जयपुर के अस्पताल में लगी आग, कई मरीजों की मौत
राजस्थान के जयपुर शहर में रविवार रात को सवाई मान सिंह (एसएमएस) अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर के न्यूरो इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में लगी भयानक आग ने कम से कम आठ मरीजों की जान ले ली, जबकि पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह घटना 5 अक्टूबर 2025 की रात करीब 11:20 बजे शुरू हुई, जब आईसीयू के स्टोरेज एरिया में शॉर्ट सर्किट से आग भड़क उठी और तेजी से फैल गई। एसएमएस अस्पताल राजस्थान का सबसे बड़ा सरकारी स्वास्थ्य केंद्र है, जहां पूरे राज्य और आसपास के जिलों से गंभीर रूप से बीमार मरीजों को रेफर किया जाता है। इस आग ने न केवल मरीजों और उनके परिजनों को स्तब्ध कर दिया, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुरक्षा की कमी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
आग की चपेट में आए अधिकांश मरीज न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से पीड़ित थे और कोमा या क्रिटिकल कंडीशन में थे। आईसीयू में 11 मरीज भर्ती थे, जबकि पास के सेमी-आईसीयू में 13 अन्य मरीज थे। मृतकों में पिंटू (सीकर से), दिलीप और बहादुर (जयपुर से), श्रीनाथ, रुकमिणी और खुरमा (भरतपुर से) शामिल हैं। दो अन्य मरीजों की मौत बचाव के दौरान हुई, जब उन्हें दूसरे आईसीयू से निकाला जा रहा था। घायलों को तुरंत दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट किया गया, जहां उनका इलाज जारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने हिंदी में लिखा, “जयपुर, राजस्थान के एक अस्पताल में आग की त्रासदी से हुई जानों का नुकसान अत्यंत दुखद है। प्रभावित परिवारों को मेरी गहरी संवेदना। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।”
आग का कारण: शॉर्ट सर्किट से भड़की लपटें, आईसीयू में फैला घना धुआं
ट्रॉमा सेंटर के इंचार्ज डॉ. अनुराग धाकड़ ने एएनआई को बताया कि आग आईसीयू के स्टोरेज एरिया में रात 11:30 बजे के आसपास इलेक्ट्रिकल वायरिंग से शुरू हुई, जहां शॉर्ट सर्किट होने का संदेह है। यह क्षेत्र मेडिकल उपकरणों, दवाओं और दस्तावेजों से भरा था, जो आग की तीव्रता को और बढ़ा दिया। आग के साथ-साथ जहरीली गैसें और मोटा काला धुआं तेजी से पूरे फ्लोर पर फैल गया, जिससे सांस लेना असंभव हो गया। मरीजों की हालत पहले से ही गंभीर होने के कारण वे खुद बचाव नहीं कर पाए, और अधिकांश को स्ट्रेचर पर ही बाहर निकाला गया।
फायर ब्रिगेड को सूचना मिलने के बाद भी आग बुझाने में करीब डेढ़ घंटे लग गए, क्योंकि अस्पताल में फायर अलार्म सिस्टम काम नहीं किया और कोई फायर एक्सटिंग्विशर उपलब्ध नहीं था। एक फायर ब्रिगेड अधिकारी ने बताया कि धुएं की वजह से इमारत के अंदर घुसना मुश्किल था, इसलिए विपरीत दिशा से खिड़कियां तोड़कर पानी की बौछारें डाली गईं। डॉ. दीपक महेश्वरी, एसएमएस कॉलेज के प्रिंसिपल ने पुष्टि की कि मौतें गंभीर जलन और दम घुटने से हुईं। जयपुर पुलिस कमिश्नर बिजू जॉर्ज ने कहा कि प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट ही मुख्य कारण लग रहा है, लेकिन फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की रिपोर्ट के बाद ही अंतिम पुष्टि होगी। पुलिस ने शवों को मोर्चरी में रखा है और पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
लापरवाही के गंभीर आरोप: स्टाफ ने नजरअंदाज की चेतावनी, परिजनों में आक्रोश
मरीजों के परिजनों ने अस्पताल स्टाफ पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने दावा किया कि धुएं की शुरुआती चेतावनी मिलने पर भी स्टाफ ने कोई ध्यान नहीं दिया और आग फैलने पर खुद भाग गए। एक परिजन नरेंद्र सिंह ने एएनआई को बताया, “मैं डिनर करने नीचे गया था, जब आईसीयू में आग लगी। वहां न तो फायर एक्सटिंग्विशर था, न पानी का कोई इंतजाम। मेरी मां कोमा में थीं, लेकिन स्टाफ ने समय पर एक्शन नहीं लिया।” इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, परिवार वाले कहते हैं कि अफरा-तफरी के बीच मरीजों की हालत के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। एक अन्य परिजन अतुल कुमार ने शिकायत की, “सिस्टम बहुत धीमा और भ्रष्ट है। ज्यादातर मदद परिजनों ने ही की, स्टाफ गायब था।”
अस्पताल के एक पूर्व अधिकारी ने दावा किया कि उन्होंने ट्रॉमा सेंटर की खराब मेंटेनेंस और निर्माण कार्यों के कारण असुरक्षित होने की चेतावनी दी थी, लेकिन उच्च अधिकारियों ने नजरअंदाज किया। यह पहली बार नहीं है जब एसएमएस अस्पताल में ऐसी घटना हुई है। 2025 में ही इमरजेंसी ओटी और एक निर्माणाधीन भवन में आग लग चुकी है, और पिछले दशक में कोई फायर मॉक ड्रिल नहीं हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि पुरानी वायरिंग, अपर्याप्त फायर सेफ्टी सिस्टम और रखरखाव की कमी ऐसी दुर्घटनाओं को न्योता देती हैं।
सरकारी कार्रवाई: अधिकारियों पर सख्ती, जांच पैनल गठित और मुआवजा घोषणा
राजस्थान सरकार ने तुरंत कदम उठाते हुए एसएमएस अस्पताल के सुपरिंटेंडेंट डॉ. सुशील भाटी और ट्रॉमा सेंटर इंचार्ज डॉ. अनुराग धाकड़ को हटा दिया। नए सुपरिंटेंडेंट के रूप में डॉ. मृणाल जोशी और ट्रॉमा सेंटर इंचार्ज डॉ. बीएल यादव को नियुक्त किया गया। अस्पताल के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर मुकेश सिंघल को निलंबित कर दिया गया, जबकि फायर सेफ्टी एजेंसी एसके इलेक्ट्रिक कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर एफआईआर दर्ज की गई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मंगलवार को घटनास्थल का दौरा किया और वरिष्ठ मंत्रियों के साथ स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने मृतकों के परिवारों को 10 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की।
सरकार ने घटना की गहन जांच के लिए छह सदस्यीय समिति गठित की है, जिसमें फॉरेंसिक विशेषज्ञ और स्वास्थ्य अधिकारी शामिल हैं। यह समिति आग के सटीक कारण, सुरक्षा मानकों की कमी और स्टाफ की भूमिका की पड़ताल करेगी। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसे “दिल दहला देने वाली घटना” बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। राजस्थान हाईकोर्ट ने सोमवार को एक सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी की, “सरकारी भवनों में क्या हो रहा है?” स्वास्थ्य विभाग ने सभी सरकारी अस्पतालों में व्यापक फायर और सेफ्टी ऑडिट के आदेश दिए हैं, ताकि ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।
यह घटना न केवल जयपुर बल्कि पूरे देश में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पर बहस छेड़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी अस्पतालों में बजट की कमी और रखरखाव की अनदेखी से ऐसी दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। पीड़ित परिवारों की मांग है कि दोषियों को सजा मिले और मुआवजा तुरंत वितरित हो। सरकार ने वादा किया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद सख्त कार्रवाई होगी, लेकिन परिजनों का विश्वास बहाल करने के लिए तत्काल कदम जरूरी हैं।
जानकारी एमएसएन और बीबीसी से एकत्र की गई है।
