पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ 48 घंटे के संघर्ष विराम को समाप्त करते हुए फिर से हवाई हमले शुरू किए
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर हाल ही में हुई हिंसक झड़पों के बाद लागू 48 घंटे का अस्थायी युद्धविराम अब पूरी तरह से टूट चुका है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। विदेशी मीडिया एजेंसी एएफपी की 8 अक्टूबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय समयानुसार उसी दिन अफगान अधिकारियों ने घोषणा की कि पाकिस्तानी सेना ने पिछले दोपहर पक्तिका प्रांत के ग्रामीण इलाकों में हवाई हमले किए, जिसमें कम से कम 10 लोग मारे गए। एक वरिष्ठ तालिबानी अधिकारी ने एएफपी को विशेष रूप से बताया, “पाकिस्तान ने युद्धविराम का उल्लंघन किया और पक्तिका प्रांत के तीन अलग-अलग स्थानों पर बमबारी की, जो नागरिक क्षेत्रों के करीब थे।” यह हमला न केवल सैन्य लक्ष्यों पर केंद्रित था, बल्कि इससे आसपास के गांवों में भय का माहौल पैदा हो गया है।
रॉयटर्स की ताजा कवरेज के मुताबिक, पक्तिका प्रांत अफगानिस्तान के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित है, जो दुर्गम पहाड़ी इलाकों के लिए जाना जाता है और लंबे समय से आतंकवादी समूहों की पनाहगाह रहा है। यहां की आबादी मुख्य रूप से पश्तून समुदाय की है, जो दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और जातीय संबंधों को जटिल बनाती है। पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा विवाद का इतिहास दशकों पुराना है, जो 1947 के बंटवारे से जुड़ा हुआ है, और ड्यूरंड लाइन नामक इस सीमा को अफगानिस्तान कभी पूरी तरह स्वीकार नहीं कर पाया। हाल के वर्षों में, तालिबान के सत्ता में आने के बाद (2021 में), सीमा पर घुसपैठ और हमलों की घटनाएं बढ़ गई हैं।
हवाई हमलों में नागरिकों की भारी क्षति, क्रिकेट खिलाड़ियों की मौत ने सदमा दिया
इन हवाई हमलों के परिणाम बेहद दुखद रहे। स्थानीय अस्पताल अधिकारियों के अनुसार, 10 नागरिक मारे गए, जिनमें दो मासूम बच्चे शामिल थे, जबकि 12 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को निकटतम स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि कई लोगों को शारीरिक चोटों के अलावा मानसिक आघात भी झेलना पड़ रहा है। बीबीसी की रिपोर्ट में उल्लेख है कि हमलों के दौरान इस्तेमाल किए गए ड्रोन और जेट विमानों ने सटीक निशाना साधा था, लेकिन सिविलियन क्षेत्रों में फैलाव के कारण अनावश्यक क्षति हुई। संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता एजेंसी (यूएनएचसीआर) ने इस घटना पर चिंता जताई है, क्योंकि सीमा क्षेत्र में पहले से ही विस्थापन की समस्या गंभीर है—हजारों परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं।
इस त्रासदी ने खेल जगत को भी प्रभावित किया है। अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (एसीबी) ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए घोषणा की कि वह अगले महीने होने वाले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं लेगा, जिसमें पाकिस्तान, भारत और बांग्लादेश जैसे देश शामिल हैं। कारण स्पष्ट है: हवाई हमलों में मारे गए 10 लोगों में तीन क्रिकेट खिलाड़ी भी थे, जो स्थानीय स्तर पर सक्रिय थे और पक्तिका प्रांत के एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखते थे। बीबीसी स्पोर्ट्स और ईएसपीएन क्रिकइंफो की रिपोर्ट्स के अनुसार, ये खिलाड़ी अफगानिस्तान की युवा क्रिकेट टीम के सदस्य थे और राष्ट्रीय टूर्नामेंट के लिए तैयारी कर रहे थे। एसीबी के एक अधिकारी ने कहा, “यह न केवल खेल का नुकसान है, बल्कि हमारे युवाओं के सपनों पर हमला है।” क्रिकेट अफगानिस्तान में एक लोकप्रिय खेल है, जो तालिबान शासन के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिला रहा है, और इस फैसले से टूर्नामेंट की संरचना पर असर पड़ सकता है।
पाकिस्तान का बचाव: हाफिज गुल बहादुर जैसे आतंकियों को निशाना बनाया
पाकिस्तान ने इन हवाई हमलों को पूरी तरह स्वीकार करते हुए अपना पक्ष रखा है। एक वरिष्ठ पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी ने मीडिया को बताया, “हमने अफगान सीमा क्षेत्र में हाफिज गुल बहादुर को निशाना बनाकर एक सटीक और सीमित हमला किया, जो आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए जरूरी था।” हाफिज गुल बहादुर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से जुड़े एक प्रमुख सशस्त्र समूह का सरगना है। टीटीपी, जो 2007 में गठित हुआ, पाकिस्तानी सरकार को उखाड़ फेंकने और शरिया कानून पर आधारित इस्लामी अमीरात स्थापित करने का लक्ष्य रखता है। यह समूह उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत और अफगान सीमा के पास सक्रिय है, जहां से यह पाकिस्तानी शहरों में बम विस्फोट, सैन्य ठिकानों पर हमले और अपहरण जैसी घटनाओं को अंजाम देता है।
यूएन सिक्योरिटी काउंसिल की रिपोर्ट्स और एएफपी के विश्लेषण से पता चलता है कि टीटीपी ने 2024-2025 में पाकिस्तान में 500 से अधिक हमले किए हैं, जिनमें सैन्य काफिलों पर आईईडी हमले और सरकारी अधिकारियों की हत्याएं शामिल हैं। हाफिज गुल बहादुर को अमेरिका और पाकिस्तान दोनों ने वैश्विक आतंकवादी घोषित किया है, और उसके सिर पर 50 लाख डॉलर का इनाम है। पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान पर आरोप लगाता रहा है कि तालिबान शासन टीटीपी को सुरक्षित आश्रय दे रहा है, जबकि काबुल इसे खारिज करता है। रॉयटर्स की एक हालिया जांच में सामने आया है कि सीमा पार हार-ताबादला घुसपैठ आम है, जो दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी को दर्शाता है।
पिछले हमलों का सिलसिला: काबुल पर बमबारी से शुरू हुई आग
यह वर्तमान हमला अचानक नहीं हुआ; यह एक सिलसिले का हिस्सा है। 9 अक्टूबर 2025 को पाकिस्तानी सेना ने अफगान राजधानी काबुल और उसके आसपास के अन्य क्षेत्रों—जैसे कुंदुज और नंगरहार प्रांत—पर टीटीपी के नेतृत्व को निशाना बनाने के बहाने हवाई बमबारी की थी। इन हमलों में कम से कम 15 लोग मारे गए थे, जिनमें कुछ नागरिक शामिल थे, जैसा कि अल जजीरा की रिपोर्ट में उल्लेख है। पाकिस्तान का दावा था कि यह “आत्मरक्षा” का कदम था, क्योंकि टीटीपी ने हाल ही में पेशावर में एक बड़ा हमला किया था, जिसमें 20 सैनिक शहीद हुए थे।
इसके जवाब में, 11 अक्टूबर को अफगान तालिबान शासन ने पाकिस्तानी सेना पर छह अलग-अलग सीमा स्थानों—जिनमें चमन, टार्गार और स्पिन बोल्डक शामिल हैं—से हमला किया, जिससे तीव्र झड़पें भड़क उठीं। ये झड़पें कई घंटों तक चलीं, जिसमें तोपखाने, मशीनगन और रॉकेट लॉन्चर का इस्तेमाल हुआ। पाकिस्तानी सेना के आधिकारिक बयान के अनुसार, इन झड़पों में 200 अफगान तालिबान शासन के अधिकारी और लड़ाके मारे गए, जबकि उनके 23 सैनिक शहीद हो गए। इधर, अफगान सैन्य अधिकारियों का दावा है कि उनके केवल नौ सैनिक मारे गए, जबकि पाकिस्तानी सेना को 58 की भारी क्षति हुई। इन आंकड़ों में स्पष्ट विरोधाभास है, जो प्रचार युद्ध का हिस्सा लगता है। बीबीसी और रॉयटर्स की जमीनी रिपोर्टिंग से पता चलता है कि झड़पों के दौरान सैकड़ों गोलियां चलीं, और सीमा के दोनों ओर विस्थापन बढ़ गया—कम से कम 5,000 लोग प्रभावित हुए। ऐसी घटनाएं दक्षिण एशिया की स्थिरता को खतरे में डालती हैं, क्योंकि वे पड़ोसी देशों जैसे भारत और ईरान को भी चिंतित कर रही हैं।
युद्धविराम की नाकामी: दोहा वार्ता पर सवाल, क्षेत्रीय प्रभाव क्या होंगे?
झड़पों के बाद, 15 अक्टूबर 2025 को शाम 6 बजे से पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने 48 घंटे का अस्थायी युद्धविराम लागू किया था, जो अंतरराष्ट्रीय दबाव—खासकर चीन और संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता—के कारण संभव हुआ। अफगानिस्तान ने स्पष्ट शर्त रखी थी कि अगर पाकिस्तान हमले न रोके, तो युद्धविराम जारी रहेगा। दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों के बीच कतर की राजधानी दोहा में युद्धविराम को लंबा करने और सीमा सुरक्षा पर बातचीत की योजना बनाई गई थी। दोहा, जो मध्य पूर्व में शांति वार्ताओं के लिए जाना जाता है, तालिबान और अन्य क्षेत्रीय समूहों के साथ पिछली बातचीत का केंद्र रहा है।
लेकिन पाकिस्तान द्वारा हवाई हमलों के फिर से शुरू होने से यह युद्धविराम टूट गया, और दोहा वार्ता की संभावनाएं धूमिल हो गईं। एएफपी और बीबीसी के विश्लेषकों के अनुसार, यह घटना न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचाएगी, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में अस्थिरता बढ़ा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना मजबूत अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के—जैसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की भूमिका या चीन की “बेल्ट एंड रोड” पहल के तहत आर्थिक दबाव—यह सीमा विवाद लंबा खिंच सकता है। आर्थिक रूप से, अफगानिस्तान पहले से ही संकट में है, जहां सूखा और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं ने स्थिति बिगाड़ दी है, जबकि पाकिस्तान अपनी आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। नागरिकों के लिए सबसे बड़ा खतरा है—बढ़ती हिंसा से मानवीय सहायता बाधित हो रही है, और शरणार्थी संकट गहरा सकता है।
जानकारी MSN.com और रॉयटर्स से एकत्र की गई है।
