टैक्स गाइडवित्त

भारत में आईटीआर दाखिल करने से पहले आपको 12 दस्तावेज तैयार करने होंगे

भारत में हर साल जब टैक्स भरने का समय आता है, तो ज्यादातर लोग घबराहट में आ जाते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह होती है कि हमारे पास सही कागजात एक जगह पर नहीं होते। 2026 में आयकर विभाग की प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा सख्त और डिजिटल हो गई है। अब आप अपनी कोई भी कमाई सरकार से छिपा नहीं सकते क्योंकि विभाग के पास आपके हर लेनदेन की खबर पहले से होती है।

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ऐसे में एक सही आईटीआर फाइलिंग दस्तावेजों की चेकलिस्ट होना आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। यह न केवल आपको समय पर रिटर्न भरने में मदद करता है, बल्कि भविष्य में आने वाले किसी भी कानूनी नोटिस के खतरे को भी कम कर देता है।

टैक्स फाइल करना कोई बहुत मुश्किल काम नहीं है, बस आपको यह पता होना चाहिए कि कौन सा कागज किस काम आता है। अक्सर लोग आखिरी तारीख का इंतजार करते हैं और फिर जल्दबाजी में गलत जानकारी भर देते हैं। इससे रिफंड मिलने में देरी होती है या फिर विभाग की तरफ से जवाब मांगा जाता है। इस गाइड में हम आपको उन 12 सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों के बारे में विस्तार से बताएंगे, जो आपको अपने पास रखने चाहिए। अगर आपके ये कागजात तैयार हैं, तो आप अपना रिटर्न खुद भी बहुत आसानी से भर पाएंगे। चलिए देखते हैं कि इस साल की चेकलिस्ट में क्या-क्या शामिल है।

आईटीआर फाइलिंग के लिए 12 सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज: आईटीआर फाइलिंग दस्तावेजों की चेकलिस्ट

1. पैन कार्ड और आधार कार्ड की जानकारी

इनकम टैक्स रिटर्न भरने की प्रक्रिया में सबसे पहला और अनिवार्य कदम आपका पैन और आधार कार्ड है। भारत में बिना पैन कार्ड के आप टैक्स रिटर्न दाखिल करने की सोच भी नहीं सकते। सरकार ने अब पैन और आधार को लिंक करना अनिवार्य कर दिया है। अगर ये दोनों आपस में जुड़े हुए नहीं हैं, तो आपका पैन कार्ड काम नहीं करेगा और आप अपना रिटर्न प्रोसेस नहीं कर पाएंगे। आधार कार्ड का उपयोग ई-वेरिफिकेशन के लिए भी किया जाता है, जिससे आपको आयकर विभाग को कोई भी कागजी दस्तावेज डाक से भेजने की जरूरत नहीं पड़ती।

जब आप अपना रिटर्न ऑनलाइन भरते हैं, तो आपकी ज्यादातर जानकारी इन दो कार्डों के जरिए अपने आप पोर्टल पर आ जाती है। ध्यान रखें कि आपके आधार और पैन में नाम और जन्मतिथि एक जैसी होनी चाहिए। अगर इनमें कोई फर्क है, तो उसे तुरंत ठीक करवा लें वरना फाइलिंग के दौरान दिक्कत आ सकती है। यह आपकी पहचान का सबसे बड़ा सबूत है और पूरी प्रक्रिया इसी के इर्द-गिर्द घूमती है।

मुख्य बिंदु विवरण
दस्तावेज का नाम पैन कार्ड और आधार कार्ड
उपयोग टैक्सपेयर की पहचान और वेरिफिकेशन
अनिवार्य नियम पैन और आधार का आपस में लिंक होना
विशेष लाभ आधार ओटीपी से तुरंत ई-वेरिफिकेशन संभव

2. एम्प्लॉयर से प्राप्त फॉर्म 16

यदि आप कहीं नौकरी करते हैं, तो फॉर्म 16 आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है। यह आपकी कंपनी द्वारा दिया जाने वाला एक सर्टिफिकेट है जिसमें यह बताया जाता है कि आपको साल भर में कितनी सैलरी मिली और उस पर कितना टैक्स काटा गया। इसके दो भाग होते हैं: भाग ए और भाग बी। भाग ए में आपके टीडीएस की जानकारी होती है, जबकि भाग बी में आपकी सैलरी का पूरा हिसाब-किताब जैसे भत्ते, बोनस और कटौतियों का ब्यौरा होता है।

रिटर्न भरते समय आपको फॉर्म 16 की बारीकियों को समझना चाहिए। इसमें यह भी लिखा होता है कि आपने अपनी कंपनी को निवेश के कौन-कौन से सबूत दिए थे। अगर आपने निवेश किया थालेकिन उसकी जानकारी ऑफिस में नहीं दी, तो भी आप रिटर्न भरते समय उसका दावा कर सकते हैं। फॉर्म 16 मिलने के बाद उसे एक बार अपने बैंक स्टेटमेंट से जरूर मैच कर लें ताकि कोई गलती न रह जाए।

मुख्य बिंदु विवरण
दस्तावेज का नाम फॉर्म 16 (भाग ए और बी)
कौन जारी करता है आपकी कंपनी या नियोक्ता
जानकारी कुल वेतन और काटा गया टैक्स (TDS)
कब जरूरी है सैलरीड प्रोफेशनल्स के लिए अनिवार्य

3. वार्षिक सूचना विवरण (AIS) और TIS

आयकर विभाग ने अब एआई-आधारित सिस्टम शुरू किया है जिसे एआईएस यानी एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट कहते हैं। यह आपकी साल भर की वित्तीय गतिविधियों का एक विस्तृत कच्चा चिट्ठा है। इसमें आपके बैंक खाते में मिला ब्याज, शेयर बाजार में की गई खरीद-फरोख्त, म्यूचुअल फंड से हुई कमाई और विदेशी यात्राओं तक का विवरण होता है। टीआईएस इसी जानकारी का एक छोटा सारांश है जिसे देखकर आप तुरंत समझ सकते हैं कि आपकी कुल आय कितनी बन रही है।

फाइलिंग शुरू करने से पहले एआईएस को ध्यान से देखना आईटीआर फाइलिंग दस्तावेजों की चेकलिस्ट का एक आधुनिक और जरूरी हिस्सा बन गया है। अगर इसमें कोई जानकारी गलत दिख रही है, तो आप विभाग को तुरंत फीडबैक दे सकते हैं। यदि आप एआईएस में दिखाई गई आय को अपने रिटर्न में नहीं दिखाते हैं, तो विभाग की तरफ से नोटिस आने की संभावना बहुत बढ़ जाती है। इसलिए इसे पोर्टल से डाउनलोड करके अपने पास जरूर रखें।

मुख्य बिंदु विवरण
दस्तावेज का नाम एआईएस (AIS) और टीआईएस (TIS)
कहाँ से मिलेगा इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल से
क्या शामिल है ब्याज, शेयर ट्रेडिंग, डिविडेंड और बड़े खर्च
महत्व डेटा में पारदर्शिता और सटीकता के लिए

4. फॉर्म 26एएस (Form 26AS)

फॉर्म 26एएस को आप अपनी ‘टैक्स पासबुक’ मान सकते हैं। इसमें वह सारा विवरण होता है जो अलग-अलग संस्थाओं ने आपके पैन पर टैक्स काटकर सरकार को जमा किया है। उदाहरण के लिए, यदि बैंक ने आपकी एफडी के ब्याज पर टैक्स काटा है या आपकी कंपनी ने आपकी सैलरी से टैक्स काटा है, तो वह सब यहाँ दिखाई देगा। इसके अलावा, यदि आपने खुद भी कोई एडवांस टैक्स या सेल्फ-असेसमेंट टैक्स भरा है, तो उसकी जानकारी भी यहीं मिलेगी।

रिटर्न फाइल करने से पहले यह सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है कि आपके फॉर्म 16 और बैंक सर्टिफिकेट में जो टैक्स दिख रहा है, वह फॉर्म 26एएस से पूरी तरह मेल खाता हो। अगर कोई टैक्स यहाँ नहीं दिख रहा है, तो इसका मतलब है कि वह सरकार के पास आपके नाम पर जमा नहीं हुआ है। ऐसी स्थिति में आपको उस संबंधित बैंक या कंपनी से संपर्क करना चाहिए जिसने टैक्स काटा है।

मुख्य बिंदु विवरण
दस्तावेज का नाम फॉर्म 26एएस
उपयोग टैक्स क्रेडिट का मिलान करने के लिए
अपडेट सरकारी रिकॉर्ड में जमा आपका कुल टैक्स
डाउनलोड स्रोत टीआरएसीईएस (TRACES) या टैक्स पोर्टल

5. सभी बैंक खातों के स्टेटमेंट और ब्याज सर्टिफिकेट

सभी बैंक खातों के स्टेटमेंट और ब्याज सर्टिफिकेट

ज्यादातर लोग सोचते हैं कि केवल सैलरी पर टैक्स लगता हैलेकिन आपके बैंक खाते में जमा पैसों पर मिलने वाला ब्याज भी आपकी आय का हिस्सा है। आपको अपने उन सभी बैंक खातों के स्टेटमेंट लेने चाहिए जो साल भर एक्टिव रहे हैं। बैंकों से आप ‘इंटरेस्ट सर्टिफिकेट’ मांग सकते हैं जो यह साफ बताता है कि आपको बचत खाते और एफडी से कुल कितना ब्याज मिला है।

आयकर कानून के अनुसार, बचत खाते से मिलने वाले ₹10,000 तक के ब्याज पर छूट मिलती हैलेकिन इसके लिए आपको पहले वह आय अपने रिटर्न में दिखानी पड़ती है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा ₹50,000 है। यदि आपके पास कई बैंक खाते हैं, तो हर एक की जानकारी देना जरूरी है। कोई भी खाता छिपाना भविष्य में जांच का कारण बन सकता है।

मुख्य बिंदु विवरण
दस्तावेज का नाम बैंक स्टेटमेंट और इंटरेस्ट सर्टिफिकेट
जरूरी क्यों है ब्याज की आय पर टैक्स गणना के लिए
छूट का लाभ धारा 80टीटीए और 80टीटीबी के तहत
चेक करें सभी बचत और फिक्स्ड डिपॉजिट खाते

6. धारा 80सी और 80डी के तहत निवेश के सबूत

यदि आपने अपनी मेहनत की कमाई को टैक्स बचाने के लिए निवेश किया है, तो उनके रसीद और दस्तावेज संभाल कर रखें। धारा 80सी के तहत आप ₹1.5 लाख तक की छूट पा सकते हैं। इसमें जीवन बीमा (LIC), पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), बच्चों की स्कूल फीस, पांच साल की बैंक एफडी और ईएलएसएस म्यूचुअल फंड जैसे निवेश शामिल हैं। इन सभी के सर्टिफिकेट आपको अपनी संबंधित संस्थाओं से मिल जाएंगे।

इसी तरह, धारा 80डी के तहत अपने और अपने परिवार के लिए लिए गए स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) के प्रीमियम पर भी छूट मिलती है। अगर आपने अपने माता-पिता के स्वास्थ्य पर कोई खर्च किया है या उनके लिए बीमा लिया है, तो उसकी रसीद भी बहुत काम आती है। ये सभी कागजात आपकी टैक्सेबल इनकम को कम करने में मदद करते हैं और आपका टैक्स रिफंड बढ़ा सकते हैं।

मुख्य बिंदु विवरण
धारा 80सी और 80डी
निवेश के प्रकार एलआईसी, पीपीएफ, एनपीएस, हेल्थ इंश्योरेंस
अधिकतम सीमा 80सी के लिए ₹1.5 लाख तक
प्रमाण पेमेंट रसीद या इन्वेस्टमेंट सर्टिफिकेट

7. शेयर और म्यूचुअल फंड के कैपिटल गेन्स स्टेटमेंट

आजकल शेयर बाजार में निवेश करना बहुत आम हो गया है। अगर आपने साल के दौरान कोई शेयर या म्यूचुअल फंड यूनिट्स बेची हैं, तो उससे हुए मुनाफे पर आपको टैक्स देना होगा। इसके लिए आपको अपने स्टॉक ब्रोकर से ‘कैपिटल गेन्स रिपोर्ट’ डाउनलोड करनी होगी। इसमें दो तरह के मुनाफे होते हैं: शॉर्ट टर्म (1 साल से कम) और लॉन्ग टर्म (1 साल से ज्यादा)।

पूंजीगत लाभ (Capital Gains) की गणना थोड़ी जटिल हो सकती है, इसलिए ब्रोकर द्वारा दी गई रिपोर्ट बहुत काम आती है। इसमें न केवल मुनाफे की जानकारी होती है, बल्कि यदि आपको कोई घाटा हुआ है, तो उसे भी आप अपने रिटर्न में दिखा सकते हैं। इस घाटे को आप आने वाले सालों के मुनाफे से एडजस्ट भी कर सकते हैं, जिससे आपका भविष्य का टैक्स बोझ कम हो जाता है।

मुख्य बिंदु विवरण
दस्तावेज का नाम कैपिटल गेन्स टैक्स स्टेटमेंट
कहाँ से मिलेगा स्टॉक ब्रोकर एप या वेबसाइट से
क्या शामिल है शेयर, म्यूचुअल फंड और गोल्ड की बिक्री
लाभ घाटे को भविष्य के लिए कैरी फॉरवर्ड करना

8. होम लोन इंटरेस्ट और प्रोविजनल सर्टिफिकेट

अगर आपने अपना घर बनाने या खरीदने के लिए लोन लिया है, तो सरकार आपको टैक्स में अच्छी-खासी राहत देती है। इसके लिए आपको बैंक से ‘होम लोन इंटरेस्ट सर्टिफिकेट’ लेना होगा। इसमें दो हिस्से होते हैं: एक जो आपने मूलधन (Principal) चुकाया है और दूसरा जो आपने ब्याज (Interest) दिया है। मूलधन पर 80सी के तहत और ब्याज पर धारा 24 के तहत ₹2 लाख तक की छूट मिलती है।

यह सर्टिफिकेट बहुत जरूरी है क्योंकि इसी के आधार पर आप अपनी हाउस प्रॉपर्टी से होने वाले नुकसान या लाभ की जानकारी देते हैं। यदि आपने घर किराए पर दिया है, तो भी इस सर्टिफिकेट की मदद से आप अपनी रेंटल इनकम पर टैक्स बचा सकते हैं। अपने बैंक की नेट बैंकिंग से आप इसे आसानी से कभी भी डाउनलोड कर सकते हैं।

मुख्य बिंदु विवरण
दस्तावेज का नाम होम लोन सर्टिफिकेट
टैक्स छूट धारा 24 (ब्याज) और 80सी (मूलधन)
जरूरी जानकारी साल भर में चुकाई गई कुल ईएमआई का ब्रेकअप
फायदा टैक्स देनदारी में भारी कमी

9. रेंट एग्रीमेंट और रेंट रसीदें (HRA के लिए)

जो लोग किराए के मकान में रहते हैं और जिन्हें अपनी कंपनी से हाउस रेंट अलाउंस (HRA) मिलता है, उनके लिए रेंट रसीदें बहुत जरूरी हैं। यदि आपका सालाना किराया ₹1 लाख से ज्यादा है, तो आपको अपने मकान मालिक का पैन कार्ड नंबर भी देना पड़ता है। इसके बिना आपकी कंपनी आपको टैक्स में छूट नहीं देगी और आपका ज्यादा टैक्स कट जाएगा।

अपनी रेंट रसीदों पर मकान मालिक के हस्ताक्षर और तारीख जरूर चेक कर लें। यदि आप कैश में किराया देते हैं, तो रसीद ही आपका एकमात्र सबूत है। अगर भविष्य में टैक्स विभाग आपसे पूछताछ करता है, तो ये रसीदें और रेंट एग्रीमेंट ही आपको सही साबित करेंगे। इसलिए इन्हें कम से कम कुछ सालों तक संभाल कर रखना चाहिए।

मुख्य बिंदु विवरण
दस्तावेज का नाम रेंट रसीद और किरायानामा (Agreement)
अनिवार्य शर्त ₹1 लाख से ऊपर मकान मालिक का पैन
लाभ एचआरए पर टैक्स से आजादी
जरूरी क्यों है किराए के भुगतान का कानूनी सबूत

10. डिविडेंड इनकम का विवरण

शेयरों और म्यूचुअल फंड से मिलने वाला डिविडेंड (लाभांश) अब पूरी तरह से टैक्स के दायरे में आता है। पहले कंपनियों को इस पर टैक्स देना होता थालेकिन अब यह शेयरधारक की इनकम में जुड़ता है। आपको साल भर में कितनी कंपनियों से कितना डिविडेंड मिला, इसकी एक लिस्ट तैयार रखनी चाहिए। इसे आप अपने बैंक स्टेटमेंट की एंट्रीज से पहचान सकते हैं।

इनकम टैक्स का एआईएस (AIS) फॉर्म भी इस मामले में बहुत मददगार होता है क्योंकि उसमें डिविडेंड की हर एक एंट्री दर्ज होती है। अगर आपको मिला कुल डिविडेंड ₹5,000 से ज्यादा है, तो कंपनियों ने उस पर 10% टीडीएस भी काटा होगा। रिटर्न भरते समय इस टीडीएस का दावा करना न भूलें ताकि आपका टैक्स कम हो सके।

मुख्य बिंदु विवरण
आय का प्रकार डिविडेंड या लाभांश
टैक्सेबिलिटी आपकी कुल आय के स्लैब के अनुसार
टीडीएस ₹5,000 से ऊपर की राशि पर कटौती
चेक करने का तरीका बैंक पासबुक और एआईएस रिपोर्ट

11. विदेशी आय और संपत्ति का विवरण (Schedule FA)

यदि आप किसी ऐसी कंपनी में काम करते हैं जो आपको विदेशी शेयर (ESOPs) देती है, या आपका विदेश में कोई बैंक खाता है, तो यह पॉइंट आपके लिए बहुत गंभीर है। आयकर विभाग अब विदेशी संपत्तियों की जानकारी न देने पर बहुत भारी जुर्माना लगाता है। आपको अपने उन सभी विदेशी निवेशों और वहां से हुई कमाई की पूरी जानकारी ‘शेड्यूल एफए’ में देनी होती है।

इसमें विदेशी बैंक खातों का बैलेंस, विदेशी कंपनियों के शेयर और वहां मौजूद किसी भी प्रॉपर्टी का जिक्र करना पड़ता है। चाहे वहां से आपको कोई कमाई हुई हो या नहीं, जानकारी देना अनिवार्य है। इसके लिए आप अपने विदेशी ब्रोकर या बैंक से स्टेटमेंट मांग सकते हैं ताकि सटीक आंकड़े भरे जा सकें।

मुख्य बिंदु विवरण
विवरण का नाम शेड्यूल एफए (Schedule FA)
क्या शामिल है विदेशी शेयर, बैंक अकाउंट और प्रॉपर्टी
जोखिम जानकारी छिपाने पर कड़ा जुर्माना और जेल
जरूरी क्यों है काले धन के खिलाफ कानूनों का पालन

12. व्यावसायिक खर्चे और फ्रीलांसिंग रसीदें

यदि आप एक फ्रीलांसर, डॉक्टर, वकील या छोटे व्यापारी हैं, तो आपको अपनी कुल कमाई में से अपने व्यापारिक खर्चे घटाने का हक है। इसके लिए आपको अपने सभी प्रोफेशनल खर्चों के बिल और रसीदें संभाल कर रखनी चाहिए। इसमें आपके ऑफिस का किराया, बिजली का बिल, इंटरनेट का खर्चा, काम के सिलसिले में की गई यात्राएं और आपके स्टाफ की सैलरी शामिल हो सकती है।

यदि आप ‘प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन’ (धारा 44एडी या 44एडीए) चुनते हैं, तो आपको बहुत ज्यादा हिसाब-किताब रखने की जरूरत नहीं पड़तीलेकिन फिर भी बैंक स्टेटमेंट और मुख्य बिलों का होना जरूरी है। यह आपकी वास्तविक इनकम को सही तरीके से दिखाने में मदद करता है और आप बेवजह ज्यादा टैक्स देने से बच जाते हैं।

मुख्य बिंदु विवरण
आय का स्रोत बिजनेस या प्रोफेशनल फ्रीलांसिंग
कटौतियां व्यापार से जुड़े सभी जायज खर्चे
जरूरी दस्तावेज इनवॉइस, रसीदें और बैंक स्टेटमेंट
फायदा शुद्ध मुनाफे पर ही टैक्स देना

आईटीआर फाइलिंग दस्तावेजों की चेकलिस्ट को कैसे इस्तेमाल करें?

दस्तावेजों को इकट्ठा करना ही काफी नहीं है, उन्हें सही तरीके से व्यवस्थित करना भी जरूरी है। सबसे पहले एक चेकलिस्ट बनाएं और जैसे-जैसे कागज मिलते जाएं, उन पर टिक करते रहें। सभी दस्तावेजों को स्कैन करके एक सुरक्षित डिजिटल फोल्डर में रखें। इससे आपको ऑनलाइन फॉर्म भरते समय बार-बार अलमारी या फाइलों को पलटने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

एक महत्वपूर्ण बात यह है कि डेटा भरते समय हमेशा सबसे पहले सरकारी पोर्टल पर दिए गए एआईएस और फॉर्म 26एएस को आधार बनाएं। यदि आपके पास मौजूद कागजात और पोर्टल के डेटा में कोई अंतर है, तो पहले उसे सुलझा लें। गलत डेटा भरने से आपके रिटर्न की प्रोसेसिंग रुक सकती है।

निष्कर्ष

अंत में, आईटीआर फाइलिंग दस्तावेजों की चेकलिस्ट का पालन करना सिर्फ एक कानूनी जरूरत नहीं है, बल्कि यह आपकी मानसिक शांति के लिए भी जरूरी है। जब आपके पास सभी 12 दस्तावेज तैयार होते हैं, तो टैक्स फाइल करने का काम मात्र 15-20 मिनट का रह जाता है। 2026 के इस डिजिटल दौर में आयकर विभाग की नजर आपकी हर गतिविधि पर है, इसलिए पारदर्शिता और सटीकता ही सबसे अच्छा बचाव है।

उम्मीद है कि इस गाइड ने आपको यह समझने में मदद की होगी कि आपको किन कागजों को सहेज कर रखना है। अपनी फाइलिंग कभी भी आखिरी तारीख के लिए न छोड़ें। जैसे ही आपके पास फॉर्म 16 और बैंक स्टेटमेंट आ जाएं, अपना रिटर्न दाखिल कर दें। इससे न केवल आपको अपना टैक्स रिफंड जल्दी मिलेगा, बल्कि आप किसी भी तकनीकी दिक्कत या सर्वर जाम जैसी समस्याओं से भी बच पाएंगे।