टैक्स गाइडवित्त

भारत में शून्य आयकर का भुगतान करने के 10 वैध तरीके

क्या आप हर महीने अपनी सैलरी स्लिप देखकर परेशान होते हैं कि आपकी मेहनत की कमाई का एक बड़ा हिस्सा टैक्स में कट गया? भारत में बहुत से लोग यह मानते हैं कि टैक्स बचाना केवल चार्टर्ड अकाउंटेंट या बड़े व्यापारियों का काम है, सच्चाई इससे बिलकुल अलग है। एक आम वेतनभोगी व्यक्ति भी सरकार द्वारा बनाए गए नियमों का सही इस्तेमाल करके [भारत में शून्य आयकर का भुगतान करें] के लक्ष्य को हासिल कर सकता है। टैक्स प्लानिंग कोई रॉकेट साइंस नहीं है, बल्कि यह आपके पैसे को सही जगह निवेश करने और सरकार द्वारा दी गई छूट का फायदा उठाने की एक कला है।

आज के समय में महंगाई बढ़ रही है, ऐसे में एक-एक रुपये की बचत महत्वपूर्ण है। अगर आप सही तरीके से अपनी आय और निवेश का प्रबंधन करें, तो आप न केवल टैक्स बचाएंगे, बल्कि अपने भविष्य के लिए एक मजबूत आर्थिक आधार भी तैयार कर पाएंगे। इस विस्तृत गाइड में, हम आपको उन 10 पूरी तरह से वैध और कानूनी तरीकों के बारे में बताएंगे, जिनका उपयोग करके आप अपनी टैक्स देनदारी को बिल्कुल शून्य कर सकते हैं। चलिए, इन तरीकों को गहराई से समझते हैं और जानते हैं कि आप इनका लाभ कैसे उठा सकते हैं।

टैक्स प्लानिंग क्यों जरूरी है?

टैक्स प्लानिंग का मतलब सिर्फ सरकार को टैक्स देने से बचना नहीं है, बल्कि यह आपकी समग्र वित्तीय सेहत (फाइनेंशियल हेल्थ) को सुधारने का एक तरीका है। जब आप टैक्स बचाने के लिए निवेश करते हैं, तो आप अनजाने में ही अपनी रिटायरमेंट, बच्चों की पढ़ाई या घर खरीदने जैसे सपनों के लिए पैसा जोड़ रहे होते हैं। बहुत से लोग वित्तीय वर्ष के आखिरी महीने यानी मार्च में हड़बड़ी में गलत जगह पैसा लगा देते हैं, जिससे उन्हें नुकसान होता है। सही टैक्स प्लानिंग साल की शुरुआत (अप्रैल) से ही शुरू हो जाती है। यह आपको अनुशासित बनाती है और आपकी डिस्पोजेबल इनकम (खर्च करने योग्य आय) को बढ़ाती है, जिससे आप आज और कल, दोनों समय बेहतर जीवन जी सकते हैं।

लाभ विवरण
भविष्य की सुरक्षा टैक्स बचाने वाले निवेश आपको लंबी अवधि में अमीर बनाते हैं।
पैसे की बचत जो पैसा टैक्स में जाने वाला था, वह आपकी जेब में रहता है।
अनुशासन नियमित निवेश की आदत पड़ती है।

भारत में Zero Tax देने के 10 कानूनी तरीके

यहाँ उन 10 सबसे प्रभावी तरीकों का विस्तृत विवरण दिया गया है, जो आयकर अधिनियम के तहत पूरी तरह मान्य हैं। आपको बस यह देखना है कि आपकी आय और खर्च के हिसाब से कौन सा विकल्प आपके लिए सबसे सटीक बैठता है।

1. धारा 87A की रिबेट (सबसे बड़ा हथियार)

भारत में [भारत में शून्य आयकर का भुगतान करें] को संभव बनाने में सबसे बड़ी भूमिका धारा 87A की होती है। यह सरकार की तरफ से दी जाने वाली एक ऐसी छूट है जो कम आय वाले लोगों को टैक्स के जाल से पूरी तरह मुक्त कर देती है। जब आपकी कुल टैक्सेबल इनकम एक निश्चित सीमा से कम होती है, तो सरकार आपके द्वारा देय टैक्स को माफ कर देती है। नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) के तहत, अगर आपकी सालाना आय 7 लाख रुपये तक है, तो आपको 25,000 रुपये तक की रिबेट मिलती है, जिसका मतलब है कि आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा। वहीं, पुरानी व्यवस्था में यह सीमा 5 लाख रुपये है। यह रिबेट अपने आप कैलकुलेट होती है, इसके लिए आपको अलग से कोई फॉर्म भरने की जरूरत नहीं होती। ध्यान रखें, अगर आपकी आय सीमा से एक रुपया भी ऊपर गई, तो यह रिबेट खत्म हो सकती है और आपको पूरी राशि पर टैक्स देना पड़ सकता है।

विशेषता नई कर व्यवस्था (New Regime) पुरानी कर व्यवस्था (Old Regime)
आय सीमा ₹7,00,000 तक ₹5,00,000 तक
रिबेट राशि अधिकतम ₹25,000 अधिकतम ₹12,500
किसके लिए सभी निवासी भारतीय सभी निवासी भारतीय

2. स्टैंडर्ड डिडक्शन (वेतनभोगियों का अधिकार)

स्टैंडर्ड डिडक्शन या मानक कटौती वेतनभोगी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक सीधा लाभ है। सरकार यह मानती है कि नौकरी करने के दौरान आपके कुछ न कुछ खर्चे (जैसे आने-जाने का किराया, कपड़े आदि) जरूर होते हैं, इसलिए वह आपकी कुल आय में से एक निश्चित राशि को बिना किसी सवाल के कम कर देती है। इसके लिए आपको किसी भी तरह का बिल, रसीद या दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं होती है। हाल के बजट अपडेट के अनुसार, नई कर व्यवस्था में इसे बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया गया है, जो पहले 50,000 रुपये था। इसका मतलब है कि अगर आपकी सैलरी 7.75 लाख रुपये है, तो 75,000 रुपये घटने के बाद आपकी आय 7 लाख रुपये रह जाएगी और आप रिबेट के दायरे में आ जाएंगे।

विवरण नई कर व्यवस्था पुरानी कर व्यवस्था
कटौती राशि ₹75,000 ₹50,000
दस्तावेज कोई नहीं चाहिए कोई नहीं चाहिए
पात्रता वेतनभोगी और पेंशनर वेतनभोगी और पेंशनर

3. धारा 80C (निवेश से महाबचत)

पुरानी कर व्यवस्था (Old Regime) के तहत टैक्स बचाने का यह सबसे लोकप्रिय और बड़ा माध्यम है। धारा 80C के तहत आप अपनी कुल आय में से 1.5 लाख रुपये तक की कटौती का दावा कर सकते हैं। इसमें निवेश करने के कई विकल्प मौजूद हैं, जैसे कि कर्मचारी भविष्य निधि (EPF), पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF), टैक्स सेविंग फिक्स्ड डिपॉजिट, और इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS)। इसके अलावा, अगर आप अपने बच्चों की स्कूल फीस भरते हैं या होम लोन की मूल राशि (प्रिंसिपल अमाउंट) चुकाते हैं, तो वह भी इसी 1.5 लाख की सीमा में शामिल होता है। यह धारा उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो टैक्स बचाने के साथ-साथ एक सुरक्षित भविष्य के लिए पैसा जोड़ना चाहते हैं।

निवेश विकल्प लॉक-इन अवधि जोखिम स्तर
PPF 15 साल बहुत कम (सरकारी सुरक्षा)
ELSS (म्यूचुअल फंड) 3 साल मध्यम (बाजार आधारित)
Tax Saver FD 5 साल कम

4. धारा 80D (स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम)

आज के दौर में इलाज का खर्च आसमान छू रहा है, इसलिए हेल्थ इंश्योरेंस होना अनिवार्य है। अच्छी बात यह है कि आयकर विभाग आपको हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम भरने पर टैक्स में छूट देता है। धारा 80D के तहत, आप अपने, अपनी पत्नी और बच्चों के बीमा प्रीमियम के लिए 25,000 रुपये तक की छूट पा सकते हैं। अगर आप अपने माता-पिता (जो 60 साल से कम उम्र के हैं) का बीमा भी करवाते हैं, तो अतिरिक्त 25,000 रुपये की छूट मिलती है। यदि माता-पिता वरिष्ठ नागरिक (60 वर्ष से ऊपर) हैं, तो यह छूट बढ़कर 50,000 रुपये हो जाती है। इसमें 5,000 रुपये तक का प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप (Preventive Health Checkup) भी शामिल है। यह धारा आपको दोहरे लाभ देती है—पहला टैक्स बचत और दूसरा बीमारी के समय आर्थिक सुरक्षा।

सदस्य अधिकतम कटौती (60 से कम) अधिकतम कटौती (60 से ऊपर)
स्वयं + परिवार ₹25,000 ₹50,000
माता-पिता ₹25,000 ₹50,000
कुल अधिकतम लाभ ₹50,000 ₹1,00,000

5. मकान किराया भत्ता (HRA) में छूट

अगर आप नौकरी करते हैं और किराए के घर में रहते हैं, तो आपको मिलने वाला हाउस रेंट अलाउंस (HRA) पूरी तरह टैक्सेबल नहीं होता। आप धारा 10(13A) के तहत इस पर छूट पा सकते हैं। यह छूट पुरानी कर व्यवस्था का हिस्सा है और उन लोगों के लिए बहुत फायदेमंद है जो मेट्रो शहरों में भारी किराया चुकाते हैं। अगर आप अपने माता-पिता के घर में रहते हैं और वह घर उनके नाम पर है, तो आप उन्हें कानूनी रूप से किराया देकर और रेंट रसीद बनवाकर HRA क्लेम कर सकते हैं। इससे आपकी टैक्सेबल इनकम काफी कम हो जाती है। याद रखें, अगर किराया साल में 1 लाख रुपये से ज्यादा है, तो मकान मालिक का पैन कार्ड देना अनिवार्य होता है।

शर्त विवरण
किराया रसीद सबूत के तौर पर अनिवार्य है।
पैन कार्ड यदि किराया ₹1 लाख/वर्ष से अधिक हो।
रिजीम केवल पुरानी व्यवस्था में उपलब्ध।

6. होम लोन के ब्याज पर छूट (धारा 24b)

होम लोन के ब्याज पर छूट (धारा 24b)

अपना घर खरीदना हर भारतीय का सपना होता है और सरकार इस सपने को टैक्स छूट के जरिए प्रोत्साहित करती है। अगर आपने घर खरीदने या बनाने के लिए लोन लिया है, तो उस लोन पर चुकाए जाने वाले ब्याज (Interest) पर आप एक वित्तीय वर्ष में 2 लाख रुपये तक की छूट का दावा कर सकते हैं। यह छूट धारा 80C की 1.5 लाख रुपये की सीमा से बिल्कुल अलग है। यानी अगर आप पुरानी व्यवस्था चुनते हैं, तो होम लोन आपको कुल मिलाकर 3.5 लाख रुपये (1.5 लाख प्रिंसिपल + 2 लाख ब्याज) तक की टैक्स आय कम करने में मदद कर सकता है। अगर आप पति-पत्नी दोनों नौकरी करते हैं और ज्वाइंट होम लोन लेते हैं, तो दोनों अलग-अलग 2-2 लाख रुपये की छूट ले सकते हैं।

विवरण अधिकतम सीमा
ब्याज पर छूट ₹2,00,000 प्रति वर्ष
किराए पर दी गई प्रॉपर्टी असीमित ब्याज (कुछ शर्तों के साथ)
शर्त लोन घर खरीदने/बनाने के लिए हो।

7. एनपीएस में अतिरिक्त निवेश (धारा 80CCD 1B)

बहुत से लोग यह नहीं जानते कि 80C की 1.5 लाख रुपये की सीमा खत्म होने के बाद भी वे और अधिक टैक्स बचा सकते हैं। नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेश करके आप धारा 80CCD(1B) के तहत 50,000 रुपये की अतिरिक्त कटौती का लाभ उठा सकते हैं। यह राशि 1.5 लाख रुपये की सीमा के ऊपर होती है, जिससे पुरानी व्यवस्था में आपकी कुल छूट 2 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। एनपीएस एक सरकारी रिटायरमेंट योजना है जो आपको बुढ़ापे में पेंशन देने के साथ-साथ बाजार आधारित रिटर्न भी देती है। यह उन लोगों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है जो अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग को मजबूत करना चाहते हैं और साथ ही एक्स्ट्रा टैक्स भी बचाना चाहते हैं।

विवरण तथ्य
अतिरिक्त छूट ₹50,000
कुल छूट (80C के साथ) ₹2,00,000
लॉक-इन 60 वर्ष की आयु तक

8. शिक्षा ऋण पर ब्याज (धारा 80E)

शिक्षा सबसे बड़ा निवेश है, और सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि इस पर टैक्स का बोझ न पड़े। यदि आपने अपने, अपने जीवनसाथी या बच्चों की उच्च शिक्षा (ग्रेजुएशन या पोस्ट-ग्रेजुएशन) के लिए किसी बैंक या वित्तीय संस्थान से एजुकेशन लोन लिया है, तो आप उसके ब्याज पर टैक्स छूट पा सकते हैं। धारा 80E की सबसे खास बात यह है कि इसमें राशि की कोई ऊपरी सीमा (Upper Limit) नहीं है। आप जितना भी ब्याज भर रहे हैं, वह पूरा का पूरा टैक्स-फ्री हो जाएगा। यह छूट लोन चुकाना शुरू करने के साल से लेकर अगले 7 सालों तक (कुल 8 साल) मिलती है। यह प्रावधान विदेश में पढ़ाई के लिए लिए गए लोन पर भी लागू होता है।

विशेषता विवरण
अधिकतम सीमा कोई सीमा नहीं (असीमित)
लाभ की अवधि 8 वर्ष तक
किसके लिए स्वयं, जीवनसाथी, बच्चों की पढ़ाई हेतु

9. सेविंग अकाउंट के ब्याज पर छूट (धारा 80TTA और 80TTB)

अक्सर हम अपने बैंक सेविंग अकाउंट में पड़े पैसे पर मिलने वाले ब्याज को नजरअंदाज कर देते हैं,इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय इसे “अन्य स्रोतों से आय” (Income from Other Sources) में दिखाना जरूरी होता है। अच्छी खबर यह है कि धारा 80TTA के तहत, 60 वर्ष से कम उम्र के व्यक्तियों को सेविंग अकाउंट के ब्याज पर 10,000 रुपये तक की छूट मिलती है। वहीं, वरिष्ठ नागरिकों (60+) के लिए धारा 80TTB है, जिसमें यह सीमा 50,000 रुपये है और इसमें फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) का ब्याज भी शामिल होता है। यह एक छोटी  महत्वपूर्ण राहत है जो आपकी टैक्सेबल इनकम को कम करने में मदद करती है और [भारत में शून्य आयकर का भुगतान करें] की राह आसान करती है।

धारा आयु वर्ग अधिकतम छूट
80TTA 60 वर्ष से कम ₹10,000 (केवल सेविंग ब्याज)
80TTB 60 वर्ष से अधिक ₹50,000 (सेविंग + FD ब्याज)

10. एलटीए (LTA) और दान 

अगर आपकी कंपनी के सैलरी पैकेज में लीव ट्रैवल अलाउंस (LTA) शामिल है, तो आप छुट्टियों पर होने वाले यात्रा खर्च पर टैक्स बचा सकते हैं। यह छूट केवल भारत के भीतर यात्रा करने पर मिलती है और इसमें केवल ट्रेन, बस या हवाई जहाज का किराया शामिल होता है (होटल या खाने का खर्चा नहीं)। आप 4 साल के ब्लॉक में दो बार इसका दावा कर सकते हैं। इसके अलावा, धारा 80G के तहत, यदि आप किसी मान्यता प्राप्त चैरिटी संस्था या प्रधानमंत्री राहत कोष में दान देते हैं, तो उस दान की राशि पर 50% या 100% तक की छूट मिल सकती है। दान करते समय हमेशा संस्था का पैन नंबर और रसीद जरूर लें ताकि रिटर्न भरते समय कोई दिक्कत न आए।

मद विवरण
LTA 4 साल में 2 यात्राओं पर छूट
दान (80G) 50% से 100% तक कटौती
शर्त केवल नकद में ₹2000 से कम दान मान्य

निष्कर्ष

अंत में, यह स्पष्ट है कि भारत में [भारत में शून्य आयकर का भुगतान करें] एक हकीकत है जिसे हासिल करना संभव है। चाहे आप नई कर व्यवस्था चुनें या पुरानी, मुख्य बात यह है कि आप नियमों को कितनी अच्छी तरह समझते हैं। यदि आपकी आय बहुत अधिक नहीं है, तो नई व्यवस्था आपके लिए बिना किसी झंझट के जीरो टैक्स सुनिश्चित करती है। दूसरी ओर, यदि आपके पास होम लोन, बीमा और अन्य निवेश हैं, तो पुरानी व्यवस्था आपको भारी टैक्स बचाने का मौका देती है।

एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में, टैक्स फाइल करना जरूरी है,सही प्लानिंग से टैक्स देनदारी को शून्य करना आपका अधिकार है। आज ही अपने वित्त का आकलन करें, ऊपर दिए गए 10 तरीकों की सूची बनाएं और देखें कि आप कहाँ-कहाँ बचत कर सकते हैं। याद रखें, बचाया गया एक-एक रुपया आपकी कमाई ही है। समझदारी से निवेश करें और अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखें।