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पाकिस्तान ने अफगान क्रिकेटरों की मौत पर आईसीसी के बयान की निंदा की, दावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए

पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के उस बयान की तीखी आलोचना की है, जिसमें अफगानिस्तान के पक्तिका प्रांत में हुए हवाई हमले में तीन युवा क्रिकेटरों की मौत को पाकिस्तानी हमले से जोड़ा गया था। यह विवाद तब भड़का जब आईसीसी और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने शनिवार को इन मौतों पर शोक संदेश जारी किए, लेकिन बयान में स्पष्ट रूप से पाकिस्तान का नाम लिए बिना ही सामान्य शोक व्यक्त किया गया। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तारर ने इन बयानों को पूरी तरह खारिज कर दिया और अफगानिस्तान के दावों को असत्यापित बताते हुए आईसीसी की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। रॉयटर्स और बीबीसी जैसी विश्वसनीय एजेंसियों की रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र में तालिबान शासन के बाद बढ़ते तनाव का हिस्सा लगती है, जहां हवाई हमलों की जिम्मेदारी अक्सर अस्पष्ट रह जाती है।

अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (एसीबी) ने इस घटना के बाद पाकिस्तान में होने वाली आगामी त्रिकोणीय सीरीज से अपनी टीम को तुरंत हटा लिया, जिससे क्रिकेट जगत में हलचल मच गई। इस सीरीज में मूल रूप से पाकिस्तान, अफगानिस्तान और श्रीलंका की टीमें भाग लेने वाली थीं, जो 25 अक्टूबर से लाहौर में शुरू होनी थी। एसीबी के इस फैसले के तुरंत बाद आईसीसी और बीसीसीआई ने शोक व्यक्त किया, लेकिन पाकिस्तान का पक्ष नजरअंदाज करने से विवाद और गहरा हो गया। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने संकट को संभालते हुए अगले ही दिन जिम्बाब्वे को अफगानिस्तान की जगह आमंत्रित किया, ताकि सीरीज बिना किसी देरी के आगे बढ़ सके। पीसीबी के चेयरमैन मोहसिन नकवी ने कहा कि यह बदलाव क्रिकेट की भावना को बनाए रखने के लिए जरूरी था, और जिम्बाब्वे ने तुरंत सहमति जता दी। इस सीरीज का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की वापसी को मजबूत करने का एक कदम था, खासकर 2009 के लाहौर हमले के बाद से चली आ रही सुरक्षा चुनौतियों के बीच।

आईसीसी के बयान को पाकिस्तान ने किया पूरी तरह खारिज, सत्यापन की कमी पर जोर

सूचना मंत्री अताउल्लाह तारर ने रविवार को एक विस्तृत बयान जारी करते हुए आईसीसी के रुख की कड़ी निंदा की। “हम आईसीसी के इस बयान को पूरी तरह खारिज करते हैं और इसकी निंदा करते हैं, क्योंकि यह गलत धारणा पैदा करता है कि तीन अफगान क्रिकेटर पाकिस्तानी हवाई हमलों में मारे गए,” तारर ने कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आईसीसी ने अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के दावों की कोई स्वतंत्र जांच नहीं की और बिना प्रमाण के ही पाकिस्तान पर उंगली उठा दी। तारर ने पाकिस्तान को आतंकवाद का सबसे बड़ा शिकार बताते हुए कहा कि देश ने दशकों से आतंकी घटनाओं का सामना किया है, जिसमें हजारों निर्दोष जानें गई हैं। उन्होंने आईसीसी से अपील की कि वह अपना बयान तुरंत संशोधित करे और तथ्यों की सही जांच कराए।

विश्वसनीय स्रोतों जैसे एपी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान ने पक्तिका प्रांत के शराना जिले में 18 अक्टूबर को हुए हवाई हमले में तीन युवा क्रिकेटरों—असादुल्लाह (उम्र 22), हसन मोहिबी (उम्र 20) और शरीफुल्लाह (उम्र 19)—की मौत की पुष्टि की है। ये खिलाड़ी स्थानीय स्तर पर उभरते सितारे थे और अफगानिस्तान की अंडर-19 टीम के लिए खेलते थे। अफगान अधिकारियों ने दावा किया कि हमला पाकिस्तानी ड्रोन से किया गया, लेकिन पाकिस्तान ने इसे सिरे से नकार दिया और कहा कि उनके किसी भी सैन्य ऑपरेशन में ऐसी कोई घटना नहीं हुई। इस क्षेत्र में तालिबान और आईएसआईएस-के के बीच चल रहे संघर्ष के कारण हवाई हमले आम हैं, लेकिन जिम्मेदारी तय करना हमेशा मुश्किल होता है। तारर ने जोर देकर कहा कि आईसीसी जैसे वैश्विक संगठन को राजनीतिक दबाव में आकर बयान नहीं देने चाहिए, बल्कि तथ्यों पर आधारित रहना चाहिए।

अफगान क्रिकेटरों की सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया, आईसीसी की स्वतंत्रता पर सवालों का दौर

तारर ने बयान में यह भी उल्लेख किया कि आईसीसी के बयान के महज कुछ घंटों बाद ही आईसीसी के चेयरमैन जय शाह ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर वही शब्दों का इस्तेमाल करते हुए शोक व्यक्त किया। इसके बाद अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने भी समान बयान जारी कर दिया, जो संयोग से अधिक लगता है। “अफगानिस्तान बोर्ड ने बिना किसी ठोस सबूत या फोरेंसिक जांच के बयान दिए, जो आईसीसी की स्वतंत्रता और निष्पक्ष दृष्टिकोण पर गंभीर सवाल खड़े करता है,” तारर ने कहा। उन्होंने चेतावनी दी कि एक अंतरराष्ट्रीय खेल संगठन को विवादास्पद दावों को बढ़ावा देकर खेल की भावना को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए।

अफगान क्रिकेट समुदाय में इस घटना ने गहरा सदमा पहुंचाया है। प्रमुख खिलाड़ी राशिद खान, जो टी20 विश्व कप में अफगानिस्तान के स्टार स्पिनर हैं, ने एक्स पर पोस्ट किया: “हमारे युवा भाइयों की मौत बेहद दुखद है। क्रिकेट हमें एकजुट करता है, लेकिन ऐसी हिंसा हमें तोड़ रही है। शांति की पुकार!” इसी तरह, ऑलराउंडर गुलबदीन नईब ने एक वीडियो शेयर करते हुए कहा कि ये क्रिकेटर भविष्य की उम्मीद थे और उनकी मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया। अन्य खिलाड़ियों जैसे मोहम्मद नबी और रहमत शाह ने भी सोशल मीडिया पर एकजुट होकर निंदा की, जिसमें उन्होंने हमले की जांच की मांग की। बीबीसी स्पोर्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ये प्रतिक्रियाएं न केवल दुख व्यक्त करती हैं बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय से न्याय की अपील भी करती हैं। तारर ने हाल के अन्य घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए कहा कि एशिया कप 2023 के दौरान श्रीलंका के खिलाफ पाकिस्तान के मैच में हुआ ‘नो-हैंडशेक’ विवाद भी आईसीसी की पूर्वाग्रहपूर्ण नीतियों को उजागर करता है, जहां पाकिस्तानी खिलाड़ियों के साथ भेदभाव के आरोप लगे थे।

क्रिकेट बोर्डों के बीच बढ़ता तनाव, त्रिकोणीय सीरीज का भविष्य और व्यापक प्रभाव

इस पूरे प्रकरण ने पाकिस्तान, अफगानिस्तान और आईसीसी के बीच तनाव को नई ऊंचाई दे दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना न केवल क्रिकेट की राजनीति को प्रभावित करेगी बल्कि अंतरराष्ट्रीय खेलों में दावों की सत्यापन प्रक्रिया को मजबूत करने की जरूरत पर जोर देगी। पीसीबी की त्वरित प्रतिक्रिया से जिम्बाब्वे की भागीदारी पक्की हो गई है, और सीरीज अब पाकिस्तान, श्रीलंका और जिम्बाब्वे के बीच लड़ी जाएगी। श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने इस बदलाव का स्वागत किया है, जबकि जिम्बाब्वे के कप्तान क्रेग एर्विन ने कहा कि वे इस अवसर का सम्मान करेंगे और अच्छा क्रिकेट खेलेंगे।

ऐतिहासिक संदर्भ में देखें तो पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा विवाद दुरुस्तन लाइन को लेकर लंबे समय से चला आ रहा है, जो 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद और तीव्र हो गया। क्रिकेट को अक्सर इन दोनों देशों के बीच डिप्लोमेसी का माध्यम माना जाता है, लेकिन ऐसी घटनाएं इसे खतरे में डाल रही हैं। एक्सपर्ट्स जैसे पूर्व पाकिस्तानी कप्तान वसीम अकरम ने कहा कि आईसीसी को एक स्वतंत्र जांच समिति गठित करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी गलतफहमियां न हों। इस विवाद से न केवल खिलाड़ियों की सुरक्षा पर सवाल उठे हैं बल्कि वैश्विक क्रिकेट कैलेंडर पर भी असर पड़ सकता है, खासकर जब टी20 विश्व कप 2026 की मेजबानी ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड को मिली है। क्रिकेट प्रेमी उम्मीद कर रहे हैं कि यह मामला शांति और सहयोग की दिशा में हल हो, ताकि खेल राजनीति के चपेट में न आए।

यह जानकारी द टाइम्स ऑफ इंडिया और मिंट से एकत्र की गई है