कृषि

10 महिलाओं के नेतृत्व वाली कृषि तकनीक की सफलता की कहानियाँ ग्रामीण भारत को बदल रही हैं

भारत का ग्रामीण इलाका हमेशा से कृषि पर निर्भर रहा है। लेकिन जलवायु परिवर्तन, बाजार की अनिश्चितता और संसाधनों की कमी ने किसानों के लिए चुनौतियाँ बढ़ा दी हैं। ऐसी स्थिति में, एग्रीटेक यानी कृषि प्रौद्योगिकी ने नई उम्मीद जगाई है। खासकर महिलाओं द्वारा नेतृत्व वाली स्टार्टअप्स ने ग्रामीण भारत को न केवल आर्थिक रूप से मजबूत किया है, बल्कि सशक्तिकरण का भी नया उदाहरण पेश किया है। यह लेख उन १० महिलाओं की कहानियों पर केंद्रित है, जो एग्रीटेक के माध्यम से ग्रामीण भारत को बदल रही हैं। इनकी पहलें साधारण किसानों को स्मार्ट फार्मिंग, बेहतर भंडारण और बाजार पहुंच प्रदान कर रही हैं। हम सरल शब्दों में इनकी यात्रा, चुनौतियों और प्रभाव को समझेंगे, ताकि पाठक आसानी से जुड़ सकें।

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भारत में एग्रीटेक बाजार २०२५ तक २४ अरब डॉलर का हो सकता है, और महिलाओं का योगदान इसमें महत्वपूर्ण है। ये कहानियाँ न केवल प्रेरणा देती हैं, बल्कि ग्रामीण विकास के लिए व्यावहारिक मॉडल भी प्रस्तुत करती हैं। एग्रीटेक महिलाओं के लिए एक क्रांति है। भारत में ६४.४ प्रतिशत कृषि कार्यबल महिलाओं का है, लेकिन केवल ६-१० प्रतिशत शीर्ष एग्रीटेक कंपनियों में उनका प्रतिनिधित्व है। ये १० कहानियाँ साबित करती हैं कि महिलाएँ ग्रामीण विकास की धुरी बन सकती हैं। आइए जानें कैसे।​

1. धनश्री मंधनी: सलाम किसान की संस्थापक

धनश्री मंधनी एक युवा उद्यमी हैं, जिन्होंने १९ साल की उम्र में प्राइम सॉल्यूशंस शुरू किया। यह २०२१ में सलाम किसान के रूप में विकसित हुआ, जो छोटे किसानों को ड्रोन-आधारित मिट्टी परीक्षण और स्मार्ट सलाह देता है। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉइस से फाइनेंस और मार्केटिंग में डिग्री लेने के बाद, धनश्री ने भारत की कृषि समस्याओं पर ध्यान दिया। उनके परिवार की कृषि पृष्ठभूमि ने उन्हें प्रेरित किया। सलाम किसान किसानों को मौसम, मिट्टी और बाजार डेटा प्रदान करता है, जिससे उत्पादकता १५-४० प्रतिशत बढ़ जाती है। धनश्री की कंपनी अब ५०,००० से अधिक किसानों से जुड़ी है।

यह एआई और ड्रोन का उपयोग करके फसल स्वास्थ्य की निगरानी करती है। ग्रामीण क्षेत्रों में, जहाँ संसाधन कम हैं, यह पहल किसानों को सशक्त बनाती है। धनश्री का मानना है कि सही जानकारी समय पर मिले तो किसान आत्मनिर्भर बन सकते हैं। उनकी स्टार्टअप ने ग्रामीण युवाओं के लिए नौकरियाँ भी पैदा की हैं, जैसे ड्रोन ऑपरेटर और एग्री एडवाइजर। धनश्री की यात्रा ग्रामीण भारत के लिए एक मिसाल है, जहाँ तकनीक छोटे किसानों की आय दोगुनी कर सकती है। सलाम किसान ने न केवल फसल उत्पादन बढ़ाया, बल्कि जल संरक्षण और मिट्टी स्वास्थ्य को भी सुधारा है।​

सलाम किसान के प्रमुख आंकड़े

विशेषता विवरण प्रभाव
उपयोगकर्ता आधार ५०,०००+ किसान ग्रामीण अर्थव्यवस्था में वृद्धि ​
तकनीक ड्रोन और एआई आधारित परीक्षण उत्पादकता में १५-४०% वृद्धि ​
निवेश टॉप ५ एग्रीटेक वेंचर्स में नौकरियाँ: ७५+ कर्मचारी ​

यह तालिका दिखाती है कि कैसे सलाम किसान ग्रामीण भारत को डिजिटल बना रहा है।​

2. हिमानी शाह: इंटेलो लैब्स की सह-संस्थापक

हिमानी शाह एक अनुभवी उद्यमी हैं, जिन्होंने इंटेलो लैब्स की सह-स्थापना की। यह कंपनी कृषि आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता लाती है। ५ वर्षों से अधिक समय से, हिमानी बाजार खुफिया और रणनीतिक योजना पर काम कर रही हैं। उनकी टीम फसल गुणवत्ता की निगरानी के लिए एआई-आधारित इमेजिंग का उपयोग करती है। इससे किसान अपनी फसल का सही मूल्यांकन कर सकते हैं। ग्रामीण भारत में, जहाँ मध्यस्थ फसलों का मूल्य घटाते हैं, इंटेलो लैब्स एक क्रांति है। हिमानी का फोकस वित्त, कानूनी और एचआर पर भी है, जो कंपनी को मजबूत बनाता है।

उनकी पहल ने २५ प्रतिशत तक उत्पादकता बढ़ाई है, जैसा कि आईसीएआर के रिपोर्ट में कहा गया है। हिमानी की यात्रा साबित करती है कि महिलाएँ कृषि में तकनीकी नेतृत्व कर सकती हैं। इंटेलो लैब्स ने गेहूँ, मक्का और आलू जैसी फसलों के लिए ग्रेडिंग सिस्टम विकसित किया, जो ग्रामीण बाजारों में विश्वास बढ़ाता है। हिमानी की टीम ने छोटे किसानों को मशीन लर्निंग से जोड़ा, जिससे बर्बादी १० प्रतिशत कम हुई।​

इंटेलो लैब्स के प्रभाव

क्षेत्र तकनीक लाभ
फसल निगरानी एआई इमेजिंग २५% उत्पादकता वृद्धि ​
आपूर्ति श्रृंखला बाजार खुफिया किसानों को बेहतर मूल्य ​
विस्तार ५+ वर्षों का अनुभव ग्रामीण सशक्तिकरण ​

यह तालिका हिमानी के योगदान को स्पष्ट करती है।​

3. श्रीया नहेता: ज़ामा ऑर्गेनिक्स की संस्थापक

शriya नहेता ने २०१७ में ज़ामा ऑर्गेनिक्स शुरू किया। यह स्टार्टअप जैविक उत्पादों को सीधे किसानों से उपभोक्ताओं तक पहुँचाता है। ५०,००० से अधिक किसानों के साथ जुड़कर, श्रीया ने मुंबई और पुणे में ताजा सब्जियाँ, अनाज और मसाले उपलब्ध कराए। उनकी कंपनी रेल और सड़क परिवहन का उपयोग करती है, ताकि कार्बन फुटप्रिंट कम रहे। ग्रामीण क्षेत्रों में जैविक खेती को बढ़ावा देकर, श्रीया ने किसानों की आय बढ़ाई।

लकड़ोंग हल्दी मेघालय से और कश्मीर से केसर जैसे उत्पाद उनकी विशेषता हैं। कंपनी का राजस्व २ करोड़ रुपये तक पहुँचा है। श्रीया की पहल ग्रामीण महिलाओं को बाजार से जोड़ती है। श्रीया ने अमेरिका में पढ़ाई के दौरान जैविक खाद्य बाजार देखा, जो भारत में कमी को भरने का विचार बना। ज़ामा ऑर्गेनिक्स ने रसायन-मुक्त खेती को प्रोत्साहित किया, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रही।​

ज़ामा ऑर्गेनिक्स के उत्पाद

उत्पाद प्रकार स्रोत विशेषता
अनाज और बाजरा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र जैविक, रसायन-मुक्त ​
मसाले और तेल कश्मीर, मेघालय ताजा और नैतिक स्रोत ​
फल-सब्जियाँ स्थानीय किसान मुंबई-पुणे डिलीवरी ​

यह तालिका श्रीया के नेटवर्क को दर्शाती है।​

4. कल्याणी शिंदे: गोडाम इनोवेशंस की संस्थापक

कल्याणी शिंदे ने गोडाम इनोवेशंस शुरू किया, जो प्याज भंडारण के लिए आईओटी-आधारित समाधान देता है। नासिक के लासलगाँव से आने वाली कल्याणी ने अपने पिता की फसल हानि देखी और गोडाम सेंस डिवाइस बनाया। यह तापमान, आर्द्रता और गैसों की निगरानी करता है, जिससे २०-३० प्रतिशत प्याज बच जाता है। ग्रामीण किसानों को स्थानीय भाषा में अलर्ट भेजकर, कल्याणी ने बर्बादी रोकी।

कंपनी अब महाराष्ट्र से बाहर फैल रही है। नाफेड और नाबार्ड जैसे संगठनों के साथ साझेदारी ने प्रभाव बढ़ाया। कल्याणी को यंग चेंजमेकर अवॉर्ड मिला। कल्याणी की डिवाइस ने प्याज किसानों को निर्यात बाजार से जोड़ा, जिससे आय १५ प्रतिशत बढ़ी। यह पहल ग्रामीण महिलाओं को भंडारण प्रबंधन में प्रशिक्षित करती है।​

गोडाम इनोवेशंस के लाभ

समस्या समाधान परिणाम
भंडारण हानि आईओटी सेंसर २०-३०% बचत ​
बाजार स्थिरता रीयल-टाइम अलर्ट निर्यात में वृद्धि ​
विस्तार वेयरहाउस प्लेटफॉर्म किसान-खरीदार कनेक्शन ​

यह तालिका कल्याणी की नवाचार को सरल बनाती है।​

5. श्रीष्टी मंदार: रेड ऑटर फार्म्स की सह-संस्थापक

श्रीष्टी मंदार ने २०१६ में अनुभव दास के साथ रेड ऑटर फार्म्स शुरू किया। यह एक्वापोनिक्स पर आधारित है, जहाँ मछलियों का अपशिष्ट पौधों को पोषण देता है। दिल्ली और नैनीताल में स्थित, कंपनी रसायन-मुक्त सब्जियाँ उगाती है। ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए, श्रीष्टी ने समृद्धि फार्म्स प्रोग्राम लॉन्च किया। यह छोटे किसानों को फार्म-एज-अ-सर्विस मॉडल देता है। कंपनी ने उत्पादन क्षमता बढ़ाई और B2B तथा B2C मॉडल अपनाया। श्रीष्टी की पहल ने ग्रामीण आय में स्थिरता लाई। एक्वापोनिक्स ने पानी की बचत ९० प्रतिशत की, जो सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए वरदान है। श्रीष्टी ने ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण देकर नौकरियाँ पैदा कीं।​

रेड ऑटर फार्म्स की तकनीकें

विधि विवरण लाभ
एक्वापोनिक्स मछली-फसल एकीकरण रसायन-मुक्त उत्पाद ​
हाइड्रोपोनिक्स मिट्टी-रहित खेती कम बर्बादी ​
समृद्धि प्रोग्राम महिलाओं के लिए प्रशिक्षण आय में वृद्धि ​

यह तालिका श्रीष्टी के सस्टेनेबल मॉडल को दिखाती है।​

6. साई गोले: भारतएग्री की सह-संस्थापक

साई गोले ने २०१७ में सिद्धार्थ डायलानी के साथ भारतएग्री शुरू किया। पहले लीनएग्री के नाम से जाना गया, यह ऐप किसानों को क्या, कब और कैसे उगाएँ, इसकी सलाह देता है। आईआईटी-मद्रास के इनोवेशन सेंटर से निकला यह स्टार्टअप अब १००,००० उपयोगकर्ताओं का है। ग्रामीण क्षेत्रों में, साई की एल्गोरिदम ने आय बढ़ाई। २,५०० भुगतान वाले किसान इसका प्रमाण हैं। साई ने दूध परीक्षण मशीन भी विकसित की, जो स्वस्थ दूध सुनिश्चित करती है। उनकी कंपनी टुमकुरु और बेंगलुरु के ५० किसानों से जुड़ी है। साई का एल्गोरिदम ने कीटनाशक उपयोग ९ प्रतिशत कम किया। यह ग्रामीण स्वास्थ्य और पर्यावरण को लाभ पहुँचाता है।​

भारतएग्री के आंकड़े

उपयोगकर्ता विशेषता प्रभाव
१००,०००+ एल्गोरिदम आधारित सलाह अधिक उत्पादन ​
२,५०० पेड दूध परीक्षण राजस्व: ७० लाख रुपये ​
नेटवर्क ५०+ किसान ग्रामीण स्वास्थ्य ​

यह तालिका साई के प्रभाव को उजागर करती है।​

7. अनीषा गोयल और श्रुति जैन: काज़े लिविंग की संस्थापकें

अनीषा गोयल और श्रुति जैन ने २०२० में काज़े लिविंग शुरू किया। पेरिस से लौटने पर अनीषा को जैविक हरी सब्जियाँ न मिलने पर यह विचार आया। हाइड्रोपोनिक फार्म्स से जुड़कर, वे रसायन-मुक्त भोजन पहुँचाती हैं। मासिक ४० प्रतिशत वृद्धि के साथ, कंपनी ५०,००० किसानों से जुड़ी है। ग्रामीण भारत में, यह पहल जैविक प्रमाणीकरण को आसान बनाती है। १० लाख रुपये के प्रारंभिक निवेश से २ करोड़ का राजस्व हुआ। अनीषा और श्रुति ने ग्रामीण महिलाओं को बाजार से जोड़ा। हाइड्रोपोनिक्स ने मिट्टी की जरूरत खत्म की, जो छोटे प्लॉट वालों के लिए उपयोगी है। उनकी कंपनी ने डिलीवरी नेटवर्क से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया।​

काज़े लिविंग के मॉडल

मॉडल फोकस लाभ
B2C डिलीवरी हाइड्रोपोनिक उत्पाद ताजा भोजन ​
किसान नेटवर्क ५०,०००+ साझेदार आय वृद्धि ​
वृद्धि ४०% मासिक सस्टेनेबल फार्मिंग ​

यह तालिका उनकी सफलता को संक्षेपित करती है।​

8. बिना देवी: मशरूम महिला पहल की नेता

बिना देवी ने बिहार में मशरूम महिला प्रोजेक्ट शुरू किया। कम निवेश में मशरूम की खेती से १,५०० महिलाओं को प्रशिक्षित किया। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से, उन्होंने माइक्रोक्रेडिट का उपयोग किया। ग्रामीण आय विविधीकरण से, यह पहल खाद्य सुरक्षा बढ़ाती है। बिना को राज्य स्तर पर सम्मान मिला। एनजीओ के साथ साझेदारी से पैकेजिंग और बाजार पहुंच सुधरी। महिलाएँ अब मुख्य आय स्रोत बनीं। बिना की पहल ने कमरे के अंदर खेती को संभव बनाया, जो मौसम पर निर्भरता कम करती है। यह ग्रामीण महिलाओं को वित्तीय स्वतंत्रता देती है।​

मशरूम महिला के प्रभाव

पहलू संख्या परिणाम
प्रशिक्षित महिलाएँ १,५००+ आय स्रोत विविधीकरण ​
समूह स्वयं सहायता संगठन सामाजिक स्थिति उन्नति ​
बाजार शहरों तक पहुंच लाभ में वृद्धि ​

यह तालिका बिना के योगदान को दिखाती है।​

9. एमएस क्रॉप सिक्योर की संस्थापक: ग्रामीण सशक्तिकरण

एमएस क्रॉप सिक्योर एग्रीटेक प्राइवेट लिमिटेड की संस्थापक छोटे किसानों की चुनौतियों को हल करती हैं। स्टार्टअप इंडिया और कर्नाटक द्वारा मान्यता प्राप्त, यह एकीकृत कमोडिटी प्रबंधन पर फोकस करता है। ग्रामीण समुदायों में जीवन बदल रही यह कंपनी आईओटी और कटिंग-एज तकनीक का उपयोग करती है। ग्रामीण भारत में, यह पहल फसल सुरक्षा और बाजार स्थिरता लाती है। संस्थापक की नेतृत्व ने ४० अंडर ४० में स्थान दिलाया। महिलाओं को सशक्त बनाकर, यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करती है। कंपनी ने सॉफ्टवेयर से फसल पूर्वानुमान को सटीक बनाया, जो जोखिम कम करता है। यह ग्रामीण युवाओं को डिजिटल स्किल्स सिखाती है।​​

एमएस क्रॉप सिक्योर के फीचर्स

तकनीक लाभ प्रभाव
आईओटी प्रबंधन कमोडिटी निगरानी फसल सुरक्षा ​
कटिंग-एज ग्रामीण समुदाय जीवन परिवर्तन ​
मान्यता स्टार्टअप इंडिया आर्थिक सशक्तिकरण ​

यह तालिका उनकी नवाचार को सरल बनाती है।​

10. ईशा अंबानी: महिला-नेतृत्व एग्रीटेक की प्रेरणा

ईशा अंबानी ने महिला-नेतृत्व एग्रीटेक की क्षमता पर जोर दिया। रिलायंस से जुड़ी ईशा लिंग-समावेशी कृषि को बढ़ावा देती हैं। इससे उत्पादकता और खाद्य सुरक्षा बढ़ती है। ग्रामीण भारत में, उनकी दृष्टि महिलाओं को तकनीक से जोड़ती है। ईशा की पहलें एआई और आईओटी को ग्रामीण फार्मिंग में एकीकृत करती हैं। यह ग्रामीण विकास के लिए एक मॉडल है। ईशा ने तेलंगाना के सागू बागू प्रोग्राम का समर्थन किया, जहाँ डिजिटल टूल्स से चिली उत्पादन २१ प्रतिशत बढ़ा। उनकी दृष्टि ग्रामीण महिलाओं को मुख्यधारा में लाती है।​

ईशा अंबानी के योगदान

क्षेत्र फोकस लाभ
लिंग समावेश एग्रीटेक में महिलाएँ उत्पादकता वृद्धि ​
तकनीक एआई और आईओटी खाद्य सुरक्षा ​
प्रभाव ग्रामीण सशक्तिकरण समावेशी विकास ​

यह तालिका ईशा की दृष्टि को दर्शाती है।​

महिला एग्रीटेक का समग्र प्रभाव

ये १० कहानियाँ दिखाती हैं कि महिलाएँ एग्रीटेक के माध्यम से ग्रामीण भारत को कैसे बदल रही हैं। भारत में ८५ प्रतिशत ग्रामीण महिलाएँ कृषि से जुड़ी हैं, लेकिन केवल १३ प्रतिशत भूमि मालिक हैं। इन स्टार्टअप्स ने उत्पादकता ७० प्रतिशत तक बढ़ाई है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में १५-४० प्रतिशत आय वृद्धि हुई है। महिलाओं की भागीदारी से सस्टेनेबल फार्मिंग बढ़ी है। ब्लॉकचेन जैसी तकनीकें धोखाधड़ी रोकती हैं। ये पहलें नौकरियाँ पैदा करती हैं और लिंग समानता को बढ़ावा देती हैं। महाराष्ट्र में महिला एग्रीप्रेन्योरशिप ३३.५ प्रतिशत सफल रही, जो ग्रामीण विकास को गति देती है। ये प्रयास जलवायु अनुकूलन को मजबूत बनाते हैं।​

एग्रीटेक के आंकड़े

पहलू आंकड़ा
महिला कार्यबल ६४.४%
उत्पादकता वृद्धि १५-४०%
नौकरियाँ लाखों ग्रामीण रोजगार

निष्कर्ष

महिला-नेतृत्व वाली एग्रीटेक ग्रामीण भारत की भविष्य है। ये १० कहानियाँ साबित करती हैं कि सही तकनीक और नेतृत्व से चुनौतियाँ अवसर बन सकती हैं। ग्रामीण विकास के लिए सरकार और निवेशकों को इन पहलों को समर्थन देना चाहिए। इससे न केवल अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि महिलाएँ सशक्त भी होंगी। आइए इनकी प्रेरणा से ग्रामीण भारत को नया रूप दें। ये महिलाएँ न केवल फसलें उगा रही हैं, बल्कि सपनों को भी सींच रही हैं। भविष्य में, एग्रीटेक से ग्रामीण भारत आत्मनिर्भर बनेगा, जहाँ महिलाएँ मुख्य भूमिका निभाएँगी। इन कहानियों से प्रेरित होकर, अधिक महिलाएँ इस क्षेत्र में कदम रखेंगी। ग्रामीण भारत की यह क्रांति सभी के लिए लाभकारी होगी।