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डिस्प्ले के प्रकारों को समझनाः बजट फोन के लिए AMOLED बनाम IPS LCD

जब भी हम बाजार में कोई नया बजट स्मार्टफोन खरीदने जाते हैं तो सबसे बड़ी उलझन स्क्रीन को लेकर होती है। आजकल दस हजार से बीस हजार रुपये के बजट में भी मोबाइल कंपनियां ग्राहकों को बहुत सारे विकल्प दे रही हैं। एक तरफ कुछ कंपनियां अपने फोन में चमकदार स्क्रीन देने का दावा करती हैं तो दूसरी तरफ कुछ ब्रांड तेज रिफ्रेश रेट वाली स्क्रीन का जमकर प्रचार करते हैं।

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एक आम ग्राहक के लिए यह तय करना सचमुच बहुत मुश्किल हो जाता है कि अपनी मेहनत की कमाई किस तकनीक पर खर्च की जाए। मैंने अक्सर अपने दोस्तों को सिर्फ लुभावने विज्ञापनों के झांसे में आकर ऐसा फोन खरीदते देखा है जिसकी स्क्रीन उनकी असल जरूरतों से बिल्कुल भी मेल नहीं खाती। इस लेख में मैं बिना किसी उलझाने वाले तकनीकी शब्दों के आपको एमोलेड और आईपीएस एलसीडी के बारे में पूरी सच्चाई बताऊंगा। हम गहराई से समझेंगे कि आपके रोजमर्रा के उपयोग और तय बजट के हिसाब से कौन सी स्क्रीन आपके लिए सबसे सही साबित होगी। हम यह भी देखेंगे कि कैसे मोबाइल निर्माता कंपनियां स्क्रीन के नाम पर ग्राहकों को गुमराह करती हैं और आपको उनसे कैसे बचना है।

स्मार्टफोन डिस्प्ले की बुनियादी बातें

किसी भी फोन की स्क्रीन की गहराई में जाने से पहले यह समझना बहुत जरूरी है कि वह असल में काम कैसे करती है। चाहे आप किसी भी ब्रांड का फोन इस्तेमाल कर रहे हों उसकी स्क्रीन लाखों छोटे छोटे बिंदुओं से मिलकर बनी होती है जिन्हें हम पिक्सल कहते हैं। हर एक पिक्सल के अंदर मुख्य रूप से तीन रंग मौजूद होते हैं जिनमें लाल हरा और नीला रंग शामिल है। जब ये तीनों रंग अलग अलग मात्रा में एक साथ चमकते हैं तो आपकी स्क्रीन पर वह पूरी तस्वीर या वीडियो बनता है जिसे आप अपनी आंखों से देखते हैं।

लेकिन इन छोटे पिक्सल्स को चमकने और रंग दिखाने के लिए हमेशा पीछे से एक रोशनी की जरूरत होती है। यही रोशनी देने का अलग अलग तरीका इन दोनों बेहतरीन स्क्रीन तकनीकों को एक दूसरे से पूरी तरह अलग बनाता है। सारा खेल सिर्फ इसी एक बात का है कि आपके फोन की स्क्रीन को पीछे से रोशनी किस तरह मिल रही है और वह रंगों को कैसे दर्शा रही है। इसके साथ ही पिक्सल घनत्व भी स्क्रीन की गुणवत्ता तय करने में एक बहुत बड़ी भूमिका निभाता है जिसे समझना हर खरीदार के लिए आवश्यक है।

विशेषता मुख्य विवरण
पिक्सल का काम चित्र और वीडियो बनाने के लिए लाखों छोटे बिंदु
मुख्य रंग स्क्रीन में लाल हरा और नीला रंग शामिल होता है
तस्वीर कैसे बनती है रंगों के अलग अलग मात्रा में चमकने से बनती है
रोशनी की जरूरत पिक्सल को रंग दिखाने के लिए पीछे की रोशनी आवश्यक है
तकनीक का आधार रोशनी देने का तरीका ही स्क्रीन का प्रकार तय करता है

आईपीएस एलसीडी तकनीक का काम करने का तरीका

इस तकनीक का पूरा नाम इन प्लेन स्विचिंग लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले है और यह आज भी मोबाइल बाजार में बहुत ज्यादा लोकप्रिय है। इसे आप अपने घर की छत पर लगी एक साधारण ट्यूबलाइट की तरह आसानी से समझ सकते हैं जो हर दिशा में रोशनी देती है। इस प्रकार की स्क्रीन में पिक्सल्स के ठीक पीछे एक बड़ा सा पैनल लगा होता है जो लगातार सफेद रंग की रोशनी फेंकता रहता है। जब आप अपना फोन चालू करते हैं तो यह पूरी रोशनी एक ही झटके में पूरी स्क्रीन पर एक साथ चालू हो जाती है और चमकने लगती है।

इसके बाद स्क्रीन के अंदर मौजूद छोटे लिक्विड क्रिस्टल इस सफेद रोशनी को छानकर अलग अलग रंग बनाने का काम बेहद खूबसूरती से करते हैं। अगर स्क्रीन पर कहीं गहरा काला रंग दिखाना होता है तो पिक्सल उस पीछे से आ रही रोशनी को रोकने की पूरी कोशिश करते हैं लेकिन पूरी तरह रोक नहीं पाते। पीछे से रोशनी लगातार आ रही होती है इसलिए वह हिस्सा पूरी तरह से काला नहीं हो पाता और हमेशा हल्का सलेटी रंग का ही नजर आता है। यही कारण है कि रात के अंधेरे में इस तरह की स्क्रीन आंखों में थोड़ी बहुत चुभन पैदा कर सकती है।

कार्यप्रणाली का हिस्सा तकनीक का मुख्य काम
पीछे का लाइट पैनल पिक्सल के पीछे लगातार सफेद रोशनी देता रहता है
लिक्विड क्रिस्टल सफेद रोशनी को छानकर स्क्रीन पर सही रंग बनाते हैं
काले रंग का प्रदर्शन रोशनी रोकने की कोशिश होती है पर वह पूरी तरह रुकती नहीं
स्क्रीन चालू होना फोन चालू होते ही पूरी रोशनी एक साथ काम करने लगती है
असली रंगत स्क्रीन पर काला रंग गहरा काला न होकर हल्का सलेटी लगता है

आईपीएस एलसीडी के बड़े फायदे और नुकसान

इस स्क्रीन का सबसे पहला और बड़ा फायदा यह है कि इसमें दिखने वाले रंग बहुत ही प्राकृतिक और असली लगते हैं जो आंखों को सुकून देते हैं। अगर आप फोन में कोई भी तस्वीर देखते हैं तो वह बिल्कुल वैसी ही दिखाई देगी जैसी वह असल जिंदगी में बिना किसी बनावटी चमक के दिखती है। दूसरा बड़ा फायदा यह है कि इस स्क्रीन को बनाने का खर्च काफी कम आता है जिससे कंपनियां सस्ते फोन में भी आपको शानदार अनुभव दे पाती हैं। इसी कम खर्च की वजह से आपको कम कीमत वाले फोन में भी तेज रिफ्रेश रेट मिल जाता है जो मोबाइल में भारी गेम खेलने वालों के लिए बहुत ही बेहतरीन साबित होता है।

हालांकि इसका सबसे बड़ा नुकसान यह है कि इसमें आपको कभी भी एकदम गहरा काला रंग देखने को नहीं मिलेगा जो कुछ लोगों को निराश कर सकता है। रात के अंधेरे में फोन चलाते समय स्क्रीन से हल्की रोशनी चुभती हुई महसूस होगी जो आपकी आंखों को थका सकती है। इसके अलावा पीछे की रोशनी हमेशा चालू रहने के कारण यह फोन की बैटरी को बहुत तेजी से खत्म करता है जिससे फोन बार बार चार्ज करना पड़ता है।

पहलू तकनीक का फायदा या नुकसान
प्राकृतिक रंग तस्वीरें बिल्कुल असली और बिना किसी बनावट के दिखती हैं
निर्माण खर्च तकनीक सस्ती होने के कारण फोन की कीमत हमेशा कम रहती है
रिफ्रेश रेट कम बजट में भी तेज और शानदार गति मिल जाती है
काले रंग की कमी गहरा काला रंग नहीं दिखता और रात में स्क्रीन की रोशनी चुभती है
बैटरी की खपत बैकलाइट हमेशा चालू रहने से फोन की बैटरी बहुत जल्दी खत्म होती है

एमोलेड तकनीक और इसकी खास बातें

इस आधुनिक तकनीक का पूरा नाम एक्टिव मैट्रिक्स ऑर्गेनिक लाइट एमिटिंग डायोड है जो आज के समय में मोबाइल ग्राहकों द्वारा बहुत ज्यादा पसंद की जा रही है। इसे आप किसी बड़े त्योहार पर घर सजाने वाली छोटी छोटी रंग बिरंगी लाइट की लंबी लड़ी की तरह बहुत ही आसानी से समझ सकते हैं। इसमें दूसरी पुरानी स्क्रीन की तरह पीछे कोई एक बड़ी और लगातार जलने वाली सफेद रोशनी बिल्कुल भी नहीं होती है जो बैटरी की खपत बढ़ाए। इसके बजाय इस अनोखी स्क्रीन पर मौजूद हर एक पिक्सल के पास अपनी खुद की एक अलग छोटी रोशनी होती है जो बहुत कमाल का काम करती है।

इसका सीधा मतलब यह है कि स्क्रीन का हर पिक्सल आपकी जरूरत के हिसाब से खुद ही चालू या पूरी तरह बंद होने की अद्भुत क्षमता रखता है। जब स्क्रीन पर कहीं एकदम गहरा काला रंग दिखाना होता है तो वहां मौजूद पिक्सल पूरी तरह से अपनी रोशनी बंद करके सो जाते हैं। पिक्सल के बंद होने का सीधा सा मतलब है कि वहां कोई रोशनी नहीं है और रोशनी न होने से आपको एकदम असली और गहरा काला रंग दिखाई देता है जो देखने में बहुत सुंदर लगता है।

एमोलेड की विशेषता इसका सीधा और आसान मतलब
खुद की रोशनी हर एक पिक्सल के पास अपनी बिल्कुल अलग लाइट होती है
रोशनी की गैरमौजूदगी स्क्रीन के पीछे कोई एक बड़ा लाइट पैनल नहीं लगा होता है
पिक्सल का नियंत्रण हर पिक्सल स्वतंत्र रूप से पूरी तरह चालू या बंद हो सकता है
गहरा काला रंग गहरे काले रंग के लिए पिक्सल पूरी तरह से बंद हो जाते हैं
स्क्रीन का अनुभव रंग बहुत ज्यादा जीवंत और तस्वीर बाहर उभर कर सामने आती है

एमोलेड स्क्रीन के फायदे और नुकसान

एमोलेड स्क्रीन के फायदे और नुकसान

इस शानदार स्क्रीन का कंट्रास्ट सच में बहुत ही कमाल का होता है और रंग इतने ज्यादा चटख दिखते हैं कि पहली नजर में ही मन खुश हो जाता है। फिल्में और लंबे वीडियो देखने के शौकीन लोगों के लिए यह स्क्रीन किसी बड़े वरदान से बिल्कुल भी कम नहीं है और उन्हें यह बहुत पसंद आती है। डरावनी फिल्में या रात के गहरे दृश्य देखते समय जो असली मजा इस स्क्रीन में आता है वह किसी और साधारण स्क्रीन में आपको मिल ही नहीं सकता। फोन की बैटरी बचाना भी इसका एक बहुत ही बड़ा और मजबूत पहलू है जिसे आजकल हर स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाला इंसान बहुत पसंद करता है।

जब आप अपने फोन में काले रंग वाला डार्क मोड चालू कर लेते हैं तो ज्यादातर पिक्सल बंद रहते हैं जिससे बैटरी कई घंटों तक ज्यादा लंबी चलती है। लेकिन इसका एक बहुत बड़ा नुकसान यह है कि यह तकनीक काफी महंगी है और इस वजह से सस्ते फोन में अच्छी गुणवत्ता वाली स्क्रीन कभी नहीं मिल पाती है। इसके साथ ही अगर आप लंबे समय तक स्क्रीन पर कोई एक ही तस्वीर खोलकर रखते हैं तो वह निशान हमेशा के लिए स्क्रीन पर छप जाने का बहुत बड़ा डर रहता है।

महत्वपूर्ण पहलू स्क्रीन का फायदा या नुकसान
कंट्रास्ट और रंग रंग बहुत ज्यादा चटख और देखने वालों की आंखों को लुभाने वाले होते हैं
मनोरंजन का अनुभव लंबी फिल्में और वीडियो देखने के लिए यह तकनीक सबसे बेहतरीन है
बैटरी की बचत काले रंग वाले मोड में स्क्रीन की बैटरी की खपत बहुत कम होती है
महंगी तकनीक सस्ते फोन में इसके अच्छी गुणवत्ता वाले पैनल कभी नहीं मिल पाते
निशान छपने का डर एक ही तस्वीर लंबे समय तक रखने से स्क्रीन हमेशा के लिए खराब हो सकती है

एमोलेड वर्सेज आईपीएस एलसीडी इन हिंदी सीधा मुकाबला

अब तक आप इन दोनों शानदार मोबाइल स्क्रीन तकनीकों के पीछे के विज्ञान को बहुत अच्छी तरह से और गहराई से समझ चुके होंगे। चलिए अब इन दोनों को उन असली और कड़े पैमानों पर परखते हैं जो हमारे और आपके रोजमर्रा के फोन इस्तेमाल में सबसे ज्यादा मायने रखते हैं। अगर आपको ऐसे रंग पसंद हैं जो आपकी आंखों को तुरंत अपनी तरफ खींच लें तो वहां एमोलेड तकनीक बिना किसी शक के एकतरफा विजेता साबित होती है। इसमें लाल रंग आपको और ज्यादा गहरा लाल और हरा रंग बहुत ज्यादा हरा दिखाई देता है जो देखने में बहुत ही ज्यादा सुंदर और आकर्षक लगता है।

लेकिन अगर आप उन लोगों में से हैं जिन्हें कुदरती तस्वीरें खींचने का शौक है और जो असली रंग देखना पसंद करते हैं तो आपको दूसरी तकनीक ही चुननी चाहिए। कंट्रास्ट के मामले में एमोलेड को कोई हरा ही नहीं सकता क्योंकि उसका काला रंग सचमुच असली रात जैसा बिल्कुल गहरा काला और शानदार होता है। बैटरी की खपत की बात करें तो डार्क मोड में एमोलेड हमेशा आसानी से बाजी मार लेता है जबकि दूसरी तकनीक लगातार बहुत ज्यादा बैटरी पीती रहती है।

तुलना का मुख्य आधार एमोलेड स्क्रीन का बेहतरीन प्रदर्शन आईपीएस एलसीडी का साधारण प्रदर्शन
रंगों की चमक रंग बहुत ज्यादा चटख और बहुत आकर्षक होते हैं रंग बिल्कुल असली और बहुत ही प्राकृतिक लगते हैं
कंट्रास्ट एकदम गहरा काला रंग और बहुत शानदार कंट्रास्ट साधारण कंट्रास्ट और हल्का सलेटी काला रंग मिलता है
बैटरी जीवन काले मोड में फोन की बैटरी बहुत ज्यादा बचती है हमेशा एक समान रूप से बैटरी खर्च होती रहती है
देखने का कोण तिरछा देखने पर भी रंग बिल्कुल नहीं बदलते हैं सस्ते पैनल में तिरछा देखने पर रंग फीके पड़ने लगते हैं
फोटोग्राफी उपयोग फोटो के रंग थोड़े बहुत बनावटी और तेज लग सकते हैं असली रंग देखने के लिए यह स्क्रीन एकदम सही है

बजट स्मार्टफोन बाजार की असली सच्चाई

अब हम सबसे महत्वपूर्ण और ध्यान देने वाले गंभीर मुद्दे पर आते हैं जो नया फोन खरीदते समय हमारी जेब से सीधा जुड़ा हुआ है। जब आपके पास पचास हजार रुपये या उससे भी ज्यादा का बड़ा बजट होता है तो आपको ज्यादा कुछ सोचना ही नहीं पड़ता है और आसानी से फोन मिल जाता है। उस बड़ी कीमत में आपको हमेशा सबसे बेहतरीन और उच्चतम गुणवत्ता वाली एमोलेड स्क्रीन ही मिलती है जो बहुत सालों तक बिल्कुल खराब नहीं होती। लेकिन दस हजार रुपये से लेकर बीस हजार रुपये के बीच का बाजार बहुत ही ज्यादा उलझाने वाला और आम ग्राहकों के लिए भ्रामक होता है।

यहां कई मोबाइल कंपनियां भोले भाले ग्राहकों को फंसाने के लिए एक बहुत ही चालाकी भरी चाल चलती हैं जिससे हर किसी का बचना बहुत ज्यादा जरूरी है। वे आपको पंद्रह हजार रुपये में एमोलेड का नाम तो दे देती हैं लेकिन उसकी गुणवत्ता और रिफ्रेश रेट बहुत ही घटिया और निचले स्तर का होता है। आपको यह बात अच्छी तरह समझनी होगी कि एक सस्ता और खराब एमोलेड लेने से हजार गुना बेहतर है कि आप एक उच्च गुणवत्ता वाला आईपीएस एलसीडी फोन खरीद लें।

मोबाइल बाजार की स्थिति बजट फोन में मिलने वाली असली सच्चाई
महंगे फोन की स्थिति हमेशा बेहतरीन और असली गुणवत्ता वाली स्क्रीन आसानी से मिलती है
दस से बीस हजार का बजट ग्राहकों को लुभाने के लिए बाजार में बहुत सारे भ्रामक विज्ञापन होते हैं
मोबाइल कंपनियों की चाल सस्ते फोन में घटिया गुणवत्ता वाली एमोलेड स्क्रीन दे दी जाती है
रिफ्रेश रेट का बड़ा धोखा अच्छे नाम वाली शानदार स्क्रीन में बहुत कम रिफ्रेश रेट दिया जाता है
सही समझदारी की बात घटिया एमोलेड से अच्छी गुणवत्ता वाला आईपीएस एलसीडी हमेशा बेहतर होता है

आपकी जरूरतों के अनुसार सही डिस्प्ले का चुनाव

हर इंसान का अपना फोन इस्तेमाल करने का तरीका और उसकी जरूरतें बिल्कुल अलग अलग होती हैं जिन्हें फोन खरीदने से पहले समझना बहुत जरूरी है। आपके किसी दोस्त के लिए जो स्क्रीन सबसे ज्यादा सही साबित हुई है यह बिल्कुल जरूरी नहीं है कि वह आपके लिए भी उतनी ही अच्छी और लाभदायक हो। मान लीजिए कि आप मोबाइल पर भारी गेम खेलना बहुत ज्यादा पसंद करते हैं और दिन भर सिर्फ इसी काम में पूरी तरह से लगे रहते हैं। ऐसे में आपके लिए सबसे ज्यादा जरूरी तेज रिस्पॉन्स और बहुत ही ज्यादा हाई रिफ्रेश रेट वाली एक मजबूत और शानदार स्क्रीन होती है।

कम कीमत में आपको एक बहुत ही शानदार आईपीएस डिस्प्ले आसानी से मिल जाएगा जो आपके गेमिंग अनुभव को मक्खन जैसा मुलायम और बिना रुकावट वाला बना देगा। वहीं दूसरी तरफ अगर आपका फोन इस्तेमाल करने का मुख्य कारण सिर्फ वीडियो फिल्में और वेब सीरीज देखना ही है तो आपको एमोलेड तकनीक ही चुननी चाहिए। रात के अंधेरे में फिल्में देखते समय एमोलेड का गहरा काला रंग आपको जो अद्भुत अनुभव देगा वह कोई और दूसरी साधारण स्क्रीन कभी नहीं दे पाएगी।

फोन का मुख्य उपयोग आपके लिए सबसे सही और बेहतरीन डिस्प्ले का सुझाव
भारी गेमिंग करना उच्च रिफ्रेश रेट वाला मजबूत आईपीएस एलसीडी सबसे सही रहेगा
फिल्में और वीडियो देखना गहरे काले रंग के लिए एमोलेड स्क्रीन हमेशा पहली पसंद होनी चाहिए
तस्वीरें एडिट करना फोटो के असली रंगों को पहचानने के लिए आईपीएस एलसीडी बहुत बेहतर है
धूप में फोन चलाना ज्यादा ब्राइटनेस वाला कोई भी उच्च गुणवत्ता का शानदार स्क्रीन पैनल
बैटरी को ज्यादा बचाना काले रंग के मोड के साथ एमोलेड स्क्रीन तकनीक का सही इस्तेमाल

अंतिम विचार

मैंने अपने जीवन में कई अलग अलग तरह के बजट फोन खुद इस्तेमाल किए हैं और मेरा इस मामले में एक बहुत ही सीधा सा उसूल है जिसका मैं पालन करता हूं। अगर मेरी जेब में बारह हजार रुपये से कम का बजट है तो मैं बिना किसी की सुने एक अच्छी रिफ्रेश रेट वाला बेहतरीन आईपीएस एलसीडी फोन ही खरीदूंगा। इस कम कीमत में बाजार में मिलने वाले फोन अक्सर बहुत ही घटिया गुणवत्ता के होते हैं और उनका टच बिल्कुल भी अच्छा काम नहीं करता है जो काफी परेशान करता है। लेकिन अगर मेरा बजट पंद्रह हजार रुपये से बीस हजार रुपये के आसपास है तो मैं थोड़ी ज्यादा मेहनत करके एक अच्छा एमोलेड फोन ढूंढ़ने की पूरी कोशिश करूंगा।

एमोलेड वर्सेज आईपीएस एलसीडी इन हिंदी के इस पूरे विस्तृत लेख का सीधा सा निचोड़ यही है कि आपको अपनी सबसे बड़ी जरूरत को पहचानना ही होगा। यदि आपको चटख रंग और लंबी फिल्में देखना पसंद है तो एमोलेड चुनें और अगर आप गेमिंग करते हैं या रफ इस्तेमाल करते हैं तो दूसरी स्क्रीन पर भरोसा करें। अंत में यह पूरा फैसला पूरी तरह से आपके तय बजट और आपकी अपनी रोजमर्रा की आदतों पर ही पूरी तरह निर्भर करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले अनूठे सवाल

क्या एमोलेड स्क्रीन दूसरी स्क्रीन के मुकाबले बहुत ज्यादा जल्दी खराब हो जाती है?

तकनीकी रूप से देखा जाए तो हां, ऐसा होता है। एमोलेड में जैविक सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है जिसकी उम्र समय के साथ धीरे-धीरे कम होने लगती है। इसमें एक ही तस्वीर लंबे समय तक रहने से स्क्रीन जलने का खतरा हमेशा बना रहता है जबकि दूसरी स्क्रीन ज्यादा लंबे समय तक रफ इस्तेमाल को आराम से झेल सकती है।

क्या एमोलेड स्क्रीन हमारी नाजुक आंखों के लिए ज्यादा अच्छी मानी जाती है?

इस स्क्रीन को आंखों के लिए थोड़ा बेहतर माना जाता है क्योंकि यह नीली रोशनी बहुत कम निकालती है, खासकर जब आप फोन को डार्क मोड में चलाते हैं। इसके अलावा इसमें कम ब्राइटनेस रखने पर भी तस्वीरें बहुत साफ दिखाई देती हैं जिससे आंखों पर बेवजह का दबाव बिल्कुल भी नहीं पड़ता है।

क्या मैं कम बजट वाले फोन में स्क्रीन गार्ड के साथ फिंगरप्रिंट सेंसर इस्तेमाल कर सकता हूं?

बजट फोन में स्क्रीन के अंदर वाला फिंगरप्रिंट सेंसर सिर्फ एमोलेड वाली स्क्रीन में ही देखने को मिलता है। आप स्क्रीन की सुरक्षा के लिए बिल्कुल स्क्रीन गार्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं, बस आपको यह ध्यान रखना होगा कि वह गार्ड बहुत ज्यादा मोटा या खराब गुणवत्ता का बिल्कुल न हो।

क्या आईपीएस डिस्प्ले वाले फोन में भी काले रंग वाला डार्क मोड काम करता है?

हां, यह बिल्कुल काम करता है क्योंकि सॉफ्टवेयर के जरिए पूरा फोन काले रंग की थीम में चला जाता है। लेकिन क्योंकि इस स्क्रीन की पीछे वाली रोशनी हमेशा चालू रहती है, इसलिए आपको एकदम गहरा काला रंग नहीं मिलेगा और आपकी बैटरी की बचत भी वैसी बिल्कुल नहीं होगी जैसी आप चाहते हैं।

कड़ी धूप में बाहर इस्तेमाल के लिए कौन सी स्क्रीन ज्यादा साफ और स्पष्ट दिखाई देती है?

यह बात पूरी तरह से इस पर निर्भर करती है कि आपके फोन की स्क्रीन की ब्राइटनेस कितनी ज्यादा है, न कि इस बात पर कि वह किस प्रकार की स्क्रीन है। अगर किसी फोन की ब्राइटनेस बहुत ज्यादा है, तो वह कड़ी धूप में भी दूसरी स्क्रीन के मुकाबले बहुत ज्यादा बेहतर और एकदम साफ दिखाई देगा।

गेम खेलते समय एमोलेड स्क्रीन फोन को ज्यादा गर्म क्यों कर देती है?

जब आप ग्राफिक्स वाले भारी गेम खेलते हैं, तो प्रोसेसर के साथ-साथ स्क्रीन के हर एक पिक्सल को बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। एमोलेड स्क्रीन में हर पिक्सल अपनी खुद की रोशनी पैदा करता है, जिसकी वजह से लगातार गेमिंग करने पर वह हिस्सा ज्यादा ऊर्जा खींचता है और धीरे-धीरे फोन गर्म होने लगता है।