हम अब लड़ाई में शामिल हो गए हैंः आनंद महिंद्रा ने जीएसटी कटौती की सराहना की; स्वामी विवेकानंद को ‘अधिक सुधारों’ के लिए उद्धृत किया
नई दिल्ली: भारत के प्रमुख उद्योगपति और महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने हाल ही में घोषित जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) दरों में व्यापक कटौती का गर्मजोशी से स्वागत किया है। उन्होंने इस कदम को भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत बताया, लेकिन साथ ही नीति निर्माताओं से अपील की कि वे और तेजी से सुधारों को लागू करें। महिंद्रा, जो अक्सर सोशल मीडिया पर आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय साझा करते हैं, ने इस बार एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया दी। उनकी पोस्ट में लिखा था, “अब हम लड़ाई में शामिल हो गए हैं… और तेज सुधार उपभोग और निवेश को बढ़ाने का सबसे निश्चित तरीका हैं। ये बदलाव अर्थव्यवस्था को विस्तार देंगे, रोजगार के अवसर पैदा करेंगे और वैश्विक मंच पर भारत की आवाज को और मजबूत बनाएंगे।”
महिंद्रा ने अपनी बात को और प्रभावशाली बनाने के लिए स्वामी विवेकानंद की प्रसिद्ध अपील का सहारा लिया। उन्होंने लिखा, “लेकिन स्वामी विवेकानंद की मशहूर अपील को याद रखें: ‘उठो, जागो, और लक्ष्य प्राप्त होने तक रुको मत।’ तो, कृपया और सुधार करें…।” यह पोस्ट 4 सितंबर 2025 को की गई थी, और इसे हजारों लाइक्स और शेयर मिल चुके हैं (स्रोत: आनंद महिंद्रा का आधिकारिक एक्स हैंडल, 4 सितंबर 2025; वेरिफाइड बाय ट्विटर एनालिटिक्स टूल्स जैसे ट्वीटडेक)। महिंद्रा की यह अपील न केवल जीएसटी सुधारों पर केंद्रित है, बल्कि यह व्यापक आर्थिक सुधारों की जरूरत को रेखांकित करती है, जैसे कि श्रम कानूनों में बदलाव, निवेश नीतियों को आसान बनाना और डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना। विशेषज्ञों का मानना है कि महिंद्रा जैसे प्रभावशाली व्यक्तियों की ऐसी टिप्पणियां सरकार पर दबाव डाल सकती हैं और जनता में सुधारों के प्रति जागरूकता बढ़ा सकती हैं (स्रोत: इकोनॉमिक टाइम्स ओपिनियन पीस, 4 सितंबर 2025)।
जीएसटी में क्रांतिकारी बदलाव: चार स्लैब से दो स्लैब की सरल संरचना, विस्तृत विवरण
महिंद्रा की इन टिप्पणियों का संदर्भ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 3 सितंबर 2025 को घोषित जीएसटी सुधार हैं। पहले की जटिल चार स्लैब प्रणाली (5%, 12%, 18% और 28%) को बदलकर अब एक सरलीकृत दो-स्तरीय संरचना लागू की गई है – 5% और 18%। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करना, कर प्रणाली को आसान बनाना और अर्थव्यवस्था में मांग को बढ़ावा देना है। दैनिक उपयोग की कई वस्तुओं पर अब केवल 5% कर लगेगा, जिसमें साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, रसोई के बर्तन, साइकिल, घरेलू फर्नीचर और अन्य घरेलू सामान शामिल हैं। इसके अलावा, आवश्यक खाद्य वस्तुओं जैसे यूएचटी (अल्ट्रा हाई टेम्परेचर) दूध, पनीर, भारतीय ब्रेड (जैसे रोटी, नान), दालें, अनाज और कुछ फल-सब्जियां को पूरी तरह से कर-मुक्त (शून्य दर) कर दिया गया है।
ये बदलाव 22 सितंबर 2025 से प्रभावी होंगे, जो हिंदू त्योहार नवरात्रि की शुरुआत के साथ मेल खाते हैं। वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि इस समय को इसलिए चुना गया ताकि त्योहारी सीजन में उपभोक्ता अधिक खरीदारी कर सकें और अर्थव्यवस्था को तत्काल बढ़ावा मिले। ऐतिहासिक रूप से देखें तो जीएसटी को 2017 में लागू किया गया था, लेकिन इसमें कई जटिलताएं थीं, जैसे कि वस्तुओं का वर्गीकरण और दरों में असमानता। नई संरचना इन समस्याओं को दूर करने का प्रयास है (स्रोत: भारत सरकार का आधिकारिक प्रेस रिलीज, प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) वेबसाइट, 3 सितंबर 2025; साथ ही जीएसटी काउंसिल की रिपोर्ट से वेरिफाइड)। इसके अलावा, जीवन रक्षक दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और कुछ कृषि उत्पादों पर भी छूट दी गई है, जो स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाएगी। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे कर संग्रह में शुरुआती गिरावट के बावजूद लंबे समय में वृद्धि होगी, क्योंकि अनुपालन बढ़ेगा और काला बाजारी कम होगी (स्रोत: केपीएमजी इंडिया की जीएसटी रिपोर्ट, 4 सितंबर 2025)।
उद्योग जगत की विस्तृत प्रतिक्रियाएं: त्योहारी सीजन में मांग वृद्धि की उम्मीद, विशेषज्ञों के उद्धरण
उद्योग जगत ने इन सुधारों को हाथोंहाथ लिया है, और कई प्रमुख कंपनियों के नेताओं ने इसे अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन बताया है। पारले प्रोडक्ट्स के वाइस-प्रेसिडेंट मयंक शाह ने कहा, “यह एक गेम चेंजर है। पापी वस्तुओं (जैसे तंबाकू और शराब) को छोड़कर, लगभग सभी खाद्य वस्तुएं अब 5% कर स्लैब में आ गई हैं। इससे बिस्कुट, स्नैक्स और अन्य उपभोक्ता उत्पादों की कीमतें कम होंगी, जो ग्राहकों को आकर्षित करेगी।” उन्होंने आगे जोड़ा कि त्योहारी सीजन में बिक्री में 20% तक की वृद्धि हो सकती है, खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां लोग कीमतों के प्रति संवेदनशील हैं।
डाबर इंडिया के सीईओ मोहित मल्होत्रा ने इसे और विस्तारMgmt से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह सुधार ग्रामीण और अर्ध-शहरी मांग के लिए “शक्तिशाली उत्प्रेरक” की भूमिका निभाएगा। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी के उत्पाद जैसे हेयर ऑयल, टूथपेस्ट और घरेलू देखभाल आइटम अब सस्ते होंगे, जिससे ग्रामीण भारत में खपत बढ़ेगी (स्रोत: डाबर की आधिकारिक प्रेस रिलीज, 4 सितंबर 2025; वेरिफाइड बाय बिजनेस स्टैंडर्ड इंटरव्यू)। अन्य उद्योग नेता, जैसे आईटीसी और हिंदुस्तान यूनिलीवर के प्रतिनिधियों ने भी समान विचार व्यक्त किए, कहते हुए कि यह सुधार मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद करेगा और छोटे व्यवसायों को लाभ पहुंचाएगा। फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के एक सर्वे के अनुसार, 80% से अधिक व्यवसायी इन बदलावों से सकारात्मक प्रभाव की उम्मीद कर रहे हैं (स्रोत: फिक्की रिपोर्ट, 4 सितंबर 2025; इकोनॉमिक टाइम्स कवरेज)।
राजकोषीय प्रभाव, विशेषज्ञ विश्लेषण और व्यापक आर्थिक प्रभाव: ‘जीएसटी 2.0’ की विस्तृत व्याख्या
राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि इस तर्कसंगतकरण से केंद्र और राज्यों को अनुमानित 48,000 करोड़ रुपये का वार्षिक नुकसान होगा, लेकिन यह वित्तीय रूप से टिकाऊ है। उन्होंने कहा, “दर कटौती से अनुपालन में सुधार होगा, अधिक व्यवसाय जीएसटी नेट में आएंगे, और कुल राजस्व में उछाल आएगा।” पिछले वर्षों के आंकड़ों से पता चलता है कि जीएसटी संग्रह में 10-12% की वार्षिक वृद्धि हुई है, और ये सुधार इसे और तेज कर सकते हैं (स्रोत: वित्त मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट, 2024-25; वेरिफाइड बाय सीबीडीटी डेटा)।
विशेषज्ञों ने इस ओवरहॉल को “जीएसटी 2.0” के रूप में वर्णित किया है। डेलॉइट इंडिया के पार्टनर महेश जयसिंग ने कहा, “यह सुधार घरेलू परिवारों को बहुत जरूरी राहत प्रदान करेगा, कर वर्गीकरण पर विवादों को कम करेगा और अर्थव्यवस्था की समग्र उत्पादकता बढ़ाएगा।” पीडब्ल्यूसी इंडिया के विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया कि इससे जीडीपी वृद्धि में 0.5-1% का योगदान हो सकता है, मुख्य रूप से उपभोग में वृद्धि के कारण। इसके अलावा, विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत जैसे विकासशील देशों में कर सुधारों से गरीबी कम करने और असमानता घटाने में मदद मिलती है (स्रोत: डेलॉइट रिपोर्ट, 4 सितंबर 2025; पीडब्ल्यूसी एनालिसिस, 3 सितंबर 2025; विश्व बैंक इकोनॉमिक अपडेट, 2025)।
कुल मिलाकर, ये जीएसटी सुधार न केवल तत्काल राहत प्रदान करेंगे बल्कि लंबे समय में भारत को एक अधिक प्रतिस्पर्धी और निवेश-अनुकूल अर्थव्यवस्था बनाने में मदद करेंगे। आनंद महिंद्रा की अपील की तरह, यह “लक्ष्य प्राप्त होने तक रुकने” का समय नहीं है, बल्कि निरंतर सुधारों का है। आने वाले महीनों में, इन बदलावों के प्रभाव को करीब से देखा जाएगा, विशेष रूप से दिवाली और अन्य त्योहारों के दौरान।
