10 भारतीय विश्वविद्यालय चिप डिजाइनरों की अगली पीढ़ी का निर्माण कर रहे हैं
आज की डिजिटल दुनिया में चिप डिज़ाइन एक ऐसा क्षेत्र है जो हर चीज़ को चलाता है। चाहे स्मार्टफोन हो, इलेक्ट्रिक कारें हों या फिर एआई सिस्टम्स, सबमें छोटी-सी चिप्स का बड़ा रोल है। भारत में सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री तेज़ी से बढ़ रही है। सरकार की इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत २०२५ तक १० बिलियन डॉलर का निवेश हो चुका है, और २०३० तक यह बाज़ार ११० बिलियन डॉलर का हो जाएगा। इस ग्रोथ के पीछे एक बड़ी चुनौती है—कुशल चिप डिज़ाइनरों की कमी। लेकिन अच्छी बात यह है कि भारत के कई विश्वविद्यालय इस कमी को पूरा करने के लिए काम कर रहे हैं। वे छात्रों को वीएलएसआई, माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स और चिप डिज़ाइन की ट्रेनिंग दे रहे हैं। यह लेख उन १० प्रमुख भारतीय विश्वविद्यालयों पर फोकस करता है जो चिप डिज़ाइनरों की अगली पीढ़ी तैयार कर रहे हैं। हम सरल भाषा में हर संस्थान की कहानी बताएंगे—उनके कोर्सेस, लैब्स, रिसर्च और प्लेसमेंट से। अगर आप इंजीनियरिंग के छात्र हैं या इस फील्ड में कैरियर बनाना चाहते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बहुत उपयोगी होगी। हम तथ्यों पर आधारित डिटेल्स देंगे, ताकि आप आसानी से समझ सकें कि ये विश्वविद्यालय कैसे भारत को ग्लोबल चिप हब बना रहे हैं।
1. आईआईटी बॉम्बे: चिप डिज़ाइन का केंद्र
आईआईटी बॉम्बे भारत का सबसे पुराना और प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान है। यह मुंबई में स्थित है और १९५८ से छात्रों को ट्रेनिंग दे रहा है। चिप डिज़ाइन के क्षेत्र में इसका इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग बहुत आगे है। यहां वीएलएसआई डिज़ाइन लैब १९९० के दशक से सक्रिय है, जो छात्रों को रियल-वर्ल्ड प्रोजेक्ट्स में शामिल करता है। छात्र यहां एनालॉग, डिजिटल और मिक्स्ड-सिग्नल सर्किट्स डिज़ाइन करना सीखते हैं। लैब में सिनॉप्सिस और कैडेंस जैसे एडवांस्ड टूल्स उपलब्ध हैं, जो इंडस्ट्री स्टैंडर्ड हैं। उदाहरण के लिए, छात्र १३० नैनोमीटर टेक्नोलॉजी पर चिप प्रोटोटाइप बनाते हैं। यह ट्रेनिंग छात्रों को स्टार्टअप्स शुरू करने या बड़ी कंपनियों में काम करने के लिए तैयार करती है।
मुख्य कोर्सेस में एमटेक इन वीएलएसआई डिज़ाइन और टूल्स शामिल है, जो दो साल का है। बीटेक छात्र भी इलेक्ट्रॉनिक्स में स्पेशलाइज़ेशन चुन सकते हैं। रिसर्च प्रोजेक्ट्स में न्यूरोमॉर्फिक चिप्स और एआई-बेस्ड प्रोसेसर्स पर काम हो रहा है। भारत सरकार के चिप्स टू स्टार्टअप (सी२एस) प्रोग्राम से यहां कई फंडेड प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं, जो छात्रों को पेटेंट फाइल करने का मौका देते हैं। प्लेसमेंट के मामले में, इंटेल, क्वालकॉम और एनवीडिया जैसी कंपनियां यहां आती हैं। पिछले साल ९८% छात्रों को प्लेसमेंट मिला, औसत पैकेज २१ लाख रुपये से ज़्यादा था। ये आंकड़े दिखाते हैं कि आईआईटी बॉम्बे सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि कैरियर की सॉलिड फाउंडेशन देता है।
| विशेषता | विवरण | लाभ |
| मुख्य कोर्स | एमटेक वीएलएसआई डिज़ाइन | उद्योग-केंद्रित ट्रेनिंग, प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग |
| लैब सुविधाएं | कैडेंस टूल्स, १३०nm फैब्रिकेशन, ५०+ वर्कस्टेशन्स | प्रैक्टिकल अनुभव, रियल चिप टेस्टिंग |
| रिसर्च क्षेत्र | एनालॉग/डिजिटल आईसी, एआई चिप्स, लो-पावर डिज़ाइन | २०+ पेटेंट्स सालाना, आईईईई पब्लिकेशन |
| प्लेसमेंट | इंटेल, एनवीडिया, क्वालकॉम | ९८% रेट, २१ लाख+ औसत पैकेज, ग्लोबल जॉब्स |
यहां से निकले कई छात्र आज चिप डिज़ाइन स्टार्टअप्स चला रहे हैं, जैसे कि सिमेंटिक्स। आईआईटी बॉम्बे सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत का सच्चा लीडर है।
2. आईआईटी मद्रास: इंटीग्रेटेड सिस्टम्स का विशेषज्ञ
आईआईटी मद्रास चेन्नई में स्थित है और १९५९ में स्थापित हुआ। यह दक्षिण भारत का टॉप इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट है, जो रिसर्च और इनोवेशन के लिए जाना जाता है। चिप डिज़ाइन में इसका इंटीग्रेटेड सर्किट्स एंड सिस्टम्स (आईसीएस) ग्रुप १९८० के दशक से काम कर रहा है। छात्र यहां एनालॉग, मिक्स्ड-सिग्नल और डिजिटल वीएलएसआई डिज़ाइन की पूरी प्रोसेस सीखते हैं—डिज़ाइन से लेकर वेरिफिकेशन तक। ग्रुप में २०+ फैकल्टी मेंबर्स हैं, जो इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के साथ कोलैबोरेट करते हैं। उदाहरण के लिए, छात्र फाइनल ईयर में असली चिप्स डिज़ाइन करते हैं, जो टीएसएमसी जैसे फैब्स में टेस्ट हो सकती हैं।
मुख्य कोर्स एमटेक इन माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स एंड वीएलएसआई डिज़ाइन है, जो उद्योग की ज़रूरतों पर फोकस्ड है। बीटेक छात्र इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांच में वीएलएसआई इलेक्टिव्स ले सकते हैं। रिसर्च में एआई इंटीग्रेशन, लो-पावर चिप्स और ५जी सिस्टम्स पर काम चल रहा है। सी२एस प्रोग्राम के तहत यहां १००+ छात्रों को फंडिंग मिली है, जो उन्हें स्टार्टअप्स शुरू करने में मदद करती है। प्लेसमेंट में टीएसएमसी, सैमसंग और मेदाटेक जैसी कंपनियां छात्रों को चुनती हैं। ९५% प्लेसमेंट रेट के साथ औसत पैकेज १९-२३ लाख रुपये है। यह संस्थान छात्रों को न सिर्फ टेक्निकल स्किल्स, बल्कि प्रॉब्लम-सॉल्विंग माइंडसेट भी देता है।
| विशेषता | विवरण | लाभ |
| मुख्य कोर्स | एमटेक आईसी डिज़ाइन | एम्बेडेड सिस्टम्स ट्रेनिंग, ६ महीने इंटर्नशिप |
| लैब सुविधाएं | वीएलएसआई कैड टूल्स, स्पेक्ट्रम एनालाइज़र | चिप फैब्रिकेशन एक्सपोज़र, ५०+ प्रोजेक्ट्स सालाना |
| रिसर्च क्षेत्र | मिक्स्ड-सिग्नल आईसी, एसओसी, ५जी चिप्स | १५+ जर्नल पब्लिकेशन, सरकार फंडिंग |
| प्लेसमेंट | सैमसंग, टीएसएमसी, मेदाटेक | ९५% रेट, १९-२३ लाख पैकेज, इंटरनेशनल रोल्स |
आईआईटी मद्रास चिप डिज़ाइन में भारत को ग्लोबल लेवल पर मजबूत बना रहा है।
3. आईआईटी कानपुर: इनोवेटिव चिप रिसर्च
आईआईटी कानपुर १९५९ में स्थापित उत्तर भारत का प्रमुख संस्थान है। यह कानपुर में है और रिसर्च-ओरिएंटेड एजुकेशन के लिए फेमस है। चिप डिज़ाइन में इसका इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स और वीएलएसआई पर स्पेशलाइज़्ड कोर्सेस ऑफर करता है। विभाग में १९७० से चिप रिसर्च चल रहा है, जहां छात्र नैनोटेक्नोलॉजी, डिवाइस मॉडलिंग और क्वांटम कंप्यूटिंग सीखते हैं। लैब में २०+ रिसर्चर्स काम करते हैं, जो छात्रों को मेंटर करते हैं। उदाहरण के लिए, छात्र ग्राफीन-बेस्ड चिप्स या नैनो-स्केल ट्रांजिस्टर डिज़ाइन करते हैं।
मुख्य कोर्स एमटेक इन माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजी है, साथ ही पीएचडी प्रोग्राम। बीटेक में इलेक्ट्रिकल ब्रांच छात्र वीएलएसआई माइनर चुन सकते हैं। रिसर्च में बियॉन्ड सीएमओएस डिवाइसेस, क्वांटम चिप्स और बायो-इलेक्ट्रॉनिक्स पर फोकस है। डीआरडीओ और आईएसआरओ जैसे ऑर्गेनाइज़ेशन्स के साथ प्रोजेक्ट्स चलते हैं, जो छात्रों को ५-१० लाख रुपये के फंड देते हैं। प्लेसमेंट रेट ९६% है, जहां माइक्रोन, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्लोबल फाउंड्रीज भर्ती करती हैं। औसत पैकेज १८ लाख रुपये है। यह संस्थान इनोवेशन को प्रोत्साहित करता है, जिससे छात्र रिसर्चर या एंटरप्रेन्योर बनते हैं।
| विशेषता | विवरण | लाभ |
| मुख्य कोर्स | एमटेक माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स | नैनो डिज़ाइन फोकस, १०+ इलेक्टिव्स |
| लैब सुविधाएं | सिमुलेशन टूल्स, नैनोफैब लैब | ३०+ रिसर्च प्रोजेक्ट्स, हैंड्स-ऑन एक्सपीरियंस |
| रिसर्च क्षेत्र | नैनोटेक, क्वांटम चिप्स, बायो-चिप्स | १०+ पेटेंट्स, आईएनएसपीआईआर फंडिंग |
| प्लेसमेंट | माइक्रोन, टाटा, ग्लोबल फाउंड्री | ९६% रेट, १८ लाख पैकेज, रिसर्च पोज़िशन्स |
आईआईटी कानपुर चिप डिज़ाइन में नई तकनीकों की खोज कर रहा है।
4. आईआईटी खड़गपुर: वीएलएसआई सिस्टम्स का हब
आईआईटी खड़गपुर १९५१ में स्थापित भारत का पहला आईआईटी है। यह पश्चिम बंगाल में है और एडवांस्ड इंजीनियरिंग के लिए जाना जाता है। चिप डिज़ाइन में इसका इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग दो स्पेशलाइज़्ड वीएलएसआई कोर्सेस ऑफर करता है। विभाग १९६० से सक्रिय है, जहां छात्र डिजिटल सिग्नल प्रोसेसिंग (डीएसपी), चिप आर्किटेक्चर और हाई-स्पीड सर्किट्स सीखते हैं। १५+ फैकल्टी मेंबर्स इंडस्ट्री प्रोजेक्ट्स पर काम करते हैं। उदाहरण के लिए, छात्र पाइपलाइनिंग टेक्नीक्स से फास्ट मल्टीप्लायर्स डिज़ाइन करते हैं।
मुख्य कोर्स एमटेक इन वीएलएसआई सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजी है, जो प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर जोर देता है। बीटेक में इलेक्ट्रॉनिक्स छात्र वीएलएसआई कोर चुन सकते हैं। रिसर्च में आईआईआर फिल्टर्स, लो-पावर डिज़ाइन और पैरेलल प्रोसेसिंग शामिल है। सी२एस प्रोग्राम से ५० लाख रुपये का फंडिंग मिला है, जो छात्रों को स्टेट-ऑफ-द-आर्ट लैब्स बनाने में मदद करता है। प्लेसमेंट में ९२% रेट है, एनपीएक्स, टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स और एमएसआई जैसी कंपनियां आती हैं। औसत पैकेज १७ लाख रुपये है। यह संस्थान पूर्व भारत के छात्रों के लिए चिप डिज़ाइन का गेटवे है।
| विशेषता | विवरण | लाभ |
| मुख्य कोर्स | एमटेक वीएलएसआई सिस्टम्स | डीएसपी इंटीग्रेशन, ८ महीने प्रोजेक्ट |
| लैब सुविधाएं | ईडीए टूल्स, डीएसपी किट्स | ४०+ इंडस्ट्री प्रोजेक्ट्स, वर्कशॉप्स |
| रिसर्च क्षेत्र | आईआईआर फिल्टर्स, लो-पावर, पैरेलल प्रोसेसिंग | १२+ पेटेंट्स, आईईईई कॉन्फ्रेंस |
| प्लेसमेंट | एनपीएक्स, टेक्सास, एमएसआई | ९२% रेट, १७ लाख पैकेज, हाई-टेक जॉब्स |
आईआईटी खड़गपुर चिप डिज़ाइन को रीजनल लेवल पर फैला रहा है।
5. आईआईटी दिल्ली: माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स लीडर
आईआईटी दिल्ली १९६१ में स्थापित दिल्ली-एनसीआर का टॉप इंस्टीट्यूट है। चिप डिज़ाइन में इसका सेंटर फॉर एप्लाइड रिसर्च इन इलेक्ट्रॉनिक्स (केयर) १९६९ से काम कर रहा है। यह सेंटर माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स में स्पेशलाइज़्ड है, जहां छात्र सिलिकॉन माइक्रोसर्किट्स, फोटोडिटेक्टर्स और एमईएमएस डिज़ाइन सीखते हैं। १०+ लैब्स में एडवांस्ड इक्विपमेंट हैं। उदाहरण के लिए, छात्र स्पिनट्रॉनिक्स-बेस्ड चिप्स पर प्रोजेक्ट्स करते हैं।
मुख्य कोर्स एमटेक इन वीएलएसआई डिज़ाइन टूल्स एंड टेक्नोलॉजी है, जो दो साल का है। पीएचडी प्रोग्राम रिसर्च-हेवी है। बीटेक में इलेक्ट्रिकल छात्र माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स इलेक्टिव्स लेते हैं। रिसर्च में टेराहर्ट्ज़ डिवाइसेस और क्वांटम सेंसर्स पर फोकस है। ईएसी प्रोग्राम से छात्रों को सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग ट्रेनिंग मिलती है। प्लेसमेंट में ९४% रेट है, मीडियन सैलरी १५.५९ लाख रुपये। कंपनियां जैसे स्टेला माइक्रॉनिक्स और इंटेल हैं। यह सेंटर छात्रों को डिवाइस फिज़िक्स से लेकर एप्लीकेशन्स तक सब सिखाता है।
| विशेषता | विवरण | लाभ |
| मुख्य कोर्स | एमटेक वीएलएसआई टूल्स | डिवाइस फिज़िक्स, ६ महीने इंटर्नशिप |
| लैब सुविधाएं | फैब्रिकेशन लैब, टेस्टिंग इक्विपमेंट | प्रोटोटाइपिंग, २०+ प्रोजेक्ट्स |
| रिसर्च क्षेत्र | स्पिनट्रॉनिक्स, टेराहर्ट्ज़, एमईएमएस | १५+ फंडेड प्रोजेक्ट्स, पेटेंट्स |
| प्लेसमेंट | स्टेला, इंटेल | ९४% रेट, १५.५९ लाख मीडियन, ग्लोबल ऑपर्चुनिटी |
आईआईटी दिल्ली चिप मैन्युफैक्चरिंग में लीडरशिप दे रहा है।
6. आईआईटी रुड़की: एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स
आईआईटी रुड़की १८४७ में स्थापित भारत का सबसे पुराना इंजीनियरिंग कॉलेज है। उत्तराखंड में स्थित, यह रिसर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए फेमस है। चिप डिज़ाइन में इसका इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स कोर्स ऑफर करता है। विभाग १९५० से सक्रिय है, जहां छात्र पावर डिवाइसेस, आरएफ आईसी और एनालॉग सर्किट्स सीखते हैं। १२ फैकल्टी मेंबर्स इंडस्ट्री कोलैबोरेशन्स करते हैं। उदाहरण के लिए, छात्र एलडीएमओएस ट्रांजिस्टर डिज़ाइन करते हैं।
मुख्य कोर्स एमटेक इन माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स एंड वीएलएसआई है, रेटिंग ५.०। बीटेक में इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांच छात्र स्पेशलाइज़ेशन चुनते हैं। रिसर्च में हाई-वोल्टेज डिवाइसेस और ५जी चिप्स पर काम है। टीजस प्रोग्राम से वीएलएसआई ट्रेनिंग मिलती है। प्लेसमेंट रेट ९३% है, औसत पैकेज १६ लाख। यह संस्थान प्रैक्टिकल स्किल्स पर फोकस करता है।
| विशेषता | विवरण | लाभ |
| मुख्य कोर्स | एमटेक माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स | आरएफ डिज़ाइन, प्रोजेक्ट वर्क |
| लैब सुविधाएं | सिमुलेशन सॉफ्टवेयर, आरएफ लैब | प्रैक्टिकल लैब्स, १५+ प्रोजेक्ट्स |
| रिसर्च क्षेत्र | एलडीएमओएस डिवाइसेस, पावर आईसी | इंडस्ट्री कोलैब, फंडिंग |
| प्लेसमेंट | हाई रेट, टेक जॉब्स | ९३% रेट, १६ लाख पैकेज |
आईआईटी रुड़की उभरते चिप डिज़ाइनरों को तैयार कर रहा है।
7. आईआईएससी बैंगलोर: रिसर्च-ओरिएंटेड ट्रेनिंग
आईआईएससी बैंगलोर १९०९ में स्थापित भारत का टॉप रिसर्च इंस्टीट्यूट है। बैंगलोर में स्थित, यह साइंस और टेक के लिए हब है। चिप डिज़ाइन में इसका माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स एंड वीएलएसआई डिज़ाइन ग्रुप विश्वस्तरीय है। ईईसीएस डिवीजन १९७० से काम कर रहा है, जहां छात्र नैनोस्केल डिवाइसेस, ग्राफीन मटेरियल्स और ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स सीखते हैं। २५+ रिसर्चर्स ग्लोबल प्रोजेक्ट्स पर काम करते हैं। उदाहरण के लिए, छात्र २डी मटेरियल्स से चिप्स डिज़ाइन करते हैं।
मुख्य कोर्स पीएचडी इन माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स है, साथ ही एमटेक। टैलेंटस्प्रिंट के साथ एडवांस्ड सर्टिफिकेशन प्रोग्राम चलता है। रिसर्च में गैन एचईएमटी, क्वांटम डिवाइसेस और बियॉन्ड सीएमओएस पर फोकस है। आईआईएससी कैंपस विज़िट और लैब एक्सरसाइज़ेस से प्रैक्टिकल लर्निंग होती है। प्लेसमेंट में ९७% रेट, औसत पैकेज २२ लाख। रिसर्च जॉब्स आईबीएम और गूगल में मिलते हैं। यह संस्थान डीप रिसर्च को बढ़ावा देता है।
| विशेषता | विवरण | लाभ |
| मुख्य कोर्स | पीएचडी माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स | डिवाइस-कर्किट को-डिज़ाइन, ९ महीने प्रोग्राम |
| लैब सुविधाएं | नैनोटेक लैब, वीएलएसआई टूल्स | ग्लोबल रिसर्च, ४०+ प्रोजेक्ट्स |
| रिसर्च क्षेत्र | गैन एचईएमटी, ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक्स, क्वांटम | २०+ पब्लिकेशन, फंडेड लैब्स |
| प्लेसमेंट | आईबीएम, गूगल | ९७% रेट, २२ लाख पैकेज, हाई इम्पैक्ट कैरियर |
आईआईएससी चिप डिज़ाइन में भारत का रिसर्च गढ़ है।
8. बीआईटीएस पिलानी: इंडस्ट्री-रेडी प्रोग्राम्स
बीआईटीएस पिलानी १९६४ में स्थापित राजस्थान का प्राइवेट टॉप इंस्टीट्यूट है। चिप डिज़ाइन में इसका इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स में लीडिंग है। सेंटर फॉर रिसर्च एक्सीलेंस इन सेमीकंडक्टर (सीआरईएसटी) २०२३ से चल रहा है। छात्र चिप प्रोसेसिंग, क्वांटम मटेरियल्स और ईवी चिप्स सीखते हैं। १८ फैकल्टी इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स हैं। उदाहरण के लिए, छात्र सोलर चिप्स पर प्रोजेक्ट्स करते हैं।
मुख्य कोर्स इंटीग्रेटेड एमएससी इन सेमीकंडक्टर एंड नैनोसाइंस है। बीटेक में इलेक्ट्रिकल स्पेशलाइज़ेशन उपलब्ध। रिसर्च में क्वांटम डिवाइसेस और आईओटी चिप्स पर फोकस। प्लेसमेंट ९५% रेट, आईबीएम, एसटी माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स और रिलायंस आती हैं। औसत पैकेज २० लाख। यह संस्थान प्रैक्टिकल और इंडस्ट्री-लिंक्ड एजुकेशन देता है।
| विशेषता | विवरण | लाभ |
| मुख्य कोर्स | एमएससी सेमीकंडक्टर | मल्टीडिसिप्लिनरी, ४ साल इंटीग्रेटेड |
| लैब सुविधाएं | स्टेट-ऑफ-द-आर्ट इंफ्रा, नैनो लैब | इंडस्ट्री कोलैब, ३०+ प्रोजेक्ट्स |
| रिसर्च क्षेत्र | क्वांटम डिवाइसेस, सोलर चिप्स, ईवी | आईपी डेवलपमेंट, १०+ पब्लिकेशन |
| प्लेसमेंट | आईबीएम, रिलायंस | ९५% रेट, २० लाख पैकेज, हाई-पेइंग जॉब्स |
बीआईटीएस चिप डिज़ाइन में इंडस्ट्री-रेडी ग्रेजुएट्स तैयार करता है।
9. एनआईटी त्रिची: एक्सेसिबल एजुकेशन
एनआईटी त्रिची १९६० में स्थापित तमिलनाडु का टॉप एनआईटी है। चिप डिज़ाइन में इसका ईसीई विभाग वीएलएसआई सिस्टम्स में एमटेक ऑफर करता है। विभाग १९७० से सक्रिय, जहां छात्र एनालॉग वीएलएसआई, डिजिटल स्ट्रक्चर्स और ऑप्टिमाइज़ेशन सीखते हैं। १४ फैकल्टी प्रैक्टिकल फोकस्ड हैं। उदाहरण के लिए, छात्र वेरिलॉग एचडीएल से एलयू और मल्टीप्लायर्स डिज़ाइन करते हैं।
मुख्य कोर्स एमटेक वीएलएसआई सिस्टम्स है। बीटेक में ईसीई छात्र इलेक्टिव्स लेते हैं। रिसर्च में फास्ट कन्वोल्यूशन, एडाप्टिव फिल्टर्स और लो-पावर आईआईआर पर काम। प्लेसमेंट ९१% रेट, औसत पैकेज १५ लाख। यह किफायती और क्वालिटी एजुकेशन देता है।
| विशेषता | विवरण | लाभ |
| मुख्य कोर्स | एमटेक वीएलएसआई सिस्टम्स | डीएसपी ऑप्टिमाइज़ेशन, लैब वर्क |
| लैब सुविधाएं | वेरिलॉग टूल्स, एफपीजीए किट्स | हैंड्स-ऑन लैब्स, २०+ प्रोजेक्ट्स |
| रिसर्च क्षेत्र | फास्ट कन्वोल्यूशन, एडाप्टिव फिल्टर्स | प्रोजेक्ट्स, पब्लिकेशन |
| प्लेसमेंट | ९१% रेट, इंजीनियरिंग जॉब्स | १५ लाख पैकेज, एक्सेसिबल |
एनआईटी त्रिची चिप ट्रेनिंग को सभी के लिए उपलब्ध करा रहा है।
10. आईआईआईटी बैंगलोर: चिप डिज़ाइन स्टूडियो
आईआईआईटी बैंगलोर १९९८ में स्थापित बैंगलोर का आईटी-फोकस्ड इंस्टीट्यूट है। चिप डिज़ाइन में इसका ईसीई विभाग सैमसंग चिप डिज़ाइन स्टूडियो चला रहा है। २०२५ में लॉन्च, यह स्टूडियो ईडीए टूल्स से सर्किट डिज़ाइन सिखाता है। १०+ टीम्स को एक्सेस मिलता है। उदाहरण के लिए, छात्र वेरिफिकेशन और सिमुलेशन पर प्रोजेक्ट्स करते हैं।
मुख्य कोर्स ईसीई में वीएलएसआई स्पेशलाइज़ेशन। रिसर्च में सर्किट सिमुलेशन और एफपीजीए इम्प्लीमेंटेशन। प्रोफेसर माधव राव मेंटर करते हैं। प्लेसमेंट ९४% रेट, सैमसंग और अन्य। यह इनोवेशन को बढ़ावा देता है।
| विशेषता | विवरण | लाभ |
| मुख्य कोर्स | ईसीई में वीएलएसआई | चिप स्टूडियो एक्सेस, टीम वर्क |
| लैब सुविधाएं | ईडीए टूल्स, सैमसंग स्पॉन्सर्ड | १५+ प्रोजेक्ट्स, मेंटरशिप |
| रिसर्च क्षेत्र | सर्किट सिमुलेशन, वेरिफिकेशन | स्टार्टअप सपोर्ट |
| प्लेसमेंट | सैमसंग | ९४% रेट, स्टार्टअप ऑपर्चुनिटी |
आईआईआईटी बैंगलोर चिप इनोवेशन का सेंटर है।
निष्कर्ष: भविष्य की चिप क्रांति में योगदान
भारत में चिप डिज़ाइन का क्षेत्र एक क्रांति का गवाह बन रहा है। ऊपर बताए गए १० विश्वविद्यालय न सिर्फ छात्रों को एडवांस्ड स्किल्स, रिसर्च ऑपर्चुनिटीज़ और हाई-पेइंग जॉब्स दे रहे हैं, बल्कि देश को सेल्फ-रिलायंट बनाने में भी योगदान दे रहे हैं। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत २०३० तक ८५,००० नई जॉब्स क्रिएट होंगी, और ये संस्थान इसकी बैकबोन हैं। अगर आप चिप डिज़ाइनर बनना चाहते हैं, तो इन विश्वविद्यालयों में एडमिशन के लिए तैयारी शुरू करें—जेईई या गेट जैसे एग्ज़ाम्स दें। सरल कोर्सेस, प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और इंडस्ट्री कोलैबोरेशन्स से आपका कैरियर चमकेगा। ये संस्थान न सिर्फ तकनीकी शिक्षा देते हैं, बल्कि इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप को भी प्रोत्साहित करते हैं। भारत का सेमीकंडक्टर फ्यूचर उज्ज्वल है—इन विश्वविद्यालयों के छात्र इसे साकार करेंगे। अभी एक्शन लें, और चिप क्रांति का हिस्सा बनें।
