भारतीयों के लिए 31 मार्च से पहले कर-बचत के 7 अंतिम मिनट
मार्च का महीना आते ही हम सभी की धड़कनें थोड़ी तेज हो जाती हैं। यह घबराहट गर्मी की वजह से नहीं, बल्कि “टैक्स सीजन” की वजह से होती है। क्या आप भी उन लोगों में से हैं जिन्होंने पूरे साल अपनी वित्तीय योजना और टैक्स प्लानिंग को “कल करेंगे” कहकर टाल दिया? और अब जब 31 मार्च की तारीख बिल्कुल सिर पर आ चुकी है, तो समझ नहीं आ रहा कि अपनी मेहनत की कमाई को टैक्स कटने से कैसे बचाएं? घबराइए नहीं, आप अकेले नहीं हैं। भारत में अधिकतर लोग वित्त वर्ष के आखिरी हफ्तों में ही निवेश की भागदौड़ शुरू करते हैं।
अच्छी खबर यह है कि अभी भी देर नहीं हुई है। हड़बड़ी में कोई गलत बीमा पॉलिसी या बेमतलब का निवेश करने के बजाय, थोड़ा रुककर समझदारी से फैसला लेना बहुत जरूरी है। इस विस्तृत गाइड में, हम आपके साथ वो 7 बेहतरीन अंतिम समय में टैक्स सेविंग टिप्स साझा करेंगे जो न सिर्फ आपका टैक्स बचाएंगे, बल्कि आपके पैसे को सही जगह बढ़ने का मौका भी देंगे। यह समय घबराने का नहीं, बल्कि स्मार्ट फैसले लेने का है। आइए, आखिरी समय की इस भागदौड़ को एक सुनहरे निवेश के अवसर में बदलते हैं और जानते हैं कि कैसे आप कानूनी तरीके से अपनी जेब भारी रख सकते हैं।
1. सबसे पहले चेक करें: पुरानी बनाम नई टैक्स व्यवस्था
निवेश करने के लिए दौड़ने से पहले, एक पल रुकें और यह जांचें कि क्या आपको वाकई निवेश करने की जरूरत है भी या नहीं? भारत सरकार ने अब ‘नई टैक्स व्यवस्था’ को डिफॉल्ट बना दिया है, जिसमें टैक्स की दरें काफी कम हैं, लेकिन इसमें आपको धारा 80सी या एचआरए जैसी छूट नहीं मिलती। अगर आपकी सालाना आय 7 लाख रुपये (या रिबेट के साथ थोड़ा ऊपर) तक है, तो नई व्यवस्था में आपको एक रुपये का भी टैक्स नहीं देना पड़ता। ऐसे में, सिर्फ टैक्स बचाने के लिए पैसे फंसाना समझदारी नहीं होगी।
लेकिन, अगर आपकी आय ज्यादा है और आपके पास होम लोन, इंश्योरेंस और बच्चों की फीस जैसे खर्च हैं, तो ‘पुरानी टैक्स व्यवस्था’ आपके लिए फायदे का सौदा हो सकती है। आखिरी समय में निवेश करने से पहले, एक कैलकुलेटर लेकर बैठें और दोनों व्यवस्थाओं में अपनी टैक्स देनदारी की तुलना करें। कई बार लोग बिना सोचे-समझे निवेश कर देते हैं और बाद में पता चलता है कि नई व्यवस्था में बिना निवेश किए ही उन्हें कम टैक्स देना था। इसलिए, अपनी रणनीति बनाना ही सबसे पहला और जरूरी कदम है।
| विशेषता | विवरण |
| डिफॉल्ट सेटिंग | नई टैक्स व्यवस्था (New Regime) |
| निवेश की जरूरत | पुरानी व्यवस्था में जरूरी, नई में नहीं |
| छूट की सीमा | पुरानी में ₹1.5 लाख (80सी) तक |
| निर्णय का आधार | आपकी कुल आय और कटौती |
2. धारा 80सी: टैक्स बचत का सबसे बड़ा और आसान हथियार
जब टैक्स बचाने की बात आती है, तो धारा 80सी सबसे लोकप्रिय विकल्प है, लेकिन आखिरी समय में सही साधन चुनना बहुत महत्वपूर्ण होता है। अगर आपके पास समय कम है, तो ‘ईएलएसएस’ (इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम) यानी टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड सबसे बेहतरीन विकल्प है। इसमें सिर्फ 3 साल का लॉक-इन पीरियड होता है, जो कि पीपीएफ के 15 साल के मुकाबले बहुत कम है। साथ ही, यह शेयर बाजार से जुड़ा होता है, इसलिए इसमें एफडी से बेहतर रिटर्न मिलने की उम्मीद रहती है। आप घर बैठे अपने मोबाइल से मिनटों में इसमें निवेश कर सकते हैं।
इसके अलावा, अगर आप जोखिम नहीं लेना चाहते, तो पीपीएफ (पब्लिक प्रोविडेंट फंड) या सुकन्या समृद्धि योजना (बेटियों के लिए) सबसे सुरक्षित विकल्प हैं। पीपीएफ में पैसा 15 साल के लिए लॉक होता है, लेकिन इसका ब्याज टैक्स-फ्री होता है। ध्यान दें कि बच्चों की स्कूल की ट्यूशन फीस (कॉलेज या स्कूल की रसीद) भी इसी धारा के तहत छूट के दायरे में आती है। तो निवेश करने से पहले बच्चों की फीस की रसीदें इकट्ठा कर लें, शायद आपको अलग से निवेश करने की जरूरत ही न पड़े।
| साधन का नाम | लॉक-इन अवधि | रिस्क का स्तर | फायदा |
| ईएलएसएस (ELSS) | 3 साल | मध्यम/उच्च | कम समय, ज्यादा रिटर्न |
| पीपीएफ (PPF) | 15 साल | शून्य (सुरक्षित) | टैक्स-फ्री ब्याज |
| ट्यूशन फीस | लागू नहीं | शून्य | पहले से ही किया गया खर्च |
| जीवन बीमा | पॉलिसी पर निर्भर | कम | परिवार की सुरक्षा |
3. स्वास्थ्य बीमा: खुद की सुरक्षा और टैक्स में डबल फायदा (Section 80D)
अक्सर लोग टैक्स बचाने के लिए कोई भी बेमतलब की पॉलिसी खरीद लेते हैं, लेकिन एक अच्छा ‘हेल्थ इंश्योरेंस’ (स्वास्थ्य बीमा) नहीं लेते, जो आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। धारा 80डी आपको हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर टैक्स बचाने का शानदार मौका देती है। यह धारा 80सी की 1.5 लाख रुपये की सीमा से बिल्कुल अलग है। आप अपने, पत्नी और बच्चों के लिए 25,000 रुपये तक का प्रीमियम क्लेम कर सकते हैं।
अगर आप अपने माता-पिता (जो 60 साल से ऊपर हैं) के लिए प्रीमियम भरते हैं, तो आपको 50,000 रुपये की अतिरिक्त छूट मिलती है। यानी कुल मिलाकर आप 75,000 रुपये तक की आय पर टैक्स बचा सकते हैं। इसके अलावा, एक छिपा हुआ फायदा यह है कि आप ‘प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप’ (Preventive Health Checkup) के लिए 5,000 रुपये तक का क्लेम कर सकते हैं, भले ही आपने उसका भुगतान नकद में किया हो। यह अंतिम समय में टैक्स सेविंग टिप्स में सबसे उपयोगी है क्योंकि यह आपके पूरे परिवार को सुरक्षित करता है।
| किसे मिलेगा लाभ | अधिकतम छूट सीमा |
| स्वयं और परिवार (60 से कम) | ₹25,000 |
| स्वयं और परिवार (60 से ऊपर) | ₹50,000 |
| माता-पिता (60 से ऊपर) | ₹50,000 (अतिरिक्त) |
| हेल्थ चेकअप | ₹5,000 (सीमा के भीतर) |
4. एनपीएस (NPS): अतिरिक्त ₹50,000 बचाने का मौका

क्या आपकी धारा 80सी की 1.5 लाख रुपये की सीमा पूरी हो चुकी है? और क्या आप अभी भी टैक्स बचाना चाहते हैं? तो ‘नेशनल पेंशन सिस्टम’ (NPS) आपके लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। धारा 80सीसीडी(1बी) के तहत, आप एनपीएस में 50,000 रुपये का अलग से निवेश करके अतिरिक्त टैक्स छूट पा सकते हैं। यह उन लोगों के लिए बहुत फायदेमंद है जो उच्च टैक्स स्लैब (जैसे 30%) में आते हैं, क्योंकि वे सीधे तौर पर लगभग 15,000 रुपये का टैक्स बचा सकते हैं।
एनपीएस एक सरकारी योजना है जो आपके रिटायरमेंट के लिए पैसा जमा करती है। इसमें इक्विटी और डेट का मिश्रण होता है, जिससे लंबे समय में अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना रहती है। हालांकि, ध्यान रखें कि यह पैसा आपके 60 साल का होने तक लॉक रहता है, इसलिए इसे सिर्फ टैक्स बचाने के लिए नहीं, बल्कि बुढ़ापे की सुरक्षा के लिए निवेश करें। आप ऑनलाइन ई-एनपीएस पोर्टल के जरिए आधार कार्ड का उपयोग करके तुरंत खाता खोल सकते हैं और निवेश कर सकते हैं।
| विशेषता | विवरण |
| संबंधित धारा | धारा 80सीसीडी (1बी) |
| अतिरिक्त सीमा | ₹50,000 (80सी के ऊपर) |
| परिपक्वता (Maturity) | 60 वर्ष की आयु पर |
| निवेश का प्रकार | इक्विटी और डेट (बाजार आधारित) |
5. होम लोन और एजुकेशन लोन: कर्ज का सही इस्तेमाल करें
मार्च के महीने में अपने लोन स्टेटमेंट को चेक करना न भूलें, क्योंकि आपका कर्ज भी आपको टैक्स बचाने में मदद कर सकता है। अगर आपने होम लोन लिया है, तो धारा 24(बी) के तहत आप ब्याज (Interest) के भुगतान पर 2 लाख रुपये तक की छूट पा सकते हैं। यह छूट 80सी के मूलधन (Principal) भुगतान से अलग होती है। अगर आपने अपना घर किराए पर दिया है, तो ब्याज पर क्लेम करने की कोई ऊपरी सीमा नहीं होती।
इसके अलावा, अगर आपने अपनी, अपने बच्चों की या जीवनसाथी की उच्च शिक्षा के लिए ‘एजुकेशन लोन’ लिया है, तो धारा 80ई आपके लिए वरदान है। इस लोन के ब्याज भुगतान पर कोई ऊपरी सीमा नहीं है। आप जितना भी ब्याज भरेंगे, वह पूरा का पूरा टैक्स-फ्री हो जाएगा। यह छूट लोन चुकाने की शुरुआत से 8 साल तक मिलती है। तो, बैंक से अपना ब्याज प्रमाण पत्र (Interest Certificate) तुरंत डाउनलोड करें और सीए को भेजें।
| लोन का प्रकार | धारा | अधिकतम छूट | शर्तें |
| होम लोन (ब्याज) | 24(बी) | ₹2 लाख | घर खुद के रहने के लिए हो |
| होम लोन (मूलधन) | 80सी | ₹1.5 लाख में शामिल | – |
| एजुकेशन लोन | 80ई | कोई सीमा नहीं | केवल ब्याज पर छूट |
6. माता-पिता को किराया देना (HRA Claim): घर के अंदर ही टैक्स बचत
यह एक ऐसा स्मार्ट तरीका है जिसे बहुत से वेतनभोगी (Salaried) लोग नजरअंदाज कर देते हैं। अगर आप अपने माता-पिता के साथ उनके घर में रहते हैं और आपको कंपनी से एचआरए (HRA) मिलता है, तो आप उन्हें किराया देकर टैक्स छूट क्लेम कर सकते हैं। यह पूरी तरह कानूनी है। इसके लिए आपको अपने माता-पिता के साथ एक रेंट एग्रीमेंट बनवाना होगा और हर महीने उनके बैंक खाते में किराया ट्रांसफर करना होगा।
हालांकि, इस विकल्प का इस्तेमाल करते समय कुछ सावधानियां बरतना बहुत जरूरी है। कभी भी किराया नकद में न दें, हमेशा बैंक ट्रांसफर का सबूत रखें। साथ ही, यह किराया आपके माता-पिता की आय माना जाएगा, इसलिए अगर उनकी आय टैक्सेबल सीमा से ऊपर जाती है, तो उन्हें उस पर टैक्स देना होगा। यह तरीका पूरे परिवार की टैक्स देनदारी को कम करने में बहुत कारगर साबित होता है, खासकर तब जब माता-पिता की आय कम हो।
| जरूरी दस्तावेज | प्रक्रिया |
| रेंट एग्रीमेंट | अनिवार्य है |
| रेंट रसीद | हर महीने की रसीद रखें |
| भुगतान का तरीका | केवल बैंक ट्रांसफर |
| पैन कार्ड | मकान मालिक (माता-पिता) का पैन |
7. बचत खाते और डोनेशन से छोटी मगर जरूरी बचत
अक्सर हम बड़े निवेशों के चक्कर में छोटी बचतों को भूल जाते हैं, लेकिन ये मिलकर बड़ा फायदा दे सकती हैं। अपने बैंक स्टेटमेंट को ध्यान से देखें। धारा 80टीटीए के तहत, आपके सेविंग्स बैंक अकाउंट (बचत खाते) से मिलने वाले ब्याज पर 10,000 रुपये तक कोई टैक्स नहीं लगता। अगर आप वरिष्ठ नागरिक (Senior Citizen) हैं, तो धारा 80टीटीबी के तहत यह सीमा 50,000 रुपये है, जिसमें एफडी का ब्याज भी शामिल होता है।
इसके अलावा, अगर आपने साल भर में किसी मान्यता प्राप्त चैरिटेबल ट्रस्ट या रिलीफ फंड में दान (Donation) दिया है, तो धारा 80जी के तहत आप उस पर 50% या 100% टैक्स छूट पा सकते हैं। बस ध्यान रहे कि आपके पास दान की रसीद हो और उसमें संस्था का पैन नंबर जरूर लिखा हो। 2,000 रुपये से ज्यादा का नकद दान मान्य नहीं होता, इसलिए हमेशा डिजिटल माध्यम से ही दान करें। ये छोटी-छोटी चीजें अंत में आपकी टैक्स देनदारी को काफी कम कर सकती हैं।
| धारा | विवरण | छूट की सीमा |
| 80TTA | बचत खाते का ब्याज | ₹10,000 तक |
| 80TTB | ब्याज (वरिष्ठ नागरिक) | ₹50,000 तक |
| 80G | दान (Donation) | 50% या 100% |
निष्कर्ष
टैक्स बचाना हर नागरिक का अधिकार है और समझदारी भी, लेकिन इसे एक मजबूरी के बजाय अपनी वित्तीय योजना का हिस्सा बनाना चाहिए। 31 मार्च की दौड़ में शामिल होने से बेहतर है कि आप अप्रैल से ही थोड़ी-थोड़ी योजना बनाना शुरू कर दें। लेकिन अगर आप अभी भी लेट हैं, तो ऊपर बताए गए अंतिम समय में टैक्स सेविंग टिप्स आपके लिए किसी जीवनरक्षक से कम नहीं हैं।
अपनी जरूरत, नकदी की उपलब्धता और जोखिम क्षमता को समझें और आज ही निवेश करें। याद रखें, बचाया गया एक रुपया, कमाए गए एक रुपये के बराबर है। क्या आप तैयार हैं अपना टैक्स बचाने के लिए? अपने दस्तावेजों को इकट्ठा करें और डेडलाइन खत्म होने से पहले सही कदम उठाएं!
