SCO बैठक में गले मिले पीएम मोदी, पुतिन, ट्रंप को भेजा संदेश
शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) समिट 2025 का आयोजन चीन के उत्तरी बंदरगाह शहर तियानजिन में 31 अगस्त से 1 सितंबर तक हुआ, जहां विश्व के प्रमुख नेता इकट्ठा हुए. इस समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच गर्मजोशी भरी मुलाकातें और बातचीत सुर्खियां बनीं. समिट का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा करना था, लेकिन यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों और यूक्रेन संघर्ष की पृष्ठभूमि में और भी महत्वपूर्ण हो गया. एससीओ की स्थापना 2001 में हुई थी, और अब इसमें 10 सदस्य देश हैं, जिसमें हाल ही में बेलारूस शामिल हुआ है. यह संगठन चीन और रूस के नेतृत्व में पश्चिमी प्रभाव के खिलाफ एक मंच के रूप में देखा जाता है, जहां व्यापार, सुरक्षा और सांस्कृतिक सहयोग पर जोर दिया जाता है.
समिट के दौरान, मोदी ने पुतिन और शी के साथ हाथ मिलाए, जड़पी दी और मुस्कुराहटें बांटीं, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं. ये पल न केवल व्यक्तिगत दोस्ती को दर्शाते हैं, बल्कि वैश्विक दक्षिण देशों की एकजुटता का प्रतीक भी हैं. मोदी ने एक्स पर तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, “तियानजिन में बातचीत जारी! एससीओ समिट के दौरान राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति शी के साथ विचारों का आदान-प्रदान”. एक वीडियो में मोदी को पुतिन और शी को एक साथ खींचते हुए देखा गया, जो एकता का प्रतीकात्मक इशारा था. समिट का उद्घाटन रविवार शाम शी जिनपिंग द्वारा आयोजित भव्य भोज से हुआ, जिसमें 20 से ज्यादा विदेशी नेता और 10 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख शामिल थे. यह एससीओ का अब तक का सबसे बड़ा आयोजन था, जो ‘एससीओ प्लस’ फॉर्मेट में चीन की अध्यक्षता में हुआ.
मोदी और पुतिन की द्विपक्षीय बैठक: ऊर्जा और रक्षा पर फोकस
मोदी और पुतिन की मुलाकात समिट की एक प्रमुख घटना थी, जहां दोनों नेता एक ही कार में बैठक स्थल तक गए, जो उनकी करीबी दोस्ती को उजागर करता है. बैठक में ऊर्जा संबंध, रक्षा सहयोग और वैश्विक व्यवस्था पर चर्चा हुई. यह बातचीत ट्रंप द्वारा भारतीय सामानों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के फैसले की पृष्ठभूमि में हुई, जो भारत के रूसी कच्चे तेल की खरीद को लेकर था. अधिकारियों के अनुसार, दोनों देशों के बीच ऊर्जा व्यापार को मजबूत करने पर जोर दिया गया, क्योंकि भारत रूस से सस्ता तेल आयात कर रहा है, जो वैश्विक बाजार में महत्वपूर्ण है. रक्षा क्षेत्र में, भारत और रूस के बीच लंबे समय से सहयोग है, जिसमें हथियारों की आपूर्ति और संयुक्त उत्पादन शामिल हैं.
पुतिन ने समिट में यूक्रेन संघर्ष पर अपनी स्थिति दोहराई, जहां उन्होंने पश्चिमी प्रतिबंधों की निंदा की और रूस-चीन संबंधों को “इतिहास के सर्वश्रेष्ठ” बताया. मोदी ने पुतिन से मिलकर लिखा, “राष्ट्रपति पुतिन से मिलना हमेशा खुशी की बात होती है!”. यह मुलाकात ऐसे समय हुई जब भारत, रूस और चीन तीनों अमेरिका से बढ़ते तनाव का सामना कर रहे हैं, जिसमें टैरिफ जंग और यूक्रेन के असर शामिल हैं. समिट में पुतिन ने एससीओ को वैश्विक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया और कहा कि संगठन आतंकवाद, अलगाववाद और अतिवाद से लड़ने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है.
मोदी-शी मुलाकात: भारत-चीन संबंधों में नई शुरुआत
मोदी की चीन यात्रा सात साल में पहली थी, जो 2020 के गलवान संघर्ष के बाद तनावपूर्ण संबंधों की पृष्ठभूमि में हुई. गलवान में हुई झड़प में दोनों देशों के सैनिकों की मौत हुई थी, जिसके बाद सीमा पर गतिरोध लंबा चला. हालांकि, हालिया बातचीत से संबंध सुधार की दिशा में बढ़े हैं, जिसमें सीमा व्यापार बहाल करना, सीधी उड़ानें शुरू करना और शांति सुनिश्चित करना शामिल है.
मोदी और शी की मुलाकात में आतंकवाद से लड़ने के लिए सहयोग पर जोर दिया गया, क्योंकि दोनों देश इसके शिकार हैं. नरेंद्र मोदी ने सीमा पार आतंकवाद पर चिंता जताई और कहा कि भारत और चीन विकास के साझेदार हैं, प्रतिद्वंद्वी नहीं. शी ने कहा कि सीमा मुद्दे को द्विपक्षीय संबंधों पर हावी नहीं होने देना चाहिए और दोनों देशों को आर्थिक विकास पर फोकस करना चाहिए. मोदी ने मुलाकात में “शांतिपूर्ण वातावरण” की सराहना की और कहा कि संबंध “सार्थक दिशा” में आगे बढ़ रहे हैं. दोनों नेता 75 साल की राजनयिक संबंधों की वर्षगांठ मना रहे हैं और लंबी अवधि की रणनीतिक सोच पर सहमत हुए.
समिट में मोदी ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना आतंकवाद के खुले समर्थकों की निंदा की और दोहरे मापदंडों पर सवाल उठाया. उन्होंने हालिया पहलगाम हमले का जिक्र किया, जिसमें 26 लोग मारे गए थे, और पूछा कि आतंकवाद को खुले समर्थन कैसे स्वीकार्य हो सकता है. मोदी ने कट्टरवाद के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की अपील की.
मोदी का प्लेनरी सेशन संबोधन: सुरक्षा, संपर्क और अवसर पर जोर
समिट के प्लेनरी सेशन में मोदी ने हिंदी में अपना पूरा भाषण दिया, जो एससीओ के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. उन्होंने कहा, “मैं एससीओ के 25वें समिट में भाग लेकर प्रसन्न हूं। मैं राष्ट्रपति शी को उत्कृष्ट स्वागत और आतिथ्य के लिए हृदय से धन्यवाद देता हूं”. मोदी ने उज्बेकिस्तान की स्वतंत्रता दिवस और किर्गिस्तान के राष्ट्रीय दिवस पर बधाई दी.
उन्होंने एससीओ में भारत की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि पिछले 24 वर्षों में संगठन ने यूरेशियन क्षेत्र को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. मोदी ने भारत की नीति को तीन स्तंभों पर आधारित बताया: एस – सुरक्षा, सी – संपर्क, ओ – अवसर. सुरक्षा पर उन्होंने कहा कि शांति और स्थिरता विकास की नींव हैं, लेकिन आतंकवाद, अलगाववाद और अतिवाद चुनौतियां हैं. उन्होंने एससीओ-आरएटीएस की भूमिका की सराहना की और अल-कायदा के खिलाफ संयुक्त अभियान का जिक्र किया. मोदी ने कट्टरवाद के खिलाफ समन्वित प्रयासों की वकालत की.
संपर्क पर मोदी ने चाबहार बंदरगाह और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे जैसे प्रोजेक्ट्स का समर्थन किया. अवसर के तहत, उन्होंने स्टार्ट-अप, नवाचार, युवा सशक्तिकरण और साझा विरासत पर फोकस किया. मोदी ने एससीओ के भीतर सभ्यता संवाद फोरम शुरू करने का प्रस्ताव दिया.
समिट की प्रमुख उपलब्धियां और भविष्य की दिशा
समिट में एससीओ विकास रणनीति, वैश्विक शासन सुधार, आतंकवाद विरोध, शांति, आर्थिक सहयोग और सतत विकास पर चर्चा हुई. सदस्य देशों ने तियानजिन घोषणापत्र अपनाया. शी ने समिट में ‘धमकाने वाली’ वैश्विक व्यवस्था पर निशाना साधा और शीत युद्ध मानसिकता, गुटबाजी और दबाव की राजनीति का विरोध किया. उन्होंने एससीओ देशों के बीच दोस्ती और विश्वास पर जोर दिया, साथ ही बेल्ट एंड रोड पहल के तहत सहयोग की बात की.
मोदी ने संगठन की सुधार-उन्मुख एजेंडा का समर्थन किया और संगठित अपराध, मादक द्रव्य तस्करी और साइबर सुरक्षा से निपटने के लिए केंद्र स्थापित करने का स्वागत किया. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र जैसे बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार की अपील की. समिट में मोदी ने म्यांमार के नेता से भी मुलाकात की और भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’, ‘एक्ट ईस्ट’ और इंडो-पैसिफिक नीतियों पर चर्चा की.
यह समिट वैश्विक दक्षिण की एकजुटता का प्रतीक बना, जहां सदस्य देश अमेरिका से बढ़ते टैरिफ और सुरक्षा मुद्दों के बीच सहयोग मजबूत कर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने समिट में बहुपक्षवाद का समर्थन किया और चीन को इसका “मौलिक स्तंभ” बताया. समिट के बाद मोदी भारत लौटे, जहां उन्होंने समिट की सफलता पर संतोष जताया. किर्गिस्तान अब एससीओ की अगली अध्यक्षता संभालेगा.
