आम बजट 2026: क्या हुआ सस्ता, क्या हुआ महंगा
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पेश किया गया केंद्रीय बजट भारतीय अर्थव्यवस्था के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में अपना लगातार नौवां बजट पेश करते हुए ‘विकसित भारत’ की नींव को और मजबूत करने का खाका खींचा है। इस बार का बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह देश के मध्यम वर्ग, किसानों, महिलाओं और युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने का एक ठोस दस्तावेज है।
रविवार के दिन बजट पेश होना अपने आप में ऐतिहासिक था, और पूरा देश यह जानने के लिए उत्सुक था कि सरकार महंगाई को काबू करने और रोजगार बढ़ाने के लिए क्या कदम उठा रही है। इस बजट में बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ डिजिटल क्रांति और हरित ऊर्जा पर विशेष जोर दिया गया है, जिसका सीधा असर आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक प्रगति पर दिखाई देगा।
यूनियन बजट 2026 की मुख्य विशेषताएं और ‘विकसित भारत’ का संकल्प
इस वर्ष के बजट का मुख्य उद्देश्य भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि उनका ध्यान केवल योजनाओं की घोषणा करने पर नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर है। वित्त मंत्री ने अपने भाषण में उत्पादकता बढ़ाने और अर्थव्यवस्था को किसी भी वैश्विक संकट से निपटने के लिए लचीला बनाने पर जोर दिया। इसके लिए कृषि, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में बड़े सुधारों की घोषणा की गई है। सरकार ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे। इसके अलावा, तकनीकी विकास और अनुसंधान के लिए एक बड़े कोष की स्थापना की गई है, जो भारत को नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक नेता बनाने में मदद करेगा।
| प्राथमिकता का क्षेत्र | उद्देश्य और विवरण |
| आर्थिक विकास | सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की दर को 8% से ऊपर बनाए रखना और बुनियादी ढांचे का विस्तार करना। |
| युवा शक्ति | कौशल विकास और इंटर्नशिप के माध्यम से अगले 5 वर्षों में करोड़ों रोजगार के अवसर पैदा करना। |
| अन्नदाता कल्याण | किसानों की आय बढ़ाने के लिए डिजिटल कृषि और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना। |
बजट 2026 में क्या हुआ सस्ता? (आम आदमी को बड़ी राहत)
आम जनता के लिए बजट का सबसे आकर्षक हिस्सा यह जानना होता है कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाली कौन सी चीजें सस्ती हुई हैं। सरकार ने सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) में कटौती करके कई महत्वपूर्ण वस्तुओं के दाम कम किए हैं। इसका सीधा लाभ उपभोक्ताओं को मिलेगा और उनकी बचत में इजाफा होगा।
1. मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स
वित्त मंत्री ने मोबाइल फोन विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए मोबाइल के कलपुर्जों, जैसे कि कैमरा लेंस, बैटरी कवर और पीसीबीए (प्रिंटेड सर्किट बोर्ड असेंबली) पर आयात शुल्क को 15% से घटाकर 10% कर दिया है। आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन हर व्यक्ति की जरूरत बन गया है। इस कटौती से न केवल विदेशी मोबाइल कंपनियों के फोन सस्ते होंगे, बल्कि भारत में बनने वाले स्मार्टफोन की लागत भी कम होगी। इससे कंपनियों पर दाम कम करने का दबाव बनेगा और ग्राहकों को कम कीमत पर बेहतर फीचर्स वाले फोन मिल सकेंगे। यह कदम भारत को मोबाइल निर्यात का हब बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।
| वस्तु का नाम | पुराना आयात शुल्क | नया आयात शुल्क | अनुमानित कीमत में कमी |
| मोबाइल कैमरा लेंस | 15% | 10% | ₹500 – ₹1,500 |
| बैटरी कवर/चार्जर | 20% | 15% | ₹200 – ₹400 |
| ओपन सेल (टीवी पैनल) | 5% | 2.5% | ₹1,000 – ₹3,000 |
2. इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) और बैटरियां
प्रदूषण को कम करने और हरित ऊर्जा को अपनाने के लिए सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण खनिजों, जैसे लिथियम, कोबाल्ट और निकल पर सीमा शुल्क को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। इलेक्ट्रिक गाड़ियों की कुल लागत का एक बड़ा हिस्सा उनकी बैटरी का होता है। कच्चे माल पर टैक्स हटने से बैटरी की निर्माण लागत में भारी कमी आएगी। इसका सीधा असर इलेक्ट्रिक स्कूटर, बाइक और कारों की शोरूम कीमत पर पड़ेगा। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक भारतीय सड़कों पर चलने वाले वाहनों में एक बड़ा हिस्सा इलेक्ट्रिक वाहनों का हो, और यह कदम उसी दिशा में एक बड़ी छलांग है।
| घटक (कम्पोनेंट) | बजटीय घोषणा | उपभोक्ता पर प्रभाव |
| लिथियम-आयन बैटरी | कच्चे माल पर सीमा शुल्क शून्य | बैटरी पैक 10-15% सस्ते होंगे |
| चार्जिंग स्टेशन उपकरण | आयात शुल्क में भारी कटौती | चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार होगा |
| इलेक्ट्रिक कारें | विनिर्माण लागत में कमी | गाड़ियों की कीमत ₹50,000 तक कम संभव |
3. जीवन रक्षक दवाएं और चिकित्सा उपकरण
स्वास्थ्य सेवा को किफायती बनाने के लिए सरकार ने कैंसर, किडनी और दुर्लभ बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली तीन विशेष दवाओं को सीमा शुल्क से मुक्त कर दिया है। इसके अलावा, एक्स-रे मशीन और अन्य डायग्नोस्टिक उपकरणों के निर्माण में लगने वाले पुर्जों पर भी टैक्स कम किया गया है। भारत में इलाज का खर्च कई परिवारों के लिए एक बड़ा बोझ होता है। इन दवाओं और उपकरणों के सस्ते होने से मरीजों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी। विशेष रूप से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज का खर्च लाखों में होता है, और टैक्स में छूट मिलने से इन दवाओं की कीमतों में हजारों रुपये की कमी आ सकती है।
| चिकित्सा उत्पाद | छूट का विवरण | लाभ |
| कैंसर की दवाएं | पूर्ण सीमा शुल्क छूट | उपचार लागत में 20-25% की कमी |
| डायग्नोस्टिक उपकरण | पुर्जों पर आयात शुल्क घटा | जांच और टेस्ट सस्ते होंगे |
| कृत्रिम अंग | निर्माण सामग्री पर कर कम | दिव्यांगजनों के लिए सहायक उपकरण सस्ते |
4. सौर ऊर्जा उपकरण (सोलर पैनल)
सरकार ने प्रधानमंत्री सूर्योदय योजना को और गति देने के लिए सोलर पैनल, इनवर्टर और ग्लास पर लगने वाले करों में कटौती की है। सौर ऊर्जा न केवल पर्यावरण के लिए अच्छी है, बल्कि यह हर महीने आने वाले बिजली के बिल को भी शून्य कर सकती है। इस छूट का उद्देश्य मध्यम वर्ग के परिवारों को अपनी छतों पर सोलर पैनल लगवाने के लिए प्रोत्साहित करना है। तांबे और एल्यूमीनियम के तारों पर भी शुल्क कम किया गया है, जो सोलर इंस्टॉलेशन में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होते हैं। इससे अब घर पर सोलर सिस्टम लगवाना पहले की तुलना में काफी सस्ता और आसान हो जाएगा।
| उपकरण | पुरानी कर दर | नई कर दर | संभावित बचत |
| सोलर ग्लास | 10% | शून्य | पैनल की लागत में कमी |
| तांबे के तार | 7.5% | 5% | इंस्टॉलेशन खर्च घटेगा |
| सोलर इनवर्टर | 20% | 15% | पूरा सिस्टम सस्ता होगा |
बजट 2026 में क्या हुआ महंगा? (जेब पर बढ़ता बोझ)
जहाँ सरकार ने कई चीजों पर राहत दी है, वहीं कुछ वस्तुओं पर कर बढ़ाकर उन्हें महंगा भी किया है। इसके पीछे सरकार का तर्क घरेलू उद्योगों को सुरक्षा देना और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक आदतों को हतोत्साहित करना है।
1. सिगरेट और तंबाकू उत्पाद
हर साल की तरह, इस बार भी सरकार ने सिगरेट, बीड़ी और अन्य तंबाकू उत्पादों पर ‘राष्ट्रीय आपदा आकस्मिकता शुल्क’ (एनसीसीडी) में 16% की वृद्धि की है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पादों का सेवन कम से कम किया जाए। इस बढ़ोतरी के बाद सिगरेट के पैकेट और तंबाकू के पाउच की कीमतों में सीधी वृद्धि होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इन उत्पादों पर कर बढ़ाने से न केवल राजस्व में वृद्धि होती है, बल्कि युवा पीढ़ी को इन नशों से दूर रखने में भी मदद मिलती है। हालांकि, इसका असर नियमित धूम्रपान करने वालों की जेब पर काफी भारी पड़ेगा।
| उत्पाद | कर वृद्धि | कीमत पर असर |
| सिगरेट | 16% एनसीसीडी वृद्धि | प्रति स्टिक ₹1 – ₹2 महंगी |
| तंबाकू पाउच | उत्पाद शुल्क बढ़ा | 10-15% की मूल्य वृद्धि |
| हुक्का बार सामग्री | आयात शुल्क में वृद्धि | उपभोग महंगा होगा |
2. आयातित आभूषण (सोना और चांदी)

सरकार ने विदेशों से बनकर आने वाले सोने और चांदी के आभूषणों पर सीमा शुल्क को 20% से बढ़ाकर 25% कर दिया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय सुनारों और भारतीय आभूषण उद्योग को बढ़ावा देना है। जब विदेशी गहने महंगे होंगे, तो लोग भारतीय कारीगरों द्वारा बनाए गए गहने खरीदना पसंद करेंगे। हालांकि, कच्चे सोने (गोल्ड बार) पर शुल्क में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, इसलिए स्थानीय स्तर पर बनने वाले गहनों की कीमतों में बहुत अधिक उछाल नहीं आएगा, लेकिन अगर आप किसी अंतरराष्ट्रीय ब्रांड का गहना खरीदने की सोच रहे हैं, तो आपको अब ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे।
| आइटम | शुल्क में बदलाव | प्रभाव |
| आयातित सोने के गहने | 25% (बढ़ा) | विदेशी ब्रांड महंगे होंगे |
| कच्चा सोना (बार) | यथावत (कोई बदलाव नहीं) | घरेलू भाव स्थिर रहेंगे |
| सिंथेटिक हीरे | आयात शुल्क में वृद्धि | स्थानीय हीरा उद्योग को लाभ |
3. प्लास्टिक का सामान और खिलौने
पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने सिंगल-यूज़ प्लास्टिक और विनाइल से बने उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ा दिया है। इसमें विदेशों से आने वाले प्लास्टिक के सस्ते खिलौने, सजावटी सामान और किचन में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक के बर्तन शामिल हैं। सरकार चाहती है कि भारत में पर्यावरण के अनुकूल और सुरक्षित खिलौनों का निर्माण हो। इस कदम से चीन जैसे देशों से आने वाले सस्ते और खराब गुणवत्ता वाले प्लास्टिक के सामानों की आवक कम होगी और भारतीय खिलौना निर्माताओं को बाजार में अपने पैर जमाने का बेहतर मौका मिलेगा।
| उत्पाद श्रेणी | कार्रवाई | परिणाम |
| प्लास्टिक खिलौने | आयात शुल्क 60% से 70% | विदेशी खिलौने महंगे |
| विनाइल फ्लोरिंग | शुल्क में वृद्धि | भारतीय विकल्पों को बढ़ावा |
| सजावटी सामान | टैक्स बढ़ा | स्थानीय हस्तशिल्प को लाभ |
आयकर घोषणाएं: नई कर व्यवस्था और मध्यम वर्ग को राहत
यूनियन बजट 2026 में वेतनभोगी वर्ग के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी आयकर के मोर्चे पर मिली है। वित्त मंत्री ने नई कर व्यवस्था (न्यू टैक्स रिजीम) को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए कर स्लैब में व्यापक बदलाव किए हैं।
नई कर व्यवस्था और मानक कटौती (स्टैंडर्ड डिडक्शन)
सबसे महत्वपूर्ण घोषणा मानक कटौती को लेकर है। वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए मानक कटौती की सीमा को 75,000 रुपये से बढ़ाकर सीधे 1,00,000 रुपये कर दिया गया है। इसका मतलब है कि आपकी कुल आय में से 1 लाख रुपये सीधे घटा दिए जाएंगे, जिस पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। इसके अलावा, पारिवारिक पेंशन वालों के लिए भी कटौती की सीमा बढ़ाई गई है। सरकार का यह कदम बढ़ती महंगाई को देखते हुए मध्यम वर्ग के लिए एक संजीवनी समान है, जिससे उनके हाथ में खर्च करने और निवेश करने के लिए अधिक पैसा बचेगा।
| घटक | पुरानी सीमा | नई सीमा | लाभ |
| मानक कटौती | ₹75,000 | ₹1,00,000 | ₹25,000 अतिरिक्त आय कर-मुक्त |
| पारिवारिक पेंशन छूट | ₹15,000 | ₹25,000 | पेंशनभोगियों को राहत |
| धारा 80सी (प्रस्तावित) | कोई बदलाव नहीं | कोई बदलाव नहीं | पुरानी व्यवस्था में ही मान्य |
संशोधित टैक्स स्लैब (वित्त वर्ष 2026-27)
नई कर व्यवस्था के तहत कर की दरों को तर्कसंगत बनाया गया है ताकि कम आय वालों पर बोझ कम हो। अब 4 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। इसके अलावा, धारा 87ए के तहत मिलने वाली छूट (रिबेट) को भी समायोजित किया गया है, जिससे एक निश्चित सीमा तक आय पूरी तरह टैक्स फ्री हो जाती है। यदि कोई व्यक्ति अपनी बचत और निवेश का सही प्रबंधन करता है, तो नई व्यवस्था के तहत 10 से 12 लाख रुपये तक की आय पर उसे बहुत ही मामूली या शून्य टैक्स देना पड़ सकता है।
| वार्षिक आय सीमा | कर की दर (नई व्यवस्था) | टिप्पणी |
| ₹0 से ₹4,00,000 | शून्य (NIL) | कोई टैक्स नहीं |
| ₹4,00,001 से ₹8,00,000 | 5% | बहुत कम टैक्स |
| ₹8,00,001 से ₹12,00,000 | 10% | मध्यम वर्ग को राहत |
| ₹12,00,001 से ₹16,00,000 | 15% | पहले 20% था |
| ₹16,00,001 से ₹20,00,000 | 20% | – |
| ₹20,00,000 से ऊपर | 30% | उच्च आय वर्ग |
विभिन्न क्षेत्रों पर बजट का प्रभाव (सेक्टर एनालिसिस)
बजट का असर केवल टैक्स और कीमतों तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह देश के बड़े उद्योगों की दिशा भी तय करता है। इस बजट में रेलवे, रियल एस्टेट और एमएसएमई सेक्टर के लिए खजाना खोल दिया गया है।
1. रेलवे और बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर)
भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण के लिए इस बार रिकॉर्ड बजट आवंटित किया गया है। सरकार ने 500 नई वंदे भारत ट्रेनें चलाने और 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की घोषणा की है। यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ‘कवच’ सुरक्षा प्रणाली को पूरे रेल नेटवर्क पर लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, पुराने रेलवे स्टेशनों को विश्वस्तरीय बनाने के लिए ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत बजट बढ़ाया गया है। इससे न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि निर्माण क्षेत्र में भी रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे।
| परियोजना | आवंटन/लक्ष्य | लाभ |
| वंदे भारत ट्रेनें | 500 नई रैक | तेज और आरामदायक यात्रा |
| कवच सुरक्षा प्रणाली | 20,000 किमी कवरेज | दुर्घटनाओं में कमी |
| नए एयरपोर्ट | 25 नए हवाई अड्डे | क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ेगी |
2. रियल एस्टेट और आवास
“सभी के लिए आवास” के सपने को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत अगले 5 वर्षों में 3 करोड़ नए घर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। मध्यम वर्ग के लिए एक नई योजना की घोषणा की गई है जो उन्हें अपना पहला घर खरीदने या बनाने में मदद करेगी। इसके अलावा, किराये के मकानों की समस्या को सुलझाने के लिए एक नई रेंटल हाउसिंग पॉलिसी लाने की बात कही गई है। इससे बड़े शहरों में काम करने वाले युवाओं और प्रवासी मजदूरों को सस्ते और सुरक्षित मकान मिल सकेंगे। सीमेंट और स्टील कंपनियों के लिए यह बजट बहुत सकारात्मक है क्योंकि निर्माण कार्यों में तेजी आएगी।
| योजना | विवरण | प्रभाव |
| पीएम आवास योजना | बजट में 66% की वृद्धि | किफायती घरों का निर्माण तेज |
| होम लोन सब्सिडी | ब्याज पर छूट की योजना | घर खरीदना आसान होगा |
| रेंटल हाउसिंग | नई नीति का प्रस्ताव | छात्रों और कामगारों को राहत |
3. एमएसएमई और स्टार्टअप्स
छोटे और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इस बजट में उन्हें बिना किसी गारंटी के मिलने वाले मुद्रा लोन की सीमा को 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 30 लाख रुपये कर दिया गया है। इसके साथ ही, स्टार्टअप्स के लिए टैक्स हॉलिडे (कर अवकाश) को एक और साल के लिए बढ़ा दिया गया है। सरकार ने एक विशेष ‘टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन फंड’ की भी घोषणा की है, जो छोटे उद्योगों को आधुनिक मशीनें खरीदने में मदद करेगा। इससे छोटे व्यापारियों को अपने बिजनेस को बढ़ाने और नए लोगों को नौकरी देने में आसानी होगी।
| पहल | विवरण | लाभ |
| मुद्रा लोन सीमा | ₹30 लाख तक बढ़ी | व्यापार विस्तार में आसानी |
| क्रेडिट गारंटी स्कीम | कोष में वृद्धि | बैंकों से आसानी से कर्ज मिलेगा |
| स्टार्टअप टैक्स छूट | 1 वर्ष का विस्तार | नए उद्यमियों को प्रोत्साहन |
यूनियन बजट 2026 का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि सरकार ने लोकलुभावन वादों के बजाय वित्तीय अनुशासन और दीर्घकालिक विकास को प्राथमिकता दी है। मोबाइल, ईवी और दवाओं के सस्ते होने से आम जनता को तत्काल राहत मिली है, जबकि इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश आने वाले समय में रोजगार के नए द्वार खोलेगा। नई कर व्यवस्था में सुधार और मानक कटौती में बढ़ोतरी से वेतनभोगी वर्ग के हाथ में अधिक पैसा बचेगा, जिससे बाजार में मांग बढ़ेगी। हालांकि, सिगरेट और कुछ विलासिता की वस्तुओं के दाम बढ़ना तय था। कुल मिलाकर, यह बजट एक संतुलित और प्रगतिशील दस्तावेज है जो भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।
