ऊर्जा

रिलायंस ग्रीन एनर्जीः क्या यह भारत की नवीकरणीय क्रांति का नेतृत्व कर सकता है?

भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। यहां की आबादी 1.4 अरब से अधिक है। ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ रही है। 2025 तक, देश की बिजली जरूरत 1,500 गीगावाट तक पहुंच चुकी है। लेकिन पारंपरिक जीवाश्म ईंधन जैसे कोयला और तेल पर निर्भरता बढ़ रही है। इससे वायु प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य समस्याएं हो रही हैं। भारत को साफ और टिकाऊ ऊर्जा की जरूरत है। इसी बीच, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड जैसी बड़ी कंपनियां ग्रीन एनर्जी पर बड़ा दांव लगा रही हैं।​

रिलायंस ने 2021 में नई ऊर्जा व्यवसाय की शुरुआत की। मुकेश अंबानी ने 10 बिलियन डॉलर का निवेश घोषित किया। यह कंपनी का तेल रिफाइनिंग से साफ ऊर्जा की ओर बड़ा बदलाव है। रिलायंस का फोकस सौर ऊर्जा, हरी हाइड्रोजन, बैटरी स्टोरेज और ग्रीन फ्यूल पर है। 2025 के एनुअल जनरल मीटिंग में अनंत अंबानी ने बताया कि जामनगर गीगाफैक्टरी टेस्ला से चार गुना बड़ी है। कुच्छ में सोलर प्रोजेक्ट सिंगापुर से तीन गुना बड़ा इलाका कवर करेगा।​

ये प्रयास भारत की ऊर्जा सुरक्षा, किफायती और स्थिरता के त्रिकोण को हल करेंगे। रिलायंस नेट-जीरो कार्बन लक्ष्य 2035 तक हासिल करना चाहती है। क्या यह पुश भारत को नवीकरणीय क्रांति का वैश्विक नेता बना सकता है? आइए इस लेख में विस्तार से समझते हैं। हम तथ्यों, आंकड़ों और प्रोजेक्ट्स पर नजर डालेंगे। सरल भाषा में, पाठक-अनुकूल तरीके से।​

भारत में नवीकरणीय ऊर्जा का वर्तमान परिदृश्य

भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। देश जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। पेरिस समझौते के तहत, भारत ने 2030 तक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन 45 प्रतिशत कम करने का वादा किया। जुलाई 2025 तक, कुल बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म स्रोतों से पूरा हो रहा है। यह लक्ष्य से पांच साल पहले हासिल हो गया। सौर, पवन और हाइड्रो ऊर्जा मुख्य योगदानकर्ता हैं।​

सरकार की नीतियां जैसे सोलर पार्क स्कीम और रिन्यूएबल परचेज ऑब्लिगेशन ने निवेश को आकर्षित किया। पहली छमाही 2025 में, भारत ने 22 गीगावाट नई नवीकरणीय क्षमता जोड़ी। इसमें 18.4 गीगावाट सौर और 3.5 गीगावाट पवन ऊर्जा शामिल है। कुल नवीकरणीय क्षमता अब 234 गीगावाट से अधिक हो गई। बड़े हाइड्रो प्रोजेक्ट्स को जोड़कर यह आंकड़ा और मजबूत है।​

नवीकरणीय बिजली उत्पादन में 24.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। जून 2025 में, हाइड्रो को छोड़कर नवीकरणीय स्रोतों का हिस्सा 17 प्रतिशत से ऊपर पहुंचा। हालांकि, कोयला अभी भी 75 प्रतिशत बिजली उत्पादन का स्रोत है। लेकिन ग्रीन शिफ्ट तेज हो रही है।​

भारत का 2030 लक्ष्य 500 गीगावाट नॉन-फॉसिल क्षमता हासिल करना है। इसमें सौर, पवन, हरी हाइड्रोजन और न्यूक्लियर शामिल हैं। सरकार बैटरी स्टोरेज, स्मार्ट ग्रिड और इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम पर निवेश कर रही है। ISTS वेवर नीति ने प्रोजेक्ट्स को तेजी दी।​

नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत वर्तमान क्षमता (2025 तक, गीगावाट) 2030 लक्ष्य (गीगावाट) वार्षिक वृद्धि दर (%)
सौर ऊर्जा 100+ 280 25+
पवन ऊर्जा 45+ 140 10
हाइड्रो (बड़ा) 47 62 5
बायोमास 10+ 10 8
कुल नॉन-फॉसिल 234 500 20

 यह तालिका दिखाती है कि सौर ऊर्जा सबसे तेज बढ़ रही है। ये आंकड़े भारत की ग्रीन एनर्जी महत्वाकांक्षा को दर्शाते हैं।​

रिलायंस की ग्रीन एनर्जी यात्रा की शुरुआत

रिलायंस इंडस्ट्रीज ऊर्जा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी है। यह लंबे समय से पेट्रोलियम रिफाइनिंग में अग्रणी रही। लेकिन अब कंपनी साफ ऊर्जा की ओर मुड़ रही है। 2021 में, मुकेश अंबानी ने नई ऊर्जा व्यवसाय की घोषणा की। कंपनी ने 10 बिलियन डॉलर निवेश का वादा किया। यह निवेश सौर, हाइड्रोजन और स्टोरेज पर केंद्रित है।​ 2025 तक, रिलायंस ने सौर पैनल उत्पादन शुरू कर दिया। अप्रैल 2025 में पहली सौर लाइन कमीशंड हुई। कंपनी हेटरोजंक्शन टेक्नोलॉजी (HJT) का इस्तेमाल कर रही है। इससे पैनल की दक्षता 26 प्रतिशत से अधिक है। ये मॉड्यूल 10 प्रतिशत अधिक ऊर्जा देते हैं। तापमान सहनशीलता 20 प्रतिशत बेहतर है।​

रिलायंस एकीकृत सप्लाई चेन पर जोर दे रही है। पॉलीसिलिकॉन से मॉड्यूल तक सब कुछ घर पर बनाएगी। 2024 के अंत तक 10 गीगावाट क्षमता शुरू हो चुकी। इसे 20 गीगावाट तक बढ़ाने की योजना है। यह दुनिया की सबसे बड़ी एकीकृत साइट बनेगी।​ अनंत अंबानी ने 2025 AGM में कहा कि नई ऊर्जा रिलायंस का भविष्य है। कंपनी प्राकृतिक गैस से भारत की 30 प्रतिशत जरूरत पूरी करती है। लेकिन अब ग्रीन फ्यूल पर शिफ्ट तेज है। यह भारत की ऊर्जा त्रिकोण- सुरक्षा, किफायती और स्थिरता- को सुलझाएगा।​

रिलायंस के प्रमुख निवेश राशि (करोड़ रुपये) क्षेत्र अपेक्षित प्रभाव
गीगाफैक्टरी (जामनगर) 75,000 सौर, हाइड्रोजन 10 GW+ उत्पादन
कुल ग्रीन एनर्जी 10 बिलियन डॉलर समग्र नेट-जीरो 2035
हरी हाइड्रोजन प्रोजेक्ट 5,000+ हाइड्रोजन 3 MMTPA 2032
सौर प्रोजेक्ट (कुच्छ) 20,000+ सौर 10% भारत बिजली

 ये निवेश भारत को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास हैं।​

धीरूभाई अंबानी ग्रीन एनर्जी गीगाफैक्टरी

धीरूभाई अंबानी ग्रीन एनर्जी गीगाफैक्टरी जामनगर, गुजरात में बन रही है। यह 5,000 एकड़ में फैली दुनिया की सबसे बड़ी रिन्यूएबल मैन्युफैक्चरिंग साइट होगी। कंपनी के संस्थापक के नाम पर यह प्रोजेक्ट भारत की ग्रीन महत्वाकांक्षा का प्रतीक है। निर्माण रिकॉर्ड गति से चल रहा है।​ प्रोजेक्ट की लागत 75,000 करोड़ रुपये है। इसमें सौर PV पैनल, बैटरी स्टोरेज, इलेक्ट्रोलाइजर और फ्यूल सेल का उत्पादन होगा। पहला चरण 20 गीगावाट सौर मॉड्यूल के लिए था। 2025 तक प्रगति 50 प्रतिशत से अधिक है। सोलर फैसिलिटी ने 200 MW HJT मॉड्यूल बना लिए।​

अनंत अंबानी ने कहा कि यह टेस्ला गीगाफैक्टरी से चार गुना बड़ा है। 7 लाख टन स्टील और 3.4 मिलियन क्यूबिक मीटर कंक्रीट इस्तेमाल हो रहा। 2025 AGM में इसे ‘न्यू रिलायंस’ का केंद्र कहा गया। बैटरी गीगाफैक्टरी 2026 में 40 GWh से शुरू होगी। इसे 100 GWh तक बढ़ाया जाएगा।​ फैक्टरी जामनगर रिफाइनरी के पास बनी है। यह पुरानी और नई ऊर्जा को जोड़ेगी। REC सिंगापुर से तकनीक ली गई। पेरovskाइट और HJT-IBC तकनीकें दो साल में आएंगी। इससे लागत कम होगी।​

गीगाफैक्टरी के चरण क्षमता पूरा होने का समय तकनीक
पहला चरण (सौर मॉड्यूल) 20 GW 2025 HJT
बैटरी स्टोरेज 5 GWh 2024 लिथियम-आयन
विस्तार 50 GWh 2027 उन्नत
पूर्ण क्षमता 100 GWh 2030 मॉड्यूलर

 यह तालिका प्रोजेक्ट की स्केल और टेक्नोलॉजी दिखाती है।​

कुच्छ में मेगा सोलर प्रोजेक्ट

गुजरात के कुच्छ में रिलायंस दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-साइट सोलर प्रोजेक्ट बना रही है। यह 5,50,000 एकड़ शुष्क भूमि पर फैला है। सिंगापुर के आकार से तीन गुना बड़ा। यह इलाका सूर्य की रोशनी के लिए आदर्श है। प्रोजेक्ट भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का बड़ा कदम है।​ पीक पर, रोज 55 मेगावाट सौर मॉड्यूल और 150 मेगावाट घंटा बैटरी लगेंगी। यह भारत की 10 प्रतिशत बिजली जरूरत पूरी कर सकता है। प्रोजेक्ट 2030 तक चलेगा। निर्माण तेज गति से हो रहा।​

यहां ग्रीन हाइड्रोजन, अमोनिया, मेथनॉल और एविएशन फ्यूल बनेगा। पहले रिलायंस की अपनी जरूरत पूरी होगी। फिर निर्यात पर फोकस। कुच्छ का स्थान बंदरगाहों के पास होने से लॉजिस्टिक आसान है।​ अनंत अंबानी ने कहा कि यह भारत को ग्रीन हाइड्रोजन का ग्लोबल हब बनाएगा। प्रोजेक्ट से स्थानीय रोजगार बढ़ेगा। हजारों नौकरियां पैदा होंगी। अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।​

कुच्छ सोलर प्रोजेक्ट विवरण आंकड़े लाभ निर्यात संभावना
क्षेत्रफल 5,50,000 एकड़ शुष्क भूमि उपयोग हाई
दैनिक उत्पादन 55 MW मॉड्यूल 10% भारत बिजली ग्लोबल
हाइड्रोजन लक्ष्य 3 MMTPA by 2032 निर्यात फोकस अमोनिया, फ्यूल
बैटरी 150 MWh दैनिक स्टोरेज समाधान EV एकीकरण

 यह प्रोजेक्ट रिन्यूएबल रेवोल्यूशन का प्रतीक है।​

ग्रीन हाइड्रोजन की दिशा में रिलायंस के कदम

ग्रीन हाइड्रोजन साफ ईंधन का भविष्य है। यह पानी के इलेक्ट्रोलिसिस से बनता है। रिलायंस इसमें भारी निवेश कर रही। मार्च 2025 में, SECI टेंडर जीता। 49,000 मीट्रिक टन सालाना क्षमता मिली। इंसेंटिव 400 करोड़ से अधिक।​ कुल लक्ष्य 2032 तक 3 मिलियन टन प्रति वर्ष। कुच्छ प्रोजेक्ट से शुरूआत होगी। हरी हाइड्रोजन स्टील, सीमेंट और ट्रांसपोर्ट को प्रदूषण-मुक्त करेगा। लागत 1 डॉलर प्रति किलो तक लानी है।​

रिलायंस ने L&T, AM Green के साथ टेंडर जीते। SIGHT स्कीम से 4,50,000 टन क्षमता आवंटित। इलेक्ट्रोलाइजर गीगाफैक्टरी 2026 तक 3 GW क्षमता वाली शुरू होगी।​ ग्रीन हाइड्रोजन भारत को आयात पर निर्भरता कम करेगा। रिलायंस वैश्विक पार्टनरशिप से तकनीक ले रही। यह इंडस्ट्री को बदल देगा।​

हरी हाइड्रोजन प्रोजेक्ट क्षमता (MT/वर्ष) इंसेंटिव (करोड़) लक्ष्य वर्ष
रिलायंस ग्रीन 49,000 400+ 2026
L&T एनर्जी 90,000 500+ 2027
AM ग्रीन अमोनिया 90,000 513 2026
वारे क्लीन एनर्जी 90,000 510 2027

 ये आंकड़े सेक्टर की तेज ग्रोथ दिखाते हैं।​

चुनौतियाँ और अवसर

नवीकरणीय ऊर्जा का सफर आसान नहीं। ग्रिड इंटीग्रेशन बड़ी चुनौती है। सौर और पवन ऊर्जा मौसम पर निर्भर। स्टोरेज की कमी से बिजली बर्बाद होती।​भूमि अधिग्रहण, फाइनेंसिंग और नीति स्थिरता की समस्या। कोयला लॉबी मजबूत है। 75 प्रतिशत बिजली अभी कोयले से। FDI आकर्षित करने के लिए रेगुलेटरी क्लैरिटी चाहिए।​

लेकिन अवसर अनगिनत हैं। 500 GW लक्ष्य से 20 लाख नौकरियां पैदा होंगी। निवेश 10 लाख करोड़ से अधिक आएगा। AI और IoT से स्मार्ट ग्रिड बनेगा।​ग्रीन हाइड्रोजन से इंडस्ट्री डीकार्बनाइज होगी। रिलायंस जैसी कंपनियां इनका फायदा उठा रही। सरकारी सब्सिडी और PPP मॉडल मदद करेंगे।​

चुनौतियाँ समाधान/अवसर अपेक्षित प्रभाव
ग्रिड इंटीग्रेशन स्मार्ट ग्रिड 20% दक्षता
स्टोरेज की कमी बैटरी विकास 50 GWh लक्ष्य
फाइनेंसिंग FDI और सब्सिडी 10 लाख करोड़
भूमि और नीति सरकारी समर्थन तेज प्रोजेक्ट

 रिलायंस इन चुनौतियों से निपट रही। अवसरों का लाभ ले रही।​

भारत के 2030 लक्ष्य और रिलायंस की भूमिका

2030 तक 500 GW नॉन-फॉसिल क्षमता का लक्ष्य चुनौतीपूर्ण है। लेकिन 2025 की प्रगति प्रेरणादायक। 2024 में 28 GW जोड़ी गई। 2025 में 32 GW की उम्मीद। सौर में 25 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि।​ रिलायंस की भूमिका केंद्रीय है। गीगाफैक्टरी और कुच्छ से 10 प्रतिशत बिजली योगदान। हरी हाइड्रोजन से 3 MMTPA उत्पादन। यह आत्मनिर्भरता बढ़ाएगा।​

कंपनी R&D के लिए सिंगापुर लैब इस्तेमाल कर रही। निर्यात से विदेशी मुद्रा आएगी। वैश्विक टाई-अप जैसे REC से तकनीक।​ सरकार-प्राइवेट पार्टनरशिप जरूरी। रिलायंस का पुश क्रांति को लीड करेगा। भारत ग्लोबल ग्रीन लीडर बनेगा।​

निष्कर्ष

रिलायंस का ग्रीन एनर्जी पुश भारत के लिए एक बड़ा मोड़ है। कंपनी के मेगा प्रोजेक्ट्स जैसे जामनगर गीगाफैक्टरी और कुच्छ सोलर साइट नवीकरणीय क्रांति को नई गति देंगे। 10 बिलियन डॉलर निवेश से सौर, हाइड्रोजन और स्टोरेज में आत्मनिर्भरता आएगी। चुनौतियां जैसे ग्रिड और फाइनेंसिंग हैं, लेकिन अवसर जैसे नौकरियां और निर्यात ज्यादा।​

भारत 2030 लक्ष्य हासिल कर साफ ऊर्जा में वैश्विक नेता बनेगा। रिलायंस का योगदान इसमें निर्णायक। अनंत अंबानी की तरह युवा नेतृत्व से भविष्य उज्ज्वल। यह न केवल पर्यावरण बचाएगा, बल्कि अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा। हर भारतीय को ग्रीन एनर्जी अपनानी चाहिए। भविष्य हरा, साफ और समृद्ध होगा।