टैक्स गाइडवित्त

भारत में धारा 80 सी से परे कर-बचत के 8 विकल्प

क्या आपकी डेढ़ लाख रुपये की निवेश सीमा पूरी हो चुकी है? हर साल मार्च आते-आते हम सब अपना आयकर बचाने के लिए परेशान होने लगते हैं। अगर पीपीएफ, जीवन बीमा और ईएलएसएस में निवेश करने के बाद भी आपका आयकर बन रहा है, तो आपको डरने की कोई जरूरत नहीं है। भारत में आयकर बचाने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता नहीं है। ऐसे और भी कई बेहतरीन टैक्स सेविंग ऑप्शंस इन इंडिया मौजूद हैं, जिनके जरिए आप अपनी गाढ़ी कमाई को आयकर के डंडे से बचा सकते हैं। आज हम उन्हीं विकल्पों पर सीधी और साफ बात करेंगे ताकि आप ज्यादा से ज्यादा पैसा बचा सकें।

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धारा 80सी की सीमा पूरी होने के बाद क्या करें?

भारतीय आयकर प्रणाली को अक्सर बहुत पेचीदा माना जाता है। ज्यादातर लोगों को लगता है कि आयकर बचाने का मतलब सिर्फ एक तय सीमा में डेढ़ लाख रुपये डाल देना है। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। सरकार ने हमारी सेहत, घर और उच्च शिक्षा जैसी आम और जरूरी जरूरतों के लिए अलग से आयकर में बहुत सारी छूट दे रखी है।

अगर आप पुरानी आयकर व्यवस्था का चुनाव करते हैं, तो आप इन अतिरिक्त छूट का फायदा उठाकर अपना काफी सारा पैसा बचा सकते हैं। आपको बस सही धारा और सही निवेश के तरीके पता होने चाहिए। इन तरीकों को अपनाकर आप अपने और अपने परिवार के भविष्य को भी सुरक्षित कर सकते हैं। चलिए बिना कोई लंबा भाषण दिए सीधे उन आठ तरीकों की बात करते हैं जो आपके बहुत काम आएंगे।

8 बेहतरीन टैक्स सेविंग ऑप्शंस इन इंडिया

यहां हमने उन आठ शानदार विकल्पों की सूची दी है जो आपकी डेढ़ लाख की निवेश सीमा के बिल्कुल बाहर हैं। हर बिंदु में आपको विस्तार से पता चलेगा कि आप किस तरह से और कितना पैसा बचा सकते हैं।

1. स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर आयकर छूट (धारा 80डी)

आजकल के महंगे इलाज और अस्पतालों के बढ़ते खर्च को देखते हुए अपने परिवार के लिए स्वास्थ्य बीमा लेना बहुत जरूरी हो गया है। हमारी सरकार भी इस बात को भली-भांति समझती है और धारा 80डी के तहत स्वास्थ्य बीमा का प्रीमियम भरने पर आयकर में बड़ी छूट देती है। आप अपने लिए, अपने जीवनसाथी के लिए, अपने बच्चों के लिए और अपने माता-पिता के लिए दिए गए प्रीमियम पर अपना आयकर आसानी से बचा सकते हैं। आम लोगों के लिए यह छूट पच्चीस हजार रुपये तक होती है।

अगर आप अपने माता-पिता के लिए भी प्रीमियम भरते हैं और वे वरिष्ठ नागरिक हैं, तो उनके प्रीमियम पर आप अलग से पचास हजार रुपये तक की अधिकतम छूट ले सकते हैं। इस तरह आप कुल मिलाकर पचहत्तर हजार रुपये तक का आयकर लाभ उठा सकते हैं। इसके अलावा, इस धारा में पांच हजार रुपये का प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप यानी निवारक स्वास्थ्य जांच भी शामिल होता है। यह एक ऐसा विकल्प है जो बीमारी में आर्थिक सुरक्षा देने के साथ-साथ आपकी गाढ़ी कमाई भी बचाता है।

धारा किसके लिए स्वास्थ्य बीमा लिया गया है अधिकतम आयकर छूट की सीमा
80डी खुद, जीवनसाथी और बच्चे (साठ वर्ष से कम आयु) पच्चीस हजार रुपये
80डी माता-पिता (साठ वर्ष से अधिक आयु वाले वरिष्ठ नागरिक) पचास हजार रुपये
80डी निवारक स्वास्थ्य जांच (प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप) पांच हजार रुपये (कुल सीमा के भीतर)

2. राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली या एनपीएस (धारा 80सीसीडी 1बी)

राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली आयकर बचाने और बुढ़ापे के लिए पैसा जोड़ने का सबसे बढ़िया और सुरक्षित तरीका है। यह एक ऐसा शानदार हथियार है जो आपको डेढ़ लाख रुपये की तय सीमा के ऊपर सीधे पचास हजार रुपये का अतिरिक्त आयकर लाभ दिलाता है। अगर आप नौकरीपेशा हैं या अपना खुद का व्यापार करते हैं, तो यह विकल्प आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।

आसान भाषा में समझें तो यह निवेश आज आपका आयकर बचाता है और साठ साल की उम्र के बाद आपको हर महीने पेंशन की गारंटी भी देता है। इसमें जमा किया गया पैसा शेयर बाजार और सरकारी बांड्स में लगाया जाता है, जिससे लंबे समय में अच्छा मुनाफा मिलता है। यह दोहरा फायदा देने वाला एक बेहतरीन विकल्प है जो हर किसी के निवेश पोर्टफोलियो में जरूर होना चाहिए। इसे अपनाकर आप अपने रिटायरमेंट को पूरी तरह से सुरक्षित बना सकते हैं।

फायदे की बात राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) की जानकारी
अतिरिक्त आयकर छूट पचास हजार रुपये (80सी की सीमा के ऊपर)
लॉक-इन अवधि रिटायरमेंट तक (साठ साल की उम्र पूरी होने तक)
निवेश के उपलब्ध विकल्प शेयर बाजार, कॉर्पोरेट बॉन्ड और सरकारी बॉन्ड

3. मकान के लोन के ब्याज पर बड़ी छूट (धारा 24बी)

अपना खुद का सपनों का घर खरीदना हर इंसान की जिंदगी का सबसे बड़ा लक्ष्य होता है। लेकिन क्या आपको पता है कि यह सपना आयकर बचाने में भी आपका सबसे बड़ा साथी बन सकता है। जब आप घर बनाने या खरीदने के लिए बैंक से लोन लेते हैं, तो आपकी हर महीने की किश्त के दो हिस्से होते हैं। पहला हिस्सा मूलधन का होता है और दूसरा हिस्सा उस पर लगने वाले ब्याज का होता है।

मूलधन पर तो आपको छूट मिलती ही है, लेकिन आप होम लोन के ब्याज पर साल भर में दो लाख रुपये तक की भारी आयकर छूट ले सकते हैं। यह धारा 24बी के अंतर्गत आता है और डेढ़ लाख की सीमा से बिल्कुल अलग है। अगर आपने अपना घर किराये पर दे रखा है, तो ब्याज की छूट की कोई अधिकतम सीमा नहीं होती है। यह आयकर बचाने की सबसे बड़ी और फायदेमंद छूट में से एक मानी जाती है।

होम लोन कटौती धारा 24बी के महत्वपूर्ण नियम
खुद के रहने वाले घर के लिए सालाना दो लाख रुपये तक की अधिकतम छूट
किराये पर दिए गए घर के लिए ब्याज की कोई अधिकतम सीमा तय नहीं है
छूट का दावा कब करें मकान का निर्माण कार्य पूरी तरह खत्म होने के बाद

4. उच्च शिक्षा के लोन पर पूरा आयकर लाभ (धारा 80ई)

उच्च शिक्षा के लोन पर पूरा आयकर लाभ (धारा 80ई)

आज के समय में उच्च शिक्षा का खर्च बहुत तेजी से बढ़ रहा है। अगर आपने खुद की पढ़ाई के लिए, अपने बच्चों के लिए या फिर अपने जीवनसाथी की उच्च शिक्षा के लिए बैंक से शिक्षा लोन लिया है, तो यह धारा आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसमें सबसे दिलचस्प और अच्छी बात यह है कि आयकर छूट की कोई ऊपरी सीमा तय नहीं की गई है।

आपने साल भर में शिक्षा लोन पर जितना भी ब्याज बैंक को चुकाया है, वह पूरा का पूरा पैसा आयकर से मुक्त हो जाता है। यह फायदा आपको लोन की किश्त चुकाना शुरू करने वाले साल से लेकर अगले आठ साल तक लगातार मिलता रहता है। इसलिए अगर आप विदेश में या देश के किसी बड़े संस्थान में पढ़ाई करने का सपना देख रहे हैं, तो शिक्षा लोन लेना आर्थिक रूप से काफी समझदारी भरा कदम हो सकता है।

शिक्षा लोन के फायदे धारा 80ई की खास बातें
आयकर छूट की सीमा कोई सीमा नहीं (पूरा का पूरा ब्याज आयकर मुक्त)
किसके लिए लोन ले सकते हैं खुद, जीवनसाथी, बच्चे या कानूनी रूप से गोद लिए बच्चे
कितने सालों तक लाभ मिलेगा लगातार अधिकतम आठ सालों तक

5. मकान किराया भत्ता न मिलने पर किराये पर छूट (धारा 80जीजी)

बहुत से लोगों के वेतन ढांचे में मकान किराया भत्ता (एचआरए) शामिल नहीं होता है। इसके अलावा कई लोग स्वतंत्र रूप से काम करते हैं या अपना खुद का छोटा-मोटा व्यापार करते हैं लेकिन वे किराये के घर में रहते हैं। ऐसे तमाम लोगों की मदद के लिए सरकार ने धारा 80जीजी बनाई है।

यहां एक खास गणित के हिसाब से आपको हर महीने पांच हजार रुपये तक का आयकर लाभ मिल सकता है। इसका मतलब है कि आप साल भर में साठ हजार रुपये तक की आयकर छूट का दावा कर सकते हैं। बस इसके लिए सबसे बड़ी शर्त यह है कि उस शहर में आपके नाम पर, आपके जीवनसाथी के नाम पर या आपके नाबालिग बच्चे के नाम पर कोई अपना घर नहीं होना चाहिए। यह नियम किराये पर रहने वाले उन लोगों के लिए बहुत मददगार है जिन्हें कंपनी से कोई भत्ता नहीं मिलता।

किराये के मकान पर छूट धारा 80जीजी की अहम शर्तें
अधिकतम आयकर छूट पांच हजार रुपये प्रति महीना (साठ हजार रुपये सालाना)
कौन इस छूट का दावा कर सकता है जिन्हें वेतन में मकान किराया भत्ता नहीं मिलता
जरूरी कागजात रेंट एग्रीमेंट और मकान मालिक का पैन कार्ड

6. बचत खाते के ब्याज पर आयकर से राहत (धारा 80टीटीए और 80टीटीबी)

हम सभी के बैंक बचत खाते में कुछ न कुछ पैसा हमेशा पड़ा रहता है और बैंक उस पैसे पर हमें थोड़ा बहुत ब्याज भी देता है। बहुत कम लोग जानते हैं कि यह ब्याज भी आपकी कुल कमाई का हिस्सा माना जाता है और कानूनन इस पर आयकर लगता है। लेकिन आम जनता को राहत देने के लिए सरकार ने धारा 80टीटीए के तहत दस हजार रुपये तक के बचत खाते के ब्याज को आयकर से पूरी तरह मुक्त रखा है।

वहीं अगर हम वरिष्ठ नागरिकों की बात करें तो उनके लिए सरकार ने धारा 80टीटीबी बनाई है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह आयकर छूट की सीमा सीधे पचास हजार रुपये तक चली जाती है। सबसे अच्छी बात यह है कि वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली इस पचास हजार की छूट में फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) और रेकरिंग डिपॉजिट (आरडी) से मिलने वाला ब्याज भी पूरी तरह से शामिल होता है।

बैंक खाते का ब्याज नियम और आयकर छूट की सीमा
साठ वर्ष से कम उम्र के नागरिक (धारा 80टीटीए) दस हजार रुपये (सिर्फ बचत खाते के ब्याज पर)
वरिष्ठ नागरिक (धारा 80टीटीबी) पचास हजार रुपये (बचत और फिक्स्ड डिपॉजिट दोनों पर)

7. चिकित्सा उपचार और विकलांगता पर राहत (धारा 80डीडी और 80डीडीबी)

अगर परिवार में कोई गंभीर रूप से बीमार पड़ जाए या किसी सदस्य को विशेष चिकित्सा देखभाल की जरूरत हो, तो ऐसे में अस्पताल और इलाज का खर्च बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। सरकार ऐसे मुश्किल समय में आम आदमी को आयकर में काफी राहत प्रदान करती है। धारा 80डीडी विशेष रूप से उन लोगों के लिए बनाई गई है जिनके परिवार का कोई सदस्य विकलांग है और पूरी तरह से उन पर निर्भर है।

दूसरी ओर धारा 80डीडीबी कैंसर या न्यूरोलॉजिकल जैसी अत्यंत गंभीर बीमारियों के लंबे इलाज के लिए है। बीमारी और विकलांगता की गंभीरता के आधार पर आप पचहत्तर हजार रुपये से लेकर सवा लाख रुपये तक की भारी छूट का दावा कर सकते हैं। गंभीर बीमारी के मामले में आम नागरिकों को चालीस हजार रुपये और वरिष्ठ नागरिकों को एक लाख रुपये तक की छूट मिलती है। इससे इलाज के दौरान होने वाले भारी आर्थिक तनाव को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

बीमारी या विकलांगता का प्रकार आयकर धारा अधिकतम आयकर छूट
विकलांग आश्रित के इलाज का खर्च धारा 80डीडी पचहत्तर हजार रुपये से लेकर सवा लाख रुपये तक
अत्यंत गंभीर बीमारी का इलाज धारा 80डीडीबी चालीस हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक

8. दान और परोपकार में भलाई भी, आयकर की बचत भी (धारा 80जी)

अगर आप समाज की भलाई के लिए किसी पंजीकृत गैर सरकारी संगठन (एनजीओ), धार्मिक ट्रस्ट या सरकारी राहत कोष में अपनी स्वेच्छा से दान करते हैं, तो आप पुण्य कमाने के साथ-साथ अपना बहुत सारा आयकर भी बचा सकते हैं। धारा 80जी के तहत आपके द्वारा किए गए दान का पचास प्रतिशत या सौ प्रतिशत हिस्सा आयकर से छूट पा सकता है।

यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आपने किस प्रकार के फंड या संस्था में अपना पैसा दिया है। इस भारी छूट को पाने के लिए आपके पास उस संस्था की पक्की रसीद और उनका पैन नंबर होना बहुत जरूरी है। सरकार ने नकद दान की सीमा केवल दो हजार रुपये तक ही सीमित कर रखी है। इसलिए अगर आप कोई बड़ा दान करना चाहते हैं, तो वह हमेशा डिजिटल माध्यम, चेक या बैंक ड्राफ्ट के जरिए ही करें ताकि आपको आयकर में पूरी छूट मिल सके।

दान और आयकर में छूट धारा 80जी की महत्वपूर्ण बातें
छूट का प्रतिशत पचास प्रतिशत या सौ प्रतिशत (फंड के प्रकार पर निर्भर)
नकद दान की अधिकतम सीमा केवल दो हजार रुपये तक
जरूरी दस्तावेज और सबूत पक्की रसीद जिसमें संस्था का नाम और पैन नंबर दर्ज हो

नई बनाम पुरानी टैक्स व्यवस्था: ध्यान रखने वाली बातें

अपना आयकर रिटर्न भरते समय एक बात का विशेष रूप से ध्यान रखना बहुत जरूरी है। ऊपर बताए गए ज्यादातर फायदे और छूट केवल पुरानी आयकर व्यवस्था चुनने वालों के लिए ही उपलब्ध हैं। अगर आप नई आयकर व्यवस्था का चुनाव करते हैं, तो आपको नियोक्ता द्वारा जमा किए गए एनपीएस के अलावा इनमें से कोई भी अतिरिक्त छूट नहीं मिलेगी।

नई आयकर व्यवस्था पूरी तरह से फ्लैट और कम आयकर दरों पर काम करती है, इसीलिए इसमें से सारे पुराने डिडक्शन हटा दिए गए हैं। इसलिए अपना आयकर रिटर्न फाइल करने से पहले एक बार दोनों व्यवस्थाओं में अपनी कुल कमाई और छूट की गणना ठीक से कर लें। ऐसा करने से आपको बिल्कुल साफ हो जाएगा कि किस व्यवस्था में आपका ज्यादा फायदा है और आप किसी भी तरह के आर्थिक नुकसान से बच जाएंगे।

निष्कर्ष

आयकर की योजना बनाना कोई ऐसा काम नहीं है जो सिर्फ मार्च के महीने में जल्दबाजी में किया जाए। अगर आप साल की शुरुआत से ही सही समय पर और सही जगह निवेश करते हैं, तो आप अपनी कड़ी मेहनत का पैसा व्यर्थ जाने से रोक सकते हैं। बेहतरीन टैक्स सेविंग ऑप्शंस इन इंडिया को अपनाकर आप अपने भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित कर सकते हैं। बस अपनी पारिवारिक जरूरत के हिसाब से सही स्वास्थ्य बीमा चुनें, अपने सुखद रिटायरमेंट के लिए सही पेंशन योजना अपनाएं और पुरानी आयकर व्यवस्था के सभी फायदों का समझदारी से इस्तेमाल करें ताकि आपकी बचत हमेशा बढ़ती रहे।

आम सवाल

1. क्या मैं एक ही साल में धारा 80सी और 80डी दोनों का फायदा ले सकता हूं?

हां, आप बिल्कुल ले सकते हैं। ये दोनों कानूनन एकदम अलग-अलग धाराएं हैं। आप 80सी के तहत निवेश दिखाकर और 80डी के तहत अपना स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम दिखाकर दोनों का एक साथ पूरा फायदा उठा सकते हैं।

2. एनपीएस में अतिरिक्त पचास हजार की छूट का दावा कैसे करें?

यह प्रक्रिया बहुत ही आसान है। आपको सिर्फ अपना आयकर रिटर्न भरते समय धारा 80सीसीडी(1बी) के निर्धारित कॉलम में अपने एनपीएस निवेश की रसीद का पूरा अमाउंट डालना होता है। ऐसा करने से यह राशि पुरानी सीमा से अलग जाकर कैलकुलेट होगी।

3. क्या नई आयकर व्यवस्था में घर के किराये और होम लोन पर छूट मिलती है?

नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। नई आयकर व्यवस्था में घर के किराये की छूट और खुद के रहने वाले मकान के होम लोन ब्याज पर कोई छूट नहीं मिलती है। नई व्यवस्था कम आयकर स्लैब पर चलती है इसलिए इसमें छूट का प्रावधान नहीं है।