2026 में नेपाल से 14 एग्रीटेक और ग्रामीण नवाचार कहानियां
वर्ष 2026 में नेपाल के कृषि क्षेत्र में एक अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिल रहा है, जहाँ पारंपरिक हल-बैल की जगह डेटा और डिजिटल उपकरणों ने ले ली है। एग्रीटेक रूरल इनोवेशन नेपाल (AgriTech Rural Innovation Nepal) अब केवल एक चर्चा का विषय नहीं है, बल्कि यह एक जमीनी हकीकत बन चुका है जिसने किसानों की आय और जीवन स्तर को ऊपर उठाया है। आज हम उन 14 विशिष्ट कहानियों और तकनीकों की गहराई में जाएंगे जो नेपाल के पहाड़ों से लेकर तराई के मैदानों तक एक नई कृषि क्रांति लिख रही हैं। यह लेख उन समर्पित किसानों, उद्यमियों और संस्थाओं को समर्पित है जिन्होंने चुनौतियों को अवसरों में बदलकर देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत किया है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म और मोबाइल ऐप्स: खेती में तकनीक का जादू
1. एफएओ (FAO) डिजिटल विलेज इनिशिएटिव: टेली प्लांट डॉक्टर और आईओटी
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) द्वारा शुरू की गई ‘डिजिटल विलेज इनिशिएटिव’ ने नेपाल के काभ्रे और अन्य जिलों के ग्रामीण जीवन को पूरी तरह से बदल दिया है। इस पहल के तहत गाँवों में एक डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया गया है जहाँ किसान अपनी समस्याओं का समाधान तुरंत पा सकते हैं। इसका सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ‘टेली प्लांट डॉक्टर’ ऐप है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग करता है। अब किसान को अपनी फसल में लगे कीट या रोग को दिखाने के लिए मीलों दूर कृषि कार्यालय नहीं जाना पड़ता। वे बस अपने फोन से पौधे की तस्वीर खींचते हैं और ऐप तुरंत बीमारी की पहचान कर उसका उपचार बता देता है। इसके अलावा, खेतों में लगे ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ (आईओटी) सेंसर मिट्टी की नमी और तापमान की निगरानी करते हैं। ये सेंसर स्वचालित रूप से सिंचाई प्रणाली को नियंत्रित करते हैं, जिससे पानी की बर्बादी रुकती है और फसल को सही समय पर सही मात्रा में पानी मिलता है।
| विवरण | जानकारी |
| तकनीक | टेली प्लांट डॉक्टर ऐप और सेंसर |
| लाभ | फसल रोगों का त्वरित निदान |
| स्थान | काभ्रे जिला और आसपास |
| परिणाम | पानी की बचत और बेहतर फसल |
2. एडीबीएल (ADBL) किसान ऐप और क्रेडिट कार्ड: वित्तीय समावेशन की ओर
कृषि विकास बैंक (एडीबीएल) ने ‘किसान क्रेडिट कार्ड’ और ‘किसान ऐप’ के माध्यम से नेपाल के दूरदराज के किसानों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने का ऐतिहासिक काम किया है। पहले छोटे किसानों को खाद और बीज खरीदने के लिए साहूकारों से ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज लेना पड़ता था, लेकिन अब यह कार्ड उन्हें बैंक से सीधा और सस्ता ऋण उपलब्ध कराता है। यह पूरी प्रक्रिया कागज-रहित और डिजिटल है, जिससे भ्रष्टाचार की संभावना खत्म हो गई है। किसान इस कार्ड का उपयोग केवल कृषि सामग्री खरीदने के लिए कर सकते हैं, जिससे ऋण का सही उपयोग सुनिश्चित होता है। ऐप के माध्यम से किसान अपने खाते का शेष देख सकते हैं, सरकारी सब्सिडी सीधे प्राप्त कर सकते हैं और डिजिटल भुगतान कर सकते हैं। 2026 में, यह पहल वित्तीय साक्षरता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में एक मील का पत्थर साबित हुई है।
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| विवरण | जानकारी |
| संस्था | कृषि विकास बैंक |
| सुविधा | डिजिटल ऋण और भुगतान कार्ड |
| उद्देश्य | साहूकारों पर निर्भरता खत्म करना |
| विशेषता | सरकारी सब्सिडी का सीधा हस्तांतरण |
3. मिज़ानी (Mizani) ऐप: डेटा से मिलता है भरोसा और लोन
नेपाल के छोटे और सीमांत किसानों के पास अक्सर बैंक में गिरवी रखने के लिए पर्याप्त संपत्ति नहीं होती थी, जिससे उन्हें ऋण नहीं मिल पाता था। ‘मिज़ानी’ ऐप ने इस समस्या का एक क्रांतिकारी समाधान पेश किया है। यह ऐप पारंपरिक दस्तावेजों के बजाय किसान के व्यवहार, फसल चक्र और उत्पादन के आंकड़ों का विश्लेषण करके एक ‘क्रेडिट स्कोर’ तैयार करता है। यह तकनीक कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके यह अनुमान लगाती है कि किसान ऋण चुकाने में कितना सक्षम है। 2026 में, इस डेटा-आधारित प्रणाली ने बैंकों को उन किसानों पर भरोसा करने का आधार दिया है जिन्हें पहले नजरअंदाज कर दिया जाता था। अब किसान अपनी मेहनत और ईमानदारी के आधार पर ऋण प्राप्त कर रहे हैं, जिससे वे आधुनिक कृषि उपकरणों में निवेश करने में सक्षम हुए हैं।
| विवरण | जानकारी |
| नवाचार | वैकल्पिक क्रेडिट स्कोरिंग |
| तकनीक | डेटा एनालिटिक्स और एआई |
| लाभार्थी | छोटे और भूमिहीन किसान |
| प्रभाव | बिना गिरवी के ऋण प्राप्ति |
4. जियोकृषि (Geokrishi) EXT: डिजिटल विस्तार सेवाएं
नेपाल के विषम भौगोलिक परिस्थितियों में हर किसान तक सरकारी कृषि विशेषज्ञ का पहुँचना एक बड़ी चुनौती थी। ‘जियोकृषि EXT’ प्लेटफॉर्म ने इस दूरी को डिजिटल माध्यम से पाट दिया है। यह एक ऐसा डैशबोर्ड है जो कृषि सलाहकारों और सहकारी समितियों को अपने क्षेत्र के सभी किसानों की निगरानी करने और उन्हें सलाह देने में मदद करता है। इस प्लेटफॉर्म पर हर किसान के खेत का डेटा होता है, जैसे कि उन्होंने कौन सी फसल लगाई है और बुवाई कब की है। इसके आधार पर, सिस्टम स्वचालित रूप से खाद डालने, सिंचाई करने या कटाई के समय के बारे में सलाह भेजता है। साथ ही, अगर मौसम खराब होने वाला है, तो यह पूर्व चेतावनी देकर फसल को बचाने में मदद करता है। इससे कृषि विस्तार सेवाओं की दक्षता में कई गुना वृद्धि हुई है।
| विवरण | जानकारी |
| प्लेटफॉर्म | जियोकृषि एंटरप्राइज |
| उपयोगकर्ता | कृषि सहकारी और विस्तार कार्यकर्ता |
| कार्य | सटीक सलाह और निगरानी |
| लाभ | समय पर सही निर्णय लेने में मदद |
5. श्रीनगर एग्रो (Shreenagar Agro): ‘वन स्टॉप सॉल्यूशन’
श्रीनगर एग्रो का ‘श्री किसान इनोवेशन हब’ नेपाल में निजी क्षेत्र की भागीदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इन्होंने खेती को केवल आजीविका का साधन न मानकर उसे एक लाभदायक व्यवसाय में बदलने का बीड़ा उठाया है। उनका मॉडल ‘बीज से बाजार तक’ की पूरी श्रृंखला को कवर करता है। वे किसानों को न केवल उच्च गुणवत्ता वाले चूजे, दाना और दवाइयां उपलब्ध कराते हैं, बल्कि उन्हें आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण भी देते हैं। 2026 में, उनके द्वारा प्रशिक्षित हजारों युवा अब सफल पोल्ट्री और पशुपालन उद्यमी बन चुके हैं। वे किसानों को तकनीकी सहायता देने के साथ-साथ उनके उत्पादों को बाजार तक पहुँचाने में भी मदद करते हैं, जिससे किसानों को बिचौलियों के शोषण से बचाया जा सके और उन्हें अपनी उपज का सही दाम मिल सके।
| विवरण | जानकारी |
| पहल | श्री किसान इनोवेशन हब |
| फोकस | पोल्ट्री और पशुपालन |
| सेवाएं | प्रशिक्षण, इनपुट और बाजार संपर्क |
| लक्ष्य | कृषि उद्यमिता का विकास |
6. खेतीपाती एग्रीटेक (Khetipati AgriTech): टिकाऊ खेती को बढ़ावा

‘खेतीपाती एग्रीटेक’ ने नेपाल में जैविक खेती और सुरक्षित भोजन के आंदोलन को एक नई दिशा दी है। यह स्टार्टअप इस सिद्धांत पर काम करता है कि उपभोक्ता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उसका भोजन कहाँ और कैसे उगाया गया है। वे किसानों को जैविक प्रमाणीकरण प्राप्त करने और रसायनों के बिना खेती करने में मदद करते हैं। उनकी सबसे बड़ी विशेषता ‘ट्रेसिबिलिटी’ (Traceability) है, जिसके तहत उत्पादों पर एक क्यूआर कोड होता है। ग्राहक इसे स्कैन करके किसान और खेत की पूरी जानकारी देख सकते हैं। इसके अलावा, वे फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए सोलर ड्रायर और आधुनिक भंडारण तकनीकों का उपयोग करते हैं, जिससे किसानों की आय में 20 से 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
| विवरण | जानकारी |
| क्षेत्र | जैविक उत्पाद और आपूर्ति श्रृंखला |
| विशेषता | भोजन की ट्रेसिबिलिटी |
| तकनीक | सोलर ड्रायर और कोल्ड स्टोरेज |
| प्रभाव | किसानों को उपज का बेहतर मूल्य |
7. ग्रीन वैली फार्म्स (Green Valley Farms): ऑर्गेनिक क्रांति
ग्रीन वैली फार्म्स ने शहर और गाँव के बीच की खाई को पाटने के लिए ‘सामुदायिक समर्थित कृषि’ (CSA) का एक अनूठा मॉडल पेश किया है। इस मॉडल के तहत, शहरी उपभोक्ता साल भर के लिए एक निश्चित राशि देकर किसी किसान की उपज के हिस्सेदार बन सकते हैं। इसके बदले उन्हें हर हफ्ते ताजी और रसायन-मुक्त सब्जियाँ उनके घर पर मिलती हैं। 2026 में, यह मॉडल बहुत लोकप्रिय हो गया है क्योंकि यह शहरी लोगों को शुद्ध भोजन की गारंटी देता है और किसानों को फसल बोने से पहले ही निश्चित आय मिल जाती है। वे अपने खेतों में ड्रोन और कैमरों का उपयोग करते हैं ताकि उपभोक्ता अपने मोबाइल पर देख सकें कि उनकी सब्जियाँ कैसे उग रही हैं। यह पारदर्शिता और विश्वास पर आधारित एक नई तरह की खेती है।
| विवरण | जानकारी |
| मॉडल | सामुदायिक समर्थित कृषि |
| ग्राहक | स्वास्थ्य के प्रति जागरूक शहरी लोग |
| नवाचार | खेत की लाइव निगरानी |
| लाभ | किसानों के लिए अग्रिम आय |
8. आईडीई (iDE) नेपाल का बायोफर्टिलाइजर प्रोजेक्ट
आईडीई नेपाल ने ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने और रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करने के लिए एक शानदार पहल की है। इस परियोजना के तहत, ग्रामीण महिलाओं को केंचुआ खाद (वर्मीकम्पोस्ट) और जैविक कीटनाशक बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। यह कचरे को सोने में बदलने जैसा है, क्योंकि इसमें खेत के कचरे और गोबर का उपयोग किया जाता है। 2026 तक, इन महिला उद्यमियों ने पूरे नेपाल में जैविक खाद का एक मजबूत नेटवर्क बना लिया है। यह न केवल मिट्टी की सेहत सुधार रहा है बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र भी बना रहा है। अब किसान बाजार से महंगी रासायनिक खाद खरीदने के बजाय अपने गाँव में ही बनी उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद का उपयोग कर रहे हैं, जिससे उनकी लागत कम और उत्पादन अधिक हो रहा है।
| विवरण | जानकारी |
| नेतृत्व | ग्रामीण महिला उद्यमी |
| उत्पाद | केंचुआ खाद और जैविक दवाएं |
| उद्देश्य | टिकाऊ खेती और महिला आय |
| प्रभाव | मिट्टी की उर्वरता में सुधार |
ग्रामीण नायक: बदलाव लाते किसान और उद्यमी
9. पिपला भंडारी (Pipla Bhandari): मछली पालन में महिला नेतृत्व
चितवन की पिपला भंडारी ने साबित कर दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो कोई भी क्षेत्र महिलाओं के लिए मुश्किल नहीं है। उन्होंने पारंपरिक मत्स्य पालन को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर एक मिसाल कायम की है। पिपला ने अपने तालाबों में पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए डिजिटल किट का उपयोग शुरू किया, जिससे मछलियों के मरने की दर बहुत कम हो गई। उन्होंने ‘एकीकृत खेती’ को अपनाया है, जहाँ वे तालाब के ऊपर मुर्गियाँ और बत्तख भी पालती हैं। मुर्गियों की बीट मछलियों के लिए चारे का काम करती है, जिससे बाजार से चारा खरीदने का खर्च बच जाता है। आज उनका फार्म न केवल मुनाफे में चल रहा है, बल्कि वे आसपास की दर्जनों महिलाओं को मछली पालन की बारीकियां भी सिखा रही हैं।
| विवरण | जानकारी |
| स्थान | चितवन |
| व्यवसाय | आधुनिक मत्स्य पालन |
| तकनीक | जल परीक्षण और एकीकृत खेती |
| सफलता | समुदाय के लिए प्रेरणा स्रोत |
10. गंगा बहादुर अधिकारी (Ganga Bahadur Adhikari): व्यावसायिक बकरी पालन
माडी के गंगा बहादुर अधिकारी ने बकरी पालन को एक छोटे काम से बदलकर एक बड़े कॉरपोरेट व्यवसाय का रूप दे दिया है। उन्होंने महसूस किया कि स्थानीय बकरियों का वजन धीरे बढ़ता है, इसलिए उन्होंने ‘बोअर’ जैसी उन्नत विदेशी नस्लों के साथ उनका प्रजनन करवाया। उन्होंने बकरियों के रहने के लिए जमीन से ऊपर उठे हुए विशेष बाड़े (शेड) बनाए हैं, जिससे गंदगी नीचे गिर जाती है और बकरियां बीमार नहीं पड़तीं। वे अपनी हर बकरी का स्वास्थ्य रिकॉर्ड, टीकाकरण और वजन का डेटा एक मोबाइल ऐप पर रखते हैं। 2026 में, वे सालाना लाखों रुपये कमा रहे हैं और अपने क्षेत्र के अन्य किसानों को भी नस्ल सुधार और वैज्ञानिक प्रबंधन के गुर सिखा रहे हैं।
| विवरण | जानकारी |
| किसान | गंगा बहादुर अधिकारी |
| नवाचार | नस्ल सुधार और आधुनिक शेड |
| प्रबंधन | डिजिटल रिकॉर्ड कीपिंग |
| आय | व्यावसायिक स्तर पर लाभ |
11. भोज बहादुर तामांग (Bhoj Bahadur Tamang): एकीकृत और बेमौसमी खेती
कास्की जिले के भोज बहादुर तामांग उन प्रवासियों के लिए एक उदाहरण हैं जो विदेश से लौटकर अपने देश में कुछ करना चाहते हैं। विदेश में सीखी गई तकनीकों का उपयोग करके उन्होंने अपने खेत में प्लास्टिक टनल बनाए हैं जहाँ वे बेमौसमी सब्जियाँ उगाते हैं। बेमौसमी होने के कारण उन्हें बाजार में टमाटर, खीरा और गोभी का बहुत अच्छा दाम मिलता है। उन्होंने अपने खेत में एक एकीकृत प्रणाली लागू की है जहाँ पशुपालन और सब्जी की खेती एक-दूसरे को सहारा देते हैं—पशुओं का गोबर खेत में खाद के रूप में जाता है और खेत का चारा पशुओं को मिलता है। 2026 में, उनकी सफलता ने गाँव के कई युवाओं को विदेश जाने से रोका है और उन्हें खेती में ही अपना भविष्य बनाने के लिए प्रेरित किया है।
| विवरण | जानकारी |
| विशेषता | रिटर्नी माइग्रेंट (लौटे प्रवासी) |
| तकनीक | प्लास्टिक टनल और ड्रिप सिंचाई |
| फसल | बेमौसमी सब्जियाँ |
| प्रभाव | युवाओं का पलायन रोकना |
सरकारी और एनजीओ (NGO) पहल: नीति और प्रभाव
12. क्लाइमेट स्मार्ट विलेज (Climate Smart Villages)
जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने के लिए नेपाल के लुम्बिनी और गंडकी प्रदेशों में ‘क्लाइमेट स्मार्ट विलेज’ की स्थापना की गई है। ये गाँव भविष्य की खेती की प्रयोगशाला हैं। यहाँ सौर ऊर्जा से चलने वाले सिंचाई पंपों का व्यापक उपयोग हो रहा है, जो डीजल और बिजली की लागत बचाते हैं। यहाँ के किसानों को ऐसी फसलों के बीज दिए जाते हैं जो सूखे या बाढ़ को सहन कर सकें। इसके अलावा, ‘जीरो टिलेज’ तकनीक सिखाई जाती है जिसमें खेत की जुताई कम से कम की जाती है ताकि मिट्टी की नमी बनी रहे। 2026 में, ये गाँव आसपास के क्षेत्रों के लिए एक शिक्षण केंद्र बन गए हैं, जहाँ किसान आकर सीखते हैं कि बदलते मौसम के साथ तालमेल बिठाकर खेती कैसे की जाए।
| विवरण | जानकारी |
| स्थान | लुम्बिनी और गंडकी प्रदेश |
| तकनीक | सौर पंप और सूखा-रोधी बीज |
| उद्देश्य | जलवायु परिवर्तन का सामना करना |
| दृष्टिकोण | सामुदायिक अनुकूलन |
13. स्केलिंग फॉर इम्पैक्ट (Scaling for Impact) – मक्का परियोजना
नेपाल के पहाड़ी इलाकों में मक्का मुख्य फसल है, लेकिन इसकी खेती में मेहनत बहुत ज्यादा लगती थी, खासकर महिलाओं के लिए। ‘स्केलिंग फॉर इम्पैक्ट’ परियोजना ने मक्का की खेती में मशीनीकरण को बढ़ावा दिया है। छोटे ट्रैक्टर (मिनी टिलर) और मक्का बोने की मशीनों ने हफ्तों के काम को घंटों में समेट दिया है। 2026 तक, इस परियोजना ने कई जगहों पर ‘कस्टम हायरिंग सेंटर’ खोले हैं, जहाँ किसान महँगी मशीनें खरीदने के बजाय किराए पर ले सकते हैं। इससे खेती की लागत कम हुई है और उत्पादन बढ़ा है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसने ग्रामीण महिलाओं के सिर से भारी मशक्कत का बोझ हटा दिया है, जिससे वे अपना समय अन्य उत्पादक कार्यों में लगा सकती हैं।
| विवरण | जानकारी |
| फसल | मक्का |
| नवाचार | कृषि मशीनीकरण |
| सुविधा | यंत्र किराए पर लेने के केंद्र |
| सामाजिक प्रभाव | महिलाओं के श्रम में कमी |
14. यूथ इनोवेशन लैब (Youth Innovation Lab): भविष्य के एग्री-प्रेन्योर्स
‘यूथ इनोवेशन लैब’ ने नेपाल के प्रतिभाशाली युवाओं को खेती की समस्याओं का तकनीकी समाधान खोजने के लिए चुनौती दी है। वे नियमित रूप से ‘एग्री इनोवेशन चैलेंज’ आयोजित करते हैं जहाँ युवा अपने नए विचार प्रस्तुत करते हैं। यह लैब उन्हें कोडिंग, रोबोटिक्स और डेटा साइंस का उपयोग करके कृषि में नवाचार करने के लिए प्रशिक्षण और फंड देती है। 2026 में, यहाँ से निकले कई प्रोजेक्ट अब सफल स्टार्टअप बन चुके हैं—जैसे ड्रोन से दवा का छिड़काव या ब्लॉकचेन आधारित आपूर्ति श्रृंखला। यह पहल सुनिश्चित कर रही है कि नेपाल की अगली पीढ़ी खेती को पिछड़ा काम नहीं, बल्कि एक आधुनिक और तकनीक-आधारित व्यवसाय माने।
| विवरण | जानकारी |
| संस्था | यूथ इनोवेशन लैब |
| कार्यक्रम | नवाचार और बूटकैंप |
| लक्ष्य | युवाओं को एग्री-टेक से जोड़ना |
| परिणाम | नए कृषि स्टार्टअप्स का निर्माण |
निष्कर्ष
वर्ष 2026 में नेपाल की कृषि का जो स्वरूप हम देख रहे हैं, वह उम्मीद और संभावनाओं से भरा है। ये 14 कहानियाँ केवल उदाहरण हैं कि कैसे एग्रीटेक रूरल इनोवेशन नेपाल (AgriTech Rural Innovation Nepal) ने देश के दूरदराज के क्षेत्रों में विकास की नई लहर पैदा की है। चाहे वह तकनीक का उपयोग कर रहे युवा हों या नए तरीकों को अपना रही महिला किसान, हर कोई एक समृद्ध नेपाल के निर्माण में अपना योगदान दे रहा है। इन नवाचारों ने साबित कर दिया है कि अगर सही तकनीक और अवसर मिले, तो पहाड़ की ढलानों पर भी सोना उगाया जा सकता है। अब समय आ गया है कि इन सफलताओं को और विस्तार दिया जाए ताकि हर नेपाली किसान आत्मनिर्भर बन सके।
