हिंदी दिवस 2025: हिंदी भाषा के बारे में 10 तथ्य जो आप नहीं जानते होंगे
हिंदी दिवस हर साल 14 सितंबर को भारत में मनाया जाता है। यह सिर्फ एक तारीख नहीं है, बल्कि भारत की भाषाई विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि को उजागर करता है, साथ ही हिंदी के महत्व पर जोर देता है। इस मौके पर, हम कुछ दिलचस्प तथ्य साझा कर रहे हैं जो हिंदी के बारे में आपकी जानकारी बढ़ाएंगे। ये तथ्य विश्वसनीय स्रोतों जैसे एथनोलॉग, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) और ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स पर आधारित हैं, जिन्हें हमने सत्यापित किया है।
दुनिया की तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा
एथनोलॉग की 2024 रिपोर्ट के अनुसार, हिंदी दुनिया की तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है, जो अंग्रेजी और मंदारिन के ठीक बाद आती है। इसमें लगभग 61.5 करोड़ से ज्यादा वक्ता शामिल हैं, जिनमें मूल वक्ता और द्वितीय भाषा के रूप में बोलने वाले दोनों हैं। यह आंकड़ा सिल सॉफ्टवेयर की भाषा डेटा पर आधारित है, जो वैश्विक भाषाओं का विस्तृत विश्लेषण प्रदान करता है। हिंदी की यह लोकप्रियता भारत के बाहर भी फैली हुई है, जहां यह प्रवासी समुदायों में मजबूत बनी हुई है।
61.5 करोड़ से ज्यादा वक्ता
हिंदी के कुल वक्ताओं की संख्या 61.5 करोड़ से अधिक है, जैसा कि एथनोलॉग 2024 में दर्ज है। इसमें भारत के उत्तरी और मध्य क्षेत्रों के अलावा, नेपाल, फिजी और मॉरीशस जैसे देशों के लोग शामिल हैं। विश्व बैंक और यूएन की रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिंदी की यह पहुंच डिजिटल मीडिया और बॉलीवुड के जरिए और बढ़ रही है, जो इसे वैश्विक स्तर पर मजबूत बना रही है।
भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाई गई
भारत सरकार ने 14 सितंबर 1949 को हिंदी को देवनागरी लिपि में आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाया। यह फैसला संविधान सभा ने लिया था, जैसा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 343 में उल्लेखित है। इस दिन को हिंदी दिवस के रूप में मनाने का उद्देश्य भाषा को बढ़ावा देना और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना है, जैसा कि केंद्रीय हिंदी निदेशालय की रिपोर्ट्स में बताया गया है।
अटल बिहारी वाजपेयी का संयुक्त राष्ट्र में हिंदी भाषण
1977 में, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में भाषण देकर भाषा को सम्मान दिया। यह पहली बार था जब हिंदी का इस्तेमाल यूएन में हुआ, जैसा कि यूएन की आधिकारिक रिकॉर्ड्स में दर्ज है। इस घटना ने हिंदी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई और भारत की सांस्कृतिक विविधता को दुनिया के सामने रखा।
‘हिंदी’ शब्द की उत्पत्ति
‘हिंदी’ शब्द फारसी शब्द ‘हिंद’ से आया है, जो सिंधु नदी की भूमि को दर्शाता है। यह जानकारी ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी और भाषाई इतिहासकारों जैसे जॉन टी. प्लैट्स की रचनाओं से आती है। मध्यकालीन फारसी ग्रंथों में इस शब्द का इस्तेमाल भारत को संदर्भित करने के लिए किया जाता था, जो बाद में भाषा के नाम के रूप में विकसित हुआ।
इन देशों में व्यापक रूप से बोली जाती है
हिंदी नेपाल, फिजी, गुयाना, मॉरीशस, सूरीनाम और त्रिनिदाद एवं टोबैगो जैसे देशों में व्यापक रूप से बोली जाती है। यूएन की प्रवासी रिपोर्ट्स के अनुसार, ये देश भारतीय डायस्पोरा के कारण हिंदी को बनाए रखे हुए हैं, जहां यह शिक्षा और मीडिया में इस्तेमाल होती है। उदाहरण के लिए, फिजी में हिंदी आधिकारिक भाषाओं में से एक है, और मॉरीशस में यह स्कूलों में पढ़ाई जाती है।
दुनिया भर के 176 विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाती है
भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के अनुसार, हिंदी को दुनिया भर के 176 विश्वविद्यालयों में एक विषय के रूप में पढ़ाया जाता है। इसमें अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे देशों के संस्थान शामिल हैं, जहां हिंदी को भाषा और साहित्य कोर्स के रूप में ऑफर किया जाता है। आईसीसीआर की 2023 रिपोर्ट यह दर्शाती है कि यह संख्या बढ़ रही है, जो हिंदी की वैश्विक अपील को दिखाती है।
पहले हिंदी किताबों का प्रकाशन
हिंदी की पहली किताबें 1795 में प्रकाशित मानी जाती हैं, जिनमें हीरा लाल की ‘ऐन-ए-अकबरी की भाषा वाचनिका’ और रेवा महाराजा की कबीर पर रचना शामिल हैं। यह जानकारी भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार और भाषाई इतिहास की किताबों से ली गई है। ये प्रकाशन हिंदी साहित्य के शुरुआती चरण को दर्शाते हैं, जो बाद में आधुनिक हिंदी के विकास में योगदान दिए।
पहली हिंदी बोलने वाली फिल्म
‘आलम आरा’ को पहली हिंदी बोलने वाली फिल्म माना जाता है, जो 14 मार्च 1931 को रिलीज हुई थी। भारतीय फिल्म इतिहास की रिकॉर्ड्स, जैसे बॉम्बे टॉकीज के अभिलेखों के अनुसार, यह फिल्म अर्देशिर ईरानी द्वारा निर्देशित थी और इसमें गाने व संवाद हिंदी में थे। इसने भारतीय सिनेमा को साइलेंट से टॉकी युग में ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अमीर खुसरो: पहला हिंदी कवि
प्रसिद्ध कवि अमीर खुसरो को हिंदी में पहली कविता लिखने और प्रकाशित करने वाला माना जाता है। 13वीं-14वीं शताब्दी के इस सूफी कवि ने हिंदवी (हिंदी-उर्दू का पूर्व रूप) में रचनाएं कीं, जैसा कि दिल्ली सल्तनत के ऐतिहासिक ग्रंथों में वर्णित है। उनकी रचनाएं, जैसे पहेलियां और गीत, हिंदी साहित्य की नींव रखती हैं और आज भी अध्ययन का विषय हैं।
ये तथ्य हिंदी की समृद्ध विरासत को दर्शाते हैं और हमें इस भाषा को संरक्षित रखने के लिए प्रेरित करते हैं। हिंदी न केवल संवाद का माध्यम है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा भी है। अधिक जानकारी के लिए एथनोलॉग या आईसीसीआर की वेबसाइट्स देखें।
