआ। इस मानवरहित मिशन में ओरियन अंतरिक्ष यान को चंद्रमा के चारों ओर भेजा गया, जहां इसने विभिन्न परीक्षण किए और सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर लौटा। हालांकि, मिशन के बाद जांच में कई मुद्दे सामने आए, जैसे बैटरी की समस्याएं, हवा के वेंटिलेशन और तापमान नियंत्रण प्रणाली में चुनौतियां, तथा हीट शील्ड से चार लेयर के टुकड़ों का गिरना। नासा की टीम इन मुद्दों की गहन जांच कर रही है, जिसमें हीट शील्ड की सामग्री और डिजाइन पर फोकस है, ताकि भविष्य के मिशनों में अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके (नासा के पोस्ट-मिशन रिपोर्ट और इंजीनियरिंग अपडेट से)।
हॉकिन्स ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जोर दिया, “यह आर्टेमिस की टेस्ट सीरीज है। आर्टेमिस II एक 10-दिन की टेस्ट फ्लाइट है, और हम साथ मिलकर जो गतिविधियां करेंगे, उनसे सीखेंगे।” उन्होंने बताया कि आर्टेमिस I की सफलता के बावजूद, आर्टेमिस II में नई प्रणालियों का परीक्षण किया जाएगा, जैसे जीवन समर्थन प्रणालियां जो ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड को नियंत्रित करती हैं, उन्नत डिस्प्ले और नेविगेशन सॉफ्टवेयर, तथा संचार उपकरण जो गहरे अंतरिक्ष में काम करेंगे। ये परीक्षण आर्टेमिस III के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिसमें चंद्रमा की सतह पर लैंडिंग की योजना है, जो 2027 के आसपास हो सकती है। नासा ने अपोलो 17 मिशन के बाद से, जो दिसंबर 1972 में हुआ था, चंद्रमा पर कोई मानवयुक्त मिशन नहीं भेजा है, और आर्टेमिस कार्यक्रम इस अंतर को भरने का प्रयास है (नासा के ऐतिहासिक रिकॉर्ड और हालिया घोषणाओं से)।
रॉकेट सिस्टम और ओरियन कैप्सूल की वर्तमान स्थिति
आर्टेमिस लॉन्च डायरेक्टर चार्ली ब्लैकवेल-थॉम्पसन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट, जो दुनिया का सबसे शक्तिशाली रॉकेट है, “लगभग पूरी तरह से स्टैक्ड और लॉन्च के लिए तैयार है।” SLS में चार RS-25 इंजन और दो सॉलिड रॉकेट बूस्टर शामिल हैं, जो ओरियन कैप्सूल को चंद्रमा की ओर प्रक्षेपित करेंगे। यह रॉकेट फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर में असेंबल किया गया है और विभिन्न परीक्षणों से गुजरा है, जिसमें वेट स्टैकिंग टेस्ट और इंजन फायरिंग शामिल हैं (नासा के SLS प्रोग्राम अपडेट से)।
ओरियन कैप्सूल, जो अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाएगा, अपनी अंतिम तैयारियों में है। यह केनेडी स्पेस सेंटर में प्रोसेसिंग से गुजर रहा है, जहां इसकी इलेक्ट्रिकल सिस्टम, थर्मल प्रोटेक्शन और जीवन समर्थन प्रणालियों की जांच की जा रही है। प्रोसेसिंग पूरा होने के बाद, इसे व्हीकल असेंबली बिल्डिंग (VAB) में ले जाया जाएगा, जहां इसे SLS रॉकेट के साथ जोड़ा जाएगा। ओरियन में यूरोपीयन स्पेस एजेंसी (ESA) द्वारा प्रदान किया गया सर्विस मॉड्यूल भी है, जो बिजली, प्रोपल्शन और थर्मल कंट्रोल प्रदान करता है, जो अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक और उदाहरण है (नासा और ESA के संयुक्त अपडेट से)।
भविष्य के प्रभाव और व्यापक संदर्भ
आर्टेमिस II न केवल चंद्रमा की ओर वापसी का प्रतीक है, बल्कि यह नासा के व्यापक लक्ष्यों का हिस्सा है, जैसे चंद्रमा पर बेस स्थापित करना और वहां से मंगल मिशन की तैयारी करना। मिशन में शामिल विविध टीम अंतरिक्ष अन्वेषण में समानता को बढ़ावा देती है, और इससे प्राप्त डेटा भविष्य के मिशनों को सुरक्षित और प्रभावी बनाने में मदद करेगा। नासा के अनुसार, यह कार्यक्रम निजी कंपनियों जैसे स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजिन के साथ साझेदारी पर भी निर्भर है, जो लैंडर और अन्य तकनीकों का विकास कर रही हैं। कुल मिलाकर, आर्टेमिस II मानव अंतरिक्ष यात्रा के नए युग की शुरुआत करेगा, जिसमें चुनौतियों का सामना करते हुए निरंतर सुधार किया जाएगा (नासा की आर्टेमिस प्रोग्राम ओवरव्यू और हालिया मीडिया रिपोर्ट्स से)।
