बीमास्वास्थ्य

सेक्शन 80D के तहत मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम डिडक्शन का क्लेम कैसे करें?

कर बचाने का समय आते ही हम सभी निवेश के विभिन्न तरीके खोजने लगते हैं ताकि हमारी गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा कर के रूप में न कट जाए। मैंने अपने अनुभव में अक्सर देखा है कि आम नागरिक कर बचाने के लिए केवल भविष्य निधि या सावधि जमा जैसी योजनाओं के पीछे भागते हैं और स्वास्थ्य बीमा जैसी महत्वपूर्ण चीज़ को अनदेखा कर देते हैं।

क्या आपको पता है कि आपकी और आपके परिवार की सेहत को सुरक्षित रखने वाला स्वास्थ्य बीमा आपकी जेब को भी सुरक्षित रख सकता है और आपको भारी कर चुकाने से बचा सकता है। आयकर अधिनियम का यह विशेष नियम आपको इसी चिकित्सा बीमा की किश्त पर कर बचाने का शानदार मौका देता है। यदि आपने अपने या अपने परिवार के सदस्यों के लिए स्वास्थ्य बीमा लिया है तो आप हर साल चुकाई गई किश्त की राशि पर कर छूट का दावा कर सकते हैं। यह छूट केवल आपके अपने बीमा पर नहीं मिलती बल्कि यदि आप अपनी पत्नी या पति बच्चों और अपने माता पिता के लिए स्वास्थ्य बीमा की किश्त भरते हैं तो आप उस पर भी कर कटौती का दावा कर सकते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि यह छूट अन्य निवेश योजनाओं की डेढ़ लाख रुपये की सीमा से बिल्कुल अलग है। इसका मतलब यह है कि यदि आपकी अन्य निवेश सीमा पूरी हो चुकी है तब भी आप इस नियम का उपयोग करके अपना और अधिक कर बचा सकते हैं। यह नियम नागरिकों को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने और भविष्य की चिकित्सा संबंधी परेशानियों से आर्थिक रूप से सुरक्षित करने के उद्देश्य से बनाया गया है।

विवरण पात्रता
स्वयं के लिए बीमा मान्य
जीवनसाथी के लिए बीमा मान्य
आश्रित बच्चों के लिए बीमा मान्य
माता पिता के लिए बीमा मान्य

धारा 80 डी के तहत कर कटौती की सीमाएं और आप कितना कर बचा सकते हैं

यह इस पूरे विषय का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसे आपको बहुत ही ध्यान से समझना चाहिए ताकि आप अधिकतम लाभ उठा सकें। आप इस नियम के तहत कितने रुपये तक का कर बचा सकते हैं यह पूरी तरह से आपकी और आपके माता पिता की आयु पर निर्भर करता है। आयकर विभाग ने इसके लिए अलग अलग श्रेणियां बनाई हैं ताकि हर आयु वर्ग के लोगों को उनकी आवश्यकता के अनुसार लाभ मिल सके। यदि आपकी आयु साठ वर्ष से कम है और आप अपने अपनी जीवनसाथी और अपने आश्रित बच्चों के लिए स्वास्थ्य बीमा किश्त भर रहे हैं तो आप एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम पच्चीस हजार रुपये तक की कटौती का दावा कर सकते हैं। इसके साथ ही यदि आप अपने माता पिता के लिए भी किश्त भर रहे हैं और उनकी आयु भी साठ वर्ष से कम है तो आपको पच्चीस हजार रुपये की एक और छूट मिल जाती है।

इस प्रकार आप कुल पचास हजार रुपये तक अपनी आय को कर मुक्त करवा सकते हैं। लेकिन यदि आपके माता पिता वरिष्ठ नागरिक हैं यानी उनकी आयु साठ वर्ष या उससे अधिक है तो उनके बीमा किश्त पर आपको पचास हजार रुपये तक की भारी छूट मिल सकती है। इस स्थिति में आप एक साल में कुल पचहत्तर हजार रुपये तक की कर कटौती का दावा कर सकते हैं। और सबसे बड़ा लाभ तब मिलता है जब आप स्वयं भी वरिष्ठ नागरिक हों और आपके माता पिता भी वरिष्ठ नागरिक हों। इस विशेष परिस्थिति में कर विभाग आपको सबसे ज्यादा फायदा देता है और आप सीधे सीधे एक लाख रुपये तक की कर कटौती का दावा कर सकते हैं जो कि एक बहुत बड़ी राहत है।

आपकी आयु माता पिता की आयु अधिकतम कर छूट सीमा
साठ वर्ष से कम साठ वर्ष से कम पचास हजार रुपये
साठ वर्ष से कम साठ वर्ष से अधिक पचहत्तर हजार रुपये
साठ वर्ष से अधिक साठ वर्ष से अधिक एक लाख रुपये

बीमारी से बचाव के लिए स्वास्थ्य जांच पर पांच हजार रुपये की अतिरिक्त कर राहत

हम सभी जानते हैं कि किसी भी गंभीर बीमारी का इलाज करवाने से बहुत बेहतर है कि समय रहते उस बीमारी का पता लगा लिया जाए और उससे बचाव किया जाए। हमारी सरकार भी इस बात को बहुत अच्छी तरह से समझती है और मानती है कि नागरिकों को नियमित रूप से अपनी स्वास्थ्य जांच करवानी चाहिए। इसलिए आपको निवारक स्वास्थ्य जांच यानी बीमारी का पता लगाने के लिए की जाने वाली नियमित जांच कराने पर भी पांच हजार रुपये तक की कर छूट मिलती है। इसमें आप नियमित रक्त जांच पूरे शरीर की जांच आदि से जुड़े खर्चों को शामिल कर सकते हैं। लेकिन यहां एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात है जिसे लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं और बाद में उन्हें निराशा होती है।

यह पांच हजार रुपये की छूट आपकी कुल सीमा यानी पच्चीस हजार या पचास हजार रुपये के अंदर ही शामिल होती है और यह कोई अलग से मिलने वाली अतिरिक्त राशि नहीं है। उदाहरण के लिए मान लीजिए कि आपने अपने परिवार के लिए इक्कीस हजार रुपये का स्वास्थ्य बीमा किश्त भरा और चार हजार रुपये की स्वास्थ्य जांच करवाई। आपकी कुल सीमा पच्चीस हजार रुपये है और आपका कुल खर्च भी पच्चीस हजार रुपये हो गया तो आप पूरी राशि का दावा कर सकते हैं। लेकिन यदि आपकी किश्त ही पच्चीस हजार रुपये की है तो आप जांच के पैसे का दावा नहीं कर पाएंगे क्योंकि आपकी सीमा पहले ही समाप्त हो चुकी है। इसलिए अपने खर्चों की योजना बनाते समय इस नियम का ध्यान रखना बहुत आवश्यक है ताकि आपका कोई भी दावा खारिज न हो।

खर्च का प्रकार क्या छूट मिलेगी अधिकतम सीमा
नियमित स्वास्थ्य बीमा किश्त हाँ आयु के अनुसार
निवारक स्वास्थ्य जांच हाँ पांच हजार रुपये
नकद में स्वास्थ्य जांच हाँ पांच हजार रुपये

कर छूट का दावा करने से पहले इन नियमों को अवश्य जान लें और गलतियों से बचें

कर छूट का दावा करने से पहले इन नियमों को अवश्य जान लें और गलतियों से बचें

कर बचाने की जल्दबाजी में कई बार हम कुछ ऐसी बुनियादी गलतियां कर बैठते हैं जिसके कारण हमारा पूरा दावा खारिज हो जाता है और हमारी सारी मेहनत बेकार चली जाती है। इसलिए दावा करने से पहले इन महत्वपूर्ण नियमों को अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए। सबसे पहला और सबसे कड़ा नियम यह है कि यदि आपने अपना स्वास्थ्य बीमा किश्त नकद में भरा है तो आप उस पर कर कटौती का किसी भी परिस्थिति में दावा नहीं कर सकते हैं। आपका बीमा अभिकर्ता चाहे जो भी कहे आपको किश्त का भुगतान हमेशा बैंक चेक मांग पत्र या इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से ही करना चाहिए। केवल एक ही स्थिति में नकद भुगतान की अनुमति है और वह है पांच हजार रुपये वाली निवारक स्वास्थ्य जांच जिसके लिए आप नकद दे सकते हैं। दूसरी सबसे बड़ी बात नई कर व्यवस्था और पुरानी कर व्यवस्था से जुड़ी है।

यदि आपने नई कर व्यवस्था को चुना है तो आपके लिए इस धारा के तहत कर बचाने के सभी रास्ते बंद हो चुके हैं। सरकार ने नई व्यवस्था में कर की दरें तो कम कर दी हैं लेकिन ज्यादातर कर कटौतियों को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। इस कर छूट का पूरा लाभ उठाने के लिए यह अत्यंत आवश्यक और अनिवार्य है कि आप अपनी आयकर विवरणी पुरानी कर व्यवस्था के तहत ही दाखिल करें। इसलिए अपनी विवरणी दाखिल करने से पहले हमेशा एक योग्य व्यक्ति से गणना करवा लें कि दोनों में से कौन सी व्यवस्था आपके लिए व्यक्तिगत रूप से अधिक लाभदायक साबित होगी। इन छोटी छोटी बातों का ध्यान रखकर आप किसी भी प्रकार की परेशानी से बच सकते हैं।

नियम और शर्तें क्या करना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए
भुगतान का तरीका चेक या इंटरनेट बैंकिंग का उपयोग करें मुख्य किश्त नकद में न भरें
कर व्यवस्था का चुनाव पुरानी कर व्यवस्था का चयन करें नई कर व्यवस्था में छूट की उम्मीद न करें
स्वास्थ्य जांच का बिल बिल सुरक्षित रखें बिना बिल के दावा न करें

आयकर विवरणी दाखिल करते समय कर छूट का दावा करने का बिल्कुल सही तरीका

यह जानना हर करदाता के लिए बहुत जरूरी है कि इस विशेष धारा को आयकर विवरणी में सही तरीके से कैसे दिखाया जाता है ताकि भविष्य में कोई परेशानी न हो। यदि आप किसी कार्यालय में नौकरी करते हैं तो अपने मानव संसाधन या वित्त विभाग को निवेश घोषणा के समय अपने स्वास्थ्य बीमा की रसीद या बीमा का प्रमाणपत्र अवश्य जमा कर दें। आपका कार्यालय आपके कर प्रमाणपत्र को बनाते समय इसे खुद ही शामिल कर लेगा और आपका कर कम कटेगा। यदि आप अपना कर स्वयं दाखिल कर रहे हैं तो आपको कर विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर कुछ आसान चरणों का पालन करना होगा। जब आप पोर्टल पर अपना खाता खोलेंगे और अपना विवरणी प्रपत्र भरेंगे तो वहां आपको कर कटौतियों से जुड़ा एक विशेष भाग दिखाई देगा।

उसी भाग के अंदर आपको इस धारा का विकल्प मिलेगा जहां आपको यह बताना होगा कि क्या आप या आपके परिवार में कोई वरिष्ठ नागरिक है या नहीं। आपको वहां सही विकल्प चुनकर वह पूरी राशि लिखनी होगी जो आपने बीमा किश्त के रूप में चुकाई है। आपको किसी भी प्रकार के बिल या रसीद को विवरणी दाखिल करते समय अपलोड करने या भेजने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। लेकिन भविष्य में यदि कर विभाग कोई जांच करता है या आपसे स्पष्टीकरण मांगता है तो सबूत के तौर पर अपने पास सारी रसीदें और बैंक के लेन देन का विवरण कम से कम सात वर्षों तक सुरक्षित रखना आपकी जिम्मेदारी है। सही जानकारी देकर आप किसी भी प्रकार के जुर्माने से बच सकते हैं।

विवरणी दाखिल करने का चरण आवश्यक जानकारी
पहला चरण कर पोर्टल पर जाएं
दूसरा चरण कटौती वाले भाग का चयन करें
तीसरा चरण वरिष्ठ नागरिक की जानकारी दें
चौथा चरण चुकाई गई किश्त की राशि भरें

अंतिम विचार

जब भी मैं कर बचाने की बात करता हूं तो मैंने देखा है कि लोगों को निवेश से जुड़ी मुख्य धारा और स्वास्थ्य बीमा से जुड़ी इस धारा के बीच बहुत अधिक भ्रम होता है। आइए आज इस भ्रम को पूरी तरह से और बिल्कुल आसान शब्दों में दूर करते हैं ताकि आप सही निर्णय ले सकें। निवेश वाली मुख्य धारा मुख्य रूप से लंबी अवधि के निवेश और भविष्य की बचत के लिए बनाई गई है। इसमें आप भविष्य निधि राष्ट्रीय बचत पत्र बच्चों की शिक्षा शुल्क और जीवन बीमा जैसी जगहों पर पैसा लगाकर कर बचाते हैं और इसकी अधिकतम सीमा सरकार द्वारा डेढ़ लाख रुपये निर्धारित की गई है। वहीं दूसरी तरफ हमारी आज की चर्चा वाली यह धारा सिर्फ और सिर्फ आपकी सेहत पर होने वाले खर्च यानी चिकित्सा बीमा और स्वास्थ्य जांच से सीधे तौर पर जुड़ी है।

इसका किसी अन्य निवेश से कोई लेना देना नहीं है और इसकी सीमा आपके और आपके माता पिता की आयु के आधार पर पच्चीस हजार से लेकर एक लाख रुपये तक अलग अलग होती है। सबसे अच्छी और राहत देने वाली बात यह है कि आप अपनी सुविधा और आय के अनुसार इन दोनों नियमों का फायदा एक साथ उठा सकते हैं। यदि आप निवेश में डेढ़ लाख और स्वास्थ्य बीमा में पचहत्तर हजार बचा रहे हैं तो आप अपनी कर योग्य आय को सीधे सवा दो लाख रुपये तक कम कर रहे हैं जो आपकी बचत को बहुत बढ़ा देता है। सही जानकारी और योजना के साथ आप अपनी गाढ़ी कमाई को कर के रूप में कटने से बचा सकते हैं।