भारत में स्वास्थ्य बीमा के कर लाभों को समझना
आज के समय में जब भी मार्च का महीना करीब आता है, हर कोई अपना टैक्स बचाने के लिए अलग-अलग निवेश विकल्पों की तलाश में भागदौड़ करने लगता है। बहुत से लोग जल्दबाजी में ऐसी जगहों पर अपना पैसा लगा देते हैं, जहां से उन्हें भविष्य में कोई खास फायदा नहीं मिलता है। लेकिन अगर आप समझदारी से काम लें, तो अपनी सेहत को सुरक्षित करते हुए भी बहुत सारा टैक्स बचा सकते हैं। स्वास्थ्य बीमा एक ऐसा बेहतरीन विकल्प है जो आपको एक साथ कई सारे फायदे देता है।
एक तरफ यह गंभीर बीमारी के समय अस्पताल के लाखों रुपये के भारी-भरकम बिल से आपके परिवार को बचाता है। वहीं दूसरी तरफ यह आपकी मेहनत की कमाई को आयकर के बोझ से भी काफी हद तक सुरक्षित रखता है। आज के समय में जिस तेजी से अस्पतालों और दवाइयों का खर्च बढ़ रहा है, उसे देखते हुए मेडिकल कवर होना कोई शौक नहीं बल्कि हर परिवार की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है। जब आप अपने और अपने परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए अपनी जेब से प्रीमियम भरते हैं, तो सरकार भी आपको इसके बदले आयकर में भारी छूट देकर प्रोत्साहित करती है। इस तरह आप अपनी सेहत और अपनी संपत्ति दोनों को एक साथ सुरक्षित कर पाते हैं।
| आधार | बिना स्वास्थ्य बीमा | स्वास्थ्य बीमा के साथ |
| अस्पताल का खर्च | पूरी तरह अपनी जेब से देना पड़ता है | बीमा कंपनी बिल का भुगतान करती है |
| कर की बचत | कोई भी कर लाभ नहीं मिलता | प्रीमियम पर सीधे कर छूट मिलती है |
| मानसिक शांति | अचानक बीमारी आने पर भारी तनाव रहता है | आर्थिक सुरक्षा का पूरा भरोसा रहता है |
| जांच की सुविधा | रूटीन चेकअप का खर्च खुद उठाना पड़ता है | चेकअप पर भी कर छूट का फायदा मिलता है |
बड़ा बदलाव: धारा 80डी और नई धारा 126 (आयकर अधिनियम 2025)
भारत की कर प्रणाली में हाल ही में बहुत बड़े और ऐतिहासिक बदलाव किए गए हैं जिन्हें समझना हर करदाता के लिए बेहद जरूरी है। अगर आप पिछले कई सालों से अपना आयकर रिटर्न भर रहे हैं, तो आपने आयकर अधिनियम की पुरानी धारा अस्सी-डी के बारे में जरूर सुना होगा। हम सभी सालों से इसी नियम के तहत अपनी पॉलिसी के प्रीमियम पर छूट का लाभ उठाते आए हैं। लेकिन अब इस पुरानी व्यवस्था में एक बहुत बड़ा बदलाव आ चुका है, जो आपके लिए जानना बहुत फायदेमंद साबित होगा। एक अप्रैल से देश में नया आयकर अधिनियम लागू हो गया है, जिसने पुराने कानूनों को बहुत हद तक बदल दिया है।
आखिर यह बदलाव क्या है और आप पर इसका क्या असर होगा?
इस नए कानून के तहत पुरानी धारा अस्सी-डी की जगह अब नई धारा एक सौ छब्बीस ने ले ली है। आपको यह जानकर बड़ी राहत मिलेगी कि इस नए कानून में नियमों और शर्तों का मूल ढांचा लगभग वही रखा गया है जो पहले हुआ करता था। बस कानून की किताब में अध्याय और धारा का नंबर बदल दिया गया है ताकि कर प्रणाली को और ज्यादा आसान बनाया जा सके। अगर आप आने वाले वित्तीय वर्ष के लिए अपना कर रिटर्न दाखिल करने जा रहे हैं, तो आपको इस नई धारा के तहत ही अपनी छूट का दावा करना होगा। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य पूरी कर प्रणाली को डिजिटल, आसान और करदाताओं के लिए ज्यादा पारदर्शी बनाना है। इससे कागजी कार्रवाई कम होगी और लोगों को अपना रिफंड भी बहुत जल्दी मिल सकेगा।
| नियम का आधार | पुराना नियम (आयकर अधिनियम) | नया नियम (नया आयकर अधिनियम) |
| कानून की धारा | धारा अस्सी-डी | धारा एक सौ छब्बीस |
| लागू होने का समय | यह नियम दशकों से चला आ रहा था | नए आकलन वर्ष से पूरी तरह लागू |
| कर छूट की सीमा | पच्चीस हजार से एक लाख रुपये तक | सीमाएं लगभग पुराने नियम के समान |
| वरिष्ठ नागरिक आयु | साठ साल या उससे अधिक की आयु | साठ साल या उससे अधिक की आयु |
स्वास्थ्य बीमा की किस्त पर कितनी कर छूट मिलती है?
आप अपने लिए कितने रुपये का टैक्स बचा सकते हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने पॉलिसी किसके लिए ली है और उसमें शामिल लोगों की उम्र क्या है। आयकर विभाग ने छूट की सीमा तय करने के लिए उम्र को दो स्पष्ट श्रेणियों में बांटा है।
1. अपने और परिवार के लिए स्वास्थ्य बीमा
अगर आप अपने लिए, अपने जीवनसाथी और अपने आश्रित बच्चों के लिए स्वास्थ्य बीमा खरीदते हैं, तो आप एक वित्तीय वर्ष में पच्चीस हजार रुपये तक के प्रीमियम पर कर छूट का दावा कर सकते हैं। यह सीमा तभी लागू होती है जब पॉलिसी में शामिल सभी सदस्यों की उम्र साठ साल से कम हो। अगर आपकी या आपके जीवनसाथी की उम्र साठ साल का आंकड़ा पार कर चुकी है, तो यह सीमा दोगुनी होकर सीधे पचास हजार रुपये हो जाती है। यहां आपको इस बात का खास ध्यान रखना होगा कि इस छूट का लाभ लेने के लिए बच्चों का आप पर पूरी तरह से आर्थिक रूप से निर्भर होना बहुत जरूरी है। अगर आपके बच्चे अपनी खुद की नौकरी करने लगे हैं या उनका अपना कोई व्यवसाय है, तो आप उनके नाम पर भरे गए प्रीमियम की रसीद पर अपने लिए कर छूट बिल्कुल नहीं मांग सकते।
2. माता-पिता के लिए स्वास्थ्य बीमा
भारतीय संस्कृति में हमेशा से ही माता-पिता का ख्याल रखना हमारा सबसे पहला कर्तव्य माना गया है और हमारा कर कानून भी इस भावना का पूरा सम्मान करता है। आप अपने परिवार की सीमा के अलावा, अपने माता-पिता के लिए खरीदे गए प्रीमियम पर अलग से कर छूट पा सकते हैं। अगर आपके माता-पिता की उम्र साठ साल से कम है, तो आपको पच्चीस हजार रुपये तक की अतिरिक्त छूट मिलेगी। वहीं अगर माता-पिता में से किसी एक की भी उम्र साठ साल से अधिक हो चुकी है, तो यह सीमा बढ़कर पचास हजार रुपये हो जाती है। यह छूट पूरी तरह से आपके खुद के परिवार वाले प्रीमियम सीमा से अलग और अतिरिक्त होती है, जिससे आपको दोहरा लाभ मिलता है।
3. हिंदू अविभाजित परिवार के लिए कर छूट
अगर आप एक हिंदू अविभाजित परिवार चलाते हैं, तो आपके लिए भी इस नए कानून में बहुत अच्छी खबर है। एक हिंदू अविभाजित परिवार भी अपने सदस्यों के लिए चुकाए गए स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर कर छूट का दावा बहुत आसानी से कर सकता है। अगर पॉलिसी परिवार के किसी ऐसे सदस्य के लिए खरीदी गई है जिसकी उम्र साठ साल से कम है, तो अधिकतम पच्चीस हजार रुपये तक की छूट मिलेगी। अगर पॉलिसी किसी वरिष्ठ नागरिक सदस्य के लिए है, तो परिवार पूरे पचास हजार रुपये तक की कटौती का दावा कर सकता है। यह नियम संयुक्त परिवारों को अपनी कर देनदारी कम करने और परिवार के सभी सदस्यों को स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में लाने का एक बहुत ही शानदार अवसर प्रदान करता है।
| पॉलिसी किसके लिए है | उम्र का नियम | अधिकतम कर छूट (रुपये में) |
| स्वयं, जीवनसाथी और बच्चे | सभी की उम्र साठ साल से कम | पच्चीस हजार रुपये |
| स्वयं, जीवनसाथी और बच्चे | कोई भी एक सदस्य साठ साल से ऊपर | पचास हजार रुपये |
| माता-पिता के लिए बीमा | माता-पिता की उम्र साठ साल से कम | पच्चीस हजार रुपये |
| माता-पिता के लिए बीमा | कोई भी एक साठ साल या उससे अधिक | पचास हजार रुपये |
अधिकतम कर बचत को उदाहरण से समझें
आयकर के इन जटिल नियमों की थ्योरी पढ़ने में कई बार आम आदमी के सिर के ऊपर से निकल जाती है। इसलिए मैं आपको तीन बहुत ही आम जिंदगी के व्यावहारिक उदाहरण देता हूं जिससे आपके सारे भ्रम हमेशा के लिए दूर हो जाएंगे। इससे आप यह भी समझ पाएंगे कि भारत में हेल्थ इंश्योरेंस टैक्स बेनिफिट्स आपके बैंक खाते पर सीधा कैसे असर डालते हैं और आपकी मेहनत की कमाई को बचाते हैं।
उदाहरण 1: जब आप और माता-पिता दोनों साठ साल से कम उम्र के हों
मान लीजिए कि आपकी उम्र पैंतीस साल है और आपने अपने और अपनी पत्नी के लिए एक पूरे परिवार वाला प्लान लिया है, जिसका प्रीमियम बाईस हजार रुपये सालाना जाता है। इसके साथ ही आपने अपने माता-पिता के लिए एक अलग पॉलिसी ली है जिसका प्रीमियम चौबीस हजार रुपये आता है। आपके माता-पिता की उम्र अभी पचपन और अट्ठावन साल है। यहां आप अपने परिवार के लिए बाईस हजार रुपये का पूरा दावा कर सकते हैं क्योंकि यह पच्चीस हजार की सीमा के अंदर है। माता-पिता के लिए आप चौबीस हजार रुपये का दावा कर सकते हैं। इस तरह आपकी कुल कर छूट छियालीस हजार रुपये हो जाएगी। इस पूरी रकम पर आपको कोई कर नहीं देना पड़ेगा और यह सीधा आपकी आय से घटा दी जाएगी।
उदाहरण 2: जब आप साठ से कम और माता-पिता साठ से ज्यादा के हों
यह सबसे आम स्थिति है जो हमारे देश के मध्यम वर्गीय परिवारों में सबसे ज्यादा देखने को मिलती है। मान लीजिए आपकी उम्र चालीस साल है और आपने अपने परिवार के लिए अट्ठाईस हजार रुपये का प्रीमियम भरा है। आपके माता-पिता वरिष्ठ नागरिक हैं जिनकी उम्र पैंसठ और बासठ साल है और उनका प्रीमियम अड़तालीस हजार रुपये आता है। अपने परिवार के लिए आप अधिकतम पच्चीस हजार रुपये ही दावा कर पाएंगे, भले ही आपने अपनी जेब से अट्ठाईस हजार रुपये भरे हों। लेकिन माता-पिता के लिए आप पूरा अड़तालीस हजार रुपये दावा कर सकते हैं क्योंकि उनके लिए सीमा पचास हजार रुपये तक जाती है। इस तरह आपकी कुल कर छूट तिहत्तर हजार रुपये हो जाएगी।
उदाहरण 3: जब आप और माता-पिता दोनों वरिष्ठ नागरिक हों
मान लीजिए कि आपकी उम्र इकसठ साल हो चुकी है और आपके बुजुर्ग माता-पिता पच्चासी साल के हैं। ऐसे में आपको अपने और जीवनसाथी के लिए पूरे पचास हजार रुपये की सीमा मिलती है। इसके अलावा माता-पिता के लिए भी अलग से पचास हजार रुपये की सीमा उपलब्ध रहती है। अगर आप दोनों पॉलिसियों का प्रीमियम इन सीमाओं को छूता है या पार करता है, तो आप एक साल में अधिकतम एक लाख रुपये तक की भारी-भरकम कटौती का दावा कर सकते हैं। यह उन लोगों के लिए बहुत फायदेमंद है जो अपने बुढ़ापे में भारी मेडिकल खर्चों का सामना कर रहे हैं, क्योंकि इससे उन्हें सरकार की तरफ से काफी बड़ी आर्थिक राहत मिल जाती है।
| उदाहरण | आपके परिवार का विवरण | आपके माता-पिता का विवरण | कुल कर छूट |
| पहला उदाहरण | उम्र पैंतीस वर्ष (पच्चीस हजार की सीमा) | पचपन और अट्ठावन वर्ष (पच्चीस हजार) | पचास हजार रुपये तक |
| दूसरा उदाहरण | उम्र चालीस वर्ष (पच्चीस हजार की सीमा) | पैंसठ और बासठ वर्ष (पचास हजार) | पचहत्तर हजार रुपये तक |
| तीसरा उदाहरण | उम्र इकसठ वर्ष (पचास हजार की सीमा) | पच्चासी वर्ष आयु (पचास हजार) | एक लाख रुपये तक |
निवारक स्वास्थ्य जांच (प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप) पर अतिरिक्त फायदा
हम सब यह बात बहुत अच्छी तरह से जानते हैं कि किसी भी गंभीर बीमारी का पता अगर शुरुआत में ही लग जाए तो उसका इलाज बहुत आसान, कम तकलीफदेह और सस्ता होता है। इसी अच्छी आदत को बढ़ावा देने के लिए आयकर कानून निवारक स्वास्थ्य जांच पर खास छूट देता है। सरकार चाहती है कि हर नागरिक समय-समय पर अपने शरीर की पूरी जांच करवाए ताकि देश स्वस्थ रहे। आपको हर वित्तीय वर्ष में अपनी या परिवार की रूटीन जांच जैसे खून की जांच या पूरे शरीर की स्कैनिंग पर पांच हजार रुपये तक की छूट मिलती है। यह सुविधा इसलिए दी गई है ताकि आम लोग बिना पैसे की चिंता किए साल में कम से कम एक बार अस्पताल जाकर अपने स्वास्थ्य का पूरा परीक्षण जरूर करवाएं।
पांच हजार रुपये की सीमा का सच
यहां एक बहुत बड़ी शर्त है जो अक्सर लोग अपना रिटर्न दाखिल करते वक्त समझ नहीं पाते और गलती कर बैठते हैं। यह पांच हजार रुपये की छूट आपकी कुल पच्चीस हजार या पचास हजार की मुख्य सीमा के अंदर ही शामिल होती है। यह कोई अतिरिक्त बोनस नहीं है जो आपको मुख्य सीमा के ऊपर से अलग से मिलता हो। इसे ऐसे समझिए कि अगर आपकी अपनी सीमा पच्चीस हजार रुपये है और आपने पॉलिसी के लिए बाईस हजार रुपये का प्रीमियम भरा है, तो आपके पास अभी भी तीन हजार रुपये की सीमा खाली बची हुई है। अगर आपने इसी साल चार हजार रुपये का कोई फुल बॉडी रूटीन चेकअप करवाया है, तो आप केवल खाली बचे हुए तीन हजार रुपये ही इस चेकअप के लिए दावा कर सकते हैं। कुल मिलाकर आप किसी भी सूरत में मुख्य सीमा को पार नहीं कर सकते।
| जांच का प्रकार | अधिकतम छूट | जरूरी शर्त | भुगतान का तरीका |
| खून की जांच, पूरा शरीर स्कैन | पांच हजार रुपये | यह मुख्य सीमा के अंदर ही शामिल है | नकद या डिजिटल दोनों मान्य |
बिना बीमा वाले वरिष्ठ नागरिकों के चिकित्सा खर्च पर छूट

हमारे देश के बीमा क्षेत्र में एक बहुत बड़ी समस्या यह है कि जैसे-जैसे इंसान की उम्र ढलती है, बीमा कंपनियां उन्हें पॉलिसी देने से पीछे हटने लगती हैं। कई बार बहुत ज्यादा उम्र होने पर या पहले से कोई गंभीर बीमारी होने पर उन्हें कोई कवर मिलता ही नहीं है। सरकार ने बुजुर्गों की इस भारी परेशानी को बहुत करीब से समझा है और इसके लिए एक विशेष नियम बनाया है। अगर आपके माता-पिता या परिवार का कोई आश्रित सदस्य वरिष्ठ नागरिक है और उनके नाम पर कोई भी पॉलिसी सक्रिय नहीं है, तो आप उनके अस्पताल के इलाज, दवाइयों और डॉक्टर की फीस पर खर्च किए गए पैसों पर कर छूट मांग सकते हैं। इसकी सीमा भी अधिकतम पचास हजार रुपये सालाना तय की गई है। यहां आपको यह बात गांठ बांध लेनी चाहिए कि यह सुविधा सिर्फ और सिर्फ तभी मिलेगी जब उनके पास कोई कवर न हो। अगर उनके पास पहले से कवर है, तो आप सिर्फ प्रीमियम पर कटौती मांग सकते हैं, अस्पताल के बिल पर नहीं।
| पॉलिसी की स्थिति | खर्च का प्रकार | छूट की सीमा | मुख्य शर्त |
| कोई पॉलिसी नहीं है | डॉक्टर की फीस, दवाएं और सर्जरी | पचास हजार रुपये तक | व्यक्ति का वरिष्ठ नागरिक होना अनिवार्य |
| पॉलिसी सक्रिय है | अस्पताल का बिल और अन्य खर्च | कोई छूट नहीं | किसी भी उम्र पर लागू नहीं |
कर लाभ का दावा करने के लिए जरूरी शर्तें
सिर्फ एक अच्छी सी पॉलिसी खरीद लेना और उसका पैसा भर देना ही काफी नहीं है, कर का सही फायदा अपनी झोली में डालने के लिए आपको कुछ बहुत ही बारीक और सख्त नियमों का पालन करना होता है। मैंने अपनी आंखों से कई लोगों का पक्का कर दावा सिर्फ छोटी सी लापरवाही की वजह से खारिज होते देखा है। आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि सारी कागजी प्रक्रिया बिल्कुल सही तरीके से पूरी की गई हो।
पुरानी कर व्यवस्था बनाम नई कर व्यवस्था
यह आज के समय में सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला और लोगों को परेशान करने वाला सवाल है। सरकार ने एक नई कर व्यवस्था पेश की है जिसमें कर की दरें तो बहुत कम हैं लेकिन उसमें आपको पुरानी कटौतियों की कोई भी छूट नहीं मिलती है। अगर आप अपने प्रीमियम पर भारत में हेल्थ इंश्योरेंस टैक्स बेनिफिट्स का फायदा उठाना चाहते हैं, तो आपको अपना रिटर्न दाखिल करते समय पुरानी कर व्यवस्था का ही चुनाव करना होगा। नई व्यवस्था चुनने वाले लोग इस फायदे से पूरी तरह बाहर कर दिए जाते हैं। इसलिए मेरी सलाह है कि साल की शुरुआत में ही अपनी तनख्वाह और खर्चों को देखकर अच्छी तरह हिसाब लगा लें कि आपके लिए कौन सी व्यवस्था ज्यादा पैसे बचाएगी। सही व्यवस्था का चुनाव ही आपको अधिकतम लाभ दिला सकता है।
किस्त भुगतान का तरीका: नकद या डिजिटल?
आयकर विभाग इस मामले में बहुत ज्यादा सख्त है और साफ-साफ कहता है कि किस्त का पैसा अगर आपने नकद रूप में भरा है, तो आपको एक रुपये की भी कर छूट नहीं मिलेगी। देश में काले धन पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए यह कड़ा नियम बनाया गया है। आपको अपना भुगतान हमेशा डिजिटल या बैंक के माध्यम से ही करना चाहिए। आप चेक, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग या मोबाइल भुगतान ऐप्स का बेझिझक इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि इस कड़े नियम में एक इकलौता अपवाद दिया गया है। जो पांच हजार रुपये तक का जांच बिल होता है, उसका भुगतान आप नकद में कर सकते हैं। यानी अस्पताल में जांच के लिए दिया गया नकद मान्य है, लेकिन बीमा कंपनी को दिया गया नकद पूरी तरह अमान्य है।
बहु-वर्षीय (मल्टी-ईयर) पॉलिसी के नियम
आजकल लगभग सभी बीमा कंपनियां ग्राहकों को अपनी तरफ खींचने के लिए दो या तीन साल की पॉलिसी एक साथ खरीदने पर बहुत ही अच्छा खासा डिस्काउंट ऑफर करती हैं। मान लीजिए कि आपने तीन साल का प्रीमियम एक साथ साठ हजार रुपये दे दिया। अब आपके मन में यह सवाल जरूर आएगा कि क्या मुझे इसी साल पूरे साठ हजार की छूट मिल जाएगी? इसका सीधा सा जवाब है नहीं। कानून के मुताबिक आपको इस एकमुश्त भरे गए पैसे को पॉलिसी के कुल सालों में बराबर हिस्सों में बांटना होगा। यानी साठ हजार को तीन से भाग दें, तो आप हर साल बीस हजार रुपये ही कर छूट के रूप में दावा कर पाएंगे। यह एक बहुत ही न्यायपूर्ण प्रणाली है ताकि आपको हर साल लगातार कर का फायदा मिलता रहे और सरकार को भी एक साथ भारी नुकसान न उठाना पड़े।
| महत्वपूर्ण शर्त | क्या मान्य है | क्या पूरी तरह अमान्य है |
| कर की व्यवस्था | पुरानी कर व्यवस्था | नई कर व्यवस्था |
| प्रीमियम का भुगतान | बैंक ट्रांसफर, चेक या कार्ड | नकद भुगतान |
| जांच का भुगतान | नकद या डिजिटल दोनों | कोई पाबंदी नहीं है |
| बहु-वर्षीय पॉलिसी | सालों के हिसाब से बांटकर दावा करना | एक ही साल में पूरा पैसा दावा करना |
कौन-कौन से खर्चे कर छूट के दायरे में नहीं आते?
अक्सर लोग अपने परिवार की सुरक्षा के जज्बे में पूरे खानदान का प्रीमियम भर देते हैं और सोचते हैं कि इन सब पर उन्हें कर से बचने का मौका मिलेगा। लेकिन आयकर के नियम बहुत स्पष्ट और सीमित हैं। कुछ चीजें ऐसी हैं जिन पर आपको इस धारा का कोई भी फायदा नहीं मिलेगा और आपका दावा खारिज कर दिया जाएगा। आप अपने माता-पिता के प्रीमियम पर तो पूरी छूट ले सकते हैं, लेकिन अपने जीवनसाथी के माता-पिता यानी सास-ससुर के बीमा पर आपको कोई कर लाभ नहीं मिलता है।
इसी तरह अगर आप अपने भाई, बहन, दादा, दादी या किसी और दूर के रिश्तेदार के लिए पैसों का बोझ उठाते हैं तो उस पर भी कोई कटौती नहीं मिलेगी। अगर आपके बच्चे बड़े हो गए हैं और नौकरी करने लगे हैं, तो उनके प्रीमियम पर भी सरकार आपको छूट नहीं देगी क्योंकि वे अब आप पर आर्थिक रूप से निर्भर नहीं हैं। इसके अलावा अगर आपकी कंपनी आपको ग्रुप कवर दे रही है और वही पूरा पैसा भर रही है, तो आप उस पर कर छूट नहीं मांग सकते। हां, अगर कुछ हिस्सा हर महीने आपकी सैलरी स्लिप में कट रहा है, तो आप सिर्फ उसी कटे हुए हिस्से पर कटौती ले सकते हैं।
| खर्च का विवरण | क्या कर छूट मिलेगी? |
| सास-ससुर का प्रीमियम | बिल्कुल नहीं |
| कमाने वाले आत्मनिर्भर बच्चों का प्रीमियम | बिल्कुल नहीं |
| भाई-बहन या दादा-दादी का प्रीमियम | बिल्कुल नहीं |
| कंपनी द्वारा दिए गए ग्रुप कवर का पूरा प्रीमियम | नहीं (जब तक आपकी तनख्वाह से हिस्सा न कटे) |
स्वास्थ्य बीमा कर लाभ का दावा कैसे करें?
अपने हक़ के कर लाभ का दावा करना कोई बहुत मुश्किल काम नहीं है। आपको बस पूरी प्रणाली को समझना है और इन आसान कदमों को सही समय पर उठाना है। सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि आपने जो पैसा भरा है उसकी रसीद आपके पास पूरी तरह सुरक्षित है। आजकल बीमा कंपनियां हर साल मार्च से पहले आपको कर प्रमाणपत्र खुद ही भेज देती हैं। अगर आप किसी कंपनी में काम करते हैं, तो जनवरी या फरवरी के महीने में जब आपकी कंपनी का वित्तीय विभाग सबूत मांगता है, तब आप इस रसीद की प्रतिलिपि वहां जमा कर दें। इससे फायदा यह होगा कि आपका हर महीने कटने वाला कर कम हो जाएगा और आपकी हाथ में आने वाली तनख्वाह बढ़ जाएगी।
अगर आप अपना खुद का व्यापार करते हैं या किसी वजह से अपनी कंपनी में रसीद देना भूल गए हैं, तो भी चिंता की कोई बात नहीं है। जुलाई में जब आप अपना आयकर रिटर्न दाखिल करेंगे, तब आप सीधे फॉर्म में इस धारा वाले कॉलम में अपने द्वारा भरा गया पैसा डाल सकते हैं। आयकर विभाग रिटर्न दाखिल करते समय आपसे कोई भी रसीद अपलोड करने को नहीं कहता है, लेकिन मेरी राय में आपको ये सारे कागजात अगले सात साल तक संभाल कर रखने चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी नोटिस का आसानी से जवाब दिया जा सके।
| कदम | आपको क्या करना है | यह किसके लिए जरूरी है |
| पहला कदम | प्रीमियम भुगतान की रसीद सुरक्षित रखें | सभी करदाताओं के लिए |
| दूसरा कदम | कंपनी में निवेश का सबूत जमा करें | वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए |
| तीसरा कदम | रिटर्न दाखिल करते समय सही धारा में जानकारी भरें | सभी करदाताओं के लिए |
| चौथा कदम | दस्तावेजों को सात साल तक सुरक्षित संभाल कर रखें | भविष्य में किसी भी जांच से बचने के लिए |
निष्कर्ष
अपनी सेहत और अपने परिवार के सुरक्षित भविष्य के साथ किसी भी तरह का समझौता करना कोई समझदारी का काम नहीं माना जा सकता है। एक छोटी सी पॉलिसी आपको आर्थिक और मानसिक रूप से कितना आजाद कर सकती है, यह आप केवल बीमार पड़ने पर या किसी आपातकालीन स्थिति में ही समझ पाते हैं। भारत सरकार खुद यह चाहती है कि आप अपनी सेहत की पूरी जिम्मेदारी खुद उठाएं और इसीलिए इतने सारे आकर्षक नियम और भारी छूट के प्रावधान बनाए गए हैं। अगर आप अभी तक इन सभी बेहतरीन फायदों से अनजान थे, तो आज ही अपनी वित्तीय योजना पर दोबारा गहराई से विचार करें।
भारत में हेल्थ इंश्योरेंस टैक्स बेनिफिट्स का सही तरीके से इस्तेमाल करके आप न सिर्फ अपना हजारों रुपये का कर बचाएंगे, बल्कि किसी भी अचानक आई मेडिकल इमरजेंसी के दौरान अपने परिवार को एक बहुत मजबूत और अटूट आर्थिक सुरक्षा चक्र भी दे पाएंगे। इसलिए, बिना नकद लेनदेन किए, सही कर व्यवस्था का समझदारी से चुनाव करते हुए अपनी जरूरत के हिसाब से सही पॉलिसी चुनें और अपने परिवार के साथ पूरी तरह से चिंता मुक्त जीवन व्यतीत करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या मैं विदेश में कराए गए चिकित्सा इलाज पर कर छूट मांग सकता हूं?
जी हां, आयकर कानून में ऐसी कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है कि आपका इलाज सिर्फ देश की सीमा के भीतर ही होना चाहिए। अगर आपके पास अस्पताल के असली बिल मौजूद हैं और आप वरिष्ठ नागरिक वाली सारी आवश्यक शर्तें पूरी करते हैं, तो आप विदेश में हुए इलाज के भारी खर्च पर भी नियमानुसार पूरी कटौती का लाभ ले सकते हैं।
क्या जीवन बीमा के साथ जुड़े स्वास्थ्य राइडर पर कर छूट मिलती है?
बिल्कुल मिलती है। अगर आपने अपने मूल प्लान के साथ कोई गंभीर बीमारी कवर या सर्जिकल केयर राइडर अलग से लिया हुआ है, तो उस अतिरिक्त राइडर के लिए चुकाए गए प्रीमियम के हिस्से को आप स्वास्थ्य बीमा वाली धारा में मजे से दावा कर सकते हैं। बस आपको यह ध्यान रखना होगा कि जीवन सुरक्षा वाला मूल हिस्सा अलग धारा में गिना जाता है और उसे इसके साथ नहीं मिलाया जा सकता।
मेरे पिता की उम्र बासठ साल है और उनके पास कोई कवर नहीं है। उनके घुटने की सर्जरी में एक लाख रुपये खर्च हुए। मुझे कितनी कर छूट मिलेगी?
चूंकि आपके पिता वरिष्ठ नागरिक की श्रेणी में आते हैं और उनके पास कोई भी सक्रिय कवर नहीं है, तो आप उनके चिकित्सा खर्च पर छूट ले सकते हैं। हालांकि आपका कुल खर्च एक लाख रुपये हुआ है, लेकिन कानून के मुताबिक अधिकतम सीमा केवल पचास हजार रुपये ही तय की गई है। इसलिए आप सिर्फ पचास हजार रुपये का ही दावा कर पाएंगे।
क्या पति-पत्नी दोनों मिलकर माता-पिता का प्रीमियम दावा कर सकते हैं?
अगर पॉलिसी का पैसा काफी बड़ा है और आप दोनों पति-पत्नी ने अपने-अपने बैंक खाते से आधा-आधा पैसा भरा है, तो आप दोनों अपनी-अपनी सीमा के हिसाब से दावा कर सकते हैं। लेकिन यह बात हमेशा याद रखें कि एक ही पैसे या एक ही रसीद का दो बार दावा किसी भी हाल में और किसी भी परिस्थिति में नहीं किया जा सकता है।
मैं नई कर व्यवस्था में हूं। क्या मुझे स्वास्थ्य जांच वाले पांच हजार रुपये का फायदा मिलेगा?
बिल्कुल नहीं। नई कर व्यवस्था चुनने का सीधा सा मतलब यही होता है कि आपने अपनी मर्जी से पुरानी सारी कटौतियों को छोड़ने का फैसला कर लिया है। इस नई प्रणाली के अंदर निवारक स्वास्थ्य जांच या प्रीमियम भरने पर कोई भी कर छूट या फायदा सरकार की तरफ से नहीं दिया जाता है।
