दिल्ली के पूर्व कप्तान मिथुन मन्हास होंगे बीसीसीआई के अगले अध्यक्ष
पूर्व दिल्ली कप्तान मिथुन मनहास बन सकते हैं बीसीसीआई के अगले अध्यक्ष। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के चुनाव 28 सितंबर को मुंबई मुख्यालय में होने वाली वार्षिक आम बैठक (एजीएम) के दौरान होंगे, और सूत्रों के अनुसार मनहास को आम सहमति से उम्मीदवार चुना गया है।
मिथुन मनहास का क्रिकेट करियर और पृष्ठभूमि
मिथुन मनहास एक अनुभवी क्रिकेटर हैं, जिन्होंने घरेलू क्रिकेट में दिल्ली टीम के लिए 1999 से 2015 तक मुख्य भूमिका निभाई। वे दिल्ली के कप्तान भी रहे और रणजी ट्रॉफी जैसे प्रमुख टूर्नामेंट्स में टीम को कई महत्वपूर्ण जीत दिलाईं (ईएसपीएनक्रिकइंफो के आंकड़ों के अनुसार, उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 10,000 से ज्यादा रन बनाए और 20 से अधिक शतक लगाए)। मनहास को उनकी क्लासिकल बल्लेबाजी शैली के लिए जाना जाता है, जहां वे लंबी पारियां खेलने में माहिर थे, लेकिन दुर्भाग्य से उन्हें कभी भारतीय टेस्ट टीम में जगह नहीं मिली, जिसकी वजह से उन्हें उन खिलाड़ियों की सूची में रखा जाता है जो टेस्ट कैप से चूक गए। 2015 में दिल्ली छोड़ने के बाद, वे जम्मू-कश्मीर टीम में शामिल हुए और 2017 में संन्यास लिया। आईपीएल में उन्होंने दिल्ली डेयरडेविल्स (अब दिल्ली कैपिटल्स) और पुणे वॉरियर्स इंडिया के लिए खेला, जहां उन्होंने मध्यक्रम में उपयोगी योगदान दिया, हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कभी मौका नहीं मिला। संन्यास के बाद, मनहास कोचिंग की ओर मुड़े और पिछले तीन सीजन से गुजरात टाइटंस के सहायक कोच हैं, जहां उन्होंने युवा खिलाड़ियों को तकनीकी कौशल सिखाने में योगदान दिया है (इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार)। बीसीसीआई के प्रशासकों के साथ उनके करीबी रिश्ते उन्हें इस पद के लिए मजबूत दावेदार बनाते हैं, और जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन ने उन्हें एजीएम में प्रतिनिधित्व के लिए नामांकित किया है। मनहास की छवि एक भरोसेमंद और अनुशासित व्यक्ति की है, जो क्रिकेट प्रशासन में स्थिरता ला सकती है।
नामांकन प्रक्रिया और प्रमुख उम्मीदवार
नामांकन दाखिल करने का दो दिवसीय विंडो शनिवार से शुरू हुआ, जिसमें शीर्ष क्रिकेट अधिकारी नई दिल्ली में मिले और सरकारी मंत्रियों से सलाह लेकर फैसले लिए (द हिंदू की रिपोर्ट से)। मनहास के अलावा, कई पूर्व क्रिकेटर इस चुनाव में शामिल हैं। हरभजन सिंह, जो भारत के लिए 100 से ज्यादा टेस्ट मैच खेल चुके हैं और ऑफ-स्पिन गेंदबाजी में माहिर थे, पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन का प्रतिनिधित्व करेंगे। रघुराम भट्ट, पूर्व टेस्ट क्रिकेटर और कर्नाटक के दिग्गज, कर्नाटक की ओर से नामांकन दाखिल करेंगे और वे कोषाध्यक्ष पद के लिए रविवार (21 सितंबर, 2025) को पर्चा भर सकते हैं (टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार)। पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली, जो 2019 से 2022 तक बीसीसीआई अध्यक्ष रह चुके हैं, बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन के प्रमुख के रूप में वापसी के बाद एजीएम में हिस्सा लेंगे। गांगुली का अनुभव बैठक को और प्रभावशाली बना सकता है, क्योंकि उन्होंने अपने कार्यकाल में आईपीएल का विस्तार और महिला क्रिकेट को बढ़ावा दिया था। देवजीत सैकिया मौजूदा सचिव के रूप में जारी रहेंगे, जबकि राजीव शुक्ला उपाध्यक्ष पद पर बने रहेंगे, जो राजनीतिक पृष्ठभूमि के साथ क्रिकेट प्रशासन में सक्रिय हैं। प्रभतेज सिंह भाटिया, जो लगभग एक साल से कोषाध्यक्ष थे, अब संयुक्त सचिव पद के लिए निर्विरोध चुने जा सकते हैं। बीसीसीआई की शीर्ष परिषद के छठे स्लॉट के लिए जयदेव शाह का नाम आगे आया है, जो पूर्व सौराष्ट्र कप्तान हैं और सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन के छह साल से प्रमुख हैं। शाह ने घरेलू क्रिकेट में 4,000 से ज्यादा रन बनाए और अपनी एसोसिएशन में बुनियादी ढांचे के विकास पर फोकस किया है (क्रिकेट वेबसाइट क्रिकबज के आंकड़ों से)।
बीसीसीआई के चुनाव हर तीन साल में होते हैं, और यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुमोदित लोढ़ा समिति की सिफारिशों पर आधारित है, जिसमें पदाधिकारियों की उम्र सीमा 70 वर्ष और कार्यकाल की सीमा निर्धारित है (बीसीसीआई की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार)। इस बार चुनाव मुंबई मुख्यालय में 28 सितंबर को होगा, और नामांकन का दूसरा दिन रविवार है। पिछले चुनाव में रोजर बिन्नी को共识 से अध्यक्ष चुना गया था, और इस बार भी इसी पैटर्न की उम्मीद है, जहां कोई बड़ा विरोध नहीं दिख रहा (इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट से)। बीसीसीआई के पदाधिकारी सरकारी सलाह लेते हैं, खासकर खेल मंत्रालय से, ताकि प्रशासन सुचारू रहे। चुनाव में राज्य संघों के प्रतिनिधि वोट देते हैं, और ज्यादातर पदों पर निर्विरोध चयन की संभावना है, जो बीसीसीआई की एकता को दर्शाता है। हाल के वर्षों में, बीसीसीआई ने कोविड-19 महामारी के दौरान क्रिकेट को जारी रखने और आईपीएल को सफलतापूर्वक आयोजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे उसकी वैश्विक स्थिति मजबूत हुई है (आईसीसी की वार्षिक रिपोर्ट से)।
संभावित प्रभाव और भविष्य की दिशा
यदि मिथुन मनहास अध्यक्ष चुने जाते हैं, तो यह दिल्ली क्रिकेट के लिए एक मील का पत्थर होगा, क्योंकि इससे पहले दिल्ली से कम ही पदाधिकारी शीर्ष स्तर पर पहुंचे हैं। उनका फोकस घरेलू क्रिकेट को मजबूत करने, जूनियर स्तर पर प्रतिभा विकास और कोचिंग प्रोग्राम्स पर हो सकता है, जैसा कि उनके गुजरात टाइटंस के अनुभव से पता चलता है। बीसीसीआई वर्तमान में महिला प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल) का विस्तार कर रही है और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स की तैयारी में जुटी है, जैसे 2026 टी20 विश्व कप (आईसीसी की योजनाओं के अनुसार)। गांगुली जैसे अनुभवी सदस्यों की मौजूदगी से बैठक में रणनीतिक चर्चाएं हो सकती हैं, जैसे क्रिकेट इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश और डिजिटल प्रसारण के अवसर। कुल मिलाकर, यह चुनाव बीसीसीआई को स्थिर नेतृत्व प्रदान कर सकता है, जो भारतीय क्रिकेट को वैश्विक स्तर पर और मजबूत बनाएगा। मनहास की नियुक्ति से जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों में क्रिकेट विकास को बढ़ावा मिल सकता है, जहां उन्होंने अपना करियर खत्म किया था।
ऐतिहासिक संदर्भ और तुलना
बीसीसीआई के इतिहास में कई पूर्व क्रिकेटर अध्यक्ष बने हैं, जैसे सुनील गावस्कर, शशांक मनोहर और सौरव गांगुली, जिन्होंने प्रशासनिक सुधार किए। मनहास का चयन इस परंपरा को जारी रखता है, लेकिन वे उन कुछ खिलाड़ियों में से हैं जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नहीं खेले, फिर भी प्रशासन में आगे आए (क्रिकेट हिस्ट्री बुक्स जैसे ‘द स्टेट ऑफ इंडियन क्रिकेट’ से प्रेरित)। पिछले चुनावों की तुलना में, इस बार राजनीतिक हस्तक्षेप कम दिख रहा है, जो लोढ़ा सुधारों का सकारात्मक प्रभाव है। बीसीसीआई दुनिया की सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड है, जिसकी वार्षिक आय अरबों रुपये में है, और नई टीम इस संपत्ति का उपयोग क्रिकेट के विकास के लिए करेगी (फोर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार)।
