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रिलायंस की मार्केट कैप यात्रा: कैसे बनी एशिया की सबसे मूल्यवान कंपनी

रिलायंस की नींव 1958 में पड़ी। धीरूभाई अंबानी ने मुंबई के मस्जिद बांदर इलाके में एक छोटा सा यार्न ट्रेडिंग बिजनेस शुरू किया। उनके पास सिर्फ 15,000 रुपये का पूंजी था, जो वे बचत से जमा किए थे। धीरूभाई का जन्म 28 दिसंबर 1932 को गुजरात के चोरवाड़ गांव में हुआ था। वे युवावस्था में यमन चले गए, जहां वे एक पेट्रोल पंप पर काम करते थे। 1958 में भारत लौटकर उन्होंने यह बिजनेस शुरू किया। शुरुआत में वे मसालों और पॉलिएस्टर यार्न का आयात-निर्यात करते थे।​

1960 के दशक में बिजनेस बढ़ा। धीरूभाई ने फैब्रिक निर्माण पर ध्यान दिया। 1966 में कंपनी को रिलायंस टेक्सटाइल्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड के नाम से रजिस्टर किया गया। यह सिंथेटिक फैब्रिक्स जैसे पॉलिएस्टर पर फोकस करती थी। धीरूभाई की रणनीति सरल थी: कम कीमत पर अच्छी क्वालिटी देना। उन्होंने बैकवर्ड इंटीग्रेशन अपनाया, यानी कच्चे माल से लेकर तैयार कपड़े तक सब कुछ खुद बनाना। इससे लागत कम हुई और मुनाफा बढ़ा। 1970 तक कंपनी ने पहला टेक्सटाइल मिल लगाया।​

1977 एक महत्वपूर्ण वर्ष था। रिलायंस ने पहली बार पब्लिक इश्यू लॉन्च किया। यह भारत की पहली कंपनियों में से एक थी जो आम जनता को शेयर बेची। धीरूभाई ने विज्ञापनों में खुद को प्रमोट किया, जैसे “करोड़पति बनिए”। लाखों छोटे निवेशक जुड़े, जिनमें मजदूर, किसान शामिल थे। इस आईपीओ ने कंपनी को फंड दिया और मार्केट कैप को बूस्ट। लेकिन चुनौतियां भी आईं। 1970-80 के दशक में सरकारी लाइसेंस राज था। धीरूभाई को कई बार जेल जाना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।​

1980 तक रिलायंस टेक्सटाइल क्षेत्र की लीडर बनी। ब्रांड ‘विमल’ फैब्रिक्स घर-घर पहुंचा। कंपनी की ग्रोथ तेज थी, लेकिन मार्केट कैप अभी छोटी थी। धीरूभाई की दूरदर्शिता ने इसे मजबूत आधार दिया। वे हमेशा कहते थे कि “सपने बड़े देखो, मेहनत से पूरा करो।” इस दौर में कंपनी ने 20% से ज्यादा सालाना ग्रोथ हासिल की।​

वर्ष मुख्य घटना मार्केट कैप (लगभग, करोड़ रुपये में) ग्रोथ दर (%)
1958 व्यापार शुरू न्यूनतम (0.015)
1966 कंपनी स्थापना 10-20 50+
1970 पहला मिल 50-100 30
1977 आईपीओ 100-500 100+
1980 टेक्सटाइल लीडर 500-1000 25

यह टेबल शुरुआती ग्रोथ को दर्शाती है। डेटा कंपनी इतिहास और आर्थिक रिकॉर्ड्स से लिया गया।​

पेट्रोकेमिकल्स और रिफाइनिंग में प्रवेश

1980 के दशक में रिलायंस ने टेक्सटाइल से आगे कदम बढ़ाया। पेट्रोकेमिकल्स क्षेत्र में प्रवेश किया, जो रसायन उद्योग का दिल था। 1982 में पहला पॉलिएस्टर फिलामेंट यार्न प्लांट लगा। यह भारत का सबसे बड़ा था। कंपनी ने खुद के प्लांट्स से कच्चा माल बनाना शुरू किया, जैसे PTA और MEG। इससे आयात पर निर्भरता कम हुई। 1985 में कंपनी का नाम रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड रखा गया।​

1991 भारत के लिए टर्निंग पॉइंट था। आर्थिक उदारीकरण से विदेशी निवेश आया। रिलायंस ने ग्लोबल मार्केट्स से फंड जुटाया। 1993 में रिलायंस पेट्रोलियम का ग्लोबल डिपॉजिटरी इश्यू आया। यह पहली बार था जब भारतीय कंपनी ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित किया। इंटरनेशनल रेटिंग एजेंसियां जैसे S&P और मूडीज ने रेटिंग दी। 1995 में टेलीकॉम में JV के साथ कदम रखा।​

रिफाइनिंग में बड़ा कदम 1999 में। जामनगर, गुजरात में दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी शुरू हुई। शुरू में 0.66 मिलियन बैरल प्रति दिन क्षमता थी। यह भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने वाली थी। 2008 तक इसे 1.24 मिलियन बैरल तक बढ़ाया। जामनगर अब दुनिया की सबसे जटिल रिफाइनरी है, जो डीजल, पेट्रोल, केमिकल्स बनाती। वैश्विक तेल संकट में भी यह मुनाफा देती रही। 2000 तक मार्केट कैप 1 लाख करोड़ पार कर गई।​

ओएंडजी सेक्टर में 2002 में बड़ा डिस्कवरी। कृष्णा-गोदावरी बेसिन में 7 ट्रिलियन क्यूबिक फीट गैस मिली। यह भारत का सबसे बड़ा निजी डिस्कवरी था। KG-D6 ब्लॉक से उत्पादन 2010 में शुरू हुआ। हालांकि देरी हुई, लेकिन यह कंपनी को ऊर्जा लीडर बनाया। 2010 तक मार्केट कैप 3 लाख करोड़ पहुंची। विविधीकरण ने रिस्क कम किया।​

वर्ष मुख्य उपलब्धि रिफाइनिंग क्षमता (मिलियन बैरल/दिन) मार्केट कैप (लाख करोड़ रुपये) ग्रोथ ड्राइवर
1982 पॉलिएस्टर प्लांट 0.1 पेट्रोकेमिकल्स
1991 उदारीकरण 0.5 विदेशी फंड
1999 जामनगर शुरू 0.66 1 रिफाइनिंग
2008 विस्तार 1.24 2 O&G डिस्कवरी
2010 KG-D6 1.24 3 विविधीकरण

यह टेबल पेट्रोकेमिकल्स और रिफाइनिंग की प्रगति दिखाती है।​

टेलीकॉम क्रांति: जियो का जन्म

रिलायंस का टेलीकॉम सफर 2002 से शुरू हुआ। रिलायंस इन्फोकॉम लॉन्च हुई, जो CDMA टेक्नोलॉजी पर आधारित थी। मुकेश अंबानी ने लीडरशिप संभाली। 2010 तक 100 मिलियन यूजर्स हो गए। लेकिन 2016 में बड़ा धमाका। रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड लॉन्च हुई। 4जी सर्विसेज फ्री वॉयस और सस्ते डेटा (₹10/GB) के साथ शुरू। इससे भारत में डेटा खपत 10 गुना बढ़ी।​

जियो ने मार्केट को हिला दिया। पुरानी कंपनियां जैसे एयरटेल, वोडाफोन घाटे में आईं। जियो ने 6 महीने में 100 मिलियन यूजर्स जोड़े, जो दुनिया का रिकॉर्ड है। 2020 तक 400 मिलियन सब्सक्राइबर्स। ARPU (औसत राजस्व प्रति यूजर) बढ़ा। 5G रोलआउट 2022 में शुरू, 2025 तक 200 मिलियन 5G यूजर्स। जियो एयरफाइबर ब्रॉडबैंड 7.4 मिलियन कनेक्शन्स तक पहुंचा। यह फिक्स्ड वायरलेस में ग्लोबल लीडर है।​

जियो ने निवेश आकर्षित किया। फेसबुक (5.7 बिलियन USD), गूगल (4.5 बिलियन USD) ने स्टेक लिया। 2020 में 20 बिलियन USD जुटाए। इससे जियो वैल्यूएशन 100 बिलियन USD पहुंची। मार्केट कैप पर असर: 2016 के बाद शेयर प्राइस 2.5 गुना बढ़ी। जियो प्लेटफॉर्म्स ने स्ट्रीमिंग, ई-कॉमर्स जोड़ा।​

वर्ष जियो माइलस्टोन सब्सक्राइबर्स (मिलियन) ARPU (रुपये) मार्केट कैप प्रभाव (लाख करोड़ रुपये)
2002 इन्फोकॉम शुरू 0 न्यूनतम
2016 जियो लॉन्च 100 (6 महीने) 100 +2-3
2020 निवेश राउंड 400 130 +10
2022 5G शुरू 450 180 +15
2025 5G 200M 500+ 200+ +18+

यह टेबल जियो की क्रांति को हाइलाइट करती है।​

रिटेल और डिजिटल सेवाओं का विस्तार

रिलायंस रिटेल वेंचर्स 2006 में शुरू हुई। शुरू में फैशन और ग्रॉसरी पर फोकस। अब भारत का सबसे बड़ा रिटेलर, 18,000+ स्टोर्स के साथ। 2025 तक 358 मिलियन ट्रांजैक्शनल कस्टमर्स। फॉर्मेट्स जैसे ट्रेंड्स (फैशन), रिलायंस स्मार्ट (ग्रॉसरी), जियो मार्ट (ऑनलाइन)। खुद के ब्रांड्स जैसे रिलायंस रिटेल FMCG ने मार्केट शेयर बढ़ाया। कोविड में ऑनलाइन सेल्स 100% बढ़ी।​

डिजिटल आर्म में जियो प्लेटफॉर्म्स प्रमुख। 2019 में फाइंड एक्वायर किया, ई-कॉमर्स के लिए। नेटमेड्स (हेल्थकेयर), जियो सिनेमा (स्ट्रीमिंग)। 2024 में डिज्नी के साथ JV, वैल्यू 8.5 बिलियन USD। 2025 Q2 में रिटेल EBITDA 18% ग्रोथ। रेवेन्यू 2.5 लाख करोड़।​

विविधीकरण ने कंपनी को मजबूत बनाया। 2020 में डेट-फ्री स्टेटस हासिल, 1.5 लाख करोड़ कर्ज चुकाया। इससे निवेश के दरवाजे खुले। मार्केट कैप 2025 में 19 ट्रिलियन रुपये के करीब। रिटेल ने पेट्रोकेमिकल्स के उतार-चढ़ाव को बैलेंस किया।​

सेक्टर स्टोर्स/यूजर्स (2025) रेवेन्यू योगदान (%) EBITDA मार्जिन (%) मार्केट कैप ग्रोथ (%)
रिटेल 18,000+ स्टोर्स 30 7-8 +15
डिजिटल 500M+ यूजर्स 25 45 +20
ई-कॉमर्स 100M+ ट्रांजैक्शन्स 10 5 +10
हेल्थकेयर 50M+ 5 10 +8

यह टेबल सेक्टर-वाइज विस्तार दिखाती है।​

नई ऊर्जा और सस्टेनेबल फ्यूचर

रिलायंस का फ्यूचर ग्रीन एनर्जी में है। 2021 में 10 साल का प्लान: 10 ट्रिलियन रुपये निवेश। 2030 तक 100 GW रिन्यूएबल एनर्जी। सोलर, विंड, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी। 2025 तक 20 GW क्षमता जोड़ी। जामनगर में गीगाफैक्टरी, 50 GWh बैटरी प्रोडक्शन।​

साझेदारियां मजबूत: ADNOC (UAE) के साथ हाइड्रोजन, BP के साथ EV चार्जिंग। 2035 तक नेट जीरो कार्बन। 2025 में न्यू एनर्जी रेवेन्यू 10,000 करोड़। यह ESG इन्वेस्टर्स को आकर्षित कर रहा। मार्केट कैप पर लॉन्ग-टर्म बूस्ट।​

प्रोजेक्ट क्षमता (GW, 2025 तक) निवेश (करोड़ रुपये) अपेक्षित रेवेन्यू (2025, करोड़) ग्रोथ पोटेंशियल (%)
सोलर 10 50,000 5,000 25
विंड 5 30,000 3,000 20
ग्रीन हाइड्रोजन 5 40,000 2,000 30
बैटरी स्टोरेज 5 20,000 1,000 35

यह टेबल सस्टेनेबल इनिशिएटिव्स को कवर करती है।​

वित्तीय माइलस्टोन्स और मार्केट कैप की उड़ान

रिलायंस की मार्केट कैप 1977 में 100 करोड़ से शुरू। 2000: 1 लाख करोड़। 2010: 3 लाख। 2020: 10 लाख (FY20: 5.98 ट्रिलियन)। 2024: 16.6 ट्रिलियन। 2025: 19.16 ट्रिलियन (15% ग्रोथ)। CAGR 25%+।​

Q2 FY26: नेट प्रॉफिट 18,165 करोड़ (9.7% अप), EBITDA 1.52 लाख करोड़ (14.6% अप)। O2C कमजोर लेकिन डिजिटल, रिटेल मजबूत। शेयर प्राइस ₹2,700-2,800। डिविडेंड ₹10/शेयर।​

एशिया में रिलायंस टॉप 10 में। अरामको (2.1 ट्रिलियन USD), TSMC (900 बिलियन USD) के बाद। लेकिन भारत में नंबर 1। मुकेश अंबानी का लक्ष्य: हर 4-5 साल डबलिंग।​

वर्ष मार्केट कैप (ट्रिलियन रुपये) वैश्विक रैंक एशिया रैंक मुख्य ड्राइवर
2000 1 500+ 50+ रिफाइनिंग
2010 3 200 30 पेट्रोकेम
2020 10 100 15 जियो
2024 16.6 80 10 रिटेल
2025 19.16 70 8 ग्रीन एनर्जी

यह टेबल कैप की उड़ान ट्रैक करती है।​

मुकेश अंबानी की लीडरशिप

मुकेश अंबानी 1957 में जन्मे। IIT बॉम्बे से केमिकल इंजीनियरिंग, स्टैनफोर्ड MBA। 1981 में कंपनी जॉइन। 2002 में चेयरमैन। धीरूभाई की मौत (2002) के बाद संभाला। जियो, रिटेल, न्यू एनर्जी उनके विजन। एशिया के सबसे अमीर (नेट वर्थ 110 बिलियन USD)।​

रणनीति: वर्टिकल इंटीग्रेशन, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन। 2020 डेट-फ्री। फ्यूचर: जियो IPO 2026। AI पर फोकस, जैसे भारतGPT। लीडरशिप ने रिलायंस को एशिया लीडर बनाया।​

चुनौतियां और भविष्य की संभावनाएं

चुनौतियां: 2008 ग्लोबल क्राइसिस, KG-D6 देरी, O2C मार्जिन प्रेशर (2025 में कम)। समाधान: डाइवर्सिफिकेशन, इनोवेशन। भविष्य: AI, 6G, EV। 2030 तक 40 ट्रिलियन कैप लक्ष्य। भारत अर्थव्यवस्था में योगदान: 3% GDP।​

चुनौती प्रभाव समाधान भविष्य प्रभाव
तेल मूल्य उतार-चढ़ाव O2C EBITDA डाउन डिजिटल शिफ्ट स्थिर 20% ग्रोथ
रेगुलेटरी हर्डल्स लाइसेंस देरी लॉबिंग, कंप्लायंस आसान बिजनेस
कॉम्पिटिशन (जियो) प्राइस वॉर इनोवेशन 50% मार्केट शेयर
पर्यावरण प्रेशर कार्बन एमिशन ग्रीन इन्वेस्ट ESG रेटिंग अप

यह टेबल चुनौतियों का विश्लेषण करती है।​

निष्कर्ष

रिलायंस की मार्केट कैप यात्रा दृढ़ता की मिसाल है। धीरूभाई के सपने से मुकेश की विजन तक, यह एशिया की सबसे मूल्यवान बनी। विविधीकरण, इनोवेशन से ग्रोथ बनी रही। भविष्य में ग्रीन और डिजिटल से और ऊंचाई। यह कहानी युवाओं को प्रेरित करती: मेहनत से असंभव संभव।​