खैबर पख्तूनख्वा में सीमा पर अफगान तालिबान के साथ पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की झड़प
पेशावर: मंगलवार रात को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कुर्रम जिले में पाकिस्तान और अफगानिस्तान की विवादित डूरंड लाइन सीमा पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और अफगान तालिबान के बीच फिर से तीव्र गोलीबारी हुई। यह घटना दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को दर्शाती है, जहां आतंकवाद, सीमा उल्लंघन और क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताएं प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। पाकिस्तान के राज्य मीडिया, विशेष रूप से सरकारी प्रसारक पीटीवी न्यूज ने इसकी पुष्टि की है। रिपोर्ट के अनुसार, अफगान तालिबान और पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा ‘फित्ना अल-ख्वारिज’ कहे जाने वाले उग्रवादियों ने कुर्रम क्षेत्र में बिना किसी पूर्व चेतावनी के अचानक फायरिंग शुरू कर दी। पाकिस्तानी सेना ने तुरंत पूरे दमखम से जवाब दिया, जिससे सीमा पर भारी संघर्ष छिड़ गया। ‘फित्ना अल-ख्वारिज’ एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल पाकिस्तानी सरकार प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के सदस्यों के लिए करती है, जो आईएसआईएस और अल-कायदा से प्रेरित उग्रवादी गतिविधियों में लिप्त रहते हैं।
यह झड़प पाक-अफगान सीमा पर हाल के दिनों में बढ़ती हिंसा की कड़ी का हिस्सा है। रॉयटर्स और बीबीसी न्यूज जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की रिपोर्ट्स के मुताबिक, टीटीपी ने 2021 में तालिबान के अफगानिस्तान में सत्ता हासिल करने के बाद से पाकिस्तान में कई हमले किए हैं, जिसमें सैनिकों और नागरिकों की मौत हुई है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगान तालिबान टीटीपी को पनाह दे रहा है, जबकि काबुल इन दावों को सिरे से खारिज करता है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट्स भी इस क्षेत्र में उग्रवादियों की मौजूदगी की पुष्टि करती हैं, जो सीमा पार हमलों को बढ़ावा दे रही है। कुर्रम जिला, जो पश्तून बहुल क्षेत्र है, लंबे समय से ऐसे संघर्षों का केंद्र रहा है, जहां स्थानीय जनजातियां दोनों पक्षों के बीच फंसकर प्रभावित हो रही हैं।
संघर्ष का विस्तृत विवरण और पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई
पीटीवी न्यूज की प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया गया कि अफगान तालिबान की सीमा चौकियों पर पाकिस्तानी सेना की जवाबी कार्रवाई से भारी तबाही हुई। कम से कम एक तालिबान टैंक को सीधे निशाना बनाकर नष्ट कर दिया गया, जिससे आग की लपटें और धुंआआ दूर तक दिखाई दिया। गोलीबारी की तीव्रता इतनी थी कि तालिबान लड़ाके अपनी पोजीशंस छोड़कर पीछे हट गए। बाद की अपडेट्स में उल्लेख किया गया कि कुर्रम सेक्टर में अफगान तालिबान की एक अतिरिक्त चौकी और टैंक स्थापना को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया। इसके अलावा, शमसादर पोस्ट पर स्थित चौथी टैंक पोजीशन को भी पाकिस्तानी तोपखाने और हल्के हथियारों से निशाना बनाया गया। विश्वसनीय स्रोतों जैसे द गार्जियन और एल जजीरा के अनुसार, ऐसी कार्रवाइयों में पाकिस्तानी सेना अक्सर ड्रोन और आर्टिलरी का इस्तेमाल करती है, जो सीमा पर सटीक हमले सुनिश्चित करता है।
इस ऑपरेशन के दौरान, पाकिस्तानी खुफिया स्रोतों ने दावा किया कि फित्ना अल-ख्वारिज (टीटीपी) का एक वरिष्ठ कमांडर मारा गया। इस कमांडर की पहचान अभी गोपनीय रखी गई है, लेकिन आईएसपीआर (इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस) ने पुष्टि की है कि यह व्यक्ति कई सीमा पार हमलों का मास्टरमाइंड था। आईएसपीआर, जो पाकिस्तानी सैन्य का आधिकारिक प्रवक्ता है, ने बताया कि वीकेंड में हुई पिछली घटना में अफगान तालिबान ने पाकिस्तानी चौकियों पर अचानक हमला किया था, जिसमें 23 पाकिस्तानी सैनिक शहीद हो गए। पाकिस्तान की त्वरित जवाबी कार्रवाई में 200 से अधिक तालिबान लड़ाके और उनके सहयोगी उग्रवादी मारे गए। यह आंकड़ा आईएसपीआर की आधिकारिक प्रेस रिलीज पर आधारित है, जो सैन्य सफलताओं को हाइलाइट करने के लिए जाना जाता है। हालांकि, अफगान पक्ष ने इन नुकसान के आंकड़ों को कम करके आंका है।
कूटनीतिक मोर्चा: पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय अपील
सोमवार को पाकिस्तानी विदेश कार्यालय ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। विदेश सचिव अमना बलोच ने इस्लामाबाद में तैनात विभिन्न देशों के राजदूतों को पाक-अफगान सीमा पर हालिया घटनाक्रमों पर विस्तृत ब्रिफिंग दी। ब्रिफिंग में उन्होंने पाकिस्तान की वैध सुरक्षा चिंताओं पर जोर दिया, जैसे कि सीमा पार आतंकवाद और क्षेत्रीय स्थिरता। विदेश कार्यालय के बयान में कहा गया कि पाकिस्तान अपनी क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए किसी भी हद तक प्रतिबद्ध है। यह ब्रिफिंग अमेरिका, चीन, सऊदी अरब और अन्य प्रमुख देशों के राजदूतों को संबोधित की गई, जो क्षेत्रीय शांति में रुचि रखते हैं।
पाकिस्तान ने लंबे समय से काबुल से मांग की है कि वह टीटीपी जैसे संगठनों को अफगान मिट्टी पर पनाह न दे। एपी न्यूज और सीएनएन की रिपोर्ट्स के अनुसार, 2024-2025 में पाकिस्तान ने कई बार ड्रोन हमले किए हैं, जो अफगानिस्तान के अंदर टीटीपी के कैंपों को निशाना बनाते हैं। हालांकि, इस हफ्ते के कथित हवाई हमलों की पाकिस्तान ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन इस्लामाबाद ने दोहराया है कि वह आत्मरक्षा के अधिकार का इस्तेमाल करेगा। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की हालिया चर्चाओं में भी इस मुद्दे को उठाया गया है, जहां पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से उग्रवादियों को नियंत्रित करने की अपील की है।
अफगानिस्तान का दृष्टिकोण और गहराते विवाद
अफगान तालिबान सरकार ने वीकेंड के हमले को ‘प्रतिशोधी’ कार्रवाई करार दिया है। काबुल के अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान ने पिछले हफ्ते अफगान क्षेत्र के अंदर हवाई हमले किए थे, जिसमें उनके सैनिकों को नुकसान पहुंचा। तालिबान प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा कि अफगान मिट्टी का इस्तेमाल किसी भी पड़ोसी देश के खिलाफ नहीं हो रहा, और पाकिस्तान के आरोप आधारहीन हैं। ह्यूमन राइट्स वॉच और यूएनएएम (संयुक्त राष्ट्र अफगान मिशन) की रिपोर्ट्स के मुताबिक, अफगानिस्तान में आर्थिक संकट और आंतरिक अस्थिरता के कारण तालिबान सीमा सुरक्षा पर कम ध्यान दे पा रहा है, जिससे उग्रवादी समूहों को फायदा हो रहा है।
यह विवाद 2021 के बाद से और गहरा गया है, जब तालिबान ने काबुल पर कब्जा किया। डूरंड लाइन, जो 1893 में ब्रिटिश काल में खींची गई थी, दोनों देशों के बीच विवाद का प्रमुख कारण है। पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है, जबकि अफगानिस्तान इसे अस्वीकार करता है। कुर्रम जैसे जिलों में स्थानीय पश्तून समुदाय को सबसे अधिक नुकसान हो रहा है—व्यापार रुक गया है, स्कूल बंद हैं, और हजारों लोग विस्थापित हो चुके हैं। विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, सीमा तनाव ने क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को अरबों डॉलर का नुकसान पहुंचाया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, जिसमें भारत, ईरान और मध्य एशियाई देश शामिल हैं, ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है, ताकि क्षेत्रीय शांति बहाल हो सके।
