रक्तचाप को समझनाः भारतीय वयस्कों के लिए एक सरल मार्गदर्शिका
जब भी हम किसी डॉक्टर के पास जाते हैं, तो वे सबसे पहले हमारे हाथ पर एक पट्टी बांधकर मशीन चालू करते हैं। मशीन की स्क्रीन पर कुछ नंबर आते हैं और डॉक्टर कहते हैं कि आपका बीपी थोड़ा बढ़ा हुआ है। हम भी इस बात को अक्सर सामान्य मानकर छोड़ देते हैं और अपनी पुरानी जीवनशैली में लौट जाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि उन नंबर्स का असली मतलब क्या होता है और वे हमारे शरीर के बारे में क्या बताते हैं?
आज के समय में भारत में रक्तचाप की समस्या इतनी आम हो चुकी है कि यह लगभग हर दूसरे घर में अपनी जगह बना चुकी है। लोग इसे मामूली सिरदर्द या थकान समझकर टाल देते हैं, जबकि यही छोटी सी लापरवाही आगे चलकर हमारे दिल और दिमाग पर बहुत भारी पड़ती है। इस विस्तृत गाइड में हम इस बीमारी से जुड़ी हर छोटी-बड़ी बात को बेहद आसान शब्दों में समझेंगे ताकि आप अपने परिवार को सुरक्षित रख सकें।
बीपी क्या है और यह क्यों मायने रखता है?
हमारा दिल एक बेहद शक्तिशाली पंप की तरह काम करता है जो चौबीसों घंटे बिना रुके पूरे शरीर में खून को भेजता है। जब दिल धड़कता है, तो वह खून को आगे की तरफ धकेलता है जिससे शरीर के हर हिस्से को ऑक्सीजन मिलती है। यह खून जिन पतली और लचीली नलियों से होकर गुजरता है, उन्हें हम धमनियां कहते हैं। बहते समय यह खून उन धमनियों की अंदरूनी दीवारों पर बाहर की तरफ एक दबाव बनाता है, जिसे साधारण भाषा में ब्लड प्रेशर कहा जाता है। अगर यह दबाव बहुत कम हो जाए तो शरीर के अंगों तक जरूरी पोषक तत्व नहीं पहुंच पाते और अगर यह बहुत ज्यादा बढ़ जाए तो नसों के फटने या उनके ब्लॉक होने का खतरा पैदा हो जाता है। इसलिए शरीर के सही संचालन के लिए इसका हमेशा एक तय सीमा में रहना बहुत जरूरी है।
सिस्टोलिक और डायस्टोलिक नंबर क्या होते हैं?
जब भी आप बीपी जांच की रिपोर्ट देखते हैं, तो वहां दो तरह के नंबर लिखे होते हैं जैसे कि एक सौ बीस और अस्सी। इन्हें समझने का तरीका बहुत ही सीधा और सरल है। ऊपर वाले बड़े नंबर को सिस्टोलिक प्रेशर कहा जाता है, जिसका मतलब है कि जब आपका दिल धड़क रहा है और खून को बाहर पंप कर रहा है, उस वक्त नसों में कितना दबाव है। नीचे वाले छोटे नंबर को डायस्टोलिक प्रेशर कहते हैं, जिसका मतलब है कि दो धड़कनों के बीच में जब आपका दिल कुछ पलों के लिए आराम की स्थिति में होता है, तब नसों में कितना दबाव बचा रहता है। एक स्वस्थ जीवन जीने के लिए इन दोनों ही नंबर्स का सही संतुलन में होना बेहद जरूरी माना जाता है।
बीपी कितना होना चाहिए? (नॉर्मल रेंज)
एक सामान्य और पूरी तरह स्वस्थ भारतीय वयस्क के शरीर में रक्तचाप का स्तर हमेशा एक सौ बीस बटा अस्सी मिलीमीटर मरकरी के आसपास होना चाहिए। आजकल की भागदौड़ और तनाव के कारण इन नंबर्स में थोड़ा बहुत उतार-चढ़ाव आना स्वाभाविक है। लेकिन अगर आपका ऊपर का नंबर लगातार एक सौ तीस से ऊपर जा रहा है या नीचे का नंबर पचासी से ऊपर बना हुआ है, तो आपको तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। जब यह नंबर एक सौ चालीस बटा नब्बे को पार कर जाता है, तो इसे पूरी तरह से उच्च रक्तचाप की श्रेणी में रख दिया जाता है और इसके लिए नियमित जांच की जरूरत होती है।
| ब्लड प्रेशर की स्थिति | सिस्टोलिक बीपी (ऊपर का नंबर) | डायस्टोलिक बीपी (नीचे का नंबर) | स्वास्थ्य पर असर और स्थिति |
| सामान्य और स्वस्थ | 120 से कम | 80 से कम | पूरी तरह सुरक्षित और आदर्श स्थिति |
| बढ़ा हुआ स्तर | 120 से 129 | 80 से कम | लाइफस्टाइल को तुरंत बदलने की जरूरत |
| स्टेज 1 हाई बीपी | 130 से 139 | 80 से 89 | डॉक्टर से सलाह और परहेज शुरू करें |
| स्टेज 2 हाई बीपी | 140 या ज्यादा | 90 या ज्यादा | दवाइयों और सख्त इलाज की जरूरत |
| आपातकालीन स्थिति | 180 से ज्यादा | 120 से ज्यादा | बिना देरी किए तुरंत अस्पताल जाएं |
हाई ब्लड प्रेशर को साइलेंट किलर क्यों कहते हैं?
पूरी दुनिया के डॉक्टर्स और वैज्ञानिक उच्च रक्तचाप को एक छुपा हुआ दुश्मन या साइलेंट किलर कहते हैं। इसकी सबसे बड़ी और डरावनी वजह यह है कि इसके शुरुआती दिनों में शरीर में कोई भी बड़ा या साफ लक्षण दिखाई नहीं देता। एक व्यक्ति बाहर से पूरी तरह सामान्य, हंसता-खेलता और तंदुरुस्त दिख सकता है, लेकिन मुमकिन है कि उसके शरीर के अंदर खून का दबाव खतरनाक स्तर को छू रहा हो। जब तक व्यक्ति को खुद किसी शारीरिक तकलीफ का अहसास होता है, तब तक यह बीमारी शरीर के नाजुक अंगों को अंदर से काफी नुकसान पहुंचा चुकी होती है। लंबे समय तक इस दबाव को झेलने के कारण धमनियां अपनी लचक खो देती हैं और सख्त हो जाती हैं जिससे दिल का दौरा पड़ने की संभावना बढ़ जाती है।
भारत में बढ़ते आंकड़े: हर चौथे भारतीय को बीपी की समस्या क्यों है?
अगर हम अपने देश भारत की बात करें, तो यहां के मौजूदा आंकड़े सचमुच चिंता पैदा करने वाले हैं। विभिन्न स्वास्थ्य सर्वेक्षणों से यह बात सामने आई है कि भारत में रहने वाले हर चार वयस्कों में से एक व्यक्ति इस बीमारी का शिकार हो चुका है। ग्रामीण इलाकों के मुकाबले शहरों में रहने वाले लोगों में यह समस्या बहुत तेजी से फैल रही है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह हमारा अपनी पारंपरिक आदतों से दूर होना और पश्चिमी रहन-सहन को अपनाना है। हम दिनभर कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं, शारीरिक मेहनत नाम मात्र की रह गई है और रात को देर तक जागना हमारी मजबूरी या आदत बन चुका है। यही वजह है कि अब तीस साल के युवाओं में भी यह बीमारी उतनी ही मिल रही है जितनी पहले बुजुर्गों में मिलती थी।
| भारत में बीपी बढ़ने के मुख्य कारण | प्रभाव का अनुमानित प्रतिशत | शरीर के अंगों पर इसका सीधा असर |
| शारीरिक कसरत की भारी कमी | लगभग 40 प्रतिशत | वजन का बढ़ना और नसों का सख्त होना |
| भोजन में ज्यादा नमक और जंक फूड | लगभग 35 प्रतिशत | शरीर में पानी का रुकना और दबाव बढ़ना |
| काम और जीवन का मानसिक तनाव | लगभग 30 प्रतिशत | स्ट्रेस हार्मोन के कारण नसों का सिकुड़ना |
| आनुवंशिक या पारिवारिक इतिहास | लगभग 25 प्रतिशत | कम उम्र में ही नसों की कमजोरी होना |
हाई ब्लड प्रेशर इन हिंदी: उच्च रक्तचाप के लक्षण और उपाय
जब हम अपने समाज में इस बीमारी के बढ़ते दायरे को देखते हैं, तो हमारे मन में यह सवाल आता है कि आखिर हाई ब्लड प्रेशर इन हिंदी के मुख्य लक्षण क्या हैं और इससे बचने के उपाय क्या हो सकते हैं। जैसा कि हमने पहले चर्चा की है कि यह बीमारी चुपचाप शरीर में पनपती है, लेकिन जब नसों के अंदर खून का दबाव बहुत ज्यादा बढ़ जाता है तो हमारा शरीर कुछ खास संकेत देने लगता है। इन संकेतों को सही समय पर पहचानना और बिना किसी लापरवाही के तुरंत उचित उपाय करना ही समझदारी का काम है। अगर हम शुरुआत में ही ध्यान दे दें, तो इस बीमारी को बिना दवाइयों के भी पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।
लक्षणों को समय पर पहचानना क्यों जरूरी है?
जब भी शरीर के अंदर अचानक से खून का दबाव बढ़ता है, तो हमारे सिर के पिछले हिस्से में एक अजीब सा भारीपन महसूस होने लगता है। बहुत से लोग इसे गैस की समस्या या धूप के कारण होने वाला सिरदर्द समझकर कोई भी आम दर्द निवारक गोली खा लेते हैं। यह आदत बेहद खतरनाक हो सकती है क्योंकि लक्षणों को दबाने से बीमारी खत्म नहीं होती बल्कि अंदर ही अंदर बढ़ती रहती है। अगर आप समय पर अपना बीपी नाप लेते हैं, तो आप आने वाले किसी बड़े संकट जैसे कि पैरालिसिस या अचानक होने वाले दिल के दौरे से खुद को और अपने प्रियजनों को सुरक्षित रख सकते हैं।
शुरुआती उपाय जो तुरंत मदद करते हैं

अगर आपको कभी भी ऐसा महसूस हो कि आपका बीपी अचानक से बढ़ गया है और घबराहट हो रही है, तो सबसे पहला उपाय यह है कि आप जहां भी हैं वहीं शांति से बैठ जाएं या लेट जाएं। अपने दिमाग से हर तरह के काम की चिंता या बहस को पूरी तरह निकाल दें। हल्के ठंडे पानी से अपने चेहरे को धोएं और लंबी-लंबी सांसें खींचना शुरू करें। जब आप गहरी सांस लेते हैं, तो दिल की धड़कन धीरे-धीरे सामान्य होने लगती है और नसों का खिंचाव कम हो जाता है। इसके बाद एक गिलास सादा पानी आराम से पिएं और यदि डॉक्टर ने पहले से कोई दवा बताई है, तो उसका तुरंत सेवन करें।
| अचानक बीपी बढ़ने पर तुरंत किए जाने वाले उपाय | क्या करने से पूरी तरह बचना चाहिए | इससे शरीर को मिलने वाला तुरंत फायदा |
| बिना घबराए शांत होकर सीधे लेट जाएं | अचानक से भागदौड़ या पैनिक न करें | दिल की धड़कन और सांसें सामान्य होती हैं |
| नाक से गहरी सांस लें और मुंह से छोड़ें | कोई भी भारी या मेहनत वाला काम न करें | नसों का आंतरिक तनाव तुरंत कम होता है |
| एक गिलास सादा या हल्का ठंडा पानी पिएं | चाय, कॉफी या धूम्रपान बिल्कुल न करें | खून का गाढ़ापन कम होता है और राहत मिलती |
| डॉक्टर से फोन पर बात कर सलाह लें | खुद से कोई भी नई या अनजानी दवा न खाएं | सही समय पर सही चिकित्सा मिल जाती है |
हाई ब्लड प्रेशर के मुख्य लक्षण
जब किसी व्यक्ति के शरीर में खून का दबाव अपनी सामान्य सीमा को पार करके लगातार ऊपर की तरफ बना रहता है, तो शरीर का पूरा ताना-बाना बिगड़ने लगता है। हालांकि इसके लक्षण बहुत धीरे-धीरे सामने आते हैं, फिर भी कुछ ऐसे आम संकेत हैं जो अक्सर मरीजों में साफ तौर पर देखे जा सकते हैं। अगर आपको अपने शरीर में इनमें से कोई भी बदलाव महसूस हो, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत डॉक्टर के पास जाकर अपनी जांच करवानी चाहिए।
सिर के पिछले हिस्से में लगातार दर्द रहना इसका सबसे आम लक्षण है, जो विशेष रूप से सुबह सोकर उठने के बाद बहुत तेज महसूस होता है। इसके अलावा अचानक से चक्कर आना, बैठे से खड़े होने पर आंखों के सामने अंधेरा छा जाना या शरीर का संतुलन बिगड़ने लगना भी इसी ओर इशारा करता है। थोड़ा सा चलने या घर की सीढ़ियां चढ़ने पर ही अगर आपकी सांस बुरी तरह फूलने लगती है, तो इसका मतलब है कि आपके दिल को शरीर में खून पहुंचाने के लिए सामान्य से दोगुनी मेहनत करनी पड़ रही है। छाती में भारीपन, धुंधला दिखाई देना और बिना किसी वजह के अचानक नाक से खून आ जाना भी इसके बेहद गंभीर लक्षण माने जाते हैं जिन्हें कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए।
| लक्षण का नाम और प्रकार | यह शरीर में कब और कैसे दिखता है | इस लक्षण के खतरे का स्तर |
| सुबह का तेज सिरदर्द | सोकर उठते ही सिर के पीछे भारीपन होना | मध्यम स्तर का शुरुआती चेतावनी संकेत |
| चक्कर आना और धुंधलापन | अचानक खड़े होने पर आंखों के आगे अंधेरा आना | उच्च स्तर की समस्या, तुरंत जांच कराएं |
| सीने में जकड़न और भारीपन | आराम करते समय भी छाती पर दबाव महसूस होना | बहुत उच्च स्तर, दिल के दौरे का खतरा |
| नाक से अचानक खून बहना | बिना किसी चोट के अचानक नाक से ब्लीडिंग होना | अत्यंत गंभीर स्थिति, तुरंत अस्पताल जाएं |
बीपी हाई क्यों होता है? इसके मुख्य कारण
हमारे शरीर में रक्तचाप का बढ़ना कोई एक दिन में होने वाली घटना नहीं है, बल्कि यह हमारी महीनों और सालों की उन खराब आदतों का नतीजा है जिन्हें हम रोज नजरअंदाज करते हैं। इसके साथ ही कुछ चीजें ऐसी भी होती हैं जिन पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता, जैसे कि हमारी उम्र का बढ़ना या हमारे परिवार का मेडिकल इतिहास। अगर हम इन सभी कारणों को अच्छी तरह समझ लें, तो हम इस बीमारी को होने से पहले ही रोक सकते हैं।
भारतीय लाइफस्टाइल, खान-पान और नमक का कनेक्शन
हम भारतीयों का अपने पारंपरिक और चटपटे भोजन से एक बहुत ही गहरा लगाव है। हमारे घरों में सुबह के पराठों से लेकर रात के खाने तक अचार, पापड़, चटनी और तरह-तरह की नमकीन का इस्तेमाल बहुत ज्यादा किया जाता है। इन सभी चीजों को लंबे समय तक खराब होने से बचाने और उनका स्वाद बढ़ाने के लिए उनमें जरूरत से ज्यादा सफेद नमक डाला जाता है। नमक के अंदर सोडियम की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो हमारे शरीर में जाकर नसों के अंदर पानी को रोकने का काम करता है। जब शरीर में पानी की मात्रा बढ़ती है, तो खून का आयतन भी बढ़ जाता है जिससे धमनियों पर दबाव दोगुना हो जाता है। इसके साथ ही बाजार का तला-भुना खाना हमारी नसों के अंदर वसा को जमा देता है जिससे खून का रास्ता संकरा हो जाता है।
आज की आधुनिक जिंदगी में हर व्यक्ति किसी न किसी उलझन या परेशानी में फंसा हुआ है। चाहे वह दफ्तर के काम का दबाव हो, बच्चों की पढ़ाई की चिंता हो या भविष्य की असुरक्षा। जब हम बहुत ज्यादा मानसिक तनाव लेते हैं, तो हमारा मस्तिष्क शरीर में कुछ खास तरह के स्ट्रेस हार्मोन छोड़ता है जो हमारी रक्त वाहिकाओं को तुरंत सिकोड़ देते हैं। अगर कोई व्यक्ति लगातार कई महीनों तक इसी तनाव में जीता है, तो उसका बीपी हमेशा के लिए उच्च स्तर पर रहने लगता है। इसके साथ ही शारीरिक सक्रियता न होने से बढ़ा हुआ वजन और पेट की चर्बी भी हमारे दिल पर अतिरिक्त काम का बोझ डालती है। अगर आपके माता-पिता को यह बीमारी थी, तो आपको यह समस्या होने का खतरा सामान्य लोगों से कहीं ज्यादा होता है।
| बीपी बढ़ने के मुख्य कारण | शरीर की प्रणाली पर इसका असर | इससे बचने का सही और आसान विकल्प |
| भोजन में नमक की अधिकता | शरीर में सोडियम बढ़ता है और नसें फूलती हैं | ऊपर से नमक लेना बंद करें, सादा खाना खाएं |
| लगातार मानसिक तनाव | स्ट्रेस हार्मोन नसों को अंदर से सिकोड़ते हैं | रोज सुबह दस मिनट ध्यान या प्राणायाम करें |
| शरीर का बढ़ता हुआ वजन | दिल को खून पंप करने में ज्यादा ताकत लगती है | रोज सुबह सैर करें और मीठा खाना कम करें |
| धूम्रपान और मदिरापान | नसों की अंदरूनी दीवारें पूरी तरह क्षतिग्रस्त होती हैं | इन दोनों बुरी आदतों को पूरी तरह से छोड़ दें |
हाई बीपी को तुरंत कंट्रोल कैसे करें? घरेलू और मेडिकल उपाय
अगर किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर बढ़ गया है, तो सबसे जरूरी बात यह है कि आप डरने या घबराने के बजाय ठंडे दिमाग से स्थिति को संभालें। इस बीमारी को नियंत्रण में रखने के मुख्य रूप से दो तरीके होते हैं। पहला तरीका यह है कि जब अचानक बीपी बढ़ जाए तो उस आपातकालीन स्थिति में तुरंत क्या कदम उठाए जाएं, और दूसरा तरीका यह है कि लंबे समय तक अपने बीपी को सामान्य रखने के लिए हम अपनी रोजमर्रा की आदतों में किस तरह के सकारात्मक बदलाव लाएं।
इमरजेंसी की स्थिति में तुरंत क्या करें?
अगर आपके घर में किसी बुजुर्ग या सदस्य का बीपी अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और उन्हें सीने में बेचैनी या घबराहट होने लगती है, तो सबसे पहले उन्हें बिना देरी किए बिस्तर पर सीधा लेटा दें। उनके शरीर पर मौजूद तंग कपड़ों को थोड़ा ढीला कर दें ताकि वे खुलकर सांस ले सकें। कमरे की खिड़कियां खोल दें या पंखा चला दें जिससे उन्हें ताजी हवा मिल सके। मरीज को कहें कि वे अपनी दोनों आंखें बंद करें और पूरा ध्यान अपनी सांसों पर लगाएं। इस नाजुक समय में उनके सामने कोई भी ऐसी बात या चर्चा न करें जिससे उनका गुस्सा या तनाव और बढ़ जाए। अगर डॉक्टर द्वारा सुझाई गई कोई आपातकालीन दवा घर पर है, तो उसे तुरंत दें और आराम न मिलने पर पास के क्लीनिक में ले जाएं।
दैनिक जीवन में बदलाव (डाइट, योग और एक्सरसाइज)
लंबे समय तक बिना किसी बड़ी दवा के या कम से कम दावों के सहारे एक सेहतमंद जिंदगी जीने का सिर्फ एक ही रास्ता है कि आप अपनी जीवनशैली को पूरी तरह से सुधार लें। इसके लिए आपको अपने खाने में पोटैशियम से भरपूर चीजें जैसे कि केला, संतरा, तरबूज, पालक और हरी पत्तेदार सब्जियों की मात्रा बढ़ानी होगी क्योंकि पोटैशियम शरीर से फालतू सोडियम को बाहर निकालने में मदद करता है। इसे डॉक्टरी भाषा में डैश डाइट भी कहा जाता है। इसके साथ ही रोज सुबह कम से कम तीस मिनट तक तेज कदमों से चलने की आदत डालें। योग में अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम हमारी नसों को शांत करने और मानसिक तनाव को दूर करने में सबसे ज्यादा मददगार साबित होते हैं। रात को कम से कम सात से आठ घंटे की पूरी और गहरी नींद लेना भी बीपी को काबू में रखने के लिए बेहद जरूरी है।
| उपाय का मुख्य प्रकार | दैनिक जीवन की अच्छी आदतें | इससे सेहत को मिलने वाला दीर्घकालिक लाभ |
| संतुलित खान-पान | भोजन में पोटैशियम बढ़ाना और सोडियम घटाना | नसें अंदर से साफ, लचीली और मजबूत रहती हैं |
| रोजाना शारीरिक कसरत | रोज आधा घंटा बिना रुके तेज पैदल चलना | दिल की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और वजन घटता है |
| मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान | रोज सुबह योग, ध्यान और अच्छा संगीत सुनना | स्ट्रेस हार्मोन का स्तर गिरता है और मन शांत होता है |
| नियमित रूप से जांच | हर महीने घर पर डिजिटल मशीन से बीपी मापना | बीमारी के बढ़ने से पहले ही उसका पता चल जाता है |
अंतिम विचार
पूरी चर्चा के बाद सबसे महत्वपूर्ण बात यही निकल कर आती है कि उच्च रक्तचाप कोई ऐसी भयानक बीमारी नहीं है जिससे डरकर आप अपने जीवन का आनंद लेना ही छोड़ दें। इसे सही जानकारी, सही खान-पान और थोड़े से आत्म-नियंत्रण के बल पर बहुत आसानी से पूरी तरह अपने काबू में रखा जा सकता है। हमारे भारतीय समाज में लोग अक्सर तब तक किसी डॉक्टर या अस्पताल के पास नहीं जाते जब तक कि उनकी तकलीफ बर्दाश्त से बाहर न हो जाए। हमें अपनी इस पुरानी सोच को अब बदलना होगा।
अगर आपकी उम्र तीस साल की सीमा को पार कर चुकी है, तो अपनी सेहत के प्रति जिम्मेदार बनें। अपने घर में एक अच्छी डिजिटल बीपी मशीन जरूर रखें और महीने में कम से कम एक बार अपना और अपने परिवार का बीपी जरूर चेक करें। हमेशा याद रखें कि सही समय पर बरती गई सावधानी और जीवनशैली में किया गया थोड़ा सा सुधार ही इस छुपे हुए दुश्मन से बचने का सबसे बेहतरीन और अचूक रास्ता है। अच्छा खाना खाएं, रोज थोड़ा टहलें, हमेशा खुश रहें और एक लंबी व स्वस्थ जिंदगी का आनंद लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
क्या सर्दियों के मौसम में ब्लड प्रेशर सामान्य दिनों के मुकाबले ज्यादा बढ़ जाता है?
हां, सर्दियों के दिनों में हमारा ब्लड प्रेशर थोड़ा सा बढ़ जाता है और यह एक पूरी तरह से प्राकृतिक प्रक्रिया है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ठंडे मौसम में हमारे शरीर की नसें थोड़ी सिकुड़ जाती हैं ताकि शरीर के अंदर की गर्मी बाहर न जा सके और तापमान बना रहे। नसों के इस तरह सिकुड़ने के कारण खून को बहने के लिए कम जगह मिलती है, जिससे धमनियों पर दबाव अपने आप बढ़ जाता है। यही कारण है कि ठंड के मौसम में दिल के मरीजों और बुजुर्गों को अपना विशेष ख्याल रखने और खुद को गर्म रखने की सलाह दी जाती है।
क्या रोजाना बहुत ज्यादा तेज चाय या ब्लैक कॉफी पीने से बीपी हमेशा के लिए हाई हो सकता है?
चाय और कॉफी के अंदर कैफीन नाम का एक तत्व पाया जाता है जो शरीर में जाते ही हमारी नसों को उत्तेजित कर देता है। जब आप इनका सेवन करते हैं, तो यह कुछ समय के लिए आपके ब्लड प्रेशर को तुरंत बढ़ा देता है, हालांकि यह असर अस्थाई होता है और दो से तीन घंटे में अपने आप ठीक हो जाता है। लेकिन अगर आप दिनभर में पांच से छह कप से ज्यादा कड़क चाय या कॉफी पीते हैं, तो यह आपकी रातों की नींद को पूरी तरह खराब कर सकता है। नींद की यही कमी लंबे समय में जाकर स्थायी रूप से बीपी बढ़ने का एक मुख्य कारण बन सकती है।
क्या पेट में बहुत ज्यादा गैस, कब्ज या एसिडिटी बनने से भी बीपी बढ़ सकता है?
सीधे तौर पर पेट की गैस का ब्लड प्रेशर से कोई सीधा वैज्ञानिक संबंध नहीं होता है। लेकिन जब पेट में बहुत ज्यादा गैस बनती है, तो वह ऊपर की तरफ उठती है और हमारी छाती व डायाफ्राम पर दबाव डालती है जिससे व्यक्ति को घबराहट, सीने में भारीपन और सांस लेने में बेचैनी होने लगती है। इस अचानक हुई असहजता और छाती के दर्द के कारण व्यक्ति बहुत ज्यादा डर जाता है कि कहीं यह दिल का दौरा तो नहीं है। इसी डर और मानसिक तनाव की वजह से शरीर में घबराहट बढ़ती है और बीपी अस्थाई रूप से कुछ समय के लिए ऊपर चला जाता है।
रात को सोते समय हमारा ब्लड प्रेशर अपने आप कम क्यों हो जाता है?
जब हम रात को गहरी नींद में सो रहे होते हैं, तो हमारा पूरा शरीर और हमारी सभी मांसपेशियां पूरी तरह से आराम की स्थिति में चली जाती हैं। उस शांत समय में हमारे दिल को शरीर के अंगों तक खून भेजने के लिए बहुत ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती क्योंकि अंगों की ऑक्सीजन की मांग भी कम हो जाती है। इस वजह से सोते समय बीपी स्वाभाविक रूप से दस से बीस प्रतिशत तक नीचे गिर जाता है। चिकित्सा विज्ञान की भाषा में इसे नोक्टर्नल डिपिंग कहा जाता है और यह एक पूरी तरह से सामान्य व स्वस्थ शरीर की पहचान माना जाता है।
क्या बीपी को नियंत्रित करने वाली दवाओं को हमेशा सुबह खाली पेट ही खाना चाहिए?
यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आपके डॉक्टर ने आपको किस साल्ट या ग्रुप की दवा लिख कर दी है। ब्लड प्रेशर की कुछ दवाएं ऐसी होती हैं जो खाली पेट शरीर में सबसे अच्छा काम करती हैं, जबकि कुछ अन्य दवाएं ऐसी होती हैं जिन्हें खाना खाने के बाद लेने की सलाह दी जाती है ताकि पेट में किसी तरह की जलन या एसिडिटी न हो। इसलिए इस मामले में अपनी मर्जी से कोई भी फैसला न लें। आपके डॉक्टर ने आपके पर्चे पर दवा लेने का जो समय तय किया है, ठीक उसी नियम का पालन करें।
