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चिप संप्रभुता पर बड़ा दांव लगाने वाले शीर्ष 10 देश-क्या भारत पकड़ सकता है?

आज की तेज़ रफ्तार वाली दुनिया में चिप्स या सेमीकंडक्टर हर चीज़ का आधार बन चुके हैं। स्मार्टफोन से लेकर कारों, एआई सिस्टम, रक्षा उपकरणों और यहां तक कि स्वास्थ्य सेवाओं के यंत्रों तक, सब कुछ इन छोटे-छोटे चिप्स पर निर्भर है। लेकिन वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाएं, जैसे महामारी या भू-राजनीतिक तनाव, ने कई देशों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। चिप संप्रभुता का मतलब क्या है? सरल शब्दों में, यह एक ऐसी स्थिति है जहां कोई देश अपनी जरूरत के चिप्स खुद डिजाइन, बनाए और इस्तेमाल कर सके, बिना किसी विदेशी कंपनी या देश पर पूरी तरह निर्भर हुए। यह सिर्फ तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक स्वतंत्रता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा से जुड़ा है। उदाहरण के लिए, अगर कोई देश चिप्स पर निर्भर रहता है, तो युद्ध या व्यापार प्रतिबंधों के दौरान उसकी पूरी अर्थव्यवस्था ठप हो सकती है। दुनिया भर में चिप बाजार 2025 में 600 बिलियन डॉलर से ज्यादा का होने का अनुमान है, और इसमें एआई, 5जी, इलेक्ट्रिक वाहन जैसी नई तकनीकों की मांग तेजी से बढ़ रही है।

इस लेख में हम दुनिया के टॉप 10 देशों पर विस्तार से नजर डालेंगे जो चिप संप्रभुता के लिए अरबों डॉलर का निवेश कर रहे हैं। साथ ही, भारत की स्थिति को समझेंगे—क्या यह इन देशों से पीछे है या तेजी से पकड़ बना रहा है? भारत जैसे विकासशील देश के लिए यह रेस बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और 2030 तक चिप मांग दोगुनी हो सकती है। सरल शब्दों में कहें तो, चिप संप्रभुता न सिर्फ तकनीकी ताकत देगी, बल्कि लाखों नौकरियां पैदा करेगी और भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का मजबूत हिस्सा बनाएगी। आइए, इस रोचक यात्रा को शुरू करते हैं और देखते हैं कि कैसे ये देश अपनी रणनीतियों से भविष्य को आकार दे रहे हैं।​

चिप संप्रभुता क्यों महत्वपूर्ण है?

चिप संप्रभुता आज के समय में हर देश के लिए एक बड़ा लक्ष्य बन चुका है, क्योंकि यह सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को मजबूत नहीं करती, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को सुरक्षित रखती है। महामारी के दौरान चिप की भारी कमी ने दुनिया को दिखा दिया कि विदेशी आपूर्ति पर निर्भर रहना कितना जोखिम भरा है—कारखाने बंद हो गए, फोन और कंप्यूटर महंगे हो गए। सरल शब्दों में, अगर कोई देश चिप्स आयात पर निर्भर है, तो कोई भी वैश्विक संकट उसकी तकनीकी प्रगति को रोक सकता है। इसके अलावा, भू-राजनीतिक तनाव जैसे अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर ने कई देशों को अपनी खुद की फैब्रिकेशन प्लांट्स (फैब्स) बनाने के लिए प्रेरित किया है, ताकि वे आपूर्ति श्रृंखला को नियंत्रित कर सकें।

चिप संप्रभुता से न सिर्फ आयात कम होता है, बल्कि नई तकनीकों जैसे एआई और 5जी में नवाचार बढ़ता है। भारत के संदर्भ में देखें तो, यहां 95% चिप्स आयात होते हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है—रक्षा उपकरणों से लेकर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स तक सब प्रभावित होते हैं। ग्लोबल सेमीकंडक्टर मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, और जो देश संप्रभुता हासिल करेंगे, वे ही आर्थिक रूप से मजबूत रहेंगे। लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं—उच्च लागत, कुशल श्रमिकों की कमी और पर्यावरणीय मुद्दे। फिर भी, यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां निवेश से ट्रिलियन डॉलर का बाजार खुल सकता है। नीचे एक तालिका है जो प्रमुख कारणों को सरलता से दर्शाती है, ताकि आप एक नजर में समझ सकें:​

कारण विवरण प्रभावित क्षेत्र
आपूर्ति श्रृंखला जोखिम महामारी और युद्ध जैसे संकटों से चिप की कमी, जिससे उत्पादन रुक जाता है ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स
भू-राजनीतिक तनाव यूएस-चीन जैसे ट्रेड वॉर से निर्यात प्रतिबंध, जो सुरक्षा को खतरे में डालते हैं रक्षा, एआई तकनीक
आर्थिक स्वतंत्रता घरेलू उत्पादन से आयात पर निर्भरता कम, जीडीपी बढ़ाने में मदद जीडीपी वृद्धि, रोजगार सृजन
तकनीकी नवाचार एआई, 5जी और ईवी के लिए उन्नत चिप्स की जरूरत, जो स्थानीय विकास को बढ़ावा दे स्वास्थ्य, संचार, डिजिटल अर्थव्यवस्था

यह तालिका स्पष्ट करती है कि चिप संप्रभुता वैश्विक अर्थव्यवस्था को कैसे नया आकार दे रही है, और भारत जैसे देशों के लिए यह एक सुनहरा अवसर है।

1. ताइवान: चिप का विश्व राजा

ताइवान को चिप उत्पादन की दुनिया में एक सच्चा राजा कहा जा सकता है, क्योंकि यह न सिर्फ बाजार पर कब्जा जमाए हुए है बल्कि वैश्विक तकनीक को आकार भी दे रहा है। यह छोटा-सा द्वीप देश वैश्विक चिप बाजार का 60% से ज्यादा हिस्सा नियंत्रित करता है, जो इसे भू-राजनीतिक रूप से भी मजबूत बनाता है। मुख्य वजह है टीएसएमसी, दुनिया की सबसे बड़ी चिप मैन्युफैक्चरिंग कंपनी, जो एप्पल के आईफोन से लेकर एनवीडिया के ग्राफिक्स कार्ड्स तक सब बनाती है। ताइवान की उन्नत तकनीक, जैसे 3 एनएम से छोटे नोड्स, इसे प्रतिस्पर्धियों से बहुत आगे रखती है, और यह सब सालों की मेहनत और सरकारी समर्थन से संभव हुआ है।

सरकार और निजी कंपनियां मिलकर हर साल अरबों डॉलर निवेश कर रही हैं, जिससे 2025 में चिप उत्पादन और तेजी से बढ़ेगा। लेकिन चीन के साथ बढ़ते तनाव ने ताइवान को “सिलिकॉन शील्ड” की अवधारणा दी है, जहां चिप उत्पादन ही इसकी सबसे बड़ी रक्षा है। ताइवान की सफलता का राज है इसका कुशल वर्कफोर्स—लाखों इंजीनियर जो सालों से इस क्षेत्र में ट्रेनिंग ले रहे हैं—और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, जैसे विश्वसनीय बिजली और पानी की आपूर्ति। सरल शब्दों में, ताइवान ने साबित कर दिया कि छोटा देश भी वैश्विक सप्लाई चेन का केंद्र बन सकता है, अगर फोकस सही हो। नीचे तालिका में ताइवान के प्रमुख आंकड़े दिए गए हैं, जो इसकी ताकत को एक नजर में दिखाते हैं:​

पैरामीटर आंकड़ा वैश्विक हिस्सा
बाजार हिस्सा 60%+ चिप उत्पादन
प्रमुख कंपनी टीएसएमसी 50% वैश्विक चिप्स
निवेश 2025 अरबों डॉलर एआई और 5जी फैब्स
चुनौतियां भू-राजनीतिक जोखिम चीन तनाव

ताइवान की यह यात्रा दुनिया को प्रेरणा देती है कि कैसे नवाचार और रणनीति से संप्रभुता हासिल की जा सकती है।​

2. दक्षिण कोरिया: मेमोरी चिप्स का बादशाह

दक्षिण कोरिया चिप संप्रभुता के क्षेत्र में एक चमकता सितारा है, जो न सिर्फ मेमोरी चिप्स में दुनिया का लीडर है बल्कि पूरी सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री को नई दिशा दे रहा है। यह देश वैश्विक बाजार में दूसरा सबसे बड़ा खिलाड़ी है, जहां मेमोरी चिप्स जैसे डीआरएएम और नैंड फ्लैश का उत्पादन 17-20% हिस्सा रखता है। सैमसंग और एसके हाइनिक्स जैसी दिग्गज कंपनियां इसकी रीढ़ हैं, जो स्मार्टफोन से लेकर डेटा सेंटर्स तक चिप्स सप्लाई करती हैं। सरकार ने लंबे समय से अगली पीढ़ी के चिप्स पर जोर दिया है, जैसे एआई प्रोसेसर्स और ऑटोमोटिव चिप्स, जो इलेक्ट्रिक वाहनों की क्रांति को सपोर्ट करेंगे।

2025 में कोरिया का चिप उत्पादन 14% बढ़ने का अनुमान है, क्योंकि देश एडवांस्ड फाउंड्री में भारी निवेश कर रहा है। चुनौतियां जैसे वैश्विक प्रतिस्पर्धा और ऊर्जा लागत बेशक हैं, लेकिन कोरिया का मजबूत आरएंडडी सिस्टम—जिसमें हर साल हजारों पेटेंट फाइल होते हैं—इसे आगे रखता है। दक्षिण कोरिया की रणनीति सरल है घरेलू बाजार को मजबूत कर निर्यात बढ़ाना, जिससे अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई मिले। यह देश दिखाता है कि कैसे शिक्षा और उद्योग का मेल संप्रभुता ला सकता है। प्रमुख आंकड़ों की तालिका नीचे है:​

पैरामीटर आंकड़ा वैश्विक हिस्सा
बाजार हिस्सा 17-20% मेमोरी चिप्स
प्रमुख कंपनियां सैमसंग, एसके हाइनिक्स डीआरएएम लीडर
फोकस क्षेत्र एआई चिप्स, ऑटोमोटिव अगली पीढ़ी तकनीक
वृद्धि दर 2025 14% उत्पादन विस्तार

यह तालिका कोरिया की मजबूत स्थिति को रेखांकित करती है।​

3. चीन: तेज़ी से आत्मनिर्भरता की ओर

चीन चिप संप्रभुता की दौड़ में सबसे आक्रामक खिलाड़ी है, जो दुनिया का सबसे बड़ा चिप उपभोक्ता होने के साथ-साथ उत्पादक भी बनने की कोशिश कर रहा है। यह देश पहले से 20% से ज्यादा वैश्विक उत्पादन करता है और “मेड इन चाइना 2025” योजना से 2030 तक 25% हिस्सा हासिल करने का लक्ष्य रखता है। एसएमआईसी और वुशी मेमोरी जैसी कंपनियां मिड-टियर चिप्स पर फोकस कर रही हैं, जो स्मार्टफोन और इलेक्ट्रिक कारों के लिए जरूरी हैं। सरकार ने हाल ही में 47 बिलियन डॉलर का विशेष फंड लॉन्च किया है, जो फैब्स और आरएंडडी को बढ़ावा देगा।

लेकिन अमेरिकी सैंक्शंस ने चुनौतियां बढ़ा दी हैं, फिर भी 2025 में उत्पादन 14% की दर से बढ़ेगा। चीन की रणनीति एआई और इलेक्ट्रिक वाहनों पर केंद्रित है, जहां यह घरेलू बाजार को आत्मनिर्भर बनाना चाहता है। सरल शब्दों में, चीन दिखा रहा है कि सरकारी इच्छाशक्ति से कैसे तेजी से प्रगति की जा सकती है। तालिका में मुख्य बिंदु:​

पैरामीटर आंकड़ा वैश्विक हिस्सा
बाजार हिस्सा 20%+ कुल चिप उत्पादन
प्रमुख कंपनियां एसएमआईसी, वुशी मेमोरी मिड-टियर नोड्स
सरकारी फंड 47 बिलियन डॉलर आत्मनिर्भरता योजना
लक्ष्य 2030 25% उत्पादन एआई और निर्यात

चीन की यह दौड़ वैश्विक संतुलन को बदल सकती है।​

4. संयुक्त राज्य अमेरिका: चिप्स एक्ट का दम

अमेरिका चिप संप्रभुता को राष्ट्रीय प्राथमिकता बना चुका है, जहां चिप्स एंड साइंस एक्ट ने इसे फिर से दुनिया का तकनीकी लीडर बनाने की कोशिश शुरू की है। यह एक्ट 52 बिलियन डॉलर का निवेश लाया है, जो घरेलू फैब्स बनाने में मदद करेगा। इंटेल और एनवीडिया जैसी कंपनियां एडवांस्ड चिप्स पर काम कर रही हैं, और अमेरिका पहले से 12% वैश्विक हिस्सा रखता है। 2025 तक नई फैब्स से उत्पादन दोगुना हो सकता है, खासकर एरिजोना और ओहियो में।

फोकस रक्षा, एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग पर है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगा। चुनौतियां जैसे उच्च लागत और श्रमिकों की कमी हैं, लेकिन अमेरिका एशिया से उत्पादन वापस लाने की रणनीति पर चल रहा है। यह देश दिखाता है कि कैसे नीतियां और निजी क्षेत्र का मेल चमत्कार कर सकता है। आंकड़ों की तालिका:​

पैरामीटर आंकड़ा वैश्विक हिस्सा
बाजार हिस्सा 12% एडवांस्ड लॉजिक चिप्स
सरकारी निवेश 52 बिलियन डॉलर चिप्स एक्ट
प्रमुख कंपनियां इंटेल, एनवीडिया डिजाइन और उत्पादन
फोकस एआई, रक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा

अमेरिका की यह पहल इसे सुपरपावर बनाए रखेगी।​

5. जापान: सामग्री और उपकरणों का मास्टर

जापान चिप संप्रभुता की दौड़ में एक अनोखी भूमिका निभा रहा है, जहां यह न सिर्फ उत्पादन करता है बल्कि पूरी वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत बनाने वाले सामग्री और उपकरणों का मास्टर बन चुका है। यह देश चिप बाजार में लगभग 10% हिस्सा रखता है, लेकिन इसकी असली ताकत चिप बनाने के लिए जरूरी रसायनों, लिथोग्राफी टूल्स और अन्य सामग्रियों में छिपी है, जो दुनिया के 50% से ज्यादा चिप उत्पादन को सपोर्ट करती हैं। टोक्यो इलेक्ट्रॉन, रेनेसास और कियोक्सिया जैसी कंपनियां वैश्विक स्तर पर ये उपकरण और सामग्री बनाती हैं, जो एडवांस्ड चिप्स के बिना नहीं बन सकतीं।

जापान सरकार ने हाल के वर्षों में 20 बिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है, जो लिगेसी चिप्स (पुरानी लेकिन जरूरी तकनीक) और एआई चिप्स पर फोकस करेगा, ताकि देश अपनी विशेषज्ञता को बनाए रखे। 2025 में जापान एआई और ऑटोमोटिव चिप्स में नया विस्तार करेगा, लेकिन घटती जनसंख्या और श्रमिक कमी जैसी चुनौतियां बाधा बन सकती हैं। फिर भी, जापान का आरएंडडी सिस्टम—जिसमें विश्व स्तर के लैब्स और यूनिवर्सिटी हैं—इसे बेजोड़ बनाता है, और यह देश दिखाता है कि कैसे सप्लाई चेन के हर हिस्से पर कब्जा संप्रभुता की कुंजी है। सरल शब्दों में, जापान बिना शोर मचाए चिप दुनिया का पीछे का इंजन चला रहा है। नीचे तालिका में प्रमुख आंकड़े हैं:​

पैरामीटर आंकड़ा वैश्विक हिस्सा
बाजार हिस्सा 10% सामग्री और टूल्स
प्रमुख कंपनियां टोक्यो इलेक्ट्रॉन, रेनेसास, कियोक्सिया लिथोग्राफी और मटेरियल्स
निवेश 20 बिलियन डॉलर नई फैब्स और आरएंडडी
फोकस एआई, लिगेसी चिप्स सप्लाई चेन मजबूती

जापान की यह विशेषज्ञता पूरी चिप इकोसिस्टम को मजबूत करती है और वैश्विक निर्भरता को कम करने में मदद करती है।

6. यूरोपीय संघ: चिप्स एक्ट से एकजुटता

यूरोपीय संघ चिप संप्रभुता के लिए एकजुटता का बेहतरीन उदाहरण पेश कर रहा है, जहां सदस्य देश मिलकर एशिया पर बढ़ती निर्भरता को कम करने की कोशिश कर रहे हैं, और यह सामूहिक प्रयास 43 बिलियन यूरो के चिप्स एक्ट से संचालित हो रहा है। ईयू का लक्ष्य 2030 तक वैश्विक चिप उत्पादन का 20% हिस्सा हासिल करना है, जो वर्तमान 10% से दोगुना होगा, और इसमें जर्मनी, फ्रांस और नीदरलैंड्स जैसे देश प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। जर्मनी 20 बिलियन यूरो का निवेश कर फैब्स आकर्षित कर रहा है, जबकि फ्रांस का 2030 प्लान एआई और क्वांटम चिप्स पर फोकस करता है। नीदरलैंड्स एएसएमएल जैसी कंपनी से ईयूवी लिथोग्राफी टूल्स का 90% वैश्विक उत्पादन संभालता है, जो एडवांस्ड चिप्स के लिए अनिवार्य है।

2025 तक ईयू में नई फैब्स और पैकेजिंग यूनिट्स बनेंगी, जो रक्षा, ऑटोमोटिव और ग्रीन टेक क्षेत्रों को मजबूत करेंगी। चुनौतियां जैसे सदस्य देशों के बीच समन्वय की कमी और ऊर्जा संकट हैं, लेकिन ईयू की यह रणनीति दिखाती है कि कैसे सामूहिक निवेश से छोटे-छोटे देश मिलकर बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं। सरल शब्दों में, ईयू चिप संप्रभुता को यूरोपीय एकता का प्रतीक बना रहा है। तालिका में मुख्य बिंदु:​

पैरामीटर आंकड़ा प्रमुख देश
कुल निवेश 43 बिलियन यूरो ईयू चिप्स एक्ट
जर्मनी निवेश 20 बिलियन यूरो फैब आकर्षण
फ्रांस फोकस एआई, क्वांटम फ्रांस 2030 प्लान
नीदरलैंड्स भूमिका ईयूवी टूल्स 90% एएसएमएल और सप्लाई चेन

ईयू की यह रणनीति सामूहिक शक्ति और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करती है।​

7. इज़राइल: इनोवेशन हब

इज़राइल चिप संप्रभुता में इनोवेशन और डिजाइन का सच्चा हब बन चुका है, जहां छोटा देश होने के बावजूद यह एआई, साइबर सिक्योरिटी और ऑटोनॉमस टेक्नोलॉजी में वैश्विक लीडर है, और इसका 5% बाजार हिस्सा डिजाइन क्षेत्र में बहुत बड़ा प्रभाव डालता है। इंटेल इज़राइल, मोबाइलआई और मेलानॉक्स जैसी कंपनियां एआई प्रोसेसर्स और ऑटोनॉमस व्हीकल चिप्स डिजाइन करती हैं, जो दुनिया भर में इस्तेमाल होती हैं। सरकार स्टार्टअप्स को भारी फंडिंग और टैक्स छूट देती है, जिससे 2025 में निवेश और बढ़ेगा और इज़राइल एआई चिप्स का निर्यात केंद्र बनेगा।

इसकी ताकत है मजबूत टैलेंट पूल—प्रति व्यक्ति सबसे ज्यादा इंजीनियर्स—और सैन्य-उद्योग साझेदारी, जो रक्षा चिप्स में विशेषज्ञता लाती है। चुनौतियां भू-राजनीतिक सुरक्षा जोखिम हैं, लेकिन इज़राइल वैश्विक पार्टनरशिप्स से इन्हें संभाल रहा है। सरल शब्दों में, इज़राइल साबित कर रहा है कि इनोवेशन से छोटा देश भी चिप रेस में बड़ा खिलाड़ी बन सकता है। तालिका में आंकड़े:​

पैरामीटर आंकड़ा फोकस क्षेत्र
बाजार हिस्सा 5% डिजाइन और इनोवेशन
प्रमुख क्षेत्र एआई, साइबर सिक्योरिटी, ऑटोनॉमस टेक स्टार्टअप्स
सरकारी सपोर्ट फंडिंग और ट्रेनिंग टैलेंट डेवलपमेंट
चुनौतियां सुरक्षा जोखिम वैश्विक साझेदारी

इज़राइल की इनोवेशन संप्रभुता को नई ऊंचाई दे रही है।​

8. मलेशिया: असेंबली और टेस्टिंग लीडर

मलेशिया चिप संप्रभुता में असेंबली, पैकेजिंग और टेस्टिंग का लीडर उभर रहा है, जो दक्षिण-पूर्व एशिया का महत्वपूर्ण हब बन चुका है और वैश्विक चिप उत्पादन का 13% हिस्सा संभालता है, खासकर बैकएंड प्रोसेसिंग में। ग्लोबलफाउंड्रीज, माइक्रॉन और यूएमसी जैसी कंपनियां यहां फैब्स और टेस्टिंग यूनिट्स चला रही हैं, जो एशिया की मजबूत सप्लाई चेन का हिस्सा हैं।

मलेशिया सरकार विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए टैक्स इंसेंटिव्स और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार कर रही है, जिससे 2025 में उत्पादन विस्तार होगा और देश एआई चिप्स के पैकेजिंग में विशेषज्ञ बनेगा। इसकी ताकत कम लागत वाला श्रम और भौगोलिक स्थिति है, लेकिन कुशल वर्कर्स की कमी और पर्यावरण नियम चुनौतियां हैं। सरल शब्दों में, मलेशिया चिप चेन के अंतिम चरण को मजबूत कर वैश्विक बाजार में अपनी जगह बना रहा है। तालिका:​

पैरामीटर आंकड़ा वैश्विक हिस्सा
बाजार हिस्सा 13% असेंबली और टेस्टिंग
प्रमुख क्षेत्र बैकएंड मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग विदेशी फैब्स
निवेश 2025 बढ़ता हुआ सप्लाई चेन विस्तार
चुनौतियां श्रमिक ट्रेनिंग लागत नियंत्रण

मलेशिया सप्लाई चेन को मजबूत कर एशियाई हब बन रहा है।​

9. यूनाइटेड किंगडम: डिजाइन और रिसर्च फोकस

यूनाइटेड किंगडम चिप संप्रभुता में डिजाइन, लाइसेंसिंग और रिसर्च पर मजबूत फोकस कर रहा है, जहां यह 5% वैश्विक हिस्सा रखता है लेकिन प्रोसेसर डिजाइन में विश्व लीडर है, और ब्रेक्सिट के बाद भी अपनी तकनीकी ताकत को बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। आर्म होल्डिंग्स जैसी कंपनी प्रोसेसर डिजाइन लाइसेंस देती है, जो स्मार्टफोन और सर्वर्स में इस्तेमाल होती है।

सरकार की ब्रिटिश चिप्स स्ट्रैटेजी से 2025 में एआई और क्वांटम रिसर्च पर निवेश बढ़ेगा, जो यूनिवर्सिटी और स्टार्टअप्स को सपोर्ट करेगा। यूके की ताकत है मजबूत आरएंडडी इकोसिस्टम, लेकिन फैब निर्माण की कमी एक बड़ी चुनौती है। सरल शब्दों में, यूके चिप डिजाइन से संप्रभुता हासिल कर रहा है बिना बड़े उत्पादन पर निर्भर हुए। तालिका:​

पैरामीटर आंकड़ा फोकस क्षेत्र
बाजार हिस्सा 5% डिजाइन लाइसेंसिंग
प्रमुख कंपनी आर्म होल्डिंग्स प्रोसेसर डिजाइन
सरकारी योजना ब्रिटिश चिप्स स्ट्रैटेजी आरएंडडी
चुनौतियां फैब निर्माण उत्पादन स्केल

यूके इनोवेशन और रिसर्च से वैश्विक योगदान दे रहा है।​

10. जर्मनी: ऑटोमोटिव चिप्स का केंद्र

जर्मनी चिप संप्रभुता में ऑटोमोटिव और पावर चिप्स का यूरोपीय केंद्र है, जहां यह ईयू चिप्स एक्ट के तहत 20 बिलियन यूरो का निवेश कर रहा है और वैश्विक ऑटोमोटिव सेमीकंडक्टर बाजार का 10% हिस्सा संभालता है। इन्फिनियन, बोश और ग्लोबलफाउंड्रीज ड्रेस्डेन जैसी कंपनियां इलेक्ट्रिक वाहनों और इंडस्ट्रियल चिप्स पर काम कर रही हैं। 2025 में जर्मनी ग्रीन एनर्जी और सस्टेनेबल टेक पर फोकस बढ़ाएगा, जो ईवी क्रांति को सपोर्ट करेगा। चुनौतियां ऊर्जा संकट और सप्लाई चेन हैं, लेकिन मजबूत इंजीनियरिंग टैलेंट इसे आगे रखता है। सरल शब्दों में, जर्मनी चिप्स को ऑटो और इंडस्ट्री से जोड़कर संप्रभुता मजबूत कर रहा है। तालिका:​

पैरामीटर आंकड़ा वैश्विक हिस्सा
निवेश 20 बिलियन यूरो ईयू चिप्स एक्ट
प्रमुख क्षेत्र ऑटोमोटिव, पावर चिप्स इलेक्ट्रिक वाहन
कंपनियां इन्फिनियन, बोश, ग्लोबलफाउंड्रीज मटेरियल्स और उत्पादन
फोकस सस्टेनेबल टेक ग्रीन एनर्जी

जर्मनी यूरोपीय संप्रभुता को बढ़ावा दे रहा है।​

भारत की चिप यात्रा: प्रगति और योजनाएं

भारत चिप संप्रभुता की दौड़ में तेजी से शामिल हो रहा है, जहां इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) ने इसे नया आयाम दिया है। अभी 80% चिप्स आयात होते हैं, लेकिन 2021 से शुरू आईएसएम ने 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया है। 2024 में बाजार 52 बिलियन डॉलर का था, 2030 तक 103 बिलियन का लक्ष्य। टाटा-पीएसएमसी गुजरात में फैब बना रहा है, माइक्रॉन असेंबली प्लांट लगा रहा है। डीएलआई से 23 प्रोजेक्ट्स मंजूर। 2025 अंत तक उत्पादन शुरू। तालिका:​

योजना/प्रोजेक्ट विवरण निवेश (रुपये करोड़)
आईएसएम फैब और डिजाइन सपोर्ट 1.6 लाख करोड़
टाटा-पीएसएमसी गुजरात फैब 91,000
माइक्रॉन प्लांट असेंबली और टेस्टिंग 22,516
डीएलआई स्कीम 23 प्रोजेक्ट्स, 72 स्टार्टअप्स 803 करोड़
चिप्स-टू-स्टार्टअप प्रोडक्ट डिजाइन 100,000 इंजीनियर्स ट्रेनिंग

भारत की प्रगति आशाजनक है।​

भारत की चुनौतियां और अवसर

भारत को चिप संप्रभुता के रास्ते पर कई चुनौतियां हैं, लेकिन अवसर भी कम नहीं। इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने की जरूरत है। तालिका:​

चुनौती विवरण समाधान सुझाव
सप्लाई चेन विदेशी निर्भरता लोकल वेंडर्स डेवलप
टैलेंट कमी कुशल वर्कर्स की जरूरत 1 लाख ट्रेनिंग प्रोग्राम
लागत फैब निर्माण महंगा सरकारी सब्सिडी
इंफ्रास्ट्रक्चर बिजली, पानी स्टेट सपोर्ट 20-25%

अवसर बड़ी आबादी से।​

निष्कर्ष: भारत का भविष्य उज्ज्वल हो सकता है

टॉप 10 देश चिप संप्रभुता पर ट्रिलियन डॉलर का दांव लगा रहे हैं, जो न सिर्फ उनकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा बल्कि वैश्विक नेतृत्व भी सुनिश्चित करेगा। ताइवान की तकनीकी ताकत से लेकर चीन की आक्रामक रणनीति तक, हर देश एआई, 5जी और ईवी के भविष्य को अपना बना रहा है। भारत आईएसएम और वैश्विक पार्टनरशिप्स से तेजी से आगे बढ़ रहा है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और डिजिटल स्वतंत्रता को मजबूत करेगा। अगर चुनौतियों जैसे टैलेंट गैप और इंफ्रास्ट्रक्चर पर काबू पाया जाए, तो 2030 तक भारत ग्लोबल हब बन सकता है, लाखों नौकरियां पैदा करेगा और “मेक इन इंडिया” को नया रूप देगा।

सरल शब्दों में, भारत का भविष्य उज्ज्वल है—यह दौड़ न सिर्फ तकनीकी प्रगति लाएगी, बल्कि आत्मनिर्भरता और वैश्विक सम्मान भी दिलाएगी। आखिर, चिप क्रांति भारत के सपनों को हकीकत में बदलने का माध्यम बनेगी, जहां हर डिवाइस में “मेड इन इंडिया” चिप हो। यह समय है कि भारत इस अवसर को पकड़े और दुनिया को दिखाए कि यह पीछे नहीं, बल्कि आगे निकल सकता है।