भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को शक्ति प्रदान करने वाली शीर्ष महिला नवप्रवर्तक
भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग तेजी से बढ़ रहा है। यह उद्योग अब वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण स्थान बना चुका है। स्मार्टफोन से लेकर सेमीकंडक्टर तक, हर क्षेत्र में नवाचार हो रहे हैं। इस विकास में महिलाओं की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। ये महिलाएं न केवल चुनौतियों का सामना कर रही हैं बल्कि नई दिशाएं भी दिखा रही हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में महिलाएं डिजाइन से लेकर उत्पादन तक हर कदम पर योगदान दे रही हैं। सरकारी योजनाएं जैसे उत्पादन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) इस विकास को बढ़ावा दे रही हैं। 2026 तक यह उद्योग 300 अरब डॉलर का हो सकता है। महिलाओं की भागीदारी से विविधता बढ़ती है और नवाचार मजबूत होता है। भारत की अर्थव्यवस्था में इलेक्ट्रॉनिक्स का योगदान 2% से अधिक है। महिलाएं इस क्षेत्र को अधिक समावेशी बना रही हैं। उद्योग में उनकी उपस्थिति से उत्पादकता में 20% तक वृद्धि देखी गई है। यह लेख सरल शब्दों में इन महिलाओं की कहानियां साझा करेगा। हम देखेंगे कि कैसे वे बाधाओं को तोड़ रही हैं और भविष्य को आकार दे रही हैं।
उद्योग का परिचय और महिलाओं की भूमिका
भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग स्मार्टफोन, सेमीकंडक्टर और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स पर केंद्रित है। यह क्षेत्र नोएडा, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे शहरों में फैला हुआ है। महिलाएं अब 60-65% कार्यबल का हिस्सा हैं। खासकर पीसीबी असेंबली और गुणवत्ता नियंत्रण में। उनकी सटीकता और समर्पण उद्योग को मजबूत बनाते हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर स्किल्स काउंसिल ऑफ इंडिया (ईएसएससीआई) महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण दे रही है। इससे वे उत्पादन लाइन से लेकर डिजाइन तक पहुंच रही हैं।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी 25% है। 2030 तक यह 35% हो सकती है। ये महिलाएं न केवल काम करती हैं बल्कि नेतृत्व भी प्रदान करती हैं। उद्योग के विकास में उनकी भूमिका अपरिहार्य है। महिलाओं की भागीदारी से उद्योग में कम एट्रिशन रेट देखा जाता है। वे जटिल निर्देशों का पालन करने में बेहतर होती हैं। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति मजबूत हो रही है। महिलाओं के योगदान से सस्टेनेबल प्रैक्टिस भी बढ़ रही हैं।
| क्षेत्र | महिलाओं की भागीदारी (%) | मुख्य योगदान |
| पीसीबी असेंबली | 60-65 | सटीकता और फोकस |
| सेमीकंडक्टर डिजाइन | 25 | नवाचार और इंजीनियरिंग |
| इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग | 50+ | कार्यबल स्थिरता |
यह तालिका दर्शाती है कि महिलाएं कैसे विभिन्न क्षेत्रों में योगदान दे रही हैं। सरकारी पहल जैसे ईएसएससीआई महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर रही हैं। इससे रोजगार के अवसर बढ़ते हैं। उद्योग में महिलाओं की भूमिका से भारत वैश्विक हब बन सकता है।
रोशनी नादर मल्होत्रा: एचसीएल टेक्नोलॉजीज की चेयरपर्सन
रोशनी नादर मल्होत्रा भारत की प्रमुख महिला नेता हैं। वे एचसीएल टेक्नोलॉजीज की चेयरपर्सन हैं। 2020 में उन्होंने यह पद संभाला। यह भारतीय आईटी उद्योग में पहली बार था जब कोई महिला प्रमुख कंपनी का नेतृत्व कर रही थी। एचसीएल एक वैश्विक कंपनी है जो इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर दोनों में काम करती है। रोशनी ने कंपनी को नई दिशा दी।
उनकी पृष्ठभूमि मजबूत है। उन्होंने नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी से संचार में डिग्री ली। फिर केलॉग स्कूल से एमबीए किया। एचसीएल को उन्होंने एआई, क्लाउड और आईओटी में मजबूत बनाया। कंपनी का राजस्व बढ़ा। वे सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय हैं। शिव नादर फाउंडेशन के माध्यम से शिक्षा और वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देती हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में उनका योगदान महत्वपूर्ण है। एचसीएल हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों में काम करता है। रोशनी ने महिलाओं को प्रोत्साहित किया। उन्होंने कंपनी में विविधता बढ़ाई। उनकी रणनीति से एचसीएल का वैश्विक बाजार विस्तार हुआ।
रोशनी की यात्रा प्रेरणादायक है। वे साबित करती हैं कि परिवार की पृष्ठभूमि से अलग भी सफलता संभव है।
| उपलब्धि | विवरण | प्रभाव |
| चेयरपर्सन पद | 2020 से एचसीएल का नेतृत्व | कंपनी वृद्धि 20%+ |
| नवाचार फोकस | एआई और आईओटी पर जोर | वैश्विक बाजार विस्तार |
| सामाजिक योगदान | शिक्षा और संरक्षण | लाखों लाभार्थी |
यह तालिका रोशनी की प्रमुख उपलब्धियों को दर्शाती है। उनकी कहानी प्रेरणादायक है। युवा महिलाएं उनसे सीख सकती हैं। रोशनी का नेतृत्व इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को मजबूत कर रहा है।
उपासना ताकू: मोबिक्विक की सह-संस्थापक
उपासना ताकू डिजिटल भुगतान में क्रांति लाईं। वे मोबिक्विक की सह-संस्थापक हैं। 2009 में उन्होंने कंपनी शुरू की। आज यह भारत का सबसे बड़ा मोबाइल पेमेंट नेटवर्क है। 30 मिलियन यूजर्स और 75,000 रिटेलर्स इससे जुड़े हैं। मोबिक्विक ने ग्रामीण क्षेत्रों को डिजिटल बनाया।
उनकी शिक्षा शानदार है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग। स्टैनफोर्ड से मैनेजमेंट साइंस में एमएस। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भुगतान प्लेटफॉर्म बनाया। 2021 में कंपनी लाभदायक बनी। महिलाओं की भागीदारी 25% है उनकी कंपनी में। इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ाव: मोबिक्विक मोबाइल डिवाइसों पर काम करता है। उपासना ने फिनटेक को इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर से जोड़ा। उन्होंने 3.8 मिलियन मर्चेंट्स को जोड़ा। कंपनी का राजस्व 80% बढ़ा।
उपासना की दृष्टि ने भारत को डिजिटल अर्थव्यवस्था में आगे बढ़ाया।
| उपलब्धि | विवरण | प्रभाव |
| कंपनी स्थापना | 2009, मोबिक्विक | 134 मिलियन यूजर्स |
| लाभप्रदता | 2021 में हासिल | 80% YoY वृद्धि |
| विविधता | 25% महिलाएं | उद्योग मानक |
उपासना की मेहनत से लाखों लोगों को लाभ हुआ। वे महिला उद्यमियों के लिए मिसाल हैं। उनकी कहानी दिखाती है कि कैसे छोटे विचार बड़े बदलाव लाते हैं।
राधा वेंबू: जोहो कॉर्प की सह-संस्थापक
राधा वेंबू जोहो कॉर्प की सह-संस्थापक हैं। 1996 में उन्होंने भाइयों के साथ कंपनी शुरू की। आज जोहो बहुराष्ट्रीय कंपनी है। यह सॉफ्टवेयर उत्पादों में विशेषज्ञ है। राधा ने कंपनी को लाभदायक रखा।
राधा उत्पाद प्रबंधक हैं। उन्होंने क्लाउड-आधारित टूल्स विकसित किए। कंपनी लाभदायक है और कोई बाहरी निवेश नहीं लिया। इलेक्ट्रॉनिक्स में जोहो हार्डवेयर एकीकरण पर काम करता है। राधा ने भारतीय तकनीक को वैश्विक बनाया। उनका योगदान: सॉफ्टवेयर जो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों को नियंत्रित करता है। जोहो के टूल्स लाखों व्यवसायों को मदद करते हैं। राधा की रणनीति से कंपनी स्थिर रही।
राधा की सफलता साबित करती है कि स्वतंत्रता से विकास संभव है।
| उपलब्धि | विवरण | प्रभाव |
| कंपनी विकास | 1996 से बहुराष्ट्रीय | लाभदायक विस्तार |
| उत्पाद फोकस | क्लाउड टूल्स | लाखों यूजर्स |
| स्वतंत्रता | कोई निवेश नहीं | स्थिरता |
राधा की सफलता साबित करती है कि महिलाएं तकनीक में नेतृत्व कर सकती हैं। उनकी कहानी लंबे समय की मेहनत को दर्शाती है।
महेश्वरी कृष्णासामी: एआई और सस्टेनेबिलिटी की योद्धा
महेश्वरी कृष्णासामी इलेक्ट्रॉनिक्स में महिलाओं को सशक्त बनाने वाली हैं। वे एआई का उपयोग कर नवाचार लाती हैं। सस्टेनेबल विकास पर उनका फोकस है। उन्होंने महिलाओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए। महेश्वरी ने उद्योग में हरित प्रक्रियाओं को अपनाया।
उनकी यात्रा प्रेरणादायक है। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में उन्होंने महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई। एआई से उत्पादन कुशल बनाया। महेश्वरी ने ईएसएससीआई के साथ मिलकर स्किलिंग प्रोग्राम बनाए। उनका काम पर्यावरण और समाज दोनों को लाभ पहुंचाता है।
महेश्वरी का दृष्टिकोण उद्योग को भविष्योन्मुखी बना रहा है।
| उपलब्धि | विवरण | प्रभाव |
| एआई एकीकरण | नवाचार के लिए | उत्पादकता वृद्धि |
| सस्टेनेबिलिटी | हरित प्रक्रियाएं | पर्यावरण लाभ |
| महिलाओं सशक्तिकरण | प्रशिक्षण | रोजगार अवसर |
महेश्वरी का काम उद्योग को बदल रहा है। वे साबित करती हैं कि तकनीक सामाजिक बदलाव ला सकती है।
अन्नपूर्णा कुचिभटला: बजाज इलेक्ट्रॉनिक्स की सीटीओ
अन्नपूर्णा कुचिभटला बजाज इलेक्ट्रॉनिक्स की सीटीओ हैं। उनके पास 30 वर्षों का अनुभव है। साइबरसिक्योरिटी और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में विशेषज्ञ। उन्होंने कंपनी को सुरक्षित बनाया। अन्नपूर्णा ने डिजिटल टूल्स को उत्पादों में एकीकृत किया।
उनका योगदान: गवर्नेंस और नवाचार। इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों में डिजिटल एकीकरण। अन्नपूर्णा ने महिलाओं को मेंटरशिप प्रदान की। उनकी रणनीति से कंपनी का बाजार हिस्सा बढ़ा।
अन्नपूर्णा का अनुभव उद्योग के लिए मूल्यवान है।
| उपलब्धि | विवरण | प्रभाव |
| सीटीओ भूमिका | 30+ वर्ष अनुभव | साइबरसिक्योरिटी मजबूत |
| डिजिटल फोकस | ट्रांसफॉर्मेशन | व्यवसाय वृद्धि |
| नेतृत्व | महिलाओं के लिए | प्रेरणा |
अन्नपूर्णा की रणनीति उद्योग को मजबूत कर रही है। वे लंबे करियर की मिसाल हैं।
पूजा राव: क्योर.एआई की सह-संस्थापक
पूजा राव डॉक्टर और एआई वैज्ञानिक हैं। उन्होंने क्योर.एआई शुरू की। 2016 में यह हेल्थकेयर स्टार्टअप बना। एआई से स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ बनीं। पूजा ने मेडिकल इमेजिंग को बेहतर बनाया।
इलेक्ट्रॉनिक्स कनेक्शन: मेडिकल डिवाइसों में एआई। पूजा ने चिकित्सा और तकनीक को जोड़ा। क्योर.एआई ने लाखों जीवन बचाए। पूजा का संतुलन प्रेरणादायक है।
पूजा की नवाचार स्वास्थ्य क्षेत्र को बदल रहा है।
| उपलब्धि | विवरण | प्रभाव |
| स्टार्टअप | 2016, क्योर.एआई | स्वास्थ्य पहुंच |
| एआई उपयोग | मेडिकल इमेजिंग | लाखों जीवन प्रभावित |
| संतुलन | डॉक्टर और वैज्ञानिक | नवाचार |
पूजा की मेहनत स्वास्थ्य क्षेत्र को बदल रही है। वे दिखाती हैं कि बहु-क्षेत्रीय विशेषज्ञता कैसे लाभ देती है।
पूजा चत्राथ: ऑन्कक्वेस्ट की सीआईओ
पूजा चत्राथ ऑन्कक्वेस्ट लेबोरेटरीज की सीआईओ हैं। 23 वर्षों का अनुभव। डिजिटल इनोवेशन और सुरक्षा पर फोकस। उन्होंने डेटा सटीकता सुनिश्चित की। पूजा ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को मजबूत बनाया।
महिलाओं को सशक्त बनाना उनका लक्ष्य। पूजा ने पुरस्कार जीते। उनका काम स्वास्थ्य और तकनीक को जोड़ता है।
पूजा का नेतृत्व समावेशी है।
| उपलब्धि | विवरण | प्रभाव |
| सीआईओ | 23 वर्ष अनुभव | डिजिटल कुशलता |
| पुरस्कार | सीएसओ अवॉर्ड | मान्यता |
| विविधता | मेंटरशिप | समावेशिता |
पूजा का नेतृत्व प्रेरणादायक है। वे डेटा सुरक्षा की महत्वपूर्णता सिखाती हैं।
महिलाओं के लिए अवसर और चुनौतियां
इलेक्ट्रॉनिक्स में महिलाओं के अवसर बढ़ रहे हैं। ईएमएस, सेमीकंडक्टर और आईओटी में। ईएसएससीआई प्रशिक्षण देता है। चुनौतियां: सुरक्षा और कार्य-जीवन संतुलन। सरकार पीएलआई से 1 मिलियन नौकरियां पैदा कर रही है। महिलाओं को प्रोत्साहन मिल रहा है।
अवसरों में कौशल विकास मुख्य है। चुनौतियों का सामना करने के लिए नीतियां जरूरी हैं।
| अवसर | विवरण | चुनौती |
| मैन्युफैक्चरिंग | 60% भागीदारी | सुरक्षा |
| डिजाइन | 25% वृद्धि | कौशल अंतर |
| नेतृत्व | सीआईओ/सीटीओ भूमिकाएं | पूर्वाग्रह |
ये अवसर महिलाओं को सशक्त बनाते हैं। भविष्य में अधिक समर्थन से सफलता बढ़ेगी।
उद्योग पर प्रभाव
महिलाओं की भागीदारी से उद्योग $100 बिलियन का हो गया। 2030 तक $1 ट्रिलियन का लक्ष्य। उनकी सटीकता उत्पादकता बढ़ाती है। विविधता नवाचार लाती है। महिलाएं उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धी बना रही हैं।
उनके योगदान से सस्टेनेबिलिटी बढ़ी।
| प्रभाव | डेटा | लाभ |
| कार्यबल | 60% महिलाएं | कम एट्रिशन |
| विकास | $300 बिलियन 2026 | वैश्विक हब |
| नवाचार | एआई एकीकरण | सस्टेनेबिलिटी |
यह प्रभाव भारत को मजबूत बनाता है। महिलाओं की भूमिका से उद्योग का भविष्य उज्ज्वल है।
निष्कर्ष
भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में महिलाएं शक्ति हैं। रोशनी नादर मल्होत्रा, उपासना ताकू और अन्य महिलाओं ने साबित किया है कि वे नवाचार की अगुआई कर सकती हैं। इन महिलाओं की कहानियां दिखाती हैं कि कैसे बाधाओं को तोड़कर सफलता हासिल की जा सकती है। उद्योग अब $100 बिलियन से अधिक का है और 2030 तक $1 ट्रिलियन का लक्ष्य रखता है। महिलाओं की भागीदारी से यह लक्ष्य हासिल होगा।
उनका योगदान न केवल आर्थिक विकास लाता है बल्कि समाज को भी सशक्त बनाता है। रोशनी ने एचसीएल को वैश्विक बनाया, उपासना ने डिजिटल भुगतान को सुलभ किया, और महेश्वरी ने सस्टेनेबिलिटी पर जोर दिया। ये उदाहरण प्रेरणा देते हैं कि महिलाएं हर क्षेत्र में नेतृत्व कर सकती हैं। चुनौतियां जैसे सुरक्षा और पूर्वाग्रह बने रहेंगी, लेकिन सरकारी योजनाएं जैसे पीएलआई और ईएसएससीआई इनका समाधान करेंगी।
भविष्य में अधिक महिलाओं को शामिल करने से उद्योग विविध और मजबूत बनेगा। युवा लड़कियों को स्टेम शिक्षा पर फोकस करना चाहिए। इन नवोन्मेषकों की तरह, वे भी भारत को तकनीकी महाशक्ति बना सकती हैं। अंत में, इन महिलाओं का सफर साबित करता है कि समावेशिता से प्रगति तेज होती है। भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग इनकी बदौलत चमकेगा।
