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ट्रंप के मुकदमे को निपटाने के लिए 24.5 मिलियन डॉलर का भुगतान करने पर सहमत हुआ यूट्यूब

यूट्यूब ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य वादियों द्वारा 2021 में प्लेटफॉर्म से निलंबन के खिलाफ दायर मुकदमे को सुलझाने के लिए 24.5 मिलियन डॉलर का भुगतान करने पर सहमति जताई है। कोर्ट फाइलिंग के अनुसार, यह समझौता विवाद को खत्म करने और आगे की कानूनी लड़ाई से बचने के लिए किया गया है, जिसमें ट्रंप के मुक्त भाषण के अधिकारों का मुद्दा मुख्य था।

समझौते की मुख्य शर्तें और वितरण

कोर्ट फाइलिंग में विस्तार से बताया गया है कि कुल 24.5 मिलियन डॉलर की राशि को कैसे बांटा जाएगा। इसमें से 22 मिलियन डॉलर ट्रंप की व्हाइट हाउस स्टेट बॉलरूम निर्माण परियोजना के लिए आवंटित किए जाएंगे, जो वाशिंगटन डीसी में ऐतिहासिक महत्व की जगह है। यह राशि एक टैक्स-मुक्त संस्था, ट्रस्ट फॉर द नेशनल मॉल में रखी जाएगी, जो नेशनल मॉल के संरक्षण और विकास के लिए काम करती है। एबीसी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, यह ट्रस्ट सार्वजनिक स्थलों को बेहतर बनाने में मदद करता है, और इस फंडिंग से बॉलरूम का निर्माण ट्रंप की विरासत को मजबूत करेगा।

बाकी 2.5 मिलियन डॉलर अन्य वादियों के बीच बांटे जाएंगे। इनमें अमेरिकन कंजर्वेटिव यूनियन शामिल है, जो एक प्रमुख रूढ़िवादी संगठन है, साथ ही व्यक्तिगत वादी जैसे एंड्रयू बैगियानी, ऑस्टेन फ्लेचर, मैरीसे वेरोनिका जीन-लुई, फ्रैंक वैलेंटाइन, केली विक्ट्री और नाओमी वुल्फ। ये सभी वादी मुकदमे में ट्रंप के साथ जुड़े थे और उन्होंने यूट्यूब की नीतियों पर सवाल उठाए थे। फाइलिंग स्पष्ट करती है कि यह समझौता किसी भी तरह की गलती या जिम्मेदारी की स्वीकृति नहीं है, बल्कि सिर्फ मुकदमे के खर्च और जोखिमों से बचने का तरीका है। गूगल के प्रवक्ता ने सोमवार को एबीसी न्यूज से बातचीत में सिर्फ इसी फाइलिंग का जिक्र किया, बिना कोई अतिरिक्त टिप्पणी के।

मुकदमे का विस्तृत पृष्ठभूमि और कारण

यह मुकदमा 2021 में शुरू हुआ, जब 6 जनवरी को यूएस कैपिटल पर हुए हमले के बाद यूट्यूब ने ट्रंप का अकाउंट निलंबित कर दिया। कंपनी ने तब दावा किया कि ट्रंप द्वारा अपलोड किए गए वीडियो ने उनकी हिंसा भड़काने वाली नीति का उल्लंघन किया था। एबीसी न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह निलंबन दो साल से ज्यादा चला, और मार्च 2023 में डोनाल्ड ट्रंप का चैनल बहाल किया गया। बहाली का कारण यह था कि चुनाव से पहले मतदाताओं को सभी प्रमुख उम्मीदवारों की आवाज सुनने का मौका मिले, जैसा कि यूट्यूब ने अपने बयान में कहा।

ट्रंप के मुकदमे में मुख्य आरोप था कि यूट्यूब ने उन्हें अनिश्चितकाल के लिए प्रतिबंधित करके अमेरिकी संविधान के पहले संशोधन के तहत मुक्त भाषण के अधिकार का उल्लंघन किया। मुकदमा फ्लोरिडा की संघीय अदालत में दायर किया गया था, और इसमें यूट्यूब की सामग्री मॉडरेशन नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। सीएनएन की रिपोर्टों से पुष्टि होती है कि ट्रंप ने दावा किया था कि यह प्रतिबंध राजनीतिक पूर्वाग्रह से प्रेरित था, और इससे उनके समर्थकों तक पहुंचने की क्षमता प्रभावित हुई। इसके अलावा, अन्य वादियों ने भी अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए, जहां उन्हें प्लेटफॉर्म से हटाया गया था। रॉयटर्स जैसी एजेंसियों ने रिपोर्ट किया कि यह मुकदमा सोशल मीडिया की जिम्मेदारी और मुक्त भाषण के बीच चल रही बहस का हिस्सा था, जो जनवरी 6 की घटना के बाद तेज हुई।

अन्य सोशल मीडिया कंपनियों के साथ ट्रंप के समझौते

यूट्यूब इस साल ट्रंप के साथ समझौता करने वाली तीसरी प्रमुख सोशल मीडिया कंपनी है, जो जनवरी 6 की घटना से जुड़े निलंबनों पर आधारित हैं। जनवरी 2025 में, मेटा (फेसबुक और इंस्टाग्राम की मालिक) ने ट्रंप के मुकदमे को सुलझाने के लिए 25 मिलियन डॉलर का समझौता किया। इसमें 22 मिलियन डॉलर ट्रंप की प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी के लिए दान किए गए, और 3 मिलियन डॉलर कानूनी फीस के रूप में। एबीसी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, मेटा ने भी किसी गलती को स्वीकार नहीं किया, बल्कि मुकदमे को खत्म करने पर जोर दिया।

फरवरी में, एक्स (पूर्व ट्विटर) ने ट्रंप के साथ लगभग 10 मिलियन डॉलर का समझौता किया, जैसा कि वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रिपोर्ट किया। एक्स के मालिक एलन मस्क ने इस समझौते को विवादों से बचने का तरीका बताया, और इसमें भी कोई जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की गई। न्यूयॉर्क टाइम्स की विश्लेषण रिपोर्टों से पता चलता है कि ये समझौते सोशल मीडिया कंपनियों के लिए एक पैटर्न बन रहे हैं, जहां वे लंबे मुकदमों से बचने के लिए भुगतान कर रही हैं, लेकिन अपनी नीतियों में बदलाव नहीं ला रही हैं। इन समझौतों से ट्रंप को अपनी राजनीतिक और व्यक्तिगत परियोजनाओं के लिए फंडिंग मिल रही है, जो उनके 2024 चुनाव अभियान के बाद भी जारी है।

समझौते का व्यापक प्रभाव और कानूनी निहितार्थ

यह समझौता ट्रंप के लिए एक रणनीतिक जीत है, क्योंकि इससे उन्हें व्हाइट हाउस से जुड़ी परियोजना के लिए धन मिल रहा है, जो उनकी विरासत को मजबूत करेगा। हालांकि, गार्जियन की रिपोर्टों के अनुसार, यह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की सामग्री नीतियों में कोई बड़ा बदलाव नहीं लाता। यूट्यूब ने चैनल बहाली के बाद कहा कि वे हिंसा, गलत जानकारी और चुनावी हस्तक्षेप से जुड़ी सामग्री पर सख्ती से नजर रखेंगे, और सभी उपयोगकर्ताओं के लिए समान नियम लागू करेंगे।

कानूनी दृष्टिकोण से, ये मुकदमे अमेरिकी अदालतों में मुक्त भाषण बनाम प्लेटफॉर्म जिम्मेदारी की बहस को बढ़ावा दे रहे हैं। बीबीसी और रॉयटर्स से मिली जानकारी के आधार पर, कई विशेषज्ञ मानते हैं कि सोशल मीडिया कंपनियां सेक्शन 230 के तहत संरक्षित हैं, जो उन्हें उपयोगकर्ता सामग्री के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराता। फिर भी, ट्रंप जैसे प्रमुख व्यक्तियों के मुकदमों से कंपनियां सतर्क हो रही हैं। वैश्विक संदर्भ में, यह यूरोपीय संघ की डिजिटल सर्विसेज एक्ट जैसी नीतियों से तुलना की जा रही है, जहां प्लेटफॉर्म्स को अधिक जवाबदेही बनाया जा रहा है।

कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम अमेरिकी राजनीति, डिजिटल अधिकार और सोशल मीडिया के बीच जटिल संबंधों को उजागर करता है। जनवरी 6 की घटना के बाद से, ट्रंप ने इन प्लेटफॉर्म्स को चुनौती दी है, और ये समझौते दिखाते हैं कि कानूनी दबाव से कंपनियां समझौते करने को तैयार हैं, लेकिन अपनी स्वतंत्रता बनाए रख रही हैं। भविष्य में, ऐसे मुकदमे चुनावी मौसम में और बढ़ सकते हैं, खासकर 2028 के चुनावों से पहले।