‘शर्म करो’: मार्क जुकरबर्ग के मेटा ‘एआई चश्मे’ लाइव डेमो में विफल, वीडियो सामने आया
मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने बुधवार को आयोजित मेटा कनेक्ट इवेंट में कंपनी के अगली पीढ़ी के तकनीकी उत्पादों का भव्य अनावरण किया, लेकिन लाइव डेमो के दौरान हुई तकनीकी खराबी ने पूरे इवेंट को एक अजीब मोड़ दे दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें जुकरबर्ग के नए मेटा रे-बैन डिस्प्ले चश्मे और न्यूरल रिस्टबैंड की फेल डेमो दिखाई दे रही है, जो एआई और एआर तकनीक की चुनौतियों को उजागर करती है।
मेटा कनेक्ट इवेंट का विस्तृत अवलोकन
मेटा कनेक्ट इवेंट मेटा कंपनी का वार्षिक कार्यक्रम है, जहां वे अपनी नवीनतम तकनीकी प्रगति और उत्पादों को दुनिया के सामने पेश करते हैं। इस साल के इवेंट में, जो कैलिफोर्निया में आयोजित किया गया था, जुकरबर्ग ने कई महत्वाकांक्षी उत्पादों का खुलासा किया। इनमें दूसरी पीढ़ी के मेटा रे-बैन स्मार्ट ग्लासेस शामिल हैं, जो पहले से ज्यादा उन्नत फीचर्स के साथ आते हैं। इसके अलावा, एक नया न्यूरल रिस्टबैंड पेश किया गया, जो ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस तकनीक पर आधारित है और उपयोगकर्ताओं को विचारों या सूक्ष्म हाथ के इशारों से डिवाइस को नियंत्रित करने की सुविधा देता है।
सबसे प्रमुख उत्पाद था मेटा रे-बैन डिस्प्ले चश्मा, जो एक बिल्ट-इन हेड्स-अप डिस्प्ले (HUD) के साथ आता है। बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट के अनुसार, यह HUD दाहिने लेंस पर काम करता है और उपयोगकर्ताओं को नोटिफिकेशन, नेविगेशन दिशा-निर्देश, संदेश और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी सीधे चश्मे पर दिखाता है, बिना स्मार्टफोन को छुए। यह फीचर खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी है जो ड्राइविंग या वर्कआउट के दौरान फोन चेक नहीं करना चाहते। इसके अलावा, ओकले ब्रांड के साथ साझेदारी में विकसित स्पोर्ट्स-फोकस्ड स्मार्ट ग्लासेस भी लॉन्च किए गए, जो एथलीटों और स्पोर्ट्स प्रेमियों के लिए डिजाइन किए गए हैं, जिसमें फिटनेस ट्रैकिंग और रियल-टाइम डेटा डिस्प्ले जैसे फीचर्स हैं।
द वर्ज की एक विस्तृत रिपोर्ट से पता चलता है कि मेटा इस इवेंट के माध्यम से अपनी एआई रणनीति को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, जहां एआई को क्लाउड-बेस्ड डेटा सेंटरों से निकालकर रोजमर्रा के डिवाइसों में एकीकृत किया जा रहा है। कंपनी का दावा है कि ये उत्पाद उपयोगकर्ताओं की जिंदगी को आसान बनाएंगे, लेकिन लाइव डेमो में हुई गड़बड़ी ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए। सीएनएन की कवरेज के अनुसार, ऐसे इवेंट्स में तकनीकी ग्लिच दुर्लभ नहीं हैं, लेकिन मेटा जैसे बड़े खिलाड़ी के लिए यह छवि को प्रभावित कर सकता है।
लाइव डेमो में क्या गड़बड़ हुई
इवेंट के मुख्य आकर्षण में जुकरबर्ग ने न्यूरल रिस्टबैंड का प्रदर्शन किया। उन्होंने इस डिवाइस का उपयोग करके मेटा के सीटीओ एंड्र्यू बोसवर्थ को एक मैसेज भेजा, जो जेस्चर-बेस्ड टाइपिंग की क्षमता दिखा रहा था। यह फीचर काफी प्रभावशाली लग रहा था, क्योंकि यह उपयोगकर्ताओं को बिना कीबोर्ड छुए टाइप करने की अनुमति देता है, जो विकलांग व्यक्तियों या मल्टीटास्किंग के लिए उपयोगी हो सकता है। लेकिन समस्या तब शुरू हुई जब जुकरबर्ग ने हाथ के इशारों से वीडियो कॉल शुरू करने की कोशिश की।
सिस्टम ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, और जुकरबर्ग ने कई बार इशारे दोहराए, लेकिन सफलता नहीं मिली। आखिरकार, बोसवर्थ को खुद स्टेज पर आना पड़ा। बोसवर्थ ने मजाक में कहा, “यह वाई-फाई बहुत क्रूर है,” जबकि जुकरबर्ग ने हंसते हुए जवाब दिया, “मुझे नहीं पता, हम इसे बाद में डिबग करेंगे। हम इन चीजों को 100 बार रिहर्सल करते हैं, लेकिन लाइव में क्या होगा, पता नहीं चलता।” बोसवर्थ ने आगे जोड़ा, “मैं वादा करता हूं, इससे ज्यादा किसी को निराशा नहीं हुई जितनी मुझे, क्योंकि अब मेरी टीम को यह पता लगाना है कि स्टेज पर यह क्यों फेल हुआ।”
टेकक्रंच की एक गहन विश्लेषण रिपोर्ट से पता चलता है कि यह समस्या शायद वाई-फाई से ज्यादा गहरी थी, क्योंकि न्यूरल रिस्टबैंड जैसे डिवाइस सेंसर और सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन पर निर्भर करते हैं। ऐसे ग्लिच एआर और न्यूरल टेक्नोलॉजी की शुरुआती स्टेज को दर्शाते हैं, जहां रियल-टाइम परफॉर्मेंस अभी परिपक्व नहीं है। फोर्ब्स ने नोट किया कि मेटा ने पहले भी क्वेस्ट वीआर हेडसेट्स में इसी तरह की समस्याओं का सामना किया है, जो कंपनी की आरएंडडी चुनौतियों को उजागर करता है।
सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रियाएं और चिंताएं
डेमो का वीडियो एक्स (पूर्व में ट्विटर) और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से फैला, जहां टेक उत्साही और सामान्य उपयोगकर्ताओं ने अपनी राय साझा की। एक यूजर ने लिखा, “यह वाई-फाई समस्या जैसा नहीं लगता, बल्कि प्रोडक्ट में ही कोई कमी है।” दूसरे ने कमेंट किया, “मैं वह अनकट वीडियो देखना चाहता हूं जहां जुकरबर्ग टीम पर गुस्सा कर रहे हों।” एक तीसरे यूजर ने गंभीर चिंता जताते हुए कहा, “यह बहुत डरावना है! और बिल्कुल रोचक नहीं। टेक कंपनियां इन तकनीकों का इस्तेमाल लोगों की पहचान करने और निजी जानकारी इकट्ठा करने के लिए कर रही हैं। शर्म की बात है।”
द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे उत्पादों से प्राइवेसी की चिंताएं बढ़ रही हैं, क्योंकि स्मार्ट ग्लासेस कैमरा और एआई के माध्यम से रियल-टाइम डेटा कैप्चर करते हैं, जो सरकारी निगरानी या डेटा दुरुपयोग का खतरा पैदा कर सकता है। बीबीसी ने भी इस पर प्रकाश डाला कि मेटा की पिछली कंट्रोवर्सी, जैसे फेसबुक डेटा स्कैंडल, इन नए उत्पादों पर संदेह बढ़ा रही हैं। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने इसे मेटा की महत्वाकांक्षा का मजाक उड़ाया, जबकि अन्य ने तकनीकी प्रगति की सराहना की लेकिन विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। कुल मिलाकर, वायरल वीडियो ने इवेंट को ज्यादा ध्यान दिलाया, लेकिन नकारात्मक तरीके से।
कुकिंग डेमो में एक और असफलता
इन हिचकियों के बावजूद, जुकरबर्ग ने पूरे अनावरण को मेटा के लिए “एक विशेष पल” बताया और कंपनी की एआई विजन पर जोर दिया कि एआई को डेटा सेंटरों में कैद नहीं रखना चाहिए, बल्कि यह लोगों की रोजमर्रा की मदद के लिए होना चाहिए। इस दृष्टिकोण को दिखाने के लिए, उन्होंने फूड कंटेंट क्रिएटर जैक मैनकुसो को आमंत्रित किया, जो अपग्रेडेड रे-बैन मेटा ग्लासेस का उपयोग करके लाइव कुकिंग डेमो दे रहे थे।
मैनकुसो ने एआई असिस्टेंट से “कोरियन-इंस्पायर्ड स्टेक सॉस” बनाने की विधि पूछी, लेकिन असिस्टेंट ने प्रक्रिया को ठीक से नहीं संभाला। शुरुआती चरणों को छोड़कर, यह सीधे सोया सॉस और सेसम ऑयल मिलाने की सलाह देता रहा, बिना विस्तृत निर्देश दिए। मैनकुसो ने कई बार पूछा, “मुझे पहले क्या करना चाहिए?”, लेकिन एआई ने सीधा जवाब नहीं दिया और दो बार एक ही निर्देश दोहराया: “आपने बेस इंग्रीडिएंट्स को पहले ही मिला लिया है, अब नाशपाती को ग्रेट करें और इसे सॉस के साथ धीरे से मिलाएं।”
फोर्ब्स की एक विस्तृत रिपोर्ट से पता चलता है कि मेटा का एआई असिस्टेंट, जो लामा मॉडल पर आधारित है, अभी रियल-टाइम कन्वर्सेशन में सुधार की जरूरत रखता है। यह घटना एआई की सीमाओं को दिखाती है, जहां संदर्भ समझने में कमी हो सकती है। सीएनएन ने उल्लेख किया कि मेटा भविष्य में ऐसे फीचर्स को अपडेट करने का वादा कर रहा है, जो उपयोगकर्ता अनुभव को बेहतर बनाएगा।
मेटा की समग्र योजनाएं और निहितार्थ
मेटा की ये घोषणाएं कंपनी की एआर, वीआर और एआई क्षेत्र में निवेश को दर्शाती हैं। न्यूरल रिस्टबैंड जैसे उत्पाद ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस की दिशा में एक कदम हैं, जो भविष्य में मेडिकल एप्लीकेशन्स जैसे पैरालिसिस के इलाज में मदद कर सकते हैं। द वर्ज की रिपोर्ट के अनुसार, मेटा का फोकस “मेटावर्स” को वास्तविकता बनाने पर है, जहां ऐसे डिवाइस महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। हालांकि, प्राइवेसी, डेटा सिक्योरिटी और तकनीकी स्थिरता की चिंताएं बनी हुई हैं, जैसा कि बीबीसी और द गार्जियन जैसे स्रोतों ने हाइलाइट किया है।
इवेंट में जुकरबर्ग ने अन्य प्रतिक्रियाओं का भी जिक्र किया, जैसे सेलेब्स और फैंस की राय, लेकिन मुख्य जोर तकनीकी नवाचार पर रहा। कुल मिलाकर, मेटा कनेक्ट इवेंट कंपनी की महत्वाकांक्षाओं को दिखाता है, लेकिन लाइव डेमो की असफलताओं ने विकास की चुनौतियों को सामने लाया। भविष्य में मेटा को इन ग्लिच को ठीक करने पर ध्यान देना होगा ताकि उपयोगकर्ताओं का विश्वास बना रहे।
