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भारत, चीन ने 5 साल बाद कोलकाता से ग्वांगझू के लिए सीधी उड़ानें फिर से शुरू कीं

कोलकाता: चार साल से अधिक समय के लंबे ब्रेक के बाद, भारत और चीन के बीच कोलकाता से मुख्यभूमि चीन के ग्वांगझोउ शहर के लिए सीधी व्यावसायिक हवाई सेवाएं रविवार को दोबारा शुरू हो गईं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से पहली उड़ान रात 10 बजे सफलतापूर्वक रवाना हुई, जैसा कि हवाई अड्डे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की। यह घटना न केवल यात्रियों के लिए एक राहत है, बल्कि दोनों देशों के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हो रही है।

निजी विमानन कंपनी इंडिगो की आधुनिक ए320 नियो विमान इस उड़ान को संचालित कर रही थी, जिसमें कुल 176 यात्री सवार थे। विमान में मौजूद यात्रियों में व्यापारी, पर्यटक और परिवार शामिल थे, जो इस नई कनेक्टिविटी का इंतजार कर रहे थे। अधिकारी ने बताया कि उड़ान निर्धारित समय पर ग्वांगझोउ के बाईयुन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरी, जहां यात्रियों को स्वागत के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। यह उड़ान दैनिक आधार पर संचालित होगी, जो कोलकाता से ग्वांगझोउ तक लगभग 3,000 किलोमीटर की दूरी को सिर्फ 3.5 घंटे में तय करेगी।

उड़ानों का इतिहास: महामारी और सीमा विवाद ने क्यों रोकीं सेवाएं?

ये सीधी उड़ानें 2020 की शुरुआत तक दोनों शहरों के बीच नियमित रूप से संचालित हो रही थीं, जब कोविड-19 महामारी ने वैश्विक हवाई यात्रा को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों के अनुसार, 2020 में चीन में महामारी के पहले मामलों के बाद भारत सहित कई देशों ने चीन के लिए उड़ानों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। इससे पहले, ये रूट व्यापारिक यात्राओं के लिए काफी लोकप्रिय थे, खासकर कैंटोन फेयर जैसे बड़े आयोजनों के दौरान।

महामारी के बाद स्थिति और जटिल हो गई जब पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सीमा विवाद ने तनाव बढ़ा दिया। 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के बाद, दोनों देशों ने सैन्य और राजनयिक स्तर पर कई कदम उठाए, जिसमें हवाई संपर्क को भी सीमित कर दिया गया। भारतीय सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि 2020 से 2024 तक, चीन के लिए सीधी उड़ानें लगभग शून्य हो गईं, जबकि अप्रत्यक्ष रूट्स के माध्यम से यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या में 80% की कमी आई। इस दौरान, यात्रियों को दिल्ली या मुंबई जैसे हब एयरपोर्ट्स से होकर जाना पड़ता था, जो समय और लागत दोनों के लिहाज से महंगा साबित होता था।

राजनयिक प्रयासों का नतीजा: कैसे हुईं उड़ानें फिर शुरू?

हाल के राजनयिक प्रयासों ने इस निलंबन को तोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अक्टूबर 2024 में रूस के कज़ान में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई, जिसमें आर्थिक सहयोग और सीमा मुद्दों पर शांति बनाए रखने पर सहमति बनी। चीनी विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने “व्यापारिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने” के लिए ठोस कदम उठाने का वादा किया। इसी का परिणाम है कि भारतीय सिविल एविएशन अथॉरिटी ने इंडिगो को ग्वांगझोउ रूट के लिए मंजूरी दी।

इंडिगो के प्रवक्ता ने बताया कि कंपनी ने चीन में अपनी सेवाओं को फिर से शुरू करने के लिए विशेष रूप से ए320 नियो विमानों को तैयार किया, जो ईंधन दक्षता और यात्री सुविधाओं के मामले में अग्रणी हैं। यह कदम इंडिगो की रणनीति का हिस्सा है, जो एशिया में अपनी पहुंच को विस्तारित करने पर केंद्रित है। इसके अलावा, भारत-चीन व्यापारिक संबंधों को देखते हुए, 2024-25 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 1,00,000 करोड़ डॉलर से अधिक पहुंच चुका है, जैसा कि वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़े दर्शाते हैं। ये उड़ानें इस व्यापार को और गति देने में सहायक होंगी।

समारोह और हवाई अड्डे की तैयारियां: नई शुरुआत का प्रतीक

हवाई अड्डे पर इस ऐतिहासिक पल को एक संक्षिप्त लेकिन भावपूर्ण समारोह के साथ चिह्नित किया गया। एक यात्री ने पारंपरिक भारतीय रीति के अनुसार दीप प्रज्वलन किया, जो भारत और चीन के बीच नवीनीकृत मित्रता और सहयोग की भावना का प्रतीक था। समारोह में एनएससीबीआई हवाई अड्डे के निदेशक पी आर बुरिया ने मुख्य भूमिका निभाई, साथ ही एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) के वरिष्ठ अधिकारी और इंडिगो एयरलाइंस के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे। बुरिया ने अपने संबोधन में कहा कि “यह न केवल एक उड़ान की शुरुआत है, बल्कि पूर्वी भारत को वैश्विक हवाई नेटवर्क से जोड़ने का एक नया द्वार खोलने जैसा है।”

हवाई अड्डे ने इस रूट के लिए विशेष तैयारियां की थीं, जिसमें चेक-इन काउंटरों पर चीनी भाषा के बोर्डिंग पास और यात्रियों के लिए बहुभाषी सहायता शामिल थी। एएआई के अनुसार, कोलकाता हवाई अड्डा पहले से ही पूर्वी भारत का सबसे व्यस्त हवाई केंद्र है, जहां 2024 में 2.5 करोड़ से अधिक यात्री ट्रांजिट हुए। हाल के वर्षों में 1,500 करोड़ रुपये के निवेश से नई टर्मिनल, विस्तारित रनवे और आधुनिक सुरक्षा प्रणालियां जोड़ी गई हैं, जो अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को संभालने की क्षमता को दोगुना कर देंगी।

यात्रियों, व्यापार और पर्यटन के लिए लाभ: आर्थिक प्रभाव

निदेशक बुरिया ने जोर देकर कहा कि इस सीधी रूट की बहाली से व्यापार और पर्यटन संबंधों को नई गति मिलेगी, साथ ही यात्रियों को पहले से कहीं अधिक सुविधा प्राप्त होगी। ग्वांगझोउ, जो चीन का तीसरा सबसे बड़ा शहर है, इलेक्ट्रॉनिक्स, वस्त्र और मैन्युफैक्चरिंग का प्रमुख केंद्र है। कोलकाता के व्यापारी, खासकर चाय, जूट और आईटी क्षेत्र से जुड़े, अब आसानी से ग्वांगझोउ के कैंटोन फेयर जैसे वैश्विक व्यापार मेलों में भाग ले सकेंगे। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (फियो) के अनुसार, बंगाल से चीन निर्यात 2023 में 20% बढ़ा था, और ये उड़ानें इसे और तेज करेंगी।

पर्यटन के दृष्टिकोण से, ये उड़ानें चीनी पर्यटकों को पूर्वी भारत के सांस्कृतिक स्थलों जैसे दार्जिलिंग, सुंदरबन और कोलकाता के ऐतिहासिक स्थलों तक आसानी से पहुंचने में मदद करेंगी। इसके विपरीत, भारतीय पर्यटक ग्वांगझोउ के आधुनिक बाजारों, चमचमाते शॉपिंग मॉल्स और निकटवर्ती हांगकांग की यात्रा कर सकेंगे। इंडिगो ने शुरुआती किरायों को प्रतिस्पर्धी रखा है – एक तरफा टिकट 20,000 से 30,000 रुपये के बीच – जो मध्य वर्ग के यात्रियों के लिए किफायती है। इसके अलावा, ये रूट गुवाहाटी, पटना और भुवनेश्वर जैसे अन्य पूर्वी शहरों से कनेक्टिविटी बढ़ाएंगे, जिससे क्षेत्रीय हवाई ट्रैफिक में 15-20% की वृद्धि की उम्मीद है।

भविष्य की योजनाएं: और मजबूत होंगे संबंध

अधिकारियों के मुताबिक, कोलकाता और ग्वांगझोउ के बीच दैनिक सीधी कनेक्टिविटी पश्चिम बंगाल की राजधानी को पूर्वी भारत के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय विमानन हब के रूप में स्थापित करेगी। इंडिगो के अलावा, अन्य एयरलाइंस जैसे एयर इंडिया भी चीन रूट्स पर नजर रख रही हैं, और निकट भविष्य में शंघाई तथा बीजिंग से सीधी उड़ानों की योजना है। हाल की संयुक्त भारत-चीन बयान में कहा गया है कि दोनों देश “शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और आपसी लाभ” पर आधारित संबंधों को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे चीन यात्रा से पहले वीजा, स्वास्थ्य प्रमाणपत्र और कोविड-संबंधी नियमों की जांच करें, क्योंकि चीन ने अभी भी कुछ प्रवेश प्रतिबंध बरकरार रखे हैं। कुल मिलाकर, ये उड़ानें न केवल यात्रा को आसान बनाएंगी, बल्कि दोनों प्राचीन सभ्यताओं के बीच एक नई पुल का काम करेंगी, जो आर्थिक विकास और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देगी।

यह जानकारी एन. डी. टी. वी. और बी. बी. सी. से एकत्र की गई है।