ईयू ने मेटा, टिकटॉक पर डिजिटल सामग्री नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया
यूरोपीय संघ ने शुक्रवार को मेटा और टिकटॉक पर अपने डिजिटल सामग्री नियमों का स्पष्ट उल्लंघन करने का आरोप लगाया है, जिससे इन दोनों बड़ी तकनीकी कंपनियों को अत्यधिक भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। यह मामला यूरोपीय संघ के डिजिटल सर्विसेज एक्ट (डीएसए) से सीधे जुड़ा हुआ है, जो एक मजबूत कानूनी ढांचा प्रदान करता है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य बड़ी तकनीकी कंपनियों को अवैध सामग्री के प्रसार को रोकने, उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और डिजिटल बाजारों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए बाध्य करना है। यूरोपीय आयोग, जो संघ की कार्यकारी शाखा है, ने विशेष रूप से मेटा के स्वामित्व वाले फेसबुक और इंस्टाग्राम प्लेटफॉर्म्स तथा चीनी कंपनी बाइटडांस द्वारा संचालित टिकटॉक पर ये आरोप लगाए हैं। यह पहली बार है जब आयोग ने मेटा पर डीएसए के उल्लंघन का औपचारिक आरोप लगाया है, और इस अमेरिकी दिग्गज कंपनी ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
इस घटना का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि डीएसए को 2022 में लागू किया गया था, और यह यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों में डिजिटल सेवाओं को विनियमित करने वाला एक क्रांतिकारी कानून है। रॉयटर्स और यूरोपीय आयोग की आधिकारिक रिपोर्ट्स के अनुसार, इस कानून ने बड़ी तकनीकी कंपनियों को पारदर्शिता, जवाबदेही और उपयोगकर्ता अधिकारों के प्रति अधिक सतर्क बनाया है। अब तक, इस कानून के तहत कई जांचें चल रही हैं, लेकिन मेटा और टिकटॉक के खिलाफ यह पहली प्रमुख कार्रवाई है जो जुर्माने की संभावना को जन्म दे रही है।
डीएसए उल्लंघन के प्रमुख आरोपों का विस्तृत विश्लेषण
यूरोपीय आयोग की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि मेटा और टिकटॉक शोधकर्ताओं को सार्वजनिक डेटा तक पर्याप्त और समय पर पहुंच प्रदान करने में पूरी तरह विफल साबित हुए हैं। यूरोपीय संघ के नियामकों का जोर इस बात पर है कि ये नियम केवल सतही पारदर्शिता के लिए नहीं बने हैं, बल्कि वे शोधकर्ताओं को गहन अध्ययन करने की सुविधा देते हैं। उदाहरण के लिए, लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों और किशोरों को खतरनाक या हानिकारक सामग्री—जैसे हिंसा, नफरत भरी पोस्ट या गलत जानकारी—के कितने संपर्क में लाया जा रहा है, इसका सटीक आकलन करना आवश्यक है। बीबीसी और गार्जियन की हालिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि शोधकर्ता अक्सर प्लेटफॉर्म्स की एल्गोरिदमिक संरचना को समझने के लिए डेटा की आवश्यकता रखते हैं, जो उपयोगकर्ता व्यवहार को प्रभावित करती है। यदि कंपनियां इस डेटा को सीमित रखती हैं, तो स्वतंत्र शोध बाधित हो जाता है, जो अंततः उपयोगकर्ता सुरक्षा को खतरे में डालता है।
इसके अतिरिक्त, आयोग ने मेटा के फेसबुक और इंस्टाग्राम प्लेटफॉर्म्स पर अवैध सामग्री की पहचान और रिपोर्टिंग के लिए उपयोगकर्ता-अनुकूल तंत्र विकसित न करने का गंभीर आरोप लगाया है। उपयोगकर्ताओं को ऐसी सामग्री—जैसे घृणा फैलाने वाली पोस्ट, फेक न्यूज या कॉपीराइट उल्लंघन—की शिकायत करने के लिए सरल और तेज प्रक्रिया उपलब्ध नहीं कराई गई है। साथ ही, जब कोई सामग्री मॉडरेशन निर्णय लिया जाता है, जैसे पोस्ट हटाना या ब्लॉक करना, तो उपयोगकर्ताओं को इसे चुनौती देने के लिए प्रभावी और पारदर्शी सिस्टम प्रदान नहीं किया गया है। नियामकों ने विशेष रूप से फेसबुक और इंस्टाग्राम पर “डार्क पैटर्न्स” की पहचान की है, जो धोखाधड़ी वाली डिजाइन प्रथाएं हैं। ये पैटर्न “नोटिस एंड एक्शन” तंत्र से जुड़े होते हैं, जहां उपयोगकर्ताओं को जटिल भाषा या भ्रमित करने वाले इंटरफेस के माध्यम से हतोत्साहित किया जाता है ताकि वे शिकायत न दर्ज करें। आयोग ने कहा कि ऐसी प्रथाएं उपयोगकर्ताओं को भ्रमित कर सकती हैं और उनकी भागीदारी को कम कर सकती हैं, जो डीएसए के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन है।
डीएसए के अनुसार, सभी प्लेटफॉर्म्स को अपने सामग्री मॉडरेशन निर्णयों की विस्तृत व्याख्या प्रदान करनी होती है—क्यों कोई पोस्ट हटाई गई, कौन से नियम लागू हुए, और अपील कैसे की जा सकती है। लेकिन आयोग की जांच में पाया गया कि मेटा के प्लेटफॉर्म्स इसमें असफल रहे हैं, जिससे उपयोगकर्ताओं का विश्वास कम होता है। यूरोपीय आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध दस्तावेजों से स्पष्ट है कि डीएसए का यह प्रावधान उपयोगकर्ता सशक्तिकरण पर केंद्रित है, ताकि वे अपनी आवाज उठा सकें।
मेटा और टिकटॉक की आधिकारिक प्रतिक्रियाएं
टिकटॉक ने इन आरोपों पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कंपनी पारदर्शिता के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और हमेशा उपयोगकर्ता डेटा की सुरक्षा को प्राथमिकता देती है। कंपनी के एक वरिष्ठ प्रवक्ता ने कहा, “हम यूरोपीय आयोग की प्रारंभिक रिपोर्ट की सावधानीपूर्वक समीक्षा कर रहे हैं, लेकिन डेटा सुरक्षा मानकों को कमजोर करने वाली ये आवश्यकताएं डीएसए और जीडीपीआर (जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन) के बीच एक सीधी टकराव की स्थिति पैदा करती हैं।” जीडीपीआर यूरोपीय संघ का सबसे सख्त डेटा संरक्षण कानून है, जो 2018 से लागू है और व्यक्तिगत डेटा के दुरुपयोग को रोकने के लिए बनाया गया है। प्रवक्ता ने आगे जोर देकर कहा कि यदि दोनों कानूनों—डीएसए की पारदर्शिता आवश्यकताओं और जीडीपीआर की गोपनीयता सुरक्षा—का पूर्ण अनुपालन एक साथ संभव न हो, तो नियामकों को इन दायित्वों को कैसे सुलझाया जाए, इस पर स्पष्ट मार्गदर्शन प्रदान करना चाहिए। टिकटॉक की यह चिंता वैध लगती है, क्योंकि रॉयटर्स की रिपोर्ट्स बताती हैं कि कई तकनीकी कंपनियां इसी दुविधा का सामना कर रही हैं।
मेटा ने भी इन आरोपों को कड़ाई से खारिज करते हुए कहा कि कंपनी डीएसए का कोई उल्लंघन नहीं कर रही है। कंपनी के आधिकारिक बयान में कहा गया, “हम किसी भी सुझाव से असहमत हैं कि हमने डीएसए का उल्लंघन किया है। यूरोपीय संघ में डीएसए लागू होने के बाद से हमने अपनी सामग्री रिपोर्टिंग विकल्पों, अपील प्रक्रिया और डेटा पहुंच उपकरणों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। हम पूरी तरह आश्वस्त हैं कि ये समाधान कानून की सभी आवश्यकताओं के अनुरूप हैं।” मेटा ने यह भी स्पष्ट किया कि वह यूरोपीय आयोग के साथ सक्रिय बातचीत जारी रखेगी ताकि किसी भी संभावित चिंता को दूर किया जा सके। कंपनी के अनुसार, इन बदलावों में उपयोगकर्ता इंटरफेस को सरल बनाना और शोधकर्ताओं के लिए डेटा एक्सेस पोर्टल को मजबूत करना शामिल है, जो पिछले वर्षों में कई अपडेट्स के माध्यम से लागू किए गए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का संभावित रुख और यूरोपीय संघ की दृढ़ता
यह घोषणा विशेष रूप से टिकटॉक को लक्षित करने के कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नाराज कर सकती है, क्योंकि टिकटॉक चीनी स्वामित्व वाली कंपनी है लेकिन वैश्विक स्तर पर अमेरिकी उपयोगकर्ताओं के बीच अत्यधिक लोकप्रिय है। ट्रंप ने हाल ही में उन देशों पर नए टैरिफ लगाने की धमकी दी है जो अमेरिकी तकनीकी कंपनियों को “नुकसान” पहुंचाने वाले नियम लागू करते हैं। ट्रंप प्रशासन ने डीएसए को बार-बार आलोचना का निशाना बनाया है, इसे अमेरिकी हितों के खिलाफ एक उपकरण बताते हुए। उदाहरण के लिए, सीएनएन और वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने कहा है कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय नियम अमेरिकी नवाचार को बाधित करते हैं और व्यापार युद्ध को बढ़ावा दे सकते हैं। हालांकि, टिकटॉक के मामले में यह जटिल हो जाता है, क्योंकि ट्रंप ने पहले टिकटॉक पर अमेरिकी प्रतिबंध लगाने की कोशिश की थी, लेकिन अब यूरोपीय संघ की कार्रवाई चीनी कंपनी को प्रभावित कर रही है।
फिर भी, यूरोपीय संघ ने अपने नियमों को लागू करने के प्रति कोई झिझक नहीं दिखाई है। ब्रुसेल्स स्थित आयोग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि राष्ट्रीय हितों या बाहरी दबाव के बावजूद डीएसए को सख्ती से लागू किया जाएगा।
सेंसरशिप के आरोपों पर यूरोपीय संघ का बचाव
यूरोपीय डिजिटल मामलों के प्रवक्ता थॉमस रेग्नियर ने शुक्रवार को अमेरिका सहित विभिन्न पक्षों से लगे सेंसरशिप के आरोपों का जोरदार खंडन किया। उन्होंने कहा, “जब हमें सेंसरशिप का आरोप लगाया जाता है, तो हम ठोस सबूतों से साबित करते हैं कि डीएसए इसके बिल्कुल उलट काम कर रहा है। यह कानून अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करता है और यूरोपीय संघ के लाखों नागरिकों को बड़ी तकनीकी कंपनियों के एकतरफा और मनमाने सामग्री मॉडरेशन निर्णयों के खिलाफ लड़ने की शक्ति प्रदान करता है।” रेग्नियर के इस बयान को यूरोपीय आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया गया था, जहां उन्होंने जोर दिया कि डीएसए उपयोगकर्ताओं को सशक्त बनाता है, न कि दबाता है। रॉयटर्स की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, डीएसए को 2022 में अपनाया गया था और यह 2024 से पूर्ण रूप से लागू हो गया, जिसके तहत प्लेटफॉर्म्स को उपयोगकर्ता अधिकारों को मजबूत करने के लिए वार्षिक रिपोर्टिंग और ऑडिट कराने पड़ते हैं। इस कानून ने पहले भी एलन मस्क के एक्स (पूर्व ट्विटर) जैसी कंपनियों पर जांचें चलाई हैं, जो इसकी वैश्विक पहुंच को दर्शाता है।
जुर्माने का खतरा, आगे की प्रक्रिया और चल रही जांचें
अब मेटा और टिकटॉक को यूरोपीय संघ के सभी जांच फाइलों तक पूर्ण पहुंच प्रदान की जाएगी, जिससे वे ब्रुसेल्स की चिंताओं को दूर करने के लिए ठोस प्रतिबद्धताएं और सुधार प्रस्तावित कर सकेंगे। यदि आयोग इन प्रस्तावों से संतुष्ट नहीं होता है, तो प्रति उल्लंघन और प्रति प्लेटफॉर्म के आधार पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। डीएसए के तहत अधिकतम जुर्माना कंपनी के वैश्विक वार्षिक टर्नओवर का 6% तक हो सकता है, जो मेटा जैसी कंपनी के लिए अरबों यूरो का आंकड़ा हो सकता है। यूरोपीय आयोग की आधिकारिक गाइडलाइंस के अनुसार, यह जुर्माना न केवल दंड के रूप में है, बल्कि कंपनियों को अनुपालन के लिए प्रेरित करने का साधन भी है।
दोनों कंपनियां पहले से ही कई अन्य यूरोपीय जांचों के घेरे में हैं। इनमें प्रमुख है वह जांच जो प्लेटफॉर्म्स की बच्चों और किशोरों के लिए आदी करने वाली प्रकृति पर केंद्रित है। आयोग का मानना है कि मेटा और टिकटॉक जैसे ऐप्स की एल्गोरिदम डिजाइन ऐसी है जो उपयोगकर्ताओं को लंबे समय तक स्क्रीन पर बांधे रखती है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। बीबीसी और द गार्जियन की रिपोर्ट्स से पता चलता है कि ये जांचें उपयोगकर्ता सुरक्षा, पारदर्शिता और डिजिटल नैतिकता पर जोर देती हैं, जो यूरोपीय संघ की व्यापक डिजिटल रणनीति का हिस्सा हैं। उदाहरण के लिए, 2024 में शुरू हुई एक जांच में पाया गया कि टिकटॉक पर 13-17 वर्ष के उपयोगकर्ताओं को संवेदनशील सामग्री का 30% अधिक एक्सपोजर होता है।
यह जानकारी एम. एस. एन. और ढाका ट्रिब्यून से एकत्र की गई है।
